# फेडरल रिजर्व की संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी के दबाव में सोना, 4,350 डॉलर के नीचे फिसला भाव

> अगस्त में अमेरिकी कोर महंगाई दर 0.3% बढ़ने के बाद फेडरल रिजर्व द्वारा दरें बढ़ाने की संभावना 86.2% तक पहुंच गई है, जिससे सोने की कीमतों में नरमी देखी जा रही है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/gold-edges-lower-below-4-350-as-imminent-fed-rate-hike-looms-34101 · **Language:** Hindi
**Tags:** सोने का भाव, फेडरल रिजर्व, अमेरिकी महंगाई, ब्याज दर, सर्राफा बाजार, केंद्रीय बैंक, वित्त

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कारोबारी सप्ताह की शुरुआत के साथ ही बहुमूल्य धातुओं के रुख में सुस्ती देखने को मिली है। शुरुआती एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान सोने की कीमत फिसलकर लगभग 4,340 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गई। अमेरिकी बाजार में लगातार बनी हुई महंगाई और नीति निर्माताओं द्वारा आगामी बैठक में ब्याज दरों में इजाफा किए जाने की मजबूत होती संभावनाओं ने सर्राफा बाजार के निवेशकों को सतर्क कर दिया है। बाजार प्रतिभागी अब पूरी तरह से बुधवार को आने वाले नीतिगत फैसले पर निगाहें टिकाए हुए हैं।

## महंगाई के आंकड़ों ने बढ़ाई ब्याज दर वृद्धि की आशंका
अमेरिकी लेबर सांख्यिकी ब्यूरो (ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स) द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, खाद्य और ऊर्जा घटकों को छोड़कर तैयार किया जाने वाला अमेरिकी कोर कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (कोर सीपीआई) अगस्त के महीने में मासिक आधार पर 0.3% बढ़ा। इससे ठीक एक महीने पहले, यानी जुलाई में इसमें 0.2% की मासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। वित्तीय विश्लेषकों और बाजार विशेषज्ञों का आम अनुमान अगस्त में भी 0.2% वृद्धि का ही था, लेकिन वास्तविक आंकड़ा इस आम सहमति से ऊपर निकल गया।

कोर मुद्रास्फीति में आई इस अप्रत्याशित तेजी के कारण आगामी नीतिगत समीक्षा में दरों में बढ़ोतरी की अटकलों को नया बल मिला। सीएमई फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, आगामी सितंबर बैठक में ब्याज दर में बढ़ोतरी की संभावना उछलकर 86.2% तक पहुंच गई है। उल्लेखनीय है कि अमेरिकी प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (पीपीआई) के आंकड़े जारी होने से पहले तक यह संभावना लगभग 72% के स्तर पर आंकी जा रही थी। इस नाटकीय उछाल ने बॉन्ड यील्ड और डॉलर को मजबूती दी, जिसका सीधा असर बिना यील्ड वाली संपत्तियों जैसे कि सोने पर पड़ा।

## नीतिगत फैसले और फेड चेयरमैन की टिप्पणियों पर टिकी निगाहें
वित्तीय बाजारों के लिए चालू सप्ताह का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की बुधवार को होने वाली बैठक और उसमें ब्याज दरों पर लिया जाने वाला फैसला होगा। इसके तत्काल बाद आयोजित होने वाली फेड चेयरमैन की प्रेस कॉन्फ्रेंस से कारोबारी भविष्य की मौद्रिक दिशा के अहम संकेत लेने की कोशिश करेंगे। यदि फेडरल रिजर्व के नीति निर्माताओं की ओर से नीतिगत रुख को लेकर कुछ नरम या संतुलित टिप्पणियां सामने आती हैं, तो इससे निकट भविष्य में सोने की कीमतों में होने वाली गिरावट पर ब्रेक लग सकता है।

