अमरीकी महंगाई के दबाव और केविन वॉर्श के भाषण से पहले सोने में हलचल, 4,600 डॉलर के स्तर पर टिकी निगाहें अमरीका में PCE महंगाई के आंकड़ों में मजबूती के बाद डॉलर को समर्थन मिला है, जिससे सोने की कीमतों में $4,600 के पास उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। व्यापारी अब फेड अध्यक्ष केविन वॉर्श के आगामी संबोधन का इंतजार कर रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में हालिया तेजी के बाद हल्का दबाव देखने को मिला है, जहां भाव $4,600 के महत्वपूर्ण स्तर के आसपास कारोबार कर रहे हैं। अमरीका में जारी पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) प्राइस इंडेक्स के आंकड़ों ने महंगाई में निरंतरता के संकेत दिए हैं। फेडरल रिजर्व द्वारा पसंदीदा इस महंगाई सूचकांक के ऊंचे स्तर पर बने रहने के कारण अमरीकी डॉलर को बल मिला है, जिससे बुलियन की कीमतों पर अल्पकालिक दबाव दर्ज किया गया। इसके बावजूद, दीर्घकालिक 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) के ऊपर बने रहने से सोने का बुनियादी रुझान अब भी सकारात्मक बना हुआ है। निवेशक और मुद्रा बाजार के कारोबारी अब जैक्सन होल सम्मेलन में फेड अध्यक्ष केविन वॉर्श के पहले भाषण का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जो ब्याज दरों के भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। महंगाई आंकड़े और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति का असर अमरीका के आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, फेडरल रिजर्व का प्रमुख महंगाई पैमाना यानी PCE प्राइस इंडेक्स 2% के तय लक्ष्य से काफी ऊपर स्थिर बना हुआ है। इस स्थिति ने केंद्रीय बैंक पर अपनी मौद्रिक नीति को सख्त बनाए रखने या दरों में कटौती में देरी करने का दबाव बढ़ा दिया है। हालांकि, ब्याज दरों में वृद्धि या स्थिरता को लेकर बाजार की उम्मीदों में बहुत बड़ा बदलाव नहीं आया है। CME ग्रुप के फेडवॉच टूल के आंकड़ों से पता चलता है कि सितंबर की बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना 36% पर स्थिर बनी हुई है। मौद्रिक नीति में इस अनिश्चितता के कारण डॉलर सूचकांक को समर्थन मिल रहा है, जो गैर-उपज वाली परिसंपत्ति के रूप में सोने की मांग को सीमित कर रहा है। सोने के तकनीकी स्तर और मूविंग एवरेज का विश्लेषण कीमती धातु XAU/USD ने हफ्ते की शुरुआत में $4,700 के स्तर का परीक्षण किया था, लेकिन वहां से बिकवाली का दबाव आने के बाद कीमतें फिसलकर $4,595 के स्तर पर आ गईं। हालिया कारोबारी सत्रों में लाइव बाजार आंकड़ों के मुताबिक सोने का भाव $4,651 पर देखा गया, जो $4,598 के पिछले बंद भाव से 1.14% की बढ़त दर्शाता है। तकनीकी परिदृश्य पर नजर डालें तो दैनिक चार्ट में मोमेंटम संकेतक अभी भी तेजी के क्षेत्र में हैं। 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) ओवरबॉट स्तरों से थोड़ा गिरकर 66 के आसपास आ गया है, जबकि लाइव आंकड़ों में RSI 72 दर्ज किया गया है जो मजबूत खरीदारी का संकेत देता है। इसके अलावा मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) संकेतक शून्य से ऊपर बना हुआ है, जो यह दर्शाता है कि तेजी की रफ्तार में थोड़ी नरमी आई है, न कि कोई मंदी का रुझान शुरू हुआ है। कारोबारियों के लिए नीचे की तरफ पहला मजबूत समर्थन $4,583 का स्तर है, जो हालिया निचला स्तर रहा है। इसके नीचे 200-दिवसीय SMA $4,525 पर स्थित है, जो विदेशी मुद्रा और कमोडिटी व्यापारियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तकनीकी संकेतक है। यदि सोने की कीमत $4,525 के नीचे मजबूती से बंद होती है, तो मंदी के समर्थकों को बल मिलेगा और कीमतें $4,450 तथा $4,310 के निचले स्तरों तक गिर सकती हैं। दूसरी ओर, ऊपर की तरफ पहला प्रतिरोध $4,700 के स्तर पर है और इसके पार जाने पर $4,775 का अगला उच्च स्तर देखा जा सकता है। लाइव बोलिंगर बैंड $4,020 से $4,765 के बीच फैले हैं, जबकि दैनिक अस्थिरता को दर्शाने वाला ATR(14) 75.14 पर है। सुरक्षित निवेश और केंद्रीय बैंकों की स्वर्ण खरीदारी ऐतिहासिक रूप से सोना मानव सभ्यता में मूल्य के भंडारण और विनिमय के माध्यम के रूप में अपनी भूमिका निभाता आया है। वर्तमान दौर में आभूषणों के उपयोग के अलावा इसे संकट के समय सबसे सुरक्षित संपत्ति माना जाता है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव या मुद्रास्फीति के समय निवेशक सोने को अपनी पूंजी की सुरक्षा का प्रमुख साधन मानते हैं। चूंकि सोना किसी सरकार या विशिष्ट जारीकर्ता पर निर्भर नहीं होता, इसलिए यह मुद्रा के अवमूल्यन के खिलाफ एक प्रभावी हेज के रूप में कार्य करता है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े धारक हैं। कठिन समय में अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं को मजबूती देने और भंडार