सोने में अल्पकालिक दबाव के बाद 2027 तक रिकवरी के संकेत, वैश्विक ब्रोकरेज ने घटाया मूल्य लक्ष्य फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाओं के बीच सोने के भाव 3,900 डॉलर प्रति औंस के निचले स्तर से संभले हैं। विश्लेषकों का अनुमान है कि साल 2026 के अंत तक पीली धातु 4,250 डॉलर और 2027 के अंत तक 4,710 डॉलर तक पहुंच सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में दो दिनों की लगातार गिरावट के बाद सप्ताह की शुरुआत में हल्का सुधार देखने को मिला है। शुक्रवार को आई भारी गिरावट के चलते पीली धातु 3,900 डॉलर प्रति औंस से नीचे फिसल गई थी, जो अक्टूबर 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर रहा। हालांकि, वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक वार्ताओं से जुड़े सकारात्मक संकेतों ने अमेरिकी डॉलर की बढ़त पर लगाम लगाई है, जिससे सोने को तात्कालिक समर्थन मिला है। इसके बावजूद अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा मौद्रिक नीति को सख्त बनाए रखने की संभावनाओं के कारण निकट भविष्य में बाजार पर दबाव बना हुआ है। लंबी अवधि का दृष्टिकोण और मूल्य लक्ष्यों में बदलाव बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मध्यम अवधि में सोने का परिदृश्य सकारात्मक बना हुआ है, हालांकि पहले के अनुमानों में कुछ कटौती की गई है। वित्तीय विश्लेषकों ने अब सोने का मूल्य लक्ष्य संशोधित करते हुए 2026 के अंत तक 4,250 डॉलर प्रति औंस और 2027 के अंत तक 4,710 डॉलर प्रति औंस रहने का अनुमान लगाया है। उनका मानना है कि दिसंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में एक और वृद्धि किए जाने की आशंका बनी हुई है। यदि अमेरिकी ब्याज दरें लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनी रहती हैं, तो बॉन्ड यील्ड में तेजी जारी रहेगी, जिससे बिना ब्याज वाले सोने को अपने पास रखने की अवसर लागत बढ़ जाती है। केंद्रीय बैंकों की खरीद और संस्थागत निवेश का सहारा बाजार में हालिया बिकवाली और तकनीकी सुधार के बावजूद सोने की बुनियादी मांग को मजबूत समर्थन मिल रहा है। गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स यानी ईटीएफ में पूंजी का प्रवाह लगातार बना हुआ है और दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीदारी जारी है। विशेषज्ञों के अनुसार, हालिया पोजीशनिंग वॉशआउट के बाद उन स्तरों से नए लॉन्ग पोजीशन बनने की संभावना है जहां से पिछले ब्रेकआउट की शुरुआत हुई थी। साल 2027 के दृष्टिकोण को देखें तो फेडरल रिजर्व के सख्त रुख में ढील आने, अमेरिकी डॉलर की मजबूती में नरमी और यील्ड में स्थिरता आने से सोने की दीर्घकालिक रिकवरी को मजबूती मिलेगी। लाइव तकनीकी संकेतक और बाजार के प्रमुख स्तर लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, कमोडिटी एक्सचेंज पर सोना 3,915 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद स्तर 3,899 डॉलर से 0.42 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। इसका 52 सप्ताह का दायरा 3,879 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच रहा है, जबकि ट्रेडिंग वॉल्यूम 20 दिनों के औसत का 0.27 गुना है। तकनीकी विश्लेषण पर नजर डालें तो 14-दिवसीय आरएसआई 30 के स्तर पर है, जो अत्यधिक बिकवाली की स्थिति दर्शाता है। एमएसीडी -82.19 पर है जो सिग्नल लाइन -68.36 से नीचे रहते हुए मंदी का रुझान दिखा रहा है। प्रमुख मूविंग एवरेज में ईएमए20 4,090 डॉलर, ईएमए50 4,199 डॉलर और ईएमए200 4,412 डॉलर पर है, जबकि एसएमए50 4,279 डॉलर और एसएमए200 4,516 डॉलर पर दर्ज किया गया है। वर्तमान में ईएमए50 का ईएमए200 से नीचे जाना डेथ क्रॉस की स्थिति दर्शाता है। बोलिंजर बैंड के अनुसार दायरा 3,927 डॉलर से 4,279 डॉलर के बीच है, जिसमें कीमत निचले बैंड से नीचे बनी हुई है। 14-दिवसीय एडीएक्स 31 पर ट्रेंडिंग स्थिति में है। दैनिक वोलैटिलिटी दर्शाने वाला एटीआर 78.36 है। ट्रेडिंग के लिए पिवट स्तर 3,911 डॉलर, पहला रेजिस्टेंस 3,932 डॉलर व दूसरा रेजिस्टेंस 3,950 डॉलर है, जबकि सपोर्ट स्तर क्रमशः 3,893 डॉलर और 3,872 डॉलर पर स्थित हैं। करेंसी और क्रिप्टो बाजार में हलचल विदेशी मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर में एशियाई सत्र के दौरान सुधार देखा गया। कूटनीतिक घटनाक्रमों से निवेशकों के विश्वास को बल मिलने के कारण सेफ-हेवन अमेरिकी डॉलर की बढ़त सीमित रही, जिससे जोखिम-संवेदनशील ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को गति मिली। हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के आगामी नीतिगत फैसले से पहले निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं और कीमतें गुरुवार को छुए गए एक महीने के उच्च स्तर से नीचे बनी हुई हैं। वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन में मजबूती देखी गई और यह 158.00 के आसपास पहुंच गया, जिस पर जापानी वित्त मंत्री सात्सुकी कातायामा की हालिया चेतावनी का कोई खास असर नहीं दिखा। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में अक्टूबर के चार सप्ताह की लगातार गिरावट के बाद मामूली सुधार हुआ है, जहां बिटकॉइन 78,462 डॉलर के ऊपर संभला है और एथेरियम 2,295 डॉलर के पार पहुंचा है, हालांकि वह अभी भी प्रमुख मूविंग एवरेज से नीचे कारोबार कर रहा है। इसका आप पर असर सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय आभूषण बाजार, खुदरा निवेशकों और घरेलू बजट पर पड़ता है। • भारत में: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने के भाव 3,900 डॉलर के पास स्थिर होने से घरेलू सराफा बाजारों में कीमतों में अचानक आने वाली बड़ी तेजी थम सकती है। शादी-ब्याह के सीजन में खरीदारी की योजना बना रहे आम परिवारों को बजट प्रबंधन में तात्कालिक राहत मिलेगी। • खुदरा निवेशकों के लिए: गोल्ड ईटीएफ और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश करने वालों को अल्पकालिक मूल्य दबाव के लिए तैयार रहना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशक 2027 तक अनुमानित 4,710 डॉलर के लक्ष्य को ध्यान में रखकर गिरावट पर चरणबद्ध खरीदारी कर सकते हैं। • आभूषण कारोबारियों के लिए: कमोडिटी में बढ़ती अस्थिरता और 78 डॉलर से अधिक के एटीआर को देखते हुए ज्वैलर्स को अपनी इन्वेंट्री सुरक्षित रखनी होगी। कीमतों में उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए व्यापारियों को हेजिंग रणनीतियों पर अतिरिक्त ध्यान देने की आवश्यकता है। • मुद्रास्फीति और बचत: केंद्रीय बैंकों की निरंतर खरीदारी से स्पष्ट है कि सोने की मूल्य संरक्षण क्षमता बरकरार है। लंबे समय में सुरक्षित बचत चाहने वाले लोग अपने समग्र वित्तीय पोर्टफोलियो का एक हिस्सा सोने में बनाए रख सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ सोने की कीमतों में हालिया गिरावट और उसके बाद आए आंशिक सुधार के पीछे अमेरिकी मौद्रिक नीति, बॉन्ड यील्ड और पश्चिम एशिया के कूटनीतिक घटनाक्रम मुख्य कारक रहे हैं। • अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका: तेल कीमतों के कारण उपजी महंगाई से निपटने के लिए फेडरल रिजर्व द्वारा दिसंबर में दरों में एक और वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। ऊंची ब्याज दरों के बने रहने से बॉन्ड यील्ड मजबूत होती है, जिससे सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों की आकर्षण क्षमता घटती है। • कूटनीतिक वार्ताओं से डॉलर पर दबाव: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रगति की खबरों ने सेफ-हेवन के रूप में डॉलर की मांग को कम किया है। डॉलर के कमजोर पड़ने से अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए सोना अपेक्षाकृत सस्ता हुआ, जिससे कीमतों को निचली सतह पर सहारा मिला। • केंद्रीय बैंकों और ईटीएफ की निरंतर मांग: हाल के हफ्तों में तकनीकी बिकवाली के बावजूद वैश्विक केंद्रीय बैंकों की आधिकारिक खरीदारी और ईटीएफ निवेश ने कीमतों को एक निश्चित स्तर से नीचे गिरने से बचाया है। यह संस्थागत समर्थन बाजार को लंबी अवधि में रिकवरी के लिए आधार प्रदान कर रहा है। सवाल-जवाब 1. सोने के लिए दीर्घकालिक मूल्य अनुमान क्या हैं? वित्तीय विश्लेषकों ने सोने का मूल्य 2026 के अंत तक 4,250 डॉलर और 2027 के अंत तक 4,710 डॉलर प्रति औंस रहने का अनुमान लगाया है। 2. सोने की कीमतों पर वर्तमान में दबाव क्यों बना हुआ है? अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना और उच्च बॉन्ड यील्ड के कारण सोने पर निकट अवधि में दबाव है। 3. शुक्रवार को सोने का भाव किस स्तर तक गिरा था? शुक्रवार की भारी गिरावट के बाद सोना 3,900 डॉलर प्रति औंस से नीचे चला गया था, जो अक्टूबर 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर था। 4. क्या केंद्रीय बैंक अभी भी सोने की खरीदारी कर रहे हैं? हां, वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा आधिकारिक भंडार के लिए सोने की निरंतर खरीदारी और ईटीएफ निवेश कीमतों को बुनियादी समर्थन दे रहे हैं। 5. सोने के लिए तत्काल तकनीकी सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर क्या हैं? सोने के लिए पहला प्रमुख सपोर्ट 3,893 डॉलर और दूसरा 3,872 डॉलर है, जबकि रेजिस्टेंस स्तर 3,932 डॉलर और 3,950 डॉलर पर स्थित हैं। https://trendkia.com/market/gold-men-alpakalika-dabava-ke-bada-2027-taka-rikavari-ke-snketa-vaishvika-brokareja-ne-ghataya-mulya-lakshya-54888 TrendKia — Har trend, sabse pehle.