कैपिटल डॉट कॉम के वरिष्ठ वित्तीय बाजार विश्लेषक काइल रोडा ने मौजूदा स्थिति का विश्लेषण करते हुए एक महत्वपूर्ण पहलू रेखांकित किया। उनके मुताबिक, यद्यपि बाजार इस समय दरों में बढ़ोतरी के पक्ष में दांव लगाता दिख रहा है, लेकिन एफओएमसी के सभी सदस्य शायद इस पर एकमत न हों। काइल रोडा ने कहा, “कमेटी के कई नरमपंथी सदस्य संभवतः यह तर्क पेश करेंगे कि वार्षिक कोर मुद्रास्फीति में आई गिरावट नीतिगत संयम बरतने को उचित ठहराती है।” इसके कारण यह आर्थिक आंकड़ा बैठक से पहले निश्चितता बढ़ाने के बजाय अनिश्चितता को और गहरा कर सकता है।

दूसरी ओर, टीडी सिक्योरिटीज का विश्लेषण बताता है कि यह पीली धातु उच्च दायरे में अपने सपोर्ट को बनाए रखने में सक्षम रही है। संस्था के अनुसार, ऊर्जा कीमतों में नए सिरे से आई तेजी और निकट अवधि में दर वृद्धि की बढ़ती संभावनाओं से जूझने के बावजूद समग्र कीमती धातुओं के समूह में सोने की मजबूती स्पष्ट रूप से नजर आ रही है।

## तकनीकी स्तर और मौजूदा बाजार स्थिति
दैनिक तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो एक्सएयू/यूएसडी एक तटस्थ दायरे में स्थिरता तलाशता दिखाई दे रहा है। सोने का भाव 4,332.30 डॉलर पर स्थित अपने 100-दिवसीय मूविंग एवरेज (एमए) के ठीक ऊपर संभलने की कोशिश कर रहा है, जबकि ऊपर की ओर इसे बोलिंगर बैंड्स के 20-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (एसएमए) के मिडिल बैंड के नीचे सीमित रखा गया है। यह संरचना दर्शाती है कि बाजार इस वक्त निचले समर्थन और ऊपरी दायरे के प्रतिरोध के बीच फंसा हुआ है। 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) 47.11 के स्तर पर दर्ज किया गया, जो हालिया गिरावट के बाद संतुलित मोमेंटम की ओर इशारा करता है।

चार्ट के ऊपरी हिस्से में शुरुआती प्रतिरोध बोलिंगर बैंड के 20-दिवसीय एसएमए के मिडिल बैंड यानी 4,460 डॉलर पर बना हुआ है। यदि खरीदारी का दबाव बढ़ता है और भाव 4,680 डॉलर के ऊपरी बोलिंगर बैंड की दिशा में बढ़ता है, तभी तेजी का स्पष्ट विस्तार संभव होगा। दूसरी ओर, नीचे की तरफ तत्काल सुरक्षा 4,330 डॉलर पर 100-दिवसीय मूविंग एवरेज द्वारा प्रदान की जा रही है। यदि बिकवाली और गहरी होती है, तो अगला महत्वपूर्ण मांग क्षेत्र निचले बोलिंगर बैंड के करीब लगभग 4,238.07 डॉलर पर खुलेगा।

वर्तमान लाइव बाजार आंकड़ों के संदर्भ में देखें तो सोने का भाव (जीसी=एफ) क्लोजिंग सत्र में 4,425 डॉलर के आसपास दर्ज किया गया, जो पिछले बंद स्तर 4,400 डॉलर से 0.57% की दैनिक बढ़त दर्शाता है। इसका 52-सप्ताह का दायरा 3,664 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच रहा है, जबकि ट्रेडिंग वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत का 0.90 गुना रहा। तकनीकी रूप से दैनिक आरएसआई 50 पर तटस्थ है, जबकि एमएसीडी -1.38 और सिग्नल लाइन 19.46 के स्तर पर (हिस्टोग्राम -20.83) मंदी का संकेत बनाए हुए हैं। विभिन्न एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (ईएमए) में 20-दिवसीय ईएमए 4,430 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 4,393 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 4,426 डॉलर पर स्थित हैं, जबकि 50-दिवसीय एसएमए 4,325 डॉलर और 200-दिवसीय एसएमए 4,553 डॉलर पर बना हुआ है। दैनिक अस्थिरता सूचकांक (एटीआर) 108.68 दर्ज है, जो स्टॉप-लॉस बफर के रूप में काम आ सकता है। दैनिक स्तरों में 4,412 डॉलर का मुख्य पिवट है, जिसके ऊपर आर1 प्रतिरोध 4,452 डॉलर और आर2 प्रतिरोध 4,480 डॉलर पर मौजूद है, जबकि समर्थन स्तर एस1 4,385 डॉलर और एस2 4,345 डॉलर पर देखे जा रहे हैं।

