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  "type": "article",
  "title": "ग्लोबल पॉलिसी और फॉरेक्स अपडेट: जिद्दी महंगाई के बीच नॉर्जेस बैंक की अंतिम दर वृद्धि का अनुमान, USD/JPY सात महीने के निचले स्तर पर",
  "summary": "जिद्दी महंगाई के चलते नॉर्जेस बैंक नवंबर में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी कर सकता है, जिसके बाद 2027 के बाद दरों में 3.50 प्रतिशत तक की कटौती संभव है। वैश्विक बाजारों में अमेरिकी डॉलर की चौतरफा कमजोरी के बीच USD/JPY सात महीने के निचले स्तर 153.36 पर आ गया है, जबकि डीजल क्रैक स्प्रेड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर को पार कर गया है।",
  "content": "वैश्विक केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में इस समय महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहे हैं। दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में जिद्दी मुद्रास्फीति और आर्थिक सुस्ती के बीच खींचतान जारी है। जापानी ब्रोकरेज कंपनी नोमुरा के विश्लेषकों का अनुमान है कि नॉर्वे का केंद्रीय बैंक, नॉर्जेस बैंक, लगातार बनी हुई मुद्रास्फीति के दबाव के कारण नवंबर 2026 में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी कर सकता है। इस संभावित दर वृद्धि के बाद अगले साल ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट (0.25 प्रतिशत) की पहली कटौती होने की संभावना है, जिसके बाद 2027 के बाद दरों को धीरे-धीरे घटाकर 3.50 प्रतिशत के तटस्थ लक्ष्य तक लाया जा सकता है।\n\n \n\nनॉर्जेस बैंक की नीति और मुद्रास्फीति का ट्रांसमिशन सिस्टम\n\nनॉर्वे की मुख्य नीतिगत ब्याज दर ऐतिहासिक रूप से यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) की दरों की तुलना में काफी ऊंची बनी हुई है। इस अंतर के पीछे नॉर्वेजियन क्रोन (NOK) की कमजोरी, घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती और तटस्थ ब्याज दर के उच्च अनुमान मुख्य कारण रहे हैं। इससे पहले नॉर्जेस बैंक ने मई में ब्याज दरों में वृद्धि की थी, जो आंशिक रूप से ईरान युद्ध के कारण उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा और मूल्य दबावों से प्रेरित थी। हालांकि, आर्थिक आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि मौद्रिक सख्ती का सबसे मुख्य कारण मूल मुद्रास्फीति में बनी हुई जिद्दी रुकावट है।\n\n नॉर्वे में मौद्रिक नीति का प्रभाव अन्य यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अलग तरीके से काम करता है। कैश-फ्लो चैनल के माध्यम से मौद्रिक नीति का तेजी से प्रभाव और ऊर्जा झटकों के प्रति देश का कम संपर्क यह समझाता है कि 2022 में नॉर्वे में महंगाई की शीर्ष दर यूरोप की तुलना में कम क्यों रही। ऐसा तब भी हुआ जब नॉर्जेस बैंक ने 2022 और 2023 के बीच ECB की तुलना में दरों में कम बढ़ोतरी की थी। इसके बावजूद, नॉर्वे में सख्त नीतिगत दरों के बाद भी अंतर्निहित महंगाई दर नीचे आने में समय ले रही है, जिससे 2026 के उत्तरार्ध तक ब्याज दरें ऊंची बने रहने का अनुमान है।\n\n \n\nविदेशी मुद्रा बाजार: येन की मजबूती, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और डॉलर पर दबाव\n\nकरेंसी मार्केट में USD/JPY बुधवार को यूरोपीय कारोबारी घंटों के दौरान लगातार मंदी के रुख में बना रहा और 153.50 के स्तर के आसपास कारोबार करता दिखा। लाइव मार्केट डेटा के अनुसार USD/JPY 153.36 पर ट्रेड कर रहा है, जो पिछले बंद स्तर 153.85 से 0.32 प्रतिशत नीचे है। यह जोड़ी मंगलवार को बने 153.36 के सात महीने के निचले स्तर के बेहद करीब है, जबकि इसका 52 हफ्तों का दायरा 146.61 से 163.98 के बीच रहा है। जापानी येन को रोयटर्स टांकन बिजनेस सर्वे के मजबूत आंकड़ों से लगातार समर्थन मिल रहा है, जिससे बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की उम्मीदें मजबूत हुई हैं।