# सोने में 5000 डॉलर के पार जाने की तैयारी, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और लंबी अवधि के निवेश से मिल रहा सहारा

> ब्याज दरों में सख्ती के बावजूद सोने में तेजी का नया दौर शुरू होने के आसार बन रहे हैं, जहाँ 2027 तक यह 5,000 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच सकता है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/gold-men-5000-dolara-ke-para-jane-ki-taiyari-kendriya-bainkon-ki-kharidari-aura-lnbi-avadhi-ke-nivesha-se-mila-raha-sahara-37217 · **Language:** Hindi
**Tags:** सोना, गोल्ड प्राइस, फेडरल रिजर्व, केंद्रीय बैंक, बैंक ऑफ जापान, अमेरिकी डॉलर, विदेशी मुद्रा

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट के बीच एक नए ऐतिहासिक उछाल की जमीन तैयार हो रही है। बुधवार के कारोबारी सत्र में हाजिर सोना लगभग 1.0 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,315 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गया, लेकिन बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह कमजोरी अस्थायी है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाओं के चलते अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है, जिससे बिना ब्याज वाली इस पीली धातु पर तात्कालिक दबाव देखा जा रहा है। इसके बावजूद, दीर्घकालिक बुनियादी कारक सोने को आने वाले वर्षों में और अधिक ऊंचाई पर ले जाने की ओर इशारा कर रहे हैं।

## 2027 तक 5000 डॉलर की नई ऊंचाई की संभावना
टीडी सिक्योरिटीज के विश्लेषण के अनुसार, सोने का बाजार एक बार फिर बड़ी तेजी के अगले चरण में प्रवेश करने के लिए तैयार दिख रहा है। पीली धातु ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक सख्ती के बावजूद मजबूती से टिके रहने की उल्लेखनीय क्षमता दिखाई है। निवेशकों और केंद्रीय बैंकों की ओर से बढ़ती मांग को देखते हुए यह अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2027 तक सोना 5,000 डॉलर प्रति औंस के पार का नया रिकॉर्ड स्तर छू सकता है। बाजार का रुख अब धीरे-धीरे बदल रहा है और लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करने वाले समूहों का पूंजी प्रवाह पिछले महीनों में काफी तेज हुआ है। माना जा रहा है कि यही मजबूत निवेश प्रवाह सोने को ऊंची ब्याज दरों के दबाव से उबरने और नए सिरे से तेज रफ्तार पकड़ने में मदद करेगा।

## सिस्टमैटिक फंड्स का दबाव और भविष्य की गुंजाइश
कीमती धातुओं के सकारात्मक परिदृश्य को देखते हुए निवेशकों के पास अपनी खरीदारी बढ़ाने के भरपूर अवसर मौजूद हैं। हाल के हफ्तों में कमोडिटी ट्रेडिंग एडवाइजर्स (सीटीए) की ओर से बिकवाली दर्ज की गई थी, जिसने देर से आई ग्रीष्मकालीन तेजी पर कुछ ब्रेक लगाया था। दरअसल, सितंबर में होने वाली फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की बैठक से ठीक पहले व्यवस्थित फंड्स ने अपनी मध्यम स्तर की लॉन्ग पोजीशन को खत्म कर दिया था। अब मोमेंटम फंड्स की पोजीशन काफी हद तक साफ हो चुकी है। इसका सीधा मतलब यह है कि यदि डिस्क्रेशनरी यानी स्वैच्छिक निवेशकों की खरीदारी फिर से लौटती है, तो सोने को ऊपर की तरफ एक अतिरिक्त तकनीकी सहारा मिल सकता है।

## केंद्रीय बैंकों का रिजर्व और डी-डॉलराइजेशन का असर
सोने की इस तेजी को सबसे बड़ा ईंधन वैश्विक केंद्रीय बैंकों से मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली में डी-डॉलराइजेशन, अमेरिकी डॉलर के अवमूल्यन और विभिन्न देशों की राजकोषीय नीतियों को लेकर बढ़ता अविश्वास सोने की मांग के मुख्य संचालक बन गए हैं। इस वजह से केंद्रीय बैंकों की तरफ से आधिकारिक रूप से घोषित की गई खरीद और बिना आधिकारिक घोषणा वाली अनुमानित खरीद, दोनों में ही इस साल आक्रामक स्तर पर सोने का संचय जारी रहने का अनुमान है। केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने और वित्तीय जोखिमों को कम करने के लिए लगातार सोने का स्टॉक बढ़ा रहे हैं।

## करेंसी बाजार में डॉलर का दबदबा और बैंक ऑफ जापान का फैसला
मुद्रा बाजार के रुख पर नजर डालें तो अमेरिकी डॉलर की मजबूती से कई प्रमुख जोड़ियों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) पर एशियाई कारोबार के दौरान नया बिकवाली दबाव देखने को मिला और यह 0.7100 के स्तर का परीक्षण कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया के ताजा पीएमआई आंकड़ों में विनिर्माण क्षेत्र में संकुचन और सेवा क्षेत्र में लगातार दूसरे महीने सुस्त विस्तार दर्ज किया गया, जिससे ऑस्ट्रेलियाई करेंसी कमजोर हुई है। इसके अलावा, गुरुवार को होने वाले महत्वपूर्ण ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन से पहले कारोबारी सतर्क हैं, जबकि अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता पूरी होने के घटनाक्रम पर बाजार ने खास ध्यान नहीं दिया।

दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) बुधवार के एशियाई सत्र में 157.00 के मध्य स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया, जो पिछले शुक्रवार को छुए गए दो सप्ताह के उच्चतम स्तर के करीब है। बैंक ऑफ जापान (बीओजे) ने अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। नीतिगत समिति में यह निर्णय 7-2 के बहुमत से लिया गया, जो काफी हद तक बाजार की पूर्व अपेक्षाओं के अनुरूप था। हालांकि, बैंक ऑफ जापान का यह कदम अपेक्षाकृत नरम माना गया, जिसके चलते जापानी येन पर दबाव बना रहा। वहीं अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख के कारण डॉलर लगातार मजबूत बना हुआ है, हालांकि येन में जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित हस्तक्षेप की आशंकाएं डॉलर-येन की बढ़त को सीमित किए हुए हैं।

## इसका आप पर असर
सोने के 5,000 डॉलर तक जाने के अनुमान और ब्याज दरों के इस बदलाव का सीधा असर निवेशकों के पोर्टफोलियो और घरेलू सोने के भावों पर पड़ेगा।

- **भारत में:** अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों में लंबी अवधि के उछाल से घरेलू खुदरा बाजार में आभूषण और सोने के सिक्के काफी महंगे हो सकते हैं। शादी-ब्याह के लिए आभूषण खरीदने वाले परिवारों को अधिक बजट आवंटित करना पड़ सकता है या फिर सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और गोल्ड ईटीएफ जैसे विकल्पों पर निर्भर रहना होगा।
- **सोने के निवेशकों पर:** मौजूदा 4,315 डॉलर के स्तर पर आई तात्कालिक गिरावट उन लंबी अवधि के निवेशकों को खरीदारी का मौका दे सकती है जो 2027 तक 5,000 डॉलर के संभावित लक्ष्य पर नजर रखे हुए हैं। सिस्टमैटिक फंड्स की बिकवाली पूरी होने के कारण अब नए सिरे से पूंजी आवंटन करने वाले निवेशकों को लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न मिलने की गुंजाइश दिख रही है।
- **करेंसी ट्रेडर्स के लिए:** अमेरिकी डॉलर में लगातार मजबूती बने रहने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और जापानी येन में ट्रेडिंग करने वालों को अत्यधिक सतर्कता बरतनी होगी। बैंक ऑफ जापान की दर बढ़ोतरी और जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित दखल के चलते मुद्रा बाजार में अचानक बड़े उतार-चढ़ाव आ सकते हैं।
- **वैश्विक अर्थव्यवस्था के स्तर पर:** केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने का बड़ा भंडार जमा करने से वैश्विक मुद्रा प्रणाली में डॉलर पर निर्भरता घटने के संकेत मिल रहे हैं। इससे आने वाले वर्षों में विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं में अंतरराष्ट्रीय व्यापार के निपटारे के लिए नए वित्तीय समीकरण बन सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
सोने में तात्कालिक गिरावट और लंबी अवधि की भारी तेजी का यह अनुमान विभिन्न वैश्विक वित्तीय और मौद्रिक कारणों के तालमेल से बना है।

