# सोने की कीमतों में 4,200 डॉलर का स्तर टूटना बड़ी गिरावट नहीं बल्कि अहम इम्तिहान, 4,000 डॉलर पर खरीदारों की नजर

> सोने के 4,200 डॉलर से नीचे फिसलने के बाद बाजार में 4,000 से 3,800 डॉलर के दायरे में मजबूत मांग की परीक्षा हो रही है, जहां अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और आगामी आर्थिक आंकड़ों पर निवेशकों की पैनी नजर टिकी है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-29 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/gold-ki-kimaton-men-4200-dollar-ka-stara-tutana-bari-giravata-nahin-balki-ahama-imtihana-4000-dollar-para-kharidaron-ki-najara-40182 · **Language:** Hindi
**Tags:** सोना, गोल्ड प्राइस, कमोडिटी बाजार, फेडरल रिजर्व, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, केंद्रीय बैंक, मुद्रास्फीति, वित्त

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों का 4,200 डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसलना निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है, हालांकि यह स्तर अपने आप में पीली धातु की आगे की लंबी अवधि की दिशा तय करने के लिए पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। बाजार के मौजूदा ढांचे को देखते हुए असली इम्तिहान मौजूदा कीमतों से कुछ नीचे के स्तरों पर होने की संभावना है। खरीदारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उनके पास फिलहाल बाजार में तुरंत लौटने या खरीदारी की होड़ मचाने की कोई जल्दबाजी नहीं दिख रही है। तकनीकी गति नकारात्मक बनी हुई है, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तरों के आसपास बनी हुई है, और आने वाले अमेरिकी आर्थिक आंकड़े फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति संबंधी अपेक्षाओं को पूरी तरह नया आकार दे सकते हैं।

## मनोवैज्ञानिक सीमा टूटने के बाद तकनीकी स्तरों की अहमियत
सोने का 4,200 डॉलर के नीचे जाना अगस्त महीने में दर्ज 4,700 डॉलर के शिखर से शुरू हुए सुधार के तेज होने का संकेत देता है। दैनिक चार्ट का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट दिखाई देता है कि जो स्तर टूटा है, उसकी तुलना में मौजूदा भाव के ठीक नीचे का क्षेत्र तकनीकी दृष्टि से कहीं अधिक निर्णायक साबित हो सकता है। हाल के महीनों में सोने ने 4,000 डॉलर के आसपास कई निचले स्तर स्थापित किए हैं। इसके अलावा 3,900 डॉलर से 4,000 डॉलर का क्षेत्र जून और जुलाई के निचले स्तरों के साथ-साथ अक्टूबर और नवंबर 2025 के एक बड़े ऐतिहासिक बदलाव के स्तर से मेल खाता है।

सोसिएते जेनेराल के विश्लेषकों का भी ऐसा ही निष्कर्ष है। बैंक के विश्लेषक सोने के लिए शुरुआती समर्थन स्तर लगभग 4,095 डॉलर पर देखते हैं, जिसके बाद जून और जुलाई के 3,960 डॉलर से 3,940 डॉलर के निचले स्तरों को कीमती धातु के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्र बताया गया है। इस दृष्टिकोण से 4,200 डॉलर के नीचे की गिरावट की व्याख्या बदल जाती है। बिकवाली करने वालों ने अल्पकालिक गति पर नियंत्रण जरूर हासिल कर लिया है, लेकिन व्यापक बाजार ढांचे की लड़ाई अभी पूरी तरह से उनके पक्ष में नहीं गई है। 4,000 डॉलर की तरफ बढ़ते कदम को किसी भी तरह से आत्मसमर्पण नहीं माना जा सकता, बल्कि यह अंतर्निहित मांग के एक बड़े इम्तिहान की शुरुआत है।

