होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के प्रस्ताव के बाद डॉलर इंडेक्स में नरमी, 30 जुलाई के उच्च स्तर से फिसली अमेरिकी मुद्रा ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की पेशकश और कच्चे तेल के दो सप्ताह के निचले स्तर पर आने से अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में 30 जुलाई के शिखर से हल्की गिरावट दर्ज की गई। फेडरल रिजर्व के रुख और वैश्विक बॉन्ड यील्ड्स के बीच प्रमुख मुद्राओं, सोने और बिटकॉइन में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में मंगलवार को यूरोपीय सत्र के शुरुआती घंटों के दौरान अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 30 जुलाई के बाद के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचने के बाद सीमित दायरे में आ गया। छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा की मजबूती को मापने वाला यह सूचकांक अपनी बढ़त को बरकरार रखने में संघर्ष करता दिखा और दिन के स्तरों पर लगभग सपाट रहते हुए 100.50 के स्तर के ठीक नीचे कारोबार करता नजर आया। लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, सूचकांक 100.44 के स्तर पर बना रहा, जो पिछले बंद स्तर 100.43 के मुकाबले 0.01 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्शाता है। 52 हफ्तों के दौरान डॉलर इंडेक्स 95.55 से 101.80 के दायरे में कारोबार कर चुका है, जबकि वर्तमान वॉल्यूम अपने 20-दिवसीय औसत के 1.00 गुना स्तर पर दर्ज किया गया। ईरान की पेशकश और कच्चे तेल में नरमी का असर बाजार में डॉलर की रफ्तार सुस्त पड़ने की मुख्य वजह मध्य पूर्व से आया एक भू-राजनीतिक घटनाक्रम रहा। ईरान ने घोषणा की कि यदि अमेरिका उसके बंदरगाहों की नाकेबंदी समाप्त करता है और सैन्य अभियानों को रोकता है, तो वह सात दिनों के भीतर रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को व्यापारिक जहाजों के लिए दोबारा खोलने को तैयार है। इस सकारात्मक संकेत के सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखी गई और क्रूड दो सप्ताह के निचले स्तर पