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  "type": "article",
  "title": "घरेलू शेयर बाजार में अचानक लौटी बिकवाली, सेंसेक्स ऊपरी स्तर से 900 अंक टूटा और निफ्टी 22,400 से नीचे फिसला",
  "summary": "शुरुआती बढ़त गंवाकर भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को तेज गिरावट देखने को मिली, जहां बीएसई सेंसेक्स दिन के उच्चतम स्तर से 900 अंक से ज्यादा लुढ़क गया और निफ्टी 22,400 के नीचे आ गया। लगातार एफआईआई निकासी, चढ़ती बॉन्ड यील्ड और भारत वीआईएक्स में 7 प्रतिशत से अधिक के उछाल ने दलाल स्ट्रीट पर निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।",
  "content": "भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 12 अक्टूबर को शुरुआती कारोबार के दौरान अचानक तेज गिरावट देखने को मिली। मजबूत शुरुआत के बाद हेवीवेट शेयरों में लौटी भारी बिकवाली ने पिछले कारोबारी सत्र की तेजी पर पानी फेर दिया। बीएसई सेंसेक्स अपने दिन के उच्चतम स्तर से 900 अंकों से अधिक का गोता लगाकर नीचे चला गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 महत्वपूर्ण 22,400 के स्तर से नीचे फिसल गया। इस अचानक आए दबाव ने दलाल स्ट्रीट पर जारी सुधार की नाजुक स्थिति को उजागर कर दिया है।\n\nदिन के शुरुआती स्तरों से जोरदार फिसलन\nसप्ताह के पहले कारोबारी दिन दोनों प्रमुख सूचकांकों ने सकारात्मक रुख के साथ शुरुआत की थी। पिछले सत्र में देखने को मिले सुधार के बाद निवेशकों को उम्मीद थी कि बाजार अपनी बढ़त बरकरार रखेगा। हालांकि, पहले घंटे के बाद खरीदारी की रफ्तार फीकी पड़ गई और प्रमुख दिग्गजों में मुनाफावसूली हावी हो गई। सुबह करीब 11:35 बजे बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 72,472.33 की तुलना में 493.97 अंक यानी लगभग 0.68 प्रतिशत टूटकर 71,978.36 पर कारोबार कर रहा था। सेंसेक्स 72,771.32 पर खुला था और दिन के दौरान 72,884.25 के उच्चतम स्तर को छूने के बाद 71,898.17 के निचले स्तर तक गिर गया था। इस तरह सेंसेक्स ने अपने ऊपरी स्तर से 900 अंक से ज्यादा गंवा दिए।\n\nदूसरी ओर, निफ्टी 50 में भी ऐसा ही रुख रहा। सुबह करीब 11:40 बजे निफ्टी 141.85 अंक यानी करीब 0.63 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,378.60 के स्तर पर आ गया था, जबकि इसका पिछला बंद स्तर 22,520.45 था। निफ्टी की शुरुआत 22,593.20 पर हुई थी और यह 22,651.10 के उच्च स्तर तक गया, लेकिन बिकवाली के झटके से यह 22,370.65 के निचले स्तर तक लुढ़क गया। इन दोनों प्रमुख सूचकांकों के अहम स्तरों से नीचे फिसलने से ट्रेडर्स में घबराहट बढ़ गई।\n\nभारत वीआईएक्स में 7 प्रतिशत से अधिक का उछाल\nबाजार में अस्थिरता और घबराहट को मापने वाला प्रमुख सूचकांक भारत वीआईएक्स 7 प्रतिशत से अधिक चढ़कर 15 के स्तर के पार पहुंच गया। अस्थिरता सूचकांक में आई यह तेज तेजी साफ संकेत देती है कि प्रतिभागी आने वाले सत्रों में शेयरों में बड़े उतार-चढ़ाव की आशंका जता रहे हैं। हालांकि वीआईएक्स बाजार की अगली दिशा तय नहीं करता, लेकिन इसमें अचानक उछाल यह बताता है कि कारोबारी जोखिम उठाने से बच रहे हैं और अपनी मौजूदा पोजीशन को लेकर बेहद सतर्क हो गए हैं।