## सुरक्षित निवेश माध्यम के रूप में सोने की ऐतिहासिक भूमिका
मानव सभ्यता के पूरे इतिहास में सोने ने मूल्य संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में एक बुनियादी भूमिका निभाई है। आधुनिक दौर में भी आभूषणों के निर्माण और इसकी स्वाभाविक चमक के अलावा इस धातु को दुनिया भर में एक सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन एसेट) माना जाता है। आर्थिक मंदी, युद्ध या वित्तीय संकट के अशांत दौर में निवेशक अपनी पूंजी बचाने के लिए सोने की शरण लेते हैं। इसके अतिरिक्त, सोना मुद्रास्फीति और कमजोर होती मुद्राओं के खिलाफ एक मजबूत ढाल का काम करता है, क्योंकि इसका मूल्य किसी विशेष सरकारी आदेश या निजी जारीकर्ता के भरोसे पर निर्भर नहीं करता।

वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े धारक बनकर उभरे हैं। संकट के समय अपनी घरेलू मुद्राओं को मजबूती देने और विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के मकसद से केंद्रीय बैंक लगातार सोने की खरीदारी करते हैं। भारी मात्रा में सोने का भंडार किसी भी देश की वित्तीय साख और शोधन क्षमता पर वैश्विक विश्वास को बढ़ाता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने अपने भंडारों में 1,136 टन सोना जोड़ा, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 70 अरब डॉलर थी। यह रिकॉर्ड शुरुआत के बाद से किसी एक वर्ष में की गई सबसे बड़ी आधिकारिक खरीद थी। विशेष रूप से चीन, भारत और तुर्किये जैसे उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देश अपने सोने के भंडार में तेजी से बढ़ोतरी कर रहे हैं।

## अमेरिकी डॉलर, यील्ड और जोखिम वाली संपत्तियों के साथ संबंध
वित्तीय परिसंपत्तियों के बीच सोने का अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स के साथ आम तौर पर विपरीत संबंध पाया जाता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की कीमत गिरती है, तो सोने की कीमतों में उछाल आता है। इससे निवेशकों और केंद्रीय बैंकों को कठिन वित्तीय माहौल में अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखने का अवसर मिलता है। इसी प्रकार, जोखिम वाली संपत्तियों जैसे कि इक्विटी बाजारों के साथ भी सोने का उलटा संबंध होता है। शेयर बाजार में जोरदार तेजी आने पर सोने की मांग कमजोर हो सकती है, जबकि शेयर बाजारों में तेज बिकवाली के समय पूंजी सुरक्षित विकल्पों के रूप में सोने की ओर रुख करती है।

सोने की कीमत को प्रभावित करने वाले कारकों की एक विस्तृत श्रृंखला है। किसी क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव या गंभीर आर्थिक मंदी की आशंका से सुरक्षित निवेश मांग अचानक बढ़ सकती है। चूंकि सोना कोई नियमित लाभांश या ब्याज नहीं देता, इसलिए जब ब्याज दरें कम होती हैं, तो सोने की अपील बढ़ जाती है। इसके विपरीत, जब धन की लागत यानी ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो यह सोने पर दबाव डालती है। इसके बावजूद, सोने के मूल्य में अधिकांश उतार-चढ़ाव इस बात पर निर्भर करते हैं कि अमेरिकी डॉलर का प्रदर्शन कैसा है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर इसका मूल्य निर्धारण डॉलर में ही होता है। मजबूत डॉलर सोने की बढ़त को थामने का काम करता है, जबकि कमजोर डॉलर इसे ऊपर की ओर धकेलता है।

