# ग्लोबल बॉन्ड बाजार में भारी बिकवाली, मजबूत अमेरिकी डॉलर के आगे लुढ़की प्रमुख मुद्राएं और सोना

> बढ़ते रियल टर्म प्रीमियम और भारी कर्ज दबाव के बीच वैश्विक बॉन्ड बाजार में तेज बिकवाली देखी जा रही है, जिससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर पहुंच गई है। इसके चलते अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है, जबकि यूरो, जापानी येन, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, सोना और हाइपरलिक्विड दबाव में हैं।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/global-bond-bajara-men-bhari-bikavali-majabuta-us-dollar-ke-age-lurhaki-pramukha-mudraen-aura-gold-41260 · **Language:** Hindi
**Tags:** वैश्विक बॉन्ड बाजार, अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड यील्ड, यूरो विनिमय दर, सोने का भाव, कच्चा तेल महंगाई, हाइपरलिक्विड

अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में इन दिनों सरकारी और कॉरपोरेट कर्ज पत्रों यानी बॉन्ड्स में जबर्दस्त बिकवाली का दौर चल रहा है। केंद्रीय बैंकों की सख्त मौद्रिक नीतियों के लंबे समय तक बने रहने के अनुमान और निवेशकों द्वारा अधिक समय के लिए अतिरिक्त मुआवजे यानी बढ़ते रियल टर्म प्रीमियम की मांग के चलते यह संकट और गहरा गया है। इसके अलावा बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा भारी मात्रा में बॉन्ड जारी किए जाने से बाजार में पूंजी की कमी या क्राउडिंग-आउट प्रभाव देखने को मिल रहा है, जिसने वैश्विक स्तर पर सरकारी कर्ज चुकाने की दीर्घकालिक क्षमता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। जब सरकारें और टेक कंपनियां भारी मात्रा में बॉन्ड बाजार में उतारती हैं, तो कर्ज की आपूर्ति मांग से अधिक हो जाती है, जिससे ब्याज दरें ऊपर चढ़ती हैं और बॉन्ड की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की जाती है।

## सॉवरेन डेट पर दबाव और फ्रांस का रिकॉर्ड कर्ज लक्ष्य
बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के विश्लेषण का हवाला देते हुए एलियास हद्दाद ने रेखांकित किया कि वास्तविक टर्म प्रीमियम में यह उछाल बड़ी टेक कंपनियों की आक्रामक बॉन्ड उधारी और संप्रभु सरकारों की कर्ज स्थिरता पर उठ रहे सवालों का सीधा परिणाम है। खासकर अत्यधिक कर्ज के बोझ तले दबे देशों के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है। उदाहरण के लिए, फ्रांस ने अगले साल रिकॉर्ड पैमाने पर बॉन्ड जारी करके कर्ज जुटाने की योजना बनाई है। कर्ज पर ब्याज भुगतान की बढ़ती लागत पहले से ही तंग सरकारी खजाने पर भारी वित्तीय दबाव डाल रही है। जब कर्ज चुकाने की लागत बढ़ती है, तो नीति निर्माताओं के सामने बजटीय संतुलन बनाए रखना और आर्थिक विकास को समर्थन देना अत्यंत कठिन हो जाता है।

## कच्चे तेल से उपजी महंगाई और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी
वैश्विक वित्तीय परिदृश्य पर इस उथल-पुथल का असर केवल बॉन्ड बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने मुद्रा और जिंस बाजारों को भी पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया है। संयुक्त राज्य अमेरिका में हाल ही में आए व्यक्तिगत उपभोग व्यय यानी पीसीई आंकड़ों ने मुद्रास्फीति के मोर्चे पर हल्की नरमी दिखाई, जिसने अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों को काफी हद तक धीमा कर दिया है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों से उपजी महंगाई का जोखिम लगातार मंडरा रहा है। इसी खतरे के चलते अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तर के करीब टिकी हुई है, जिसने अमेरिकी डॉलर को जबर्दस्त मजबूती प्रदान की है और अन्य संपत्तियों पर भारी दबाव बना दिया है।

