सोने की कीमतों में 4,000 डॉलर के नीचे तेज गिरावट पर बाजार दोफाड़, उछाल या मंदी को लेकर बंटे रणनीतिकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया है। जहां एक विश्लेषण इसे संस्थागत मांग के चलते बड़े उछाल की तैयारी मान रहा है, वहीं दूसरा दृष्टिकोण अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के दम पर और गिरावट की चेतावनी दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय बुलियन मार्केट में सोने की कीमतों में आई भारी बिकवाली ने सर्राफा कारोबारियों और निवेशकों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। सप्ताह के अंत की ओर बढ़ते हुए हाजिर सोना (XAU/USD) 4,000 डॉलर प्रति औंस के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे लुढ़क गया है। मौजूदा बाजार में कीमत 3,966 डॉलर प्रति औंस के आसपास दर्ज की गई है, जो पिछले बंद भाव 4,031 डॉलर के मुकाबले 1.61 प्रतिशत की गिरावट दर्शाती है। इस बड़ी गिरावट के बाद बाजार विश्लेषकों के बीच दो बिल्कुल विपरीत राय उभरकर सामने आई हैं। एक खेमा इस गिरावट को बिकवाली की अंतिम सीमा यानी टर्मिनल एग्जॉशन मानकर जोरदार वापसी की उम्मीद जता रहा है, जबकि दूसरा खेमा इसे आने वाले हफ्तों में और बड़ी कमजोरी की शुरुआत के रूप में देख रहा है। तकनीकी संकेतकों पर संस्थागत मांग और रिवर्सन का परिदृश्य एसएमएएस क्वांटम रिसर्च से जुड़े आंद्रेई श्वेदेव इस गिरावट को किसी मंदी के ब्रेकडाउन के बजाय बाजार द्वारा लिक्विडिटी सोखने की प्रक्रिया के रूप में देखते हैं। उनका आकलन है कि कई दिनों से जारी इस गिरावट की गति अब अपनी अंतिम सीमा तक पहुंच चुकी है। 4,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक दायरे से नीचे का दबाव असल में तेज लिक्विडिटी सर्च है, लेकिन यह मंदी भरा आवेग 3,920 डॉलर से 3,960 डॉलर के बीच बने संस्थागत संचय गलियारे से टकराने के बाद काफी धीमा पड़ गया है। तकनीकी टेलीमेट्री के अनुसार, प्रति घंटे के चार्ट यानी H1 पर बिकवाली का वेग -42 डिग्री से गिरकर H4 चार्ट पर -8 डिग्री रह गया है, जो बिकवाली के धीमे होने का स्पष्ट प्रमाण है। इसके विपरीत, साप्ताहिक यानी W1 टाइमफ्रेम पर दीर्घकालिक रुझान +26 डिग्री के साथ मजबूती से तेजी का संकेत दे रहा है। इस आधार पर श्वेदेव ने डिप पर खरीदारी यानी लॉन्ग मीन-रिवर्सन की रणनीति सुझाई है। इस रणनीति के तहत 3,940 डॉलर से 3,965 डॉलर के दायरे में बाय लिमिट लगाने, 3,895 डॉलर के नीचे स्टॉप लॉस रखने और 4,065 डॉलर तथा 4,175 डॉलर के लक्ष्य की बात कही गई है। उनके अनुसार, चार घंटे की मोमबत्ती का 4,035.00 डॉलर के ऊपर बंद होना बिकवाली दबाव के पूरी तरह खत्म होने की पुष्टि करेगा। अमेरिकी वृहद आर्थिक आंकड़े और ब्याज दरों में बढ़ोतरी का डर इसके ठीक उलट, बाजार विश्लेषक सागर दुआ इस गिरावट को बुनियादी आर्थिक कारणों से प्रेरित मानते हैं और उनका कहना है कि सोने पर दबाव अभी जारी रहेगा। हाल ही में जारी हुए अमेरिकी आंकड़ों के अनुसार, तीसरी तिमाही का प्रारंभिक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 3.4 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ा