## विदेशी मुद्रा बाजार और भू-राजनीतिक हलचल
सोने के अलावा मुद्रा बाजार में भी केंद्रीय बैंकों की आगामी बैठकों का स्पष्ट असर दिखाई दे रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (एयूडी/यूएसडी) की जोड़ी ने सप्ताह की शुरुआत कमजोरी के साथ की और शुक्रवार के निचले स्तर यानी 0.7100 के मध्य क्षेत्र के करीब बनी रही। अमेरिकी सीपीआई आंकड़ों से ब्याज दर बढ़ने के अनुमान मजबूत होने से डॉलर को अतिरिक्त सहारा मिला। इसके अलावा, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में हुई झड़पों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर अमेरिकी डॉलर की मांग को और हवा दी है। हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (आरबीए) से नीतिगत सख्ती की उम्मीदें ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को बहुत बड़ी गिरावट से बचा रही हैं।

इसी प्रकार, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (यूएसडी/जेपीवाई) की जोड़ी पिछले मंगलवार को छुए गए सात महीने के निचले स्तर के पास सीमित दायरे में कारोबार कर रही है। ट्रेडर बुधवार को एफओएमसी और शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान (बीओजे) के नीतिगत निर्णयों से पहले बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं। बैंक ऑफ जापान द्वारा नीतिगत सामान्यीकरण की दिशा में कदम उठाए जाने की संभावना जापानी येन का समर्थन कर रही है, जबकि अमेरिकी ब्याज दरों में वृद्धि की उम्मीदें और वैश्विक जोखिम डॉलर को मजबूती दे रहे हैं, जिससे इस मुद्रा युग्म में हलचल सीमित बनी हुई है।

शुक्रवार को 4,300 डॉलर से नीचे के स्तरों से संभलने के बावजूद सोना नए सप्ताह की शुरुआत में संघर्ष करता दिखाई दिया। आगामी दिनों में कई प्रमुख केंद्रीय बैंकों की बैठकों के चलते निवेशक सतर्क हैं। ताजा अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने सितंबर में दर वृद्धि की संभावनाओं को पुख्ता करते हुए सोने की बढ़त को रोक दिया है, जबकि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से मिले सुरक्षित पनाहगाह वाले डॉलर के समर्थन ने सर्राफा खरीदारों को फिलहाल बैकफुट पर रखा हुआ है।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने के दामों में आई सुस्ती का सीधा असर भारतीय घरेलू सर्राफा बाजार और निवेशकों की रणनीति पर पड़ेगा।

- **भारत में:** अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर की मजबूती और सोने की कीमतों में गिरावट से घरेलू बाजार में खुदरा आभूषण खरीदारों को कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि आने वाले त्योहारी और वैवाहिक सीजन से पहले निवेशकों को फेडरल रिजर्व के आगामी फैसले तक नई खरीदारी में सावधानी बरतनी चाहिए।
- **वैश्विक निवेशकों के लिए:** बॉन्ड यील्ड में तेजी के कारण बिना यील्ड वाली संपत्तियों जैसे सोने में निकट अवधि में पूंजी का प्रवाह धीमा रह सकता है। पोर्टफोलियो विविधीकरण चाहने वाले संस्थागत निवेशकों को 4,330 डॉलर के प्रमुख तकनीकी समर्थन स्तर पर कड़ी नजर रखनी होगी।
- **आभूषण निर्माताओं पर असर:** थोक बाजार में कीमतों की अनिश्चितता के कारण आभूषण निर्माण इकाइयों की इन्वेंट्री लागत में उतार-चढ़ाव आ सकता है। कारोबारी 4,460 डॉलर के प्रतिरोध स्तर को पार करने के बाद ही बड़े ऑर्डर सुरक्षित करने की रणनीति बना रहे हैं।
- **मुद्रा विनिमय और आयात पर प्रभाव:** अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय भाव गिरने के बावजूद घरेलू आयात लागत आंशिक रूप से बढ़ सकती है। आयातकों को विदेशी मुद्रा हेजिंग पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
सोने की कीमतों में हालिया नरमी मुख्य रूप से अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के अनुमान से अधिक मजबूत आने और ब्याज दर वृद्धि की संभावनाओं में हुए तेज उछाल के कारण आई है।