- **फेडरल रिजर्व की मौद्रिक सख्ती:** अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आगे और बढ़ोतरी की आशंकाओं ने अमेरिकी डॉलर को मजबूत किया है। बिना ब्याज वाली संपत्ति होने की वजह से बढ़ती डॉलर यील्ड के दौर में सोने पर तात्कालिक रूप से 1 प्रतिशत का दबाव बना है और यह 4,315 डॉलर पर फिसल गया।
- **केंद्रीय बैंकों द्वारा रणनीतिक संचय:** वैश्विक अर्थव्यवस्था में डी-डॉलराइजेशन की प्रवृत्ति, डॉलर के अवमूल्यन का डर और विभिन्न सरकारों की वित्तीय नीतियों को लेकर अविश्वास मुख्य कारण बने हैं। इसी वजह से दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने सुरक्षित भंडार को बढ़ाने के लिए रिकॉर्ड स्तर पर सोने की खरीदारी कर रहे हैं।
- **सिस्टमैटिक फंड्स का पोजीशन साफ करना:** सितंबर एफओएमसी बैठक से पहले सिस्टमैटिक फंड्स और सीटीए ने अपनी लॉन्ग पोजीशन बेच दी थीं, जिससे ग्रीष्मकालीन रैली पर रोक लगी थी। अब बाजार में बिकवाली का दबाव खत्म हो चुका है, जिससे स्वैच्छिक निवेशकों की नई खरीदारी के लिए रास्ता पूरी तरह खुल गया है।
- **जापान और ऑस्ट्रेलिया के आर्थिक संकेत:** बैंक ऑफ जापान ने दरें बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत की हैं लेकिन उसका रुख अभी भी नरम माना गया, जबकि ऑस्ट्रेलिया के पीएमआई आंकड़ों में विनिर्माण संकुचन दिखा। इन कमजोरियों ने डॉलर की ताकत को और सहारा दिया है, जिसका परोक्ष असर कीमती धातुओं और मुद्राओं पर पड़ा है।

## सवाल-जवाब

### 1. सोने के लिए 5,000 डॉलर का स्तर कब तक हासिल होने का अनुमान है?
विश्लेषण के अनुसार, लंबी अवधि के निवेशकों और केंद्रीय बैंकों की बढ़ती मांग के दम पर सोना 2027 तक 5,000 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच सकता है।

### 2. हालिया कारोबारी सत्र में सोने की कीमत में गिरावट क्यों आई?
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आगे और बढ़ोतरी की संभावनाओं के कारण डॉलर मजबूत हुआ, जिससे सोना 1.0 प्रतिशत गिरकर लगभग 4,315 डॉलर पर आ गया।

### 3. केंद्रीय बैंक सोने की खरीदारी क्यों तेज कर रहे हैं?
डी-डॉलराइजेशन, डॉलर के संभावित अवमूल्यन और वित्तीय नीतियों को लेकर बढ़ते अविश्वास के चलते केंद्रीय बैंक अपने रिजर्व में सोने का संचय बढ़ा रहे हैं।

### 4. बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दरों में क्या बदलाव किया है?
बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है।

### 5. ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव क्यों देखा गया?
ऑस्ट्रेलिया के ताजा पीएमआई में विनिर्माण क्षेत्र संकुचन में चला गया और सेवा क्षेत्र की वृद्धि सुस्त रही, जिससे AUD/USD 0.7100 के स्तर पर फिसल गया।

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