होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद: कच्चे तेल में 3% की भारी तेजी, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराया संकट अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की खबरों से कच्चे तेल की कीमतें 3% से अधिक उछल गई हैं। इस भू-राजनीतिक अस्थिरता ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। दुनिया भर के बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों ने 13 जुलाई को एक नई हलचल पैदा कर दी है, जिसके पीछे अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता हुआ भू-राजनीतिक तनाव मुख्य कारण है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की खबरों और दोनों देशों के बीच छिड़े नए टकराव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम 3 फीसदी से अधिक बढ़ गए हैं। एशियाई बाजारों के कारोबार में आई इस तेजी ने आम जनता और विशेषज्ञों के बीच यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अब ईंधन के दाम फिर से आसमान छूएंगे। कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उछाल बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो सितंबर डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड की कीमतें 3.32 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 78.54 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई हैं। वहीं, अमेरिकी कच्चा तेल यानी WTI क्रूड में भी 3.42 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया, जिसके बाद यह 73.83 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है। उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह भी तेल की कीमतों में 5.5 फीसदी की तेजी देखी गई थी। केवल तेल ही नहीं, ऊर्जा क्षेत्र के अन्य घटकों पर भी इसका असर दिख रहा है, जहां यूरोपीय प्राकृतिक गैस वायदा (Natural Gas Futures) में 2.5 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान और अमेरिका के दावे ईरान ने आधिकारिक रूप से घोषणा की है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लगभग 20 फीसदी हिस्से को नियंत्रित करने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य अब अगली सूचना तक बंद रहेगा। हालांकि, अमेरिका ने ईरान के इस दावे को पूरी तरह से नकार दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर स्पष्ट किया कि होर्मुज सभी जहाजों के लिए पूरी तरह खुला है और अमेरिकी सेना समुद्री आवाजाही को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। तनाव को और बढ़ाते हुए, अमेरिका ने कहा है कि हाल ही में जहाजों पर हुए हमलों का जवाब देने के उद्देश्य से उसने रविवार की शाम ईरान के खिलाफ नए हमले शुरू किए हैं। जॉइंट मैरीटाइम इंफॉर्मेशन सेंटर (JMIC) की रिपोर्ट्स के अनुसार, रविवार को इस संवेदनशील समुद्री रास्ते पर सन्नाटा पसरा रहा और कोई भी समुद्री यातायात दर्ज नहीं किया गया, केवल दो तेल टैंकर ही इस मार्ग की दिशा में जाते हुए देखे गए थे। आर्थिक विशेषज्ञ और भविष्य की चिंताएं अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने इस स्थिति को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। एजेंसी का मानना है कि इस ताजा तनाव का असर वैश्विक तेल भंडार को फिर से भरने की प्रयासों पर नकारात्मक पड़ेगा। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि अमेरिका और ईरान का यह गतिरोध लंबे समय तक जारी रहता है और होर्मुज के रास्ते तेल की आपूर्ति बाधित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर को भी पार कर सकती हैं, जिससे वैश्विक मुद्रास्फीति पर गहरा दबाव पड़ेगा। इसका आप पर असर भारत में: कच्चे तेल की कीमतों में वैश्विक वृद्धि का सीधा असर भारत के आयात बिल पर पड़ेगा, जिससे पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ सकती है। व्यापारियों के लिए: ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, इसलिए निवेशकों को बाजार की अस्थिरता पर नजर रखने की सलाह दी जाती है। सवाल-जवाब 1. कच्चे तेल की कीमतों में अचानक इतनी तेजी क्यों आई? अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की खबरों के कारण कीमतों में 3% से ज्यादा की तेजी आई है। 2. होर्मुज जलडमरूमध्य का क्या महत्व है? होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लगभग 20% हिस्से को नियंत्रित करता है, इसलिए इसका बंद होना वैश्विक तेल बाजार के लिए बड़ा खतरा है। 3. क्या अमेरिका ने होर्मुज बंद होने की बात मानी है? नहीं, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य सभी जहाजों के लिए पूरी तरह खुला है और वे सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। 4. अगले कुछ दिनों में तेल के दाम कहाँ जा सकते हैं? अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का मानना है कि यदि तनाव जारी रहा, तो कच्चे तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर सकती हैं। https://trendkia.com/market/hormuja-jaladamarumadhya-vivada-kachche-tela-men-3-ki-bhari-teji-vaishvika-arthavyavastha-para-mndaraya-snkata-7246 TrendKia — Har trend, sabse pehle.