में विविधता लाने के लिए केंद्रीय बैंक लगातार सोने की खरीदारी करते हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में वैश्विक केंद्रीय बैंकों ने अपने भंडार में 1,136 टन सोना जोड़ा, जिसकी कुल कीमत लगभग $70 अरब थी। रिकॉर्ड दर्ज किए जाने के बाद से यह किसी भी वर्ष की सबसे बड़ी खरीदारी थी। विशेष रूप से चीन, भारत और तुर्की जैसे उभरते बाजारों के केंद्रीय बैंक अपने स्वर्ण भंडार में तेजी से बढ़ोतरी कर रहे हैं ताकि अपनी अर्थव्यवस्था की साख और वित्तीय स्थिरता को मजबूत किया जा सके। डॉलर, बांड्स और शेयर बाजार के साथ सोने का संबंध सोने की कीमत का अमरीकी डॉलर और अमरीकी ट्रेजरी बॉन्ड के साथ उल्टा संबंध (Inverse Correlation) होता है। जब अमरीकी डॉलर कमजोर होता है, तो अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सोना सस्ता हो जाता है, जिससे इसकी मांग बढ़ती है। इसी तरह, शेयर बाजार में तेजी आने पर निवेशक जोखिम वाली परिसंपत्तियों की ओर रुख करते हैं, जिससे सोने में बिकवाली देखने को मिलती है। इसके विपरीत, शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आने पर निवेशक सोने जैसे सुरक्षित विकल्पों में पैसा लगाते हैं। चूंकि सोने पर कोई ब्याज या लाभांश नहीं मिलता, इसलिए कम ब्याज दर वाले माहौल में इसकी आकर्षण क्षमता बढ़ जाती है, जबकि उच्च ब्याज दरें सोने की मांग पर दबाव डालती हैं। मुद्रा बाजार का हाल और जैक्सन होल सम्मेलन पर नजर सोने के साथ-साथ प्रमुख वैश्विक मुद्राओं में भी मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। GBP/USD 1.3600 के स्तर से नीचे अपने साप्ताहिक निचले दायरे में स्थिर बना हुआ है। वहीं EUR/USD 1.1650 के पास कारोबार कर रहा है, जिसे यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) की सख्त दरों की संभावनाओं से समर्थन मिल रहा है। विदेशी मुद्रा बाजार में व्यापारी अमरीकी जॉबलेस क्लेम्स और मध्य पूर्व के घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए हैं। शुक्रवार को फेड अध्यक्ष केविन वॉर्श जैक्सन होल संगोष्ठी में अपना पहला भाषण देने जा रहे हैं। इस भाषण से अमरीकी केंद्रीय बैंक के दर चक्र की स्पष्ट तस्वीर सामने आने की उम्मीद है, जिसका सीधा असर डॉलर और सोने की आगे की चाल पर पड़ेगा। इसका आप पर असर सोने और विदेशी मुद्रा बाजार में चल रही उथल-पुथल का आपकी व्यक्तिगत बचत, निवेश योजनाओं और मुद्रास्फीति पर सीधा असर पड़ता है। • भारत में: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव से घरेलू सर्राफा बाजारों में 24 कैरट और 22 कैरट सोने के भाव प्रभावित होते हैं। अगर आप त्योहारों या शादी-विवाह के लिए सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो वैश्विक संकेतों पर नजर रखना फायदेमंद रहेगा। • निवेशकों के लिए: गोल्ड ईटीएफ और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड धारकों को मौद्रिक नीति के संकेतों के कारण अल्पकालिक अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है। $4,525 का मूविंग एवरेज स्तर निवेशकों के लिए अहम स्टॉप-लॉस और ट्रेंड फिल्टर के रूप में काम कर सकता है। • लोन और ब्याज दरें: फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें ऊंची बनाए रखने से वैश्विक लिक्विडिटी पर असर पड़ता है, जिससे भारत में भी रेपो रेट और होम लोन की दरों में जल्द कटौती की उम्मीदें धीमी हो सकती हैं। • कच्चा माल व आयात बिल: अमरीकी डॉलर की मजबूती से भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे आयातित सामान और तेल की लागत पर असर पड़ने की संभावना रहती है। सवाल-जवाब 1. सोने की कीमत $4,600 के नीचे क्यों आ गई? अमरीका में PCE महंगाई के आंकड़े ऊंचे बने रहने से अमरीकी डॉलर मजबूत हुआ, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव पड़ा और भाव $4,600 के नीचे आ गए। 2. फेड अध्यक्ष केविन वॉर्श के भाषण का सोने पर क्या असर हो सकता है? जैक्सन होल में केविन वॉर्श का भाषण अमरीकी ब्याज दरों की भविष्य की दिशा का संकेत देगा। यदि वे सख्त रुख अपनाते हैं तो डॉलर मजबूत होगा और सोने पर दबाव आ सकता है। 3. सोने के लिए कौन से तकनीकी समर्थन और प्रतिरोध स्तर अहम हैं? सोने के लिए तत्काल समर्थन $4,583 और 200-दिवसीय SMA $4,525 पर है, जबकि ऊपर की तरफ प्रतिरोध $4,700 और $4,775 पर स्थित है। 4. केंद्रीय बैंक सोने की खरीदारी क्यों बढ़ा रहे हैं? केंद्रीय बैंक अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं को मजबूती देने, विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने और आर्थिक अनिश्चितता के समय जोखिम कम करने के लिए सोना खरीदते हैं। https://trendkia.com/market/gold-fluctuates-near-4600-ahead-of-kevin-warsh-speech-as-us-inflation-firmness-supports-dollar-23084 TrendKia — Har trend, sabse pehle.