## यूरोपीय मुद्रा में ऐतिहासिक गिरावट और ऊर्जा संकट
अमेरिकी डॉलर के इस एकतरफा प्रभुत्व का सबसे गहरा असर यूरोप की साझा मुद्रा पर देखा जा रहा है। यूरो और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर यानी EUR/USD गिरकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। यह करेंसी जोड़ी बुधवार को फिसलकर 1.1312 तक आ गई थी, जो जनवरी में दर्ज किए गए 1.2082 के अपने उच्च शिखर से काफी नीचे है। यूरो में आई यह तीव्र गिरावट डॉलर की वैश्विक मजबूती, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और यूरोप के ऊर्जा संकट के दोहरे जोखिम को दर्शाती है। यदि यूरोज़ोन में मुद्रास्फीति का कोई नया झटका सामने आता है, तभी यूरो को एक अप्रत्याशित सहारा मिल सकता है, अन्यथा मौजूदा फंडामेंटल्स यूरो पर भारी बने हुए हैं।

## येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर डॉलर की मार
एशियाई मुद्रा बाजारों में गुरुवार के कारोबारी सत्र के दौरान जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर यानी USD/JPY 158.00 के पार अपने साप्ताहिक दायरे के शीर्ष पर कारोबार करता नजर आया। बैंक ऑफ जापान द्वारा नीतिगत सख्ती की संभावनाओं और जापानी अधिकारियों द्वारा मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप के जोखिमों के बावजूद अमेरिकी डॉलर की मजबूती थमने का नाम नहीं ले रही है। इसके साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक गतिरोध ने सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की मांग को और बढ़ा दिया है।

दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर भी अमेरिकी डॉलर के सामने संघर्ष कर रहा है। एशियाई सत्र में AUD/USD अपने दो महीने के निचले स्तर के करीब 0.6900 के मध्य दायरे में सिमटता दिखा। ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष अगस्त महीने में भारी गिरावट के साथ घटकर 49.5 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर यानी 495 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रह गया। हालांकि इस संकुचित व्यापार अधिशेष का ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर सीमित असर ही देखने को मिला, लेकिन डॉलर की तेज तेजी के चलते इस करेंसी जोड़ी पर दबाव बरकरार रहा।

## सोने की चमक फीकी और हाइपरलिक्विड में गिरावट
ब्याज दर न देने वाली सुरक्षित संपत्तियों के लिए बढ़ता अमेरिकी यील्ड एक बड़ा रोड़ा बन चुका है। सोने की कीमतें यूरोपीय सत्र के पहले हिस्से में 4,200 डॉलर के दायरे की तरफ मामूली बढ़त दर्ज करने के बाद उसे बनाए रखने में विफल रहीं और दिन के कारोबार में लगभग सपाट स्थिति में बनी रहीं। अमेरिका में बुधवार को आए उम्मीद से कम मुद्रास्फीति आंकड़ों के बावजूद डॉलर की आक्रामक खरीदारी जारी रही। बढ़ते ट्रेजरी प्रतिफल ने निवेशकों को बिना ब्याज वाली पीली धातु से दूर रखा है, जिससे सोने की मांग पर प्रत्यक्ष असर पड़ा है।

डिजिटल एसेट बाजार में भी इस तरलता दबाव की स्पष्ट झलक देखने को मिली। हाइपरलिक्विड यानी HYPE गुरुवार को 2 प्रतिशत गिर गया, जिससे पिछले दिन की 5 प्रतिशत की बढ़त का एक बड़ा हिस्सा घट गया। संस्थागत निवेशकों की मांग कमजोर पड़ी है, जिसका प्रमाण बुधवार को दर्ज किया गया 50 लाख डॉलर यानी 5 मिलियन डॉलर का आउटफ्लो है। तकनीकी दृष्टिकोण से HYPE का मिजाज मिला-जुला बना हुआ है क्योंकि इसकी कीमत 90 डॉलर के स्तर के नीचे ही सीमित बनी हुई है।

## इसका आप पर असर
वैश्विक बॉन्ड बाजार में यील्ड बढ़ने और अमेरिकी डॉलर की तेजी से अंतरराष्ट्रीय व्यापार लागत और उधारी महंगी हो सकती है।

