अमेरिकी डॉलर में रिकवरी और मध्य पूर्व में तनाव के बीच सोने की कीमतों में शुरुआती बढ़त पर लगी ब्रेक मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी डॉलर की रिकवरी के चलते सोने की कीमतों में शुरुआती बढ़त थम गई है। फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बाजार पर हावी है। अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सोने की कीमतों में शुरुआती तेजी पर विराम लग गया है। सर्राफा बाजार में अभी भी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर संशय बना हुआ है, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। मध्य पूर्व में तनाव और कच्चे तेल की चाल मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक हालात तब और गंभीर हो गए जब ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के चार दक्षिणी शहरों में ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। इस घटना से ठीक पहले सप्ताहांत में अमेरिका ने ईरानी जहाजों पर कार्रवाई की थी और तेहरान ने भी अमेरिकी युद्धपोतों तथा तेल टैंकरों पर हमले किए थे। इन घटनाक्रमों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सिलसिला जारी है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 91.80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है, जो सत्र के दौरान 92.48 डॉलर तक पहुंच गया था जो 8 जून के बाद का इसका सबसे ऊंचा स्तर है। अमेरिकी डॉलर की वापसी और मुद्रा बाजार का रुख ताज़ा संघर्षों के कारण जापानी येन में आई तेज तेजी से कमजोर हुआ अमेरिकी डॉलर भी संभलने में कामयाब रहा। छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की चाल मापने वाला डॉलर इंडेक्स 98.97 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो 98.72 के अपने निचले स्तर से ऊपर आया है। इसी बीच एशियाई सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियन डॉलर 0.7200 के ऊपर बना हुआ है, जबकि अमेरिकी डॉलर पर दबाव अभी भी बरकरार है। दूसरी ओर डॉलर/येन जोड़ी अपने छह महीने के निचले स्तर से उबरते हुए यूरोपीय कारोबार में 154.00 के करीब पहुंच रही है, हालांकि जापान के मजबूत मजदूरी आंकड़ों के कारण इसमें सीमित तेजी ही देखने को मिल रही है। तकनीकी विश्लेषण और चार्ट पैटर्न दैनिक चार्ट पर नजर डालें तो सोने की कीमतें 50-दिवसीय और 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज से ऊपर टिकी हुई हैं। हालांकि, चार्ट पर एक संभावित हेड-एंड-शोल्डर पैटर्न भी आकार ले रहा है जिसका नेकलाइन करीब 4,350 डॉलर के स्तर पर है। इस क्षेत्र को 100-दिवसीय मूविंग एवरेज का मजबूत समर्थन मिल रहा है। बाजार में गति तटस्थ बनी हुई है जहां रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 50 के आसपास है और एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स घटकर 23 पर आ गया है, जो इस बात का संकेत है कि रुझान की ताकत कमजोर पड़ रही है। फेडरल रिजर्व की बैठक और ब्याज दरों के अनुमान बाजार की निगाहें अब 15-16 सितंबर को होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी हुई हैं। सीएमई फेडवॉच टूल के मुताबिक 25 आधार अंकों की दर कटौती या बढ़ोतरी की करीब 60 प्रतिशत संभावना जताई जा रही है, जिसका अंतिम निर्णय इस हफ्ते आने वाले अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों पर निर्भर करेगा। इसके अलावा डीजल का क्रूड स्प्रेड भी एक सौ डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर को पार कर चुका है, जो ऊर्जा बाजार की अलग तस्वीर पेश कर रहा है। सोने का ऐतिहासिक और आर्थिक महत्व इतिहास के पन्नों में सोने ने हमेशा से मूल्य के संचय और विनिमय के एक भरोसेमंद माध्यम के रूप में अपनी भूमिका निभाई है। आभूषणों के अलावा यह संकट के समय एक सुरक्षित निवेश के रूप में देखा जाता है। मुद्रास्फीति और मुद्राओं के अवमूल्यन के खिलाफ इसे एक मजबूत बचाव कवच माना जाता है क्योंकि यह किसी विशेष सरकार या जारीकर्ता पर निर्भर नहीं करता है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए भारी मात्रा में सोने की खरीद करते हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर इस कीमती धातु की मांग लगातार बनी रहती है। इसका आप पर असर सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर घरेलू सर्राफा बाजार और निवेशकों की रणनीति पर पड़ता है। • भारत में: सोने के आयात और वैश्विक कीमतों में फेरबदल से घरेलू जेवरात के बाजार और खुदरा खरीदारों की जेब पर सीधा असर पड़ता है। • निवेशकों के लिए: सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ने से पोर्टफोलियो आवंटन और कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग में जोखिम प्रबंधन पर खास ध्यान देना जरूरी हो जाता है। • ऊर्जा क्षेत्र पर: कच्चे तेल और डीजल की कीमतों में तेजी आने से परिवहन लागत प्रभावित होती है, जिसका असर आम उपभोक्ता वस्तुओं की महंगाई पर पड़ सकता है। • मुद्रा विनिमय: अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से आयातित वस्तुओं की लागत बढ़ सकती है और विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ सोने की कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव और डॉलर की रिकवरी के पीछे कई भू-राजनीतिक और आर्थिक कारक जिम्मेदार हैं। • मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव: सऊदी अरब में ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों और अमेरिकी-ईरानी सैन्य टकराव ने सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग को प्रभावित किया है। • अमेरिकी डॉलर की रिकवरी: जापानी येन में तेज उतार-चढ़ाव के बाद डॉलर इंडेक्स निचले स्तरों से उबरकर वापस मजबूत हुआ है। • फेडरल रिजर्व की नीतियां: आगामी मौद्रिक नीति बैठक और ब्याज दरों को लेकर बाजार में बनी अनिश्चितता निवेशकों के रुख को तय कर रही है। • कच्चे तेल की तेजी: ऊर्जा बाजारों में आपूर्ति से जुड़ी चिंताओं और डीजल के बढ़ते दामों ने व्यापक बाजार की धारणा को बदल दिया है। सवाल-जवाब 1. सोने की कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव का मुख्य कारण क्या है? अमेरिकी डॉलर की रिकवरी और मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण सोने की कीमतों में शुरुआती बढ़त थम गई। 2. कच्चे तेल की कीमतों में किस प्रकार का बदलाव देखा गया है? वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 91.80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है जो सत्र के दौरान 92.48 डॉलर तक पहुंच गया था। 3. फेडरल रिजर्व की अगली बैठक कब निर्धारित है? फेडरल रिजर्व की आगामी नीतिगत बैठक 15-16 सितंबर को होनी है। 4. डॉलर इंडेक्स वर्तमान में किस स्तर पर है? अमेरिकी डॉलर इंडेक्स अपने निचले स्तर से उबरकर लगभग 98.97 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। 5. तकनीकी चार्ट पर सोने के लिए महत्वपूर्ण समर्थन स्तर कौन सा है? दैनिक चार्ट पर हेड-एंड-शोल्डर पैटर्न का नेकलाइन करीब 4,350 डॉलर के आसपास महत्वपूर्ण समर्थन क्षेत्र बना रहा है। https://trendkia.com/market/gold-reverses-early-gains-as-us-dollar-rebounds-and-oil-prices-rise-29582 TrendKia — Har trend, sabse pehle.