## मंदी के व्यापक ढांचे में फंसा सोने का बाजार
इस तकनीकी व्याख्या के बावजूद मौजूदा कमजोरी की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जनवरी महीने में लगभग 5,600 डॉलर के रिकॉर्ड सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद से सोना एक व्यापक मंदी के ढांचे में फंसा हुआ है। इस दौरान बनने वाले क्रमिक शिखर लगातार नीचे खिसकते गए हैं। अगस्त में सुधार की कोशिश भी लगभग 4,700 डॉलर के आसपास अटक गई, जो दैनिक चार्ट पर दिखाई देने वाली अवरोही ऊपरी सीमा के ठीक नीचे थी।

पीली धातु अपने 50-दिवसीय, 100-दिवसीय और 200-दिवसीय मूविंग एवरेज से नीचे कारोबार कर रही है, और हाल ही में यह 200-दिवसीय मूविंग एवरेज के ऊपर टिकने में पूरी तरह विफल रही है। दूसरे शब्दों में, यह विचार कि खरीदार 4,000 डॉलर से 3,900 डॉलर के आसपास वापस लौट सकते हैं, यह सुनिश्चित नहीं करता कि यह स्तर टूटेगा ही नहीं। यदि 3,900 डॉलर का स्तर लगातार दबाव में टूटता है, तो बाजार का ध्यान गिरते हुए वेज पैटर्न की निचली सीमा पर केंद्रित हो जाएगा, जो लगभग 3,800 डॉलर के पास अंतिम महत्वपूर्ण सहारा प्रदान कर सकती है। इस प्रकार वास्तविक निर्णय क्षेत्र 4,000 डॉलर से 3,800 डॉलर तक फैल जाता है। इस क्षेत्र से नीचे जाने पर इस तर्क का बचाव करना मुश्किल हो जाएगा कि यह केवल एक सामान्य तकनीकी परीक्षण था।

## भू-राजनीतिक तनाव और बॉन्ड यील्ड का विपरीत असर
सोने की मौजूदा कमजोरी इसलिए भी हैरान करने वाली है क्योंकि भू-राजनीतिक माहौल सैद्धांतिक रूप से सुरक्षित निवेश परिसंपत्तियों के पूरी तरह अनुकूल होना चाहिए। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की बाधाएं ऊर्जा आपूर्ति को लेकर लगातार चिंताएं पैदा कर रही हैं। सप्ताहांत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के ईरान के ताजा प्रस्ताव को खारिज कर दिया, हालांकि आगे अप्रत्यक्ष बातचीत जारी रहने की उम्मीद बनी हुई है।

लेकिन सोने के लिए इस संघर्ष का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव सीधे सुरक्षित निवेश की मांग में न दिखकर कच्चे तेल की कीमतों और मुद्रास्फीति तथा ब्याज दरों की उम्मीदों पर दिख रहा है। तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई बढ़ने की आशंकाएं तेज हो गई हैं, जिससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में जोरदार उछाल देखने को मिला है। 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर लगभग 5.26% पर पहुंच गई है, जो 2007 के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। बिना ब्याज या यील्ड वाली परिसंपत्ति होने के कारण सोने को अपने पास रखने की अवसर लागत अत्यधिक बढ़ जाती है। इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर हाल के उच्च स्तरों के करीब बना हुआ है, जो कीमती धातु पर दबाव का दूसरा बड़ा स्रोत बन गया है।

## आर्थिक आंकड़े तय करेंगे मौद्रिक नीति का रास्ता
सोना इस समय एक असामान्य दोराहे पर खड़ा है। वही भू-राजनीतिक झटका जो सुरक्षित मांग बढ़ा सकता था, वह कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ाकर मुद्रास्फीति की उम्मीदों और बॉन्ड यील्ड को ऊपर खींच रहा है, जिससे कीमती धातु के लिए मौद्रिक बाधाएं और मजबूत हो रही हैं। आने वाले दिनों में बाजार की नजर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स मुद्रास्फीति आंकड़ों, इंस्टीट्यूट फॉर सप्लाई मैनेजमेंट के सर्वेक्षणों और सबसे बढ़कर नॉनफार्म पेरोल रिपोर्ट पर टिकी होगी। ये आंकड़े यह निर्धारित करने में मदद करेंगे कि क्या लगातार बनी हुई मुद्रास्फीति और मजबूत आर्थिक लचीलापन वास्तव में आगे ब्याज दरों में और बढ़ोतरी को सही ठहराते हैं।

