ग्लोबल मार्केट में केंद्रीय बैंकों के फैसलों की सुगबुगाहट, मजबूत आर्थिक वृद्धि ने संकट के बीच ब्रिटिश पाउंड को दिया सहारा ऊर्जा संकट के बावजूद जुलाई के मजबूत आर्थिक आंकड़ों ने ब्रिटिश पाउंड को सहारा दिया है, जबकि दुनिया भर के निवेशक आगामी FOMC और बैंक ऑफ जापान की बैठकों से पहले सतर्क रुख अपना रहे हैं। एनर्जी प्राइस शॉक यानी ऊर्जा की कीमतों में आए बड़े झटके के बाद भी ब्रिटिश पाउंड (GBP) उम्मीद से कहीं अधिक मजबूत बना हुआ है। यूनाइटेड किंगडम (UK) की आर्थिक वृद्धि दर में इस साल की दूसरी छमाही में बड़ी गिरावट आने की आशंका जताई जा रही है, जो कि हाल के वर्षों में देखे गए मौसमी पैटर्न के समान है। हालांकि, जुलाई महीने की आर्थिक गतिविधियों से यह संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था में मंदी उतनी गंभीर नहीं होगी जितनी पहले आशंका जताई जा रही थी। मजबूत आर्थिक वृद्धि, बढ़ती ऊर्जा कीमतों और दुनिया के अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा मौद्रिक नीतियों को सख्त करने की उम्मीदों ने इस बात की संभावना बढ़ा दी है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) भी जल्द ही ब्याज दरों को बढ़ाने की दिशा में कदम उठाएगा। ब्रिटेन की आर्थिक वृद्धि और श्रम बाजार की कमजोरी के बीच संतुलन यद्यपि यूनाइटेड किंगडम में समग्र आर्थिक गतिविधियां काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं, लेकिन वहां का घरेलू श्रम बाजार कमजोरी के संकेत दे रहा है। श्रम बाजार में यह कमजोरी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की रफ्तार को धीमा कर सकती है। एमयूएफजी (MUFG) के विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत आर्थिक विकास और ऊर्जा क्षेत्र से उत्पन्न होने वाला मुद्रास्फीति का दबाव मौद्रिक नीति को सख्त करने की वकालत करता है, लेकिन श्रम बाजार की नाजुक स्थिति के कारण BoE ब्याज दरों में उतनी आक्रामक वृद्धि करने से बच सकता है जितनी बाजार को उम्मीद है। इसके चलते, नीति निर्माताओं को मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और रोजगार क्षेत्र को नुकसान से बचाने के लिए एक बेहद नाजुक संतुलन बनाना होगा। यूएस डॉलर के मुकाबले दबाव में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD) लगातार दबाव में है और मंगलवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान यह यूएस डॉलर (USD) के मुकाबले 0.7150 के स्तर से नीचे कारोबार कर रहा है। AUD/USD की जोड़ी वर्तमान में सोमवार को छुए गए तीन सप्ताह से अधिक के निचले स्तर के बेहद करीब बनी हुई है। इस गिरावट का मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती है, जिसे बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर बने अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड से सहारा मिल रहा है। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की महत्वपूर्ण बैठक से पहले निवेशक सावधानी बरत रहे हैं, और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण पैदा हुए मुद्रास्फीति के जोखिमों ने बॉन्ड यील्ड को ऊपर बनाए रखा है। इसके अतिरिक्त, चीन से अगस्त महीने के लिए आए मिले-जुले आर्थिक आंकड़ों ने भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कोई खास सहारा नहीं दिया, जिससे इस मुद्रा में गिरावट का रुख बना रहा। 155.00 के करीब पहुंचा USD/JPY, दबाव में जापानी येन दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर जापानी येन (JPY) के मुकाबले लगातार बढ़त बना रहा है, जिससे मंगलवार सुबह USD/JPY की जोड़ी 155.00 के स्तर की ओर बढ़ती दिखाई दी। बाजार के निवेशक इस सप्ताह होने वाली दो बड़ी केंद्रीय बैंक बैठकों से पहले अपनी पोजीशन मजबूत करने में जुटे हैं, जिसमें फेडरल रिजर्व की FOMC बैठक और बैंक ऑफ जापान (BoJ) की मौद्रिक नीति बैठक शामिल है। कच्चे तेल की कीमतों से जुड़े मुद्रास्फीति जोखिमों और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं के कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड मजबूत बनी हुई है, जिससे डॉलर को सपोर्ट मिल रहा है। हालांकि, जापानी येन की गिरावट पर इस उम्मीद से थोड़ा अंकुश लगा है कि BoJ अपनी अति-उदार मौद्रिक नीति को समाप्त करने और सामान्यीकरण की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा सकता है। FOMC बैठक से पहले सोने की कीमतों में स्थिरता कमोडिटी बाजार में, सोना (Gold) एशियाई सत्र के दौरान दर्ज की गई मामूली बढ़त का फायदा उठाने में असमर्थ रहा और यह सोमवार को दर्ज किए गए एक महीने के निचले स्तर के करीब ही कारोबार कर रहा है। आज से शुरू होने वाली दो दिवसीय FOMC बैठक से पहले निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं, जिसके कारण सोना