\n\n USD/JPY के तकनीकी संकेतकों में 14 दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 24 के स्तर पर है, जो ओवरसोल्ड क्षेत्र को दर्शाता है। MACD हिस्टोग्राम -0.56 के नकारात्मक स्तर पर है और सिग्नल लाइन -0.73 पर है। मूविंग एवरेज के मोर्चे पर 20 दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 157.93, 50 दिवसीय EMA 159.22 और 200 दिवसीय EMA 157.76 पर है, जबकि 50 दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) 160.17 और 200 दिवसीय SMA 158.43 पर स्थित है। हालांकि 50 दिवसीय EMA का 200 दिवसीय EMA से ऊपर होना गोल्डन क्रॉस दर्शाता है, लेकिन मौजूदा कीमत 154.53 से 162.26 के बॉलिंगर बैंड के निचले हिस्से से नीचे बनी हुई है। 47 पर ADX इंडिकेटर एक मजबूत ट्रेंडिंग बाजार का संकेत देता है। इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए मुख्य पिवट स्तर 153.42 है, जबकि रेजिस्टेंस 153.92 (R1) और 154.47 (R2) पर है, तथा सपोर्ट 152.87 (S1) और 152.38 (S2) पर स्थित है।\n\n दूसरी ओर, AUD/USD एशियाई सत्र के दौरान 0.7200 के ऊपर स्थिर बना रहा। चीन के कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) और प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) के गर्म आंकड़ों का इस पर कोई खास असर नहीं पड़ा, क्योंकि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा दर वृद्धि की उम्मीदों से इसे समर्थन मिल रहा है। विदेशी मुद्रा बाजार के कारोबारी इस सप्ताह आने वाले अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं।\n\n \n\nसोना और डिजिटल एसेट बाजार की स्थिति\n\nकीमती धातुओं के बाजार में सोने की कीमतों में कुछ रिकवरी देखी गई है। मंगलवार को 4,345 डॉलर के निचले स्तर तक गिरने के बाद यूरोपीय सुबह के सत्र में सोना वापस 4,400 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गया। अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी ने सोने को सहारा दिया है, हालांकि पिछले तीन कारोबारी दिनों में 100 डॉलर से अधिक की गिरावट के बाद समग्र तकनीकी रुझान सतर्क बना हुआ है।\n\n डिजिटल एसेट क्षेत्र में पाई नेटवर्क (PI) ने बुधवार को अपनी रिकवरी जारी रखी और 0.098 डॉलर के ऊपर कारोबार किया। सप्ताह के प्रारंभ में अपने 50 दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज के पास सपोर्ट पाने के बाद पाई नेटवर्क में यह सुधार देखा गया। पाई कोर टीम ने नेटवर्क की उपयोगिता बढ़ाने के लिए अपने डेवलपर इकोसिस्टम को मजबूत करने पर जोर दिया है।\n\n \n\nऊर्जा बाजार: डीजल क्रैक स्प्रेड का नया रिकॉर्ड\n\nकच्चे तेल का बाजार भले ही शांत दिखाई दे रहा हो, लेकिन रिफाइंड उत्पादों में स्थिति काफी तनावपूर्ण है। अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड, यानी वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड के मुकाबले अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स का प्रीमियम, इतिहास में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। इंट्राडे कारोबार के दौरान यह प्रीमियम 102.00 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार में सप्लाई की किल्लत और रिफाइनिंग की समस्याओं को दर्शाता है।\n\nइसका आप पर असर\nवैश्विक ब्याज दरों, विदेशी मुद्रा दरों और ईंधन प्रीमियम में हो रहे बदलावों का सीधा असर आपकी जेब, यात्रा खर्च और निवेश पोर्टफोलियो पर पड़ता है।