डॉलर के दबदबे और वैश्विक तनाव के बीच सोना 4,200 डॉलर के नीचे अटका कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद ब्याज दरों में ठहराव की संभावना बढ़ी है, लेकिन मजबूत डॉलर और कच्चे तेल के नए घटनाक्रमों के कारण सोना 4,200 डॉलर प्रति औंस के नीचे संघर्ष कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में सप्ताह की शुरुआत में निचले स्तरों से हल्की रिकवरी दर्ज की गई, जहां पीली धातु 4,150 डॉलर प्रति औंस के आसपास टिके रहने का प्रयास कर रही है। पिछले सप्ताह के दायरे को बरकरार रखते हुए खरीदार निचले भावों पर सक्रिय जरूर हुए हैं, लेकिन 4,200 डॉलर के अहम स्तर को पार करना अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। हालिया कारोबारी सत्र में हाजिर सोना 4,136.75 डॉलर पर कारोबार करता दिखा, जबकि ताजा सत्र में यह 4,165 डॉलर के स्तर पर स्थिर होने की कोशिश कर रहा है। इसके बावजूद अमेरिकी डॉलर का 17 महीने के उच्च स्तर पर पहुंचना धातु की रफ्तार को थाम रहा है। कच्चे तेल की नरमी और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति के प्रयास ऊर्जा बाजार में आई ताजा गिरावट ने वैश्विक वित्तीय धारणा को काफी हद तक प्रभावित किया है। जी7 देशों ने हाल ही में आपातकालीन भंडार से 100 मिलियन बैरल कच्चा तेल और डीजल जारी करने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही ऊर्जा निर्यात पर किसी भी तरह का नया प्रतिबंध न लगाने का संकल्प भी लिया गया है। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बाद उठाया गया था। इस घोषणा के बाद वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चे तेल के दाम लगातार दूसरे दिन गिरकर सोमवार को एशियाई कारोबारी घंटों में लगभग 89.30 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गए। शिपिंग आंकड़ों से यह बात भी सामने आई है कि सितंबर के अंतिम सप्ताह के सात में से चार दिनों के दौरान मध्य पूर्व से कच्चे तेल का निर्यात युद्ध-पूर्व स्तर को पार कर गया। यह स्थिति तब बनी रही जब होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर हमले की घटनाएं दर्ज की गई थीं। आपूर्ति की स्थिति बेहतर होने की उम्मीदों ने कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बनाया है, जिससे अल्पावधि में मुद्रास्फीति से जुड़ी कुछ तात्कालिक चिंताएं कम हुई हैं। फेडरल रिजर्व की नीति और अमेरिकी रोजगार के आंकड़े अमेरिकी अर्थव्यवस्था से आए गैर-कृषि पेरोल यानी एनएफपी के कमजोर आंकड़ों ने ब्याज दरों के परिदृश्य में बड़ा बदलाव ला दिया है। सीएमई ग्रुप के फेडवॉच टूल के अनुसार, उम्मीद से कमजोर रोजगार आंकड़ों के बाद वित्तीय बाजारों ने अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना को लगभग पूरी तरह खारिज कर दिया है। अब दरों में किसी भी बदलाव के न होने यानी ठहराव की संभावना 80 प्रतिशत से ऊपर पहुंच चुकी है। अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में आई नरमी और फेडरल रिजर्व की ओर से सख्त रुख न अपनाए जाने की उम्मीदों ने सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों को निचले स्तरों से उबरने में सहारा दिया है। हालांकि, व्यापक मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत बना हुआ है। टीडी सिक्योरिटीज का विश्लेषण बताता है कि पेरोल के नरम आंकड़ों, औसत प्रति घंटा कमाई में सुस्ती और पूर्व संशोधनों के बाद भी डॉलर इंडेक्स पर केवल आंशिक दबाव ही देखने को मिला है। बैंक का मानना है कि केवल अमेरिकी आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के जरिए डॉलर में लगातार तेजी के संकेत देखना मुश्किल है, इसलिए डॉलर की किसी भी उछाल का पीछा करने के बजाय अतिरिक्त जोखिम कम करना ज्यादा बेहतर रणनीति हो सकती है। भू-राजनीतिक मोर्चे पर गहराता संकट वैश्विक मंच पर सैन्य और राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग को बुनियादी समर्थन मिल रहा है। सप्ताहांत में ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ ने कड़ा बयान देते हुए कहा कि जब तक इस्लामाबाद ज्ञापन पर आधारित हमारी सात शर्तें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोला जाएगा। सुरक्षा स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि पेंटागन ने ब्रिटेन स्थित आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस से एक दर्जन बी-1 बॉम्बर्स को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया है। यह कदम ईरान से संभावित हमले के खतरों के मद्देनजर उठाया गया। दूसरी तरफ, रूस के रक्षा मंत्रालय ने भी चेतावनी जारी की है कि यूक्रेन द्वारा तेल रिफाइनरियों पर हमलों को दोगुना करने के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के संकल्प के बाद, वह यूक्रेन के सैन्य और औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर अपने हमलों को और तेज करेगा। इस तरह के तनाव से कच्चे तेल में फिर से तेजी आने और बॉन्ड यील्ड बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है, जो अंततः सोने पर दोहरा असर डाल सकता है। तकनीकी संकेतकों का मिजाज और अहम स्तर दैनिक तकनीकी चार्ट पर सोने का परिदृश्य फिलहाल मंदी की ओर झुका हुआ नजर आ रहा है क्योंकि हाजिर भाव अपने प्रमुख मूविंग एवरेज से नीचे बने हुए हैं। 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज 4,274.80 डॉलर, 50-दिवसीय एसएमए 4,327.92 डॉलर और 200-दिवसीय एसएमए 4,532.80 डॉलर पर स्थित हैं। यह तीनों लंबी अवधि के औसत मौजूदा कीमतों से काफी ऊपर हैं, जो यह दर्शाते हैं कि हालिया बिकवाली ने बाजार के झुकाव को नीचे की ओर मोड़ दिया है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई वर्तमान में 35 से 38 के आसपास घूम रहा है, जो लगातार नकारात्मक दबाव की ओर इशारा करता है लेकिन अभी ओवरसोल्ड क्षेत्र से थोड़ा ऊपर है। इसका अर्थ है कि मजबूत खरीदारी लौटने से पहले कीमतों में और कमजोरी की गुंजाइश बनी हुई है। एमएसीडी सूचक शून्य से नीचे नकारात्मक स्थिति में बना हुआ है और ईएमए 50 तथा ईएमए 200 के बीच मंदी का क्रॉसओवर दिख रहा है। ऊपर की तरफ, शुरुआती प्रतिरोध 100-दिवसीय एसएमए के पास 4,274.80 डॉलर पर है, जिसके बाद 4,327.92 डॉलर और फिर 4,532.80 डॉलर का स्तर एक सघन आपूर्ति क्षेत्र बनाता है। यदि कीमतें ऊपर चढ़ती भी हैं तो इन स्तरों पर बिकवाली का भारी दबाव देखने को मिल सकता है। नीचे की ओर, पहला प्रमुख सहारा 4,136.75 डॉलर के धुरी क्षेत्र के पास है। इसके बाद एक चढ़ती हुई ट्रेंड-लाइन का मजबूत सपोर्ट 3,999.52 डॉलर पर स्थित है। यदि 3,999.52 डॉलर का यह आधार टूटता है, तो सोने में गिरावट का दायरा और अधिक गहरा हो सकता है। फिलहाल 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड 4,117 डॉलर से 4,520 डॉलर के दायरे को इंगित कर रहे हैं। रिजर्व एसेट और वैश्विक मुद्राओं पर सोने का प्रभाव मानव इतिहास में सोना हमेशा से मूल्य के संचय और विनिमय के एक भरोसेमंद माध्यम के रूप में इस्तेमाल होता आया है। आधुनिक वित्तीय प्रणाली में आभूषणों के उपयोग से इतर यह उथल-पुथल के समय