यदि आंकड़े मजबूत आते हैं और मुद्रास्फीति उम्मीद से अधिक गर्म रहती है, तो मौद्रिक नीति को और सख्त करने की उम्मीदों को बल मिलेगा। इस स्थिति में अमेरिकी यील्ड उच्च स्तरों पर बनी रह सकती है और सोने के पास तुरंत उछाल दर्ज करने का कोई बुनियादी कारण नहीं होगा। तब 4,000 से 3,900 डॉलर का दायरा और संभवतः 3,800 डॉलर की निचली सीमा बेहद कमजोर हो सकती है। इसके विपरीत, यदि आर्थिक कमजोरी के संकेत मिलते हैं या मुद्रास्फीति नरम पड़ती है, तो दर बढ़ोतरी की आशंकाएं घटेंगी, यील्ड में गिरावट आएगी और डॉलर कमजोर होगा। यदि यह बदलाव उसी समय होता है जब सोना 4,000 से 3,900 डॉलर के समर्थन स्तर की परीक्षा ले रहा हो, तो खरीदारों के सक्रिय होने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हो जाएंगी।

## वायदा बाजार में पोजीशन और चीनी एक्सचेंजों पर लिक्विडेशन
बाजार के उन स्तरों से भी नीचे फिसलने का एक और बड़ा कारण सटोरियों की पोजीशनिंग है। 22 सितंबर के सीएफटीसी कमिटमेंट्स ऑफ ट्रेडर्स आंकड़ों के अनुसार, सट्टेबाजों ने कीमतें गिरने के दौरान तीन हफ्तों की अवधि में नाममात्र मूल्य के संदर्भ में रिकॉर्ड मात्रा में सोने के वायदा अनुबंध जमा कर लिए थे। चूंकि इनमें से कई पोजीशन मौजूदा कीमतों से ऊपर बनाई गई थीं, इसलिए कीमतों में और गिरावट आने पर लॉन्ग पोजीशन को बंद करने की होड़ मच सकती है, जिससे बिकवाली का दबाव कई गुना बढ़ सकता है।

चीन के बाजारों में भी लेवरेज कम करने के साफ संकेत दिखने लगे हैं। गोल्डमैन सैक्स के गोल्ड ट्रेडिंग डेस्क के अनुसार, शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज खुलने पर लॉन्ग पोजीशन का बड़े पैमाने पर लिक्विडेशन देखा गया, जहां ओपन इंटरेस्ट में लगभग 11,000 अनुबंधों यानी 2.6% की गिरावट दर्ज की गई। 1 अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक राष्ट्रीय दिवस की छुट्टियों के कारण एक्सचेंज बंद रहने वाला है, जिसके चलते छुट्टियों से पहले पोजीशन घटाने की यह प्रवृत्ति अल्पावधि में बिकवाली का दबाव बढ़ा सकती है। हालांकि, 4,000 डॉलर से नीचे की संभावित तेज गिरावट का यह अर्थ नहीं होगा कि संरचनात्मक मांग खत्म हो गई है, बल्कि यह लंबी अवधि के निवेशकों की वापसी से पहले लिक्विडेशन का दौर हो सकता है।

## केंद्रीय बैंकों की निरंतर खरीदारी का आधारभूत सहारा
यही बुनियादी अंतर मौजूदा सुधारात्मक गिरावट को स्थायी मंदी से अलग करता है। वास्तविक यील्ड का ऊंचा होना अल्पकालिक रूप से एक बड़ी रुकावट है, लेकिन केंद्रीय बैंकों की निरंतर मांग अभी भी मजबूती से बनी हुई है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, आधिकारिक क्षेत्र की रिपोर्ट की गई खरीदारी जुलाई में 23 टन तक पहुंच गई। कई अनुमानों का मानना है कि वास्तविक मांग आधिकारिक आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है।

गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि जुलाई में केंद्रीय बैंकों की वास्तविक खरीदारी लगभग 44 टन तक पहुंच सकती है। यही वजह है कि बैंक संप्रभु खरीद को बाजार के लिए एक मजबूत संरचनात्मक समर्थन मानता है और साल के अंत के लिए सोने का 4,900 डॉलर का लक्ष्य बरकरार रखे हुए है। हालांकि यह मांग 4,000 डॉलर के स्तर पर किसी पूर्ण तल की गारंटी नहीं देती, क्योंकि केंद्रीय बैंक हर अल्पकालिक गिरावट को रोकने नहीं आते और सट्टेबाजी का प्रवाह हफ्तों तक कीमतों पर हावी रह सकता है।

## लाइव बाजार आंकड़े और तकनीकी रुझान
ताजा बाजार सत्र के समापन आंकड़ों के अनुसार, कॉमेक्स गोल्ड फ्यूचर्स में भाव 4,163 डॉलर प्रति औंस पर दर्ज किया गया, जो पिछले बंद भाव 4,168 डॉलर के मुकाबले 0.13% की मामूली गिरावट दर्शाता है। 52 हफ्तों के दौरान सोने का दायरा 3,786 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच रहा है, जबकि मौजूदा कारोबारी वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत का 0.15 गुना है। 14-दिवसीय आरएसआई 33 के स्तर पर है, जो ओवरसोल्ड क्षेत्र के करीब पहुंचते दबाव को दर्शाता है।

एमएसीडी सूचकांक -49.58 पर बना हुआ है, जो -18.94 की सिग्नल लाइन से नीचे है और -30.64 का नकारात्मक हिस्टोग्राम मंदी के रुख को पुष्ट करता है। मूविंग एवरेज में 20-दिवसीय ईएमए 4,351 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 4,366 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 4,437 डॉलर पर स्थित हैं, जहां 50-दिवसीय ईएमए 200-दिवसीय ईएमए से नीचे फिसलने के साथ डेथ क्रॉस की स्थिति बनी हुई है। 50-दिवसीय एसएमए 4,360 डॉलर और 200-दिवसीय एसएमए 4,555 डॉलर पर हैं। बॉलिंगर बैंड्स की सीमा 4,195 डॉलर से 4,552 डॉलर के बीच है और भाव निचली पट्टी से भी नीचे कारोबार कर रहा है। 14-दिवसीय एडीएक्स 18 के स्तर पर कमजोर ट्रेंडिंग या दायरे का संकेत देता है, जबकि स्टोकेस्टिक इंडिकेटर में फास्ट लाइन 6 और सिग्नल लाइन 12 पर है। 14-दिवसीय एटीआर 98.03 डॉलर है, जो दैनिक उतार-चढ़ाव को दर्शाता है। प्रमुख स्तरों में पिवट पॉइंट 4,160 डॉलर पर है, जिसके लिए पहला प्रतिरोध 4,175 डॉलर और दूसरा प्रतिरोध 4,187 डॉलर है, जबकि पहला समर्थन 4,148 डॉलर और दूसरा समर्थन 4,133 डॉलर पर मौजूद है।

## मुद्रा बाजारों और अन्य परिसंपत्तियों की हलचल
वित्तीय बाजारों के अन्य हिस्सों में भी डॉलर की मजबूती का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर जोड़ी सप्ताह की शुरुआत में 0.7000 के स्तर का बचाव करती दिखी, जो मजबूत डॉलर के बीच 4 अगस्त के बाद के अपने सबसे निचले स्तर के करीब है। अमेरिकी यील्ड ऊंचे स्तरों पर टिकी हुई है, जिससे रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के नीतिगत फैसलों से पहले इस मुद्रा जोड़ी पर दबाव बना हुआ है।

अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन में गिरावट के बाद खरीदार लौटते दिखे, जिससे शुक्रवार की गिरावट की आंशिक भरपाई हुई। बैंक ऑफ जापान के नरम मिनट्स ने येन की बढ़त को सीमित किया, जबकि कच्चे तेल की तेजी से उपजी महंगाई की चिंताओं और अक्टूबर में फेड द्वारा दर बढ़ाने के दांव से डॉलर को फिर मजबूती मिली और यह जोड़ी 158.00 की तरफ बढ़ी। उधर, बिटकॉइन पिछले सप्ताह 4% से अधिक की बढ़त दर्ज करने के बाद 82,800 डॉलर से नीचे कारोबार करता दिखा, जहां स्पॉट ईटीएफ प्रवाह से संस्थागत मांग बरकरार रहने के बावजूद हाल के शिखरों के पास गति धीमी पड़ी है। ब्रिटेन में डीजल की कीमतें नए रिकॉर्ड पर पहुंच गई हैं, जिसने व्यापक आर्थिक चिंताओं को और गहरा कर दिया है। फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान दोनों ने ही पिछले सप्ताह ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की थी और दोनों ने संकेत दिया है कि भविष्य के कदम आगामी आंकड़ों पर निर्भर करेंगे।

## निष्कर्ष: क्या 4,200 डॉलर के नीचे बनेगा खरीदारी का नया आधार
सोने के तकनीकी चार्ट से दो बातें साफ होती हैं। पहली यह कि जनवरी के 5,600 डॉलर के स्तर से 25% से अधिक की गिरावट के बाद मध्यम अवधि में बिकवाली करने वाले हावी हैं। दूसरी यह कि बाजार अब उस क्षेत्र के करीब आ रहा है जहां जोखिम और मुनाफे का संतुलन बदलने लगता है। 4,000 डॉलर से 3,900 डॉलर का दायरा एक बड़ा मनोवैज्ञानिक पड़ाव और कई पुराने निचले स्तरों का संगम है, जो वेज की निचली सीमा 3,800 डॉलर तक फैली हुई है।

यदि आने वाले दिनों में रोजगार और मुद्रास्फीति के आंकड़े बाजार में आक्रामक दरों की संभावनाओं को कमजोर करते हैं, तो 4,200 डॉलर पर दूरी बनाए रखने वाले निवेशकों को ठीक वही मौका मिल सकता है जिसका वे इंतजार कर रहे थे। 4,200 डॉलर का टूटना महज एक सतर्कता संकेत है, असली फैसला आने वाले कुछ सौ डॉलर नीचे तय होगा।

## इसका आप पर असर
सोने के अंतरराष्ट्रीय भावों में जारी इस गिरावट से आभूषण खरीदारों, खुदरा निवेशकों और म्यूचुअल फंड गोल्ड ईटीएफ धारकों पर सीधा असर देखने को मिलेगा।

- **भारत में:** घरेलू बाजार में सोने के खुदरा भाव अंतरराष्ट्रीय रुझानों के कारण दबाव में आ सकते हैं, जिससे आगामी शादी-ब्याह के मौसम के लिए खरीदारी करने वालों को सस्ता सोना मिलने की संभावना बनेगी। हालांकि, डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल अंतिम घरेलू खुदरा कीमतों को काफी हद तक तय करेगी।
- **गोल्ड ईटीएफ और निवेशकों पर:** सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड या गोल्ड ईटीएफ में निवेश करने वाले पोर्टफोलियो की अल्पकालिक शुद्ध परिसंपत्ति मूल्य में कमी आ सकती है। लंबी अवधि के निवेशक 4,000 डॉलर से 3,900 डॉलर के समर्थन स्तर पर व्यवस्थित खरीद या एसआईपी की रणनीति अपना सकते हैं।
- **मुद्रास्फीति और ब्याज दरें:** बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं। इसका मतलब है कि होम लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई में जल्द राहत मिलने की संभावना काफी कम है।
- **हेजिंग और सुरक्षित निवेश:** पोर्टफोलियो विविधीकरण चाहने वाले निवेशकों को मौजूदा स्तरों पर पूरी पूंजी एकमुश्त लगाने के बजाय अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों के रुझानों की पुष्टि का इंतजार करना चाहिए। किसी भी जल्दबाजी से बचने के लिए चरणों में निवेश करना ज्यादा सुरक्षित साबित हो सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
सोने की कीमतों में यह तीव्र गिरावट मुख्य रूप से बढ़ती बॉन्ड यील्ड, मजबूत अमेरिकी डॉलर और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से उत्पन्न मुद्रास्फीति के दबावों का मिलाजुला परिणाम है। सुरक्षित निवेश की पारंपरिक मांग को दरकिनार करते हुए वित्तीय बाजारों ने आक्रामक ब्याज दरों की संभावनाओं को प्राथमिकता दी है।