- **उधारी लागत:** वैश्विक स्तर पर सरकारी और कॉरपोरेट बॉन्ड यील्ड में तेजी से कंपनियों और सरकारों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है। इसका सीधा असर भविष्य में कॉर्पोरेट विस्तार और खुदरा ऋणों की ब्याज दरों पर पड़ सकता है।
- **आयात और महंगाई:** अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से कच्चे तेल और अन्य आयातित वस्तुओं के बिल बढ़ जाते हैं। ऊर्जा कीमतें ऊंची रहने से घरेलू बाजारों में ईंधन और परिवहन लागत बढ़ने की आशंका रहती है।
- **करेंसी दबाव:** यूरो, येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसी प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के टूटने से विदेशी मुद्रा भंडार और निर्यात प्रतिस्पर्धी समीकरणों पर असर पड़ता है। विदेश यात्रा या विदेश में शिक्षा प्राप्त कर रहे लोगों के लिए डॉलर आधारित खर्च बढ़ सकता है।
- **सोने और क्रिप्टो निवेशक:** अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऊंची रहने के कारण बिना ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने और क्रिप्टो टोकनों से संस्थागत पूंजी निकलती है। अल्पकालिक निवेशकों को ऐसे दौर में सीमित रिटर्न या उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
वैश्विक बॉन्ड बाजार में यह व्यापक बिकवाली मौद्रिक सख्ती के बने रहने के अनुमान, भारी कर्ज आपूर्ति और तेल आधारित मुद्रास्फीति के दबावों के संयुक्त प्रभाव से हुई है।

- **रियल टर्म प्रीमियम में वृद्धि:** निवेशकों ने दीर्घकालिक बॉन्ड में पूंजी फंसाने के लिए अधिक जोखिम प्रीमियम की मांग शुरू कर दी है। बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के अनुसार बड़ी टेक कंपनियों की भारी बॉन्ड उधारी और सरकारों की वित्तीय स्थिरता चिंताओं ने बाजार को प्रभावित किया है।
- **सॉवरेन उधारी का रिकॉर्ड स्तर:** फ्रांस जैसे देशों द्वारा अगले वर्ष रिकॉर्ड स्तर पर बॉन्ड जारी करने की योजनाओं ने सरकारी ऋण स्थिरता पर सवाल खड़े किए हैं। बढ़ते ब्याज भुगतान से भारी कर्जदार सरकारों पर वित्तीय दबाव कई गुना बढ़ गया है।
- **कच्चे तेल से मुद्रास्फीति जोखिम:** अमेरिका में व्यक्तिगत उपभोग व्यय के आंकड़े नरम आने के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों के चलते महंगाई की चिंताएं बनी हुई हैं। इस कारण अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर टिकी है।
- **भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर मांग:** अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने सुरक्षित ठिकाना तलाशते हुए डॉलर की तरफ रुख किया है। इससे यूरो, येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसी प्रमुख मुद्राओं में तीव्र बिकवाली दर्ज की गई।

## सवाल-जवाब

### 1. वैश्विक बॉन्ड बाजार में बिकवाली का मुख्य कारण क्या है?
केंद्रीय बैंकों की सख्त मौद्रिक नीति की संभावनाओं, बढ़ते रियल टर्म प्रीमियम और बड़ी टेक कंपनियों की बॉन्ड उधारी से उपजे क्राउडिंग-आउट प्रभाव के कारण बिकवाली तेज हुई है।

### 2. फ्रांस की कर्ज योजना से क्या चिंताएं सामने आई हैं?
फ्रांस अगले साल रिकॉर्ड मात्रा में बॉन्ड जारी करने की योजना बना रहा है, जिससे उच्च ब्याज लागत के बीच कर्ज चुकाने के वित्तीय दबाव की चिंताएं बढ़ गई हैं।

### 3. यूरो और डॉलर की विनिमय दर में कितनी गिरावट आई है?
EUR/USD गिरकर मई 2025 के बाद के सबसे निचले स्तर 1.1312 पर आ गया है, जो जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है।

### 4. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बढ़ने से सोने की कीमत पर क्या असर पड़ा है?
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर पहुंचने से बिना ब्याज वाली संपत्ति सोने की मांग कमजोर पड़ी है और यह 4,200 डॉलर के दायरे में सपाट बना रहा।

### 5. हाइपरलिक्विड टोकन में गिरावट के क्या आंकड़े रहे?
हाइपरलिक्विड में गुरुवार को 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिसमें बुधवार को 50 लाख डॉलर का संस्थागत आउटफ्लो देखा गया और इसकी कीमत 90 डॉलर के नीचे सीमित रही।

### 6. ऑस्ट्रेलियाई व्यापार अधिशेष में क्या बदलाव दर्ज हुआ?
ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष अगस्त महीने में भारी गिरावट के साथ घटकर 49.5 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रह गया।

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