का सबसे बड़ा सुरक्षित ठिकाना माना जाता है। किसी केंद्रीय बैंक या सरकार पर निर्भर न होने के कारण यह मुद्रास्फीति और गिरती मुद्राओं के खिलाफ एक मजबूत ढाल प्रदान करता है। केंद्रीय बैंक दुनिया में सोने के सबसे बड़े धारक हैं। मुश्किल आर्थिक दौर में अपनी घरेलू मुद्राओं को मजबूती देने के लिए वे विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाते हैं और सोना खरीदते हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2022 में केंद्रीय बैंकों ने अपने भंडार में 1,136 टन सोना जोड़ा था, जिसकी कुल कीमत लगभग 70 अरब डॉलर थी। यह रिकॉर्ड शुरुआत के बाद से किसी भी एक वर्ष में की गई सबसे बड़ी आधिकारिक खरीद थी। चीन, भारत और तुर्की जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंक अपने स्वर्ण भंडार में लगातार तेज गति से विस्तार कर रहे हैं। सोने का अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड के साथ ऐतिहासिक रूप से उल्टा संबंध रहा है। जब डॉलर गिरता है, तो सोना सामान्यतः चढ़ता है। इसके अलावा शेयर बाजार में तेज उछाल के दौरान सोने की गति अक्सर धीमी पड़ जाती है, जबकि जोखिम भरे बाजारों में भारी बिकवाली के दौर में निवेशक सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोने का रुख करते हैं। वर्तमान में डॉलर 17 महीने के शिखर पर होने के कारण सोने के खरीदारों को अपनी गति बनाए रखने के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है। विदेशी मुद्रा बाजारों में भी हलचल डॉलर की मजबूती का असर अन्य प्रमुख मुद्रा जोड़ियों पर भी साफ देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर यानी एयूडी/यूएसडी में सोमवार को देर से एशियाई सत्र के दौरान ताजा बिकवाली देखी गई और यह गिरकर 0.6900 के करीब पहुंच गया। वहीं दूसरी तरफ, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन यानी यूएसडी/जेपीवाई ने अपनी शुरुआती गिरावट की भरपाई करते हुए एशियाई सत्र में 158.00 का स्तर दोबारा हासिल कर लिया, हालांकि बैंक ऑफ जापान के सख्त रुख और संभावित सरकारी हस्तक्षेप की आशंकाएं इसकी आगे की बढ़त को सीमित कर सकती हैं। यूरो की स्थिति भी कमजोर रही है, जहां यूरो/यूएसडी गिरकर 1.1312 के स्तर तक पहुंच गया, जो मई 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है और जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है। यह व्यापक डॉलर मजबूती ही वर्तमान में सोने के 4,200 डॉलर के स्तर को पार करने में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। इसका आप पर असर सोने की कीमतों में 4,200 डॉलर के स्तर पर आ रही रुकावट और डॉलर की मजबूती का सीधा असर आभूषण खरीदारों, निवेशकों और आयात लागत पर पड़ता है। • भारतीय खुदरा खरीदारों पर: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने के 4,150 डॉलर के करीब टिके रहने और डॉलर की मजबूती से घरेलू सराफा बाजारों में भाव ऊंचे बने रहेंगे। शादियों या त्योहारों की खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं को कीमतों में तत्काल बड़ी राहत मिलने की संभावना कम है। • गोल्ड ईटीएफ और निवेशकों पर: तकनीकी संकेतकों में कमजोरी के कारण निवेशकों को एकमुश्त निवेश के बजाय व्यवस्थित तरीके से खरीदारी करनी चाहिए। यदि कीमतें 3,999.52 डॉलर के सपोर्ट की तरफ फिसलती हैं तो लंबी अवधि के लिए बेहतर प्रवेश स्तर मिल सकते हैं। • कच्चे तेल और ईंधन उपभोक्ताओं पर: जी7 देशों द्वारा 100 मिलियन बैरल आपातकालीन तेल जारी करने से कच्चे तेल के दाम 89.30 डॉलर