\n\nविदेशी संस्थागत निवेशकों की भारी बिकवाली का दबाव\nबाजार में आई इस ताजा कमजोरी की मुख्य वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की ओर से जारी आक्रामक बिकवाली है। बाजार विश्लेषकों द्वारा दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर महीने के शुरुआती छह कारोबारी सत्रों में ही एफआईआई ने भारतीय इक्विटी बाजार से 45,125 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। यह निकासी कितनी बड़ी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह पूरे सितंबर महीने में हुई 45,536 करोड़ रुपये की कुल विदेशी बिकवाली के लगभग बराबर पहुंच चुकी है।\n\nलगातार हो रही विदेशी पूंजी की निकासी फ्रंटलाइन और लार्ज-कैप शेयरों पर भारी दबाव बना रही है। घरेलू संस्थागत निवेशक और खुदरा खरीदार गिरावट के समय खरीदारी का सहारा दे रहे हैं, लेकिन लगातार जारी भारी विदेशी बिकवाली की भरपाई करने के लिए केवल घरेलू प्रवाह पर्याप्त साबित नहीं हो पा रहा है। यदि विदेशी निवेशक इसी रफ्तार से पूंजी निकालते रहे, तो सूचकांकों के लिए किसी भी सुधार को लंबे समय तक बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।\n\nबढ़ती बॉन्ड यील्ड और वैश्विक आर्थिक कारक\nशेयर बाजार के मूल्यांकन पर दबाव डालने वाला दूसरा बड़ा कारण सरकारी बॉन्ड यील्ड में लगातार हो रही वृद्धि है। जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो इक्विटी की तुलना में फिक्स्ड इनकम और बॉन्ड अधिक आकर्षक लगने लगते हैं। इसके परिणामस्वरूप निवेशक जोखिम भरी संपत्तियों से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों में लगाने लगते हैं। अनिश्चित ब्याज दर परिदृश्य, मुद्रा में उतार-चढ़ाव और आगामी कंपनियों के नतीजों को देखते हुए निवेशक अधिक सतर्क हो रहे हैं।\n\nअमेरिका और भारत दोनों में बॉन्ड यील्ड ऊंची बनी रहने पर इक्विटी निवेशक नई पूंजी लगाने से पहले कंपनियों की बैलेंस शीट की मजबूती, स्पष्ट आय वृद्धि और बेहतर नकदी प्रवाह की तलाश करने लगे हैं। कमजोर बुनियादी ढांचे वाली कंपनियों के शेयरों में इससे ज्यादा तेज गिरावट दर्ज की जा रही है।\n\nबाजार रणनीतिकारों का दृष्टिकोण\nवर्तमान बाजार स्थिति पर अपनी राय देते हुए जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी के विजयकुमार ने कहा, \"बाजार ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां बाहरी प्रतिकूल परिस्थितियां घरेलू अनुकूल कारकों पर हावी हैं।\"\n\nउन्होंने बताया कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिका की ऊंची बॉन्ड यील्ड निकट भविष्य में बाजार को प्रभावित करती रहेंगी। उन्होंने कहा कि अल्पावधि में एफआईआई की बिकवाली जारी रह सकती है और घरेलू निवेशक इसे संभालने का प्रयास करेंगे। उन्होंने आगे जोड़ा कि यदि पश्चिम एशिया में स्थिति सुधरती है और कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट आती है, तो बाजार मौजूदा स्तरों से मजबूत रिकवरी दिखा सकता है।\n\nइसका आप पर असर\nशेयर बाजार में आई इस तेज गिरावट और बढ़ती अस्थिरता से खुदरा निवेशकों के पोर्टफोलियो और नए निवेश निर्णयों पर सीधा असर पड़ेगा।\n\n• इक्विटी निवेशकों पर असर: लार्ज-कैप शेयरों में गिरावट से म्यूचुअल फंड और सीधे शेयर धारकों के पोर्टफोलियो मूल्य में कमी आएगी। मौजूदा अस्थिरता के दौरान एकमुश्त भारी निवेश करने के बजाय व्यवस्थित निवेश योजना यानी सिप को प्राथमिकता देना बेहतर रहेगा।\n• ट्रेडर्स और डेरिवेटिव्स कारोबारियों पर असर: भारत वीआईएक्स के 15 के पार निकलने से ऑप्शंस और फ्यूचर्स में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। स्टॉप-लॉस सीमाओं का कड़ाई से पालन न करने पर दिन के दौरान बड़ा पूंजीगत नुकसान हो सकता है।