है। यह आंकड़ा 3.2 प्रतिशत के पिछले अनुमान और पिछली तिमाही के 2.2 प्रतिशत की तुलना में काफी बेहतर रहा है। इसके साथ ही सितंबर में कोर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) महंगाई दर सालाना आधार पर 3.1 प्रतिशत दर्ज की गई है। मजबूत आर्थिक विकास और ऊंची महंगाई का यह संयोजन फेडरल रिजर्व द्वारा दिसंबर में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की संभावना को मजबूत करता है। गैर-ब्याज वाली संपत्ति होने के कारण सोना ऐसी परिस्थितियों में निवेशकों के लिए कम आकर्षक हो जाता है। तकनीकी मोर्चे पर सोना 4,102.31 डॉलर पर स्थित अपने 20-दिवसीय घातीय मूविंग एवरेज (EMA) के नीचे बना हुआ है, जबकि इसका आरएसआई (RSI) 35.87 के आसपास दर्ज हुआ था। दुआ के मुताबिक, 4,102 डॉलर के स्तर को पार करना पहली बड़ी चुनौती है और बाजार में मौजूदा स्तरों के ठीक नीचे कोई स्पष्ट संकेतक आधारित समर्थन न होने के कारण दबाव बना रह सकता है। लाइव तकनीकी स्थिति और आगे की निर्णायक सीमा लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार सोने का 14-दिवसीय RSI 31 पर फिसल चुका है, जो इसे ओवरसोल्ड जोन के करीब ले जाता है। एमएसीडी (MACD) -70.77 पर है जो -63.83 के सिग्नल के नीचे बना हुआ है। मूविंग एवरेज के मोर्चे पर 20-दिवसीय EMA 4,115 डॉलर, 50-दिवसीय EMA 4,213 डॉलर और 200-दिवसीय EMA 4,415 डॉलर पर है, जहां 50-दिवसीय ईएमए 200-दिवसीय ईएमए से नीचे फिसलने से डेथ क्रॉस की स्थिति बनी हुई है। बोलिंगर बैंड में 3,980 डॉलर से 4,257 डॉलर का दायरा देखा जा रहा है और मौजूदा कीमत निचले बैंड के नीचे कारोबार कर रही है। फिलहाल दैनिक पिवट स्तर 3,989 डॉलर पर है, जिसके ऊपर रेजिस्टेंस R1 4,015 डॉलर और R2 4,064 डॉलर पर मौजूद हैं। वहीं गिरावट की स्थिति में पहला सपोर्ट S1 3,940 डॉलर और दूसरा सपोर्ट S2 3,914 डॉलर पर बना हुआ है, जबकि 52-सप्ताह का दायरा 3,925 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच है। बाजार के लिए 4,035 डॉलर से 4,102 डॉलर का क्षेत्र निर्णायक साबित होगा। यदि सोना इस स्तर के ऊपर दैनिक बंद देने में सफल होता है तो श्वेदेव के रिवर्सन तर्क की पुष्टि होगी, जबकि 20-दिवसीय EMA के नीचे बने रहने पर दुआ द्वारा रेखांकित मंदी का दौर गहरा सकता है। इसका आप पर असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के 4,000 डॉलर के नीचे आने से निवेशकों और आम खरीदारों के लिए निवेश व खरीदारी की रणनीतियों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। • भारत में खरीदारों पर असर: वैश्विक बाजार में आई इस गिरावट से घरेलू हाजिर सर्राफा बाजारों में भी कीमतों में नरमी देखने को मिल सकती है। शादी-ब्याह के आगामी सीजन में खरीदारी करने वाले परिवारों के लिए यह राहत भरा अवसर बन सकता है। • गोल्ड ईटीएफ और निवेशकों के लिए: सोने के दाम 20-दिवसीय ईएमए से नीचे बने रहने से अल्पावधि ट्रेडर्स को सतर्कता बरतनी होगी। जब तक कीमतें 4,035 डॉलर के ऊपर स्थिर नहीं होतीं, तब तक नए बड़े दांव लगाने से बचना समझदारी हो सकती है। • ब्याज दरों और मुद्रा बाजार पर प्रभाव: अमेरिकी