तक फिसले हैं। इससे पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी का जोखिम सीमित हुआ है। • मुद्रा बाजार और आयातकों पर: अमेरिकी डॉलर के 17 महीने के शिखर पर रहने से भारतीय रुपये सहित कई वैश्विक मुद्राओं पर दबाव बना रहेगा। आयात पर निर्भर उद्योगों के लिए लागत में बढ़ोतरी की स्थिति बनी रह सकती है। ऐसा क्यों हुआ सोने की कीमतों में 4,200 डॉलर के नीचे जारी ठहराव और सीमित बढ़त के पीछे मजबूत अमेरिकी डॉलर, नीतिगत दरों में बदलाव की उम्मीदें और ऊर्जा आपूर्ति के नए समझौते प्रमुख कारण हैं। • मजबूत डॉलर का दबाव: अमेरिकी डॉलर 17 महीने के उच्चतम स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने का सौदा डॉलर में होने के कारण मजबूत अमेरिकी मुद्रा गैर-अमेरिकी खरीदारों के लिए धातु को महंगा बनाती है और मांग को सीमित करती है। • जी7 का तेल भंडार फैसला: अमेरिकी राष्ट्रपति के दबाव के बाद जी7 देशों ने 100 मिलियन बैरल तेल और डीजल जारी करने का फैसला किया है। इससे कच्चे तेल की कीमतें घटकर 89.30 डॉलर पर आ गईं, जिससे महंगाई की तात्कालिक आशंकाएं घटी हैं। • फेडरल रिजर्व की दरों पर रुख: कमजोर अमेरिकी पेरोल आंकड़ों के बाद अक्टूबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना खत्म हो गई है और 80 प्रतिशत से अधिक संभावना ठहराव की है। इसने सोने को 4,136 डॉलर के निचले स्तरों से गिरने से तो बचाया, लेकिन डॉलर की तेजी के कारण यह 4,200 डॉलर को पार नहीं कर पाया। • मध्य पूर्व और रूस का तनाव: ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर रखी गई सात शर्तों और रूस द्वारा यूक्रेन पर हमलों की चेतावनी ने सोने को सुरक्षित निवेश के तौर पर निचला सहारा दिया हुआ है। सवाल-जवाब 1. सोना 4,200 डॉलर के स्तर को पार करने में क्यों संघर्ष कर रहा है? अमेरिकी डॉलर के 17 महीने के उच्चतम स्तर पर बने रहने और तकनीकी चार्ट पर 100-दिवसीय एसएमए के दबाव के कारण सोना 4,200 डॉलर से नीचे अटका हुआ है। 2. कच्चे तेल की कीमतों में हाल में गिरावट क्यों आई? जी7 देशों द्वारा आपातकालीन भंडार से 100 मिलियन बैरल कच्चा तेल और डीजल जारी करने पर सहमति जताने के बाद तेल की कीमतें गिरकर 89.30 डॉलर के करीब आ गईं। 3. अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की क्या संभावना है? कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद सीएमई ग्रुप के फेडवॉच टूल के अनुसार ब्याज दरें स्थिर रहने की संभावना 80 प्रतिशत से अधिक हो गई है। 4. चार्ट पर सोने के लिए महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर कौन से हैं? सोने के लिए पहला रेजिस्टेंस 100-दिवसीय एसएमए 4,274.80 डॉलर पर है, जबकि नीचे की ओर प्रमुख सपोर्ट 4,136.75 डॉलर और 3,999.52 डॉलर पर स्थित है। 5. केंद्रीय बैंकों ने सोने के भंडार को लेकर क्या ऐतिहासिक कदम उठाया था? वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार वर्ष 2022 में केंद्रीय बैंकों ने रिकॉर्ड 1,136 टन सोना खरीदा था, जिसकी कीमत लगभग 70 अरब डॉलर थी। 6. मध्य पूर्व में कौन से हालिया घटनाक्रम सोने को सुरक्षित निवेश का सहारा दे रहे हैं? ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर शर्तें रखे जाने और पेंटागन द्वारा ब्रिटेन से बी-1 बॉम्बर्स हटाए जाने जैसे कदमों ने भू-राजनीतिक चिंताएं बढ़ाई हैं। https://trendkia.com/market/gold-price-forecast-dollar-ke-dabadabe-aura-vaishvika-tanava-ke-bicha-sona-4-200-dollar-ke-niche-ataka-43017 TrendKia — Har trend, sabse pehle.