ग्लोबल करेंसी बाजार में अमेरिकी डॉलर की हलचल, यूरो में 1.1145 तक गिरावट की आशंका विदेशी मुद्रा बाजार में यूरो पर मंदी का दबाव बना हुआ है जबकि डॉलर के रुख और बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव से येन, रुपया और सोने की चाल प्रभावित हो रही है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में नई कारोबारी शुरुआत के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले प्रमुख वैश्विक मुद्राओं में मिलाजुला रुख देखा जा रहा है। यूरो की चाल पर नजर डालें तो पिछले हफ्ते के उतार-चढ़ाव के बाद साझा यूरोपीय मुद्रा सीमित दायरे में फंसी हुई है, लेकिन तकनीकी तौर पर इसमें कमजोरी का जोखिम बना हुआ है। बीते गुरुवार को यूरो संभलकर 1.1209 के स्तर पर बंद हुआ था। इसके बाद शुक्रवार को जब यह 1.1215 पर कारोबार कर रहा था, तब यह संकेत मिल रहे थे कि रिकवरी आगे बढ़ सकती है, लेकिन ऊपर की तरफ स्पष्ट तेजी की रफ्तार न होने से इसका दायरा 1.1190 से 1.1240 के बीच सीमित रहने की संभावना थी। शुक्रवार के सत्र में यूरो 1.1243 तक मजबूत हुआ, लेकिन बाद में फिसलकर 1.1187 पर आ गया और अंत में 0.07 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1.1201 पर स्थिर हुआ। मौजूदा चाल से दिशा का कोई नया संकेत नहीं मिल रहा है और आज यूरो के 1.1180 से 1.1230 के दायरे में कारोबार करने का अनुमान है। मध्यम अवधि में यूरो पर दबाव और अहम तकनीकी स्तर व्यापक नजरिए से देखें तो करीब एक महीने पहले से ही यूरो को लेकर नकारात्मक दृष्टिकोण बना हुआ है। बीते गुरुवार यानी 8 अक्टूबर को जब स्पॉट स्तर 1.1200 पर था, तब यह स्पष्ट हुआ था कि नीचे की ओर जाने वाली गति भले ही सुस्त है, लेकिन यूरो के लिए 1.1145 का स्तर छूने का मौका अब भी बरकरार है। तब से अब तक यूरो नीचे की तरफ कोई बड़ा ब्रेकडाउन नहीं दिखा पाया है। इसके बावजूद जब तक 1.1255 का मजबूत रेजिस्टेंस स्तर सुरक्षित रहता है, तब तक यह गिरावट का नजरिया कायम रहेगा। उल्लेखनीय है कि यह रेजिस्टेंस स्तर पहले 1.1265 पर देखा जा रहा था, जो अब संशोधित होकर 1.1255 पर आ गया है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और येन की चाल पर छुट्टियों का असर अन्य प्रमुख करेंसी जोड़ों में एशियाई सत्र के दौरान कम लिक्विडिटी के बीच ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) में सोमवार को आई मामूली मंदी का गैप भर गया, लेकिन यह जोड़ी 0.7000 के अहम स्तर से नीचे ही बनी हुई है। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तरों से नीचे आई है, इसके बावजूद अमेरिकी डॉलर ने संभलने की कोशिश की, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त सीमित रही। इसके अतिरिक्त नवंबर में आरबीए यानी रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी किए जाने की घटती संभावनाओं ने भी ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर दबाव बनाए रखा है। दूसरी तरफ USD/JPY में नए हफ्ते की शुरुआत में भी सीमित दायरे का कारोबार देखने को मिल रहा है। यह जोड़ी 158.00 से ऊपर बनी हुई है। जापानी येन को सहारा देने के लिए सरकारी अधिकारियों द्वारा संभावित दखलंदाजी की अटकलों के बीच खरीदार बेहद सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी ने डॉलर के खरीदारों को रक्षात्मक मुद्रा में रखा है, जिससे इस जोड़ी में भी ऊपरी स्तरों पर लगाम लगी हुई है। हालांकि जापान और अमेरिका में सार्वजनिक अवकाश के कारण बाजार में तरलता काफी कम है, और ऐसे माहौल में भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं सुरक्षित निवेश माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर में बड़ी गिरावट को रोक सकती हैं। सोने में मुनाफावसूली और कच्चे तेल पर संघर्ष विराम का असर सोमवार की शुरुआत में एक हफ्ते के उच्च स्तर को छूने के बाद सोने में बिकवाली देखने को मिली। यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान पीली धातु फिसलकर 4,200 डॉलर प्रति औंस के निशान से नीचे आ गई, जिससे इसकी लगातार दो दिनों की बढ़त का सिलसिला टूट गया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक और सख्त रुख के संकेतों ने डॉलर की गिरावट को थामा है, जिससे गैर-यील्ड वाली सर्राफा परिसंपत्ति यानी सोने पर दबाव बन गया। दूसरी ओर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा संघर्ष विराम समझौते से वैश्विक ईंधन की किल्लत दूर होने की उम्मीद जगी है, जिससे आने वाले समय में महंगाई के जोखिम कम होने की संभावना बनी है। क्रिप्टो बाजार में कार्डानो की वापसी और भारतीय रुपये को सहारा डिजिटल एसेट बाजार में कार्डानो (ADA) पिछले हफ्ते 2.85 प्रतिशत के सुधार के बाद सोमवार को फिर से अपने अहम सपोर्ट जोन के ऊपर लौटने में सफल रहा। डेरिवेटिव्स पोजीशनिंग में सुधार और सकारात्मक तकनीकी संकेतों ने एडीए की रिकवरी को समर्थन दिया है। डेरिवेटिव्स बाजार के आंकड़े बताते हैं कि कार्डानो ट्रेडर्स के बीच धारणा बेहतर हो रही है। कॉइनग्लास पर एडीए का लॉन्ग-टू-शॉर्ट अनुपात सोमवार को 1.01 दर्ज किया गया, जो तेजी के ग्रीन जोन में प्रवेश का संकेत देता है। घरेलू मोर्चे पर भारतीय रुपया (INR) सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जोरदार बढ़त के साथ खुला और 95.80 के करीब अपनी रिकवरी बनाए रखने में कामयाब रहा। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा अमेरिकी डॉलर की मांग को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए नए कदमों ने भारतीय मुद्रा को राहत प्रदान की है, जिससे डॉलर के दबाव के बावजूद रुपये को जमीन बनाए रखने में मदद मिली है। इसका आप पर असर वैश्विक मुद्राओं, बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर आयात लागत, विदेश यात्रा और दैनिक महंगाई पर पड़ता है। • भारत में: रिजर्व बैंक द्वारा डॉलर की मांग पर अंकुश लगाने से रुपया 95.80 के आसपास संभला हुआ है। इससे आयातित वस्तुओं की कीमतों में तात्कालिक उछाल रुकने और मुद्रा विनिमय लागत स्थिर रहने की उम्मीद है। • वैश्विक यात्रियों और छात्रों के लिए: यूरो और डॉलर के सीमित दायरे में रहने से अंतरराष्ट्रीय ट्यूशन फीस और यात्रा बजट पर अचानक अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। विनिमय दरों पर नजर रखकर सही स्तरों पर मुद्रा बदलना समझदारी होगी। • ऊर्जा और घरेलू बजट: रूस-यूक्रेन ऊर्जा समझौते से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई है। ईंधन सस्ता होने से भविष्य में परिवहन और आवश्यक वस्तुओं पर महंगाई का दबाव कम हो सकता है। • सोना और क्रिप्टो निवेशक: सोने के 4,200 डॉलर से नीचे आने और कार्डानो के सुधरने से निवेशकों के लिए पोर्टफोलियो संतुलन जरूरी हो गया है। निवेशक डेरिवेटिव्स और केंद्रीय बैंक की नीतियों के संकेतों के आधार पर जोखिम प्रबंधन कर सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में यह हलचल केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीतियों, कम लिक्विडिटी और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के मिलेजुले असर के कारण देखने को मिल रही है। • अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बॉन्ड यील्ड: फेड के सख्त नीतिगत रुख ने बॉन्ड यील्ड में नरमी के बावजूद अमेरिकी डॉलर को मजबूत सहारा दिया है। इसी वजह से गैर-ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने में मुनाफावसूली शुरू हो गई। • यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में नीतिगत सुस्ती: यूरो में ऊपर की ओर गति की कमी और ऑस्ट्रेलिया में नवंबर दर वृद्धि की घटती संभावनाओं ने दोनों मुद्राओं को डॉलर के मुकाबले सीमित कर दिया। निवेशकों में तकनीकी रूप से ऊपरी स्तरों पर बिकवाली का रुझान बना हुआ है। • जापान और अमेरिका में सार्वजनिक अवकाश: दोनों प्रमुख वित्तीय केंद्रों में बैंक अवकाश के कारण बाजार में तरलता बेहद कम रही। कम लिक्विडिटी में बड़े संस्थागत सौदों की कमी से कीमतें तंग दायरे में फंसी रहीं। • ऊर्जा संघर्ष विराम और आरबीआई का दखल: रूस-यूक्रेन ऊर्जा समझौते ने कच्चे तेल में सप्लाई की चिंताएं घटाईं, जबकि आरबीआई के नियमों ने घरेलू बाजार में डॉलर की मांग घटाकर रुपये को मजबूती दी। सवाल-जवाब 1. यूरो के लिए निकट भविष्य में कौन सा अहम गिरावट लक्ष्य देखा जा रहा है? यूरो के लिए तकनीकी तौर पर 1.1145 का निचला स्तर परीक्षण का मुख्य लक्ष्य बना हुआ है। 2. यूरो की मंदी की संभावना कब तक बरकरार रहेगी? जब तक यूरो 1.1255 के मजबूत रेजिस्टेंस स्तर से नीचे बना रहता है, तब तक गिरावट का जोखिम बना रहेगा। 3. सोने की कीमतों में गिरावट की मुख्य वजह क्या रही? अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख से डॉलर को मिले समर्थन के कारण सोना 4,200 डॉलर के नीचे फिसल गया। 4. कच्चे तेल की कीमतों में नरमी क्यों आई? रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा संघर्ष विराम समझौते की उम्मीदों से ईंधन की किल्लत कम होने के कारण कच्चे तेल में गिरावट आई। 5. भारतीय रुपये को डॉलर के मुकाबले किस स्तर पर सहारा मिला? आरबीआई द्वारा डॉलर की मांग पर अंकुश लगाने के नए कदमों के बाद रुपया 95.80 के पास संभलने में कामयाब रहा। 6. कार्डानो (ADA) के डेरिवेटिव्स बाजार में क्या बदलाव देखा गया? कॉइनग्लास पर कार्डानो का लॉन्ग-टू-शॉर्ट अनुपात 1.01 पर पहुंच गया, जो बाजार में धारणा के सकारात्मक होने का संकेत है। https://trendkia.com/market/global-currency-market-men-us-dollar-ki-halachala-eur-men-1-1145-taka-giravata-ki-ashnka-46782 TrendKia — Har trend, sabse pehle.