\n• ऋण और फिक्स्ड इनकम निवेशक: बॉन्ड यील्ड में लगातार तेजी आने से निश्चित आय वाले डेट फंड्स और सरकारी प्रतिभूतियों पर बेहतर रिटर्न के अवसर बन रहे हैं। इक्विटी में जोखिम घटाने के इच्छुक निवेशक अपने आवंटन का कुछ हिस्सा फिक्स्ड रिटर्न साधनों में लगा सकते हैं।\n• कच्चे तेल और ईंधन की कीमतें: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतें सीधे तौर पर घरेलू मुद्रास्फीति और परिवहन लागत को प्रभावित करती हैं। यदि तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो इसका असर आम उपभोक्ताओं के मासिक बजट पर भी देखने को मिल सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nघरेलू बाजार में आई इस अचानक तेज गिरावट के पीछे विदेशी संस्थागत निवेशकों की भारी पूंजी निकासी, ऊंची बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें मुख्य कारक रही हैं।\n\n• अक्टूबर में एफआईआई की आक्रामक बिकवाली: विदेशी निवेशकों ने अक्टूबर के शुरुआती छह कारोबारी सत्रों में ही 45,125 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं। यह बिकवाली पूरे सितंबर में हुई 45,536 करोड़ रुपये की निकासी के बराबर पहुंच चुकी है, जिसने बाजार की बढ़त को थाम दिया।\n• अमेरिका और भारत में ऊंची बॉन्ड यील्ड: वैश्विक स्तर पर सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़ने से बॉन्ड बाजार इक्विटी के मुकाबले अधिक आकर्षक हो गया है। इसके कारण वैश्विक निवेशक जोखिम भरी संपत्तियों से पैसा निकालकर सुरक्षित बांड्स में लगा रहे हैं।\n• कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। भारत के लिए महंगा कच्चा तेल व्यापार घाटे और मुद्रास्फीति के दबाव को बढ़ाता है, जिससे बाजार धारणा प्रभावित हुई है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सोमवार के कारोबारी सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी में कितनी गिरावट दर्ज की गई?\nसेंसेक्स अपने दिन के उच्च स्तर 72,884.25 से 900 अंक से अधिक गिरकर 71,978.36 पर आ गया, जबकि निफ्टी 141.85 अंक टूटकर 22,378.60 पर आ गया।\n\n2. अक्टूबर के पहले छह कारोबारी दिनों में विदेशी निवेशकों ने कितनी बिकवाली की है?\nअक्टूबर के शुरुआती छह सत्रों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 45,125 करोड़ रुपये मूल्य के भारतीय शेयर बेचे हैं।\n\n3. सितंबर महीने में एफआईआई की कुल निकासी कितनी रही थी?\nपूरे सितंबर महीने के दौरान विदेशी निवेशकों ने कुल 45,536 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे।\n\n4. भारत वीआईएक्स सूचकांक में क्या बदलाव देखा गया?\nबाजार में उतार-चढ़ाव और अस्थिरता को मापने वाला भारत वीआईएक्स 7 प्रतिशत से अधिक चढ़कर 15 के स्तर से ऊपर निकल गया।\n\n5. बाजार जानकारों के अनुसार किन परिस्थितियों में बाजार दोबारा तेजी पकड़ सकता है?\nविशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में स्थिति सामान्य होने से कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट आती है, तो बाजार मौजूदा स्तरों से मजबूत उछाल दिखा सकता है।",
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  "category": "बाज़ार",
  "publishedAt": "2026-10-12",
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