जीडीपी और महंगाई के मजबूत आंकड़ों से अमेरिकी डॉलर में मजबूती बनी रह सकती है। इससे रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, जो भारत में आयातित सोने की गिरावट को आंशिक रूप से सीमित कर सकता है। • स्टॉप लॉस और जोखिम प्रबंधन: वायदा बाजार में सक्रिय ट्रेडर्स को दैनिक वोलैटिलिटी (ATR 75.40 डॉलर) को ध्यान में रखकर ही पोजीशन बनानी चाहिए। मौजूदा समय में 3,895 डॉलर के स्तर को एक अहम सपोर्ट के रूप में देखा जा रहा है। ऐसा क्यों हुआ सोने की कीमतों में 4,000 डॉलर के नीचे आई ताजा गिरावट मुख्य रूप से अमेरिका में अप्रत्याशित रूप से मजबूत आर्थिक विकास और चिपचिपी महंगाई दर के आंकड़ों की वजह से हुई है। • मजबूत अमेरिकी जीडीपी आंकड़े: तीसरी तिमाही में अमेरिका की आर्थिक वृद्धि दर 3.4 प्रतिशत रही, जो बाजार के 3.2 प्रतिशत के अनुमान से कहीं अधिक है। तेज आर्थिक विस्तार ने यह धारणा मजबूत की है कि अर्थव्यवस्था को तत्काल नीतिगत ढील की आवश्यकता नहीं है। • महंगाई दर में जारी तेजी: सितंबर माह में कोर पीसीई मुद्रास्फीति 3.1 प्रतिशत पर दर्ज हुई, जो फेड के लक्षित दायरे से ऊपर बनी हुई है। इस आंकड़े ने फेडरल रिजर्व द्वारा दिसंबर में ब्याज दर बढ़ाने की आशंकाओं को फिर से हवा दे दी है। • यील्ड और गैर-ब्याज संपत्तियों का समीकरण: ब्याज दरें ऊंची रहने या बढ़ने की संभावना से बॉन्ड यील्ड मजबूत होती है, जिससे सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों को रखने की अवसर लागत बढ़ जाती है। इसी कारण संस्थागत फंड्स ने सप्ताह के अंत से पहले सोने में मुनाफावसूली की। • तकनीकी सपोर्ट का टूटना: 4,000 डॉलर का स्तर एक अहम मनोवैज्ञानिक और तकनीकी पड़ाव था। इस स्तर के टूटते ही ऑटोमेटेड स्टॉप-लॉस ऑर्डर्स ट्रिगर हुए, जिससे बिकवाली का वेग तेज हो गया। सवाल-जवाब 1. सोने की कीमत में हालिया गिरावट का मुख्य कारण क्या है? अमेरिका में 3.4 प्रतिशत की मजबूत जीडीपी वृद्धि और सितंबर में 3.1 प्रतिशत की कोर पीसीई महंगाई दर ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका बढ़ा दी है, जिससे गैर-ब्याज वाली संपत्ति सोने पर दबाव बना है। 2. आंद्रेई श्वेदेव के अनुसार सोने के लिए खरीदारी का दायरा क्या है? श्वेदेव ने 3,940 डॉलर से 3,965 डॉलर के बीच खरीदारी की सलाह दी है, जिसमें स्टॉप लॉस 3,895 डॉलर के नीचे और लक्ष्य 4,065 डॉलर और 4,175 डॉलर रखे गए हैं। 3. सागर दुआ के अनुसार सोने में आगे और कमजोरी क्यों आ सकती है? दुआ का मानना है कि सोना अपने 20-दिवसीय ईएमए 4,102.31 डॉलर के नीचे बना हुआ है और नीचे कोई मजबूत संकेतक आधारित सपोर्ट न होने के कारण यह कमजोरी जारी रह सकती है। 4. सोने में तेजी की पुष्टि के लिए किस तकनीकी स्तर को पार करना जरूरी है? चार घंटे के चार्ट पर 4,035 डॉलर के ऊपर मोमबत्ती का बंद होना और 4,102 डॉलर के 20-दिवसीय ईएमए को फिर से हासिल करना तेजी की पुष्टि के प्रमुख संकेत हैं। https://trendkia.com/market/gold-ki-kimaton-men-4-000-dolara-ke-niche-teja-giravata-para-bajara-dophara-uchhala-ya-mndi-ko-lekara-bnte-rananitikara-53471 TrendKia — Har trend, sabse pehle.