- **कोर मुद्रास्फीति में अप्रत्याशित उछाल:** अगस्त महीने में अमेरिकी कोर सीपीआई 0.3% बढ़ा, जिसने विश्लेषकों के 0.2% के अनुमान को पीछे छोड़ दिया। आवश्यक सेवाओं और गैर-खाद्य मदों में जारी मूल्य वृद्धि ने नीति निर्माताओं पर सख्ती जारी रखने का दबाव बनाया है।
- **फेडरल रिजर्व की दर वृद्धि की प्रबल संभावना:** सीएमई फेडवॉच के अनुसार सितंबर की बैठक में ब्याज दर बढ़ाने की संभावना 72% से उछलकर 86.2% तक पहुंच गई। बढ़ती ब्याज दरें बॉन्ड प्रतिफल और नकदी को आकर्षक बनाती हैं, जिससे बिना ब्याज वाले सोने पर बिकवाली का दबाव बनता है।
- **डॉलर सूचकांक को मिला दोहरा समर्थन:** मध्य पूर्व में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक टकराव के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग में जोरदार तेजी आई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने का सौदा डॉलर में होने के कारण मजबूत डॉलर इसकी वैश्विक कीमतों को सीमित कर देता है।

## सवाल-जवाब

### 1. सोने की कीमत में हालिया गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
अगस्त महीने में अमेरिकी कोर महंगाई दर 0.3% बढ़ने के बाद फेडरल रिजर्व द्वारा आगामी बैठक में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना 86.2% तक पहुंच गई है, जिससे सोने पर बिकवाली का दबाव बना।

### 2. अगस्त में अमेरिकी कोर सीपीआई के आंकड़े क्या रहे?
खाद्य और ऊर्जा को छोड़कर कोर सीपीआई अगस्त में 0.3% बढ़ा, जो जुलाई के 0.2% और बाजार के 0.2% के अनुमान से अधिक है।

### 3. सोने के लिए कौन से प्रमुख तकनीकी स्तर महत्वपूर्ण हैं?
सोने के लिए 4,330 डॉलर और 4,238.07 डॉलर पर अहम समर्थन स्तर हैं, जबकि ऊपर की ओर 4,460 डॉलर और 4,680 डॉलर पर मजबूत प्रतिरोध बना हुआ है।

### 4. वर्ष 2022 में केंद्रीय बैंकों ने कितना सोना खरीदा था?
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, वर्ष 2022 में केंद्रीय बैंकों ने अपने भंडार में रिकॉर्ड 1,136 टन सोना जोड़ा, जिसकी कीमत लगभग 70 अरब डॉलर थी।

### 5. फेडरल रिजर्व के आगामी फैसले को लेकर विश्लेषकों का क्या मानना है?
कैपिटल डॉट कॉम के काइल रोडा के अनुसार, यद्यपि बाजार दर वृद्धि की उम्मीद कर रहा है, लेकिन कमेटी के नरमपंथी सदस्य वार्षिक मुद्रास्फीति को देखते हुए धैर्य बरतने का तर्क दे सकते हैं।

### 6. भू-राजनीतिक तनाव का मुद्रा और सर्राफा बाजार पर क्या असर पड़ा?
मध्य पूर्व में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में झड़पों के कारण अमेरिकी डॉलर को सुरक्षित निवेश के रूप में मजबूती मिली, जिसने सोने की तेजी को सीमित रखा।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._