फिलहाल 4,300 डॉलर के स्तर से थोड़ा नीचे बना हुआ है। फेड के ब्याज दर संबंधी फैसले और भविष्य के नीतिगत संकेतों के इंतजार में बाजार में व्यापार की मात्रा सीमित है, जिससे सोने की कीमतों में कोई बड़ा सुधार नहीं देखा जा रहा है और यह निचले स्तरों पर ही कंसोलिडेट हो रहा है। इसका आप पर असर वैश्विक मुद्राओं में यह बदलाव और केंद्रीय बैंकों की नीतियां सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, कर्ज की दरों और व्यक्तिगत निवेश के फैसलों को प्रभावित करेंगी। • कर्ज और ब्याज दरें: यदि फेडरल रिजर्व या बैंक ऑफ इंग्लैंड ब्याज दरों में बढ़ोतरी करते हैं, तो वैश्विक स्तर पर कर्ज की लागत बढ़ जाएगी। इसका मतलब है कि उपभोक्ताओं को विदेशी लोन और क्रेडिट पर अधिक ब्याज देना पड़ सकता है। • यात्रियों के लिए मुद्रा विनिमय: अमेरिकी डॉलर (USD) के मुकाबले ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसी मुद्राओं के कमजोर होने से अमेरिका जाने वाले यात्रियों को अधिक पैसे खर्च करने होंगे। इसके विपरीत, डॉलर रखने वाले लोगों को ऑस्ट्रेलिया या ब्रिटेन की यात्रा पर अधिक फायदा मिलेगा। • सोने में निवेश की रणनीति: प्रमुख नीतिगत फैसलों से पहले सोने की कीमतें निचले स्तर पर बनी हुई हैं, इसलिए खुदरा निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए। FOMC का आक्रामक रुख सोने की कीमतों को और नीचे धकेल सकता है, जो खरीदारी का एक अच्छा अवसर हो सकता है। • आयात और निर्यात लागत: आयात-निर्यात से जुड़े व्यवसायों को USD/JPY और AUD/USD के उतार-चढ़ाव के कारण मुनाफा कमाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। अचानक होने वाले नुकसान से बचने के लिए मुद्रा जोखिमों का प्रबंधन (हेजिंग) करना बहुत जरूरी है। ऐसा क्यों हुआ बाजार में मौजूदा उतार-चढ़ाव ब्रिटेन के मजबूत आर्थिक आंकड़ों, अमेरिका में तेल से जुड़ी मुद्रास्फीति के डर और प्रमुख केंद्रीय बैंकों के आगामी नीतिगत फैसलों के कारण हैं। • ब्रिटेन का मजबूत आर्थिक प्रदर्शन: ऊर्जा की कीमतों में बड़े झटके के बावजूद, जुलाई की मजबूत आर्थिक गतिविधियों ने ब्रिटेन में श्रम बाजार की कमजोरी के असर को कम कर दिया है। इससे BoE द्वारा जल्द ही मौद्रिक नीति को सख्त करने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। • अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने अमेरिका में लंबे समय तक रहने वाली मुद्रास्फीति की चिंताओं को बढ़ा दिया है। इसके चलते अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तर के करीब बनी हुई है, जिससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हो रहा है। • केंद्रीय बैंकों के फैसलों का इंतजार: फेडरल रिजर्व (FOMC) और बैंक ऑफ जापान (BoJ) की महत्वपूर्ण मौद्रिक नीति बैठकों से पहले निवेशक कोई बड़ा जोखिम नहीं ले रहे हैं। इस सतर्क रुख के कारण सोने की कीमतों में स्थिरता है और मुद्राओं में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। सवाल-जवाब 1. ब्रिटिश पाउंड में मजबूती क्यों देखी जा रही है? ऊर्जा कीमतों के झटके के बावजूद, विशेष रूप से जुलाई में उम्मीद से बेहतर आर्थिक वृद्धि ने पाउंड को सहारा दिया है और बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा नीति को सख्त करने की उम्मीदें बढ़ाई हैं। 2. कौन से कारक बैंक ऑफ इंग्लैंड की ब्याज दरों में बढ़ोतरी को सीमित कर सकते हैं? ब्रिटेन के श्रम बाजार में कमजोरी बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा की जाने वाली नीतिगत सख्ती के पैमाने को सीमित कर सकती है। 3. AUD/USD की जोड़ी तीन सप्ताह के निचले स्तर के करीब क्यों कारोबार कर रही है? तेल से जुड़े मुद्रास्फीति जोखिमों और आगामी FOMC बैठक के कारण उच्च अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के साथ-साथ अगस्त के लिए चीन के मिले-जुले आर्थिक आंकड़ों ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव डाला है। 4. जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर को किस बात से सहारा मिल रहा है? फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों और कच्चे तेल की कीमतों से पैदा होने वाले मुद्रास्फीति जोखिमों के कारण मजबूत अमेरिकी बॉन्ड यील्ड से डॉलर को सहारा मिल रहा है। 5. सोने की कीमतें 4,300 डॉलर के स्तर से नीचे क्यों कारोबार कर रही हैं? महत्वपूर्ण दो दिवसीय FOMC नीति बैठक से पहले निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं, जिससे सोने की कीमतें एक महीने के निचले स्तर के करीब बनी हुई हैं। https://trendkia.com/market/globala-marketa-men-kendriya-bainkon-ke-phaisalon-ki-sugabugahata-majabuta-arthika-vriddhi-ne-snkata-ke-bicha-british-pound-ko-diy-32463 TrendKia — Har trend, sabse pehle.