- **बॉन्ड यील्ड और डॉलर में रिकॉर्ड मजबूती:** अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.26% पर पहुंच गई है, जो 2007 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। ब्याज न देने वाली परिसंपत्ति होने के कारण अधिक यील्ड और मजबूत डॉलर सोने को अपने पास रखने की लागत को काफी बढ़ा देते हैं।
- **कच्चे तेल से भड़की मुद्रास्फीति:** मध्य पूर्व के तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं ने कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई दोबारा भड़कने का खतरा पैदा हो गया है। इस वजह से केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की आशंकाएं तेज हो गई हैं।
- **सटोरियों की पोजीशनों का लिक्विडेशन:** रिकॉर्ड स्तर पर खरीदी गई फ्यूचर्स पोजीशनों में मुनाफावसूली और स्टॉप-लॉस ट्रिगर होने से बिकवाली का दबाव अचानक बढ़ गया है। चीन के शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज पर लंबी पोजीशनों के लिक्विडेशन ने इस गिरावट को और तेज कर दिया।
- **तकनीकी स्तरों का टूटना:** जनवरी के 5,600 डॉलर के शिखर से शुरू हुई मंदी के बीच सोने का 50, 100 और 200-दिवसीय मूविंग एवरेज से नीचे फिसलना तकनीकी बिकवाली को बढ़ावा दे रहा है। प्रमुख मनोवैज्ञानिक स्तर 4,200 डॉलर टूटने से अल्पावधि व्यापारियों ने बिकवाली तेज कर दी।

## सवाल-जवाब

### 1. क्या सोने के लिए 4,200 डॉलर का स्तर टूटना बड़ी गिरावट की शुरुआत है?
नहीं, विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक अल्पकालिक परीक्षण है और सोने के लिए वास्तविक समर्थन दायरा 4,000 डॉलर से 3,800 डॉलर के बीच मौजूद है।

### 2. भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद सोने की कीमतें क्यों गिर रही हैं?
तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे मुद्रास्फीति और बॉन्ड यील्ड में भारी उछाल आया है जो गैर-उपज वाली परिसंपत्ति सोने पर भारी पड़ रहा है।

### 3. सोने के लिए अगला प्रमुख समर्थन स्तर कौन सा है?
शुरुआती समर्थन 4,095 डॉलर पर है, जबकि 4,000 डॉलर से 3,900 डॉलर का दायरा सबसे मजबूत ऐतिहासिक मांग क्षेत्र माना जा रहा है।

### 4. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का मौजूदा स्तर क्या है?
10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर लगभग 5.26% पर पहुंच गई है, जो वर्ष 2007 के बाद का इसका उच्चतम स्तर है।

### 5. क्या केंद्रीय बैंक अब भी सोना खरीद रहे हैं?
हां, केंद्रीय बैंकों की मांग मजबूत बनी हुई है और जुलाई में आधिकारिक खरीदारी 23 टन तक पहुंची, जबकि अनुमानों के अनुसार वास्तविक संप्रभु खरीद 44 टन तक हो सकती है।

### 6. गोल्डमैन सैक्स का साल के अंत तक सोने के भाव का क्या अनुमान है?
गोल्डमैन सैक्स ने संप्रभु मांग को आधार मानते हुए साल के अंत के लिए सोने का लक्ष्य 4,900 डॉलर प्रति औंस पर बरकरार रखा है।

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