\n\n• भारत में: विदेशी मुद्रा दरों में उतार-चढ़ाव और कच्चे तेल तथा डीजल क्रैक स्प्रेड में बढ़ोतरी से भारत में आयातित वस्तुओं और ईंधन की लागत बढ़ सकती है। इससे आने वाले महीनों में माल ढुलाई महंगी होने से आम उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं।\n\n• निवेशकों के लिए: अमेरिकी डॉलर में कमजोरी और सोना तथा येन में हलचल से वैश्विक शेयर बाजारों में अनिश्चितता बनी रह सकती है। निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित परिसंपत्तियों और घरेलू उन्मुख शेयरों में संतुलित रखने की सलाह दी जाती है।\n\n• विदेशी यात्रियों और छात्रों के लिए: करेंसी मार्केट में फेरबदल से विदेश में पढ़ाई और यात्रा का बजट प्रभावित हो सकता है। डॉलर और अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले रुपये की विनिमय दर पर नजर रखना जरूरी है।\n\n• ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र: डीजल क्रैक स्प्रेड 100 डॉलर प्रति बैरल पार करने से रिफाइनिंग कंपनियों के मार्जिन में बदलाव आएगा। हालांकि खुदरा ईंधन दरें सरकारी नीतियों पर निर्भर करेंगी, लेकिन वैश्विक ऊर्जा लागत का दबाव बना रहेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nवैश्विक केंद्रीय बैंकों की सख्त नीतियों और वित्तीय बाजारों में हालिया उतार-चढ़ाव के पीछे कई प्रमुख आर्थिक कारक जिम्मेदार हैं।\n\n• जिद्दी अंतर्निहित महंगाई: नॉर्वे और अन्य विकसित अर्थव्यवस्थाओं में मूल मुद्रास्फीति उम्मीद से अधिक समय तक ऊंची बनी हुई है, जिससे केंद्रीय बैंकों को दरें बढ़ाने या ऊंची रखने पर मजबूर होना पड़ रहा है।\n\n• मुद्रा में कमजोरी और भू-राजनीतिक तनाव: नॉर्वेजियन क्रोन की कमजोरी और ईरान युद्ध से जुड़े वैश्विक ऊर्जा झटकों ने केंद्रीय बैंकों पर मौद्रिक सख्ती का दबाव बनाए रखा है।\n\n• बैंक ऑफ जापान का नीतिगत बदलाव: रोयटर्स टांकन सर्वे के सकारात्मक नतीजों ने बैंक ऑफ जापान द्वारा ब्याज दरें सामान्य करने की उम्मीद जगाई है, जिससे येन को मजबूती मिली और USD/JPY निचले स्तर पर आया।\n\n• रिफाइनिंग क्षमता की कमी: डीजल क्रैक स्प्रेड का 100 डॉलर प्रति बैरल पार होना वैश्विक रिफाइनरियों में आपूर्ति की बाधाओं और मिडिल-डिस्टिलेट ईंधन की भारी मांग को दर्शाता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. नॉर्जेस बैंक नवंबर में ब्याज दरें क्यों बढ़ा सकता है?\nनॉर्वे में अंतर्निहित मुद्रास्फीति लगातार जिद्दी बनी हुई है, जिसके कारण नोमुरा के विश्लेषक नवंबर में एक और ब्याज दर वृद्धि का अनुमान जता रहे हैं।\n\n2. USD/JPY सात महीने के निचले स्तर पर क्यों पहुंचा?\nजापान में मजबूत बिजनेस सर्वे के आंकड़ों से बैंक ऑफ जापान द्वारा दरें सामान्य करने की उम्मीद बढ़ी है, जबकि अमेरिकी डॉलर में चौतरफा कमजोरी दर्ज की गई है।\n\n3. सोने की कीमत में हालिया सुधार के क्या कारण हैं?\nअमेरिकी डॉलर में गिरावट से सोने को सहारा मिला है, जिससे कीमतें मंगलवार के 4,345 डॉलर के निचले स्तर से सुधरकर 4,400 डॉलर के पास पहुंची हैं।\n\n4. डीजल क्रैक स्प्रेड 100 डॉलर पार करने का क्या मतलब है?\nइसका मतलब है कि कच्चे तेल के मुकाबले अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल का रिफाइनिंग प्रीमियम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो वैश्विक डीजल आपूर्ति में तंगी का संकेत है।",
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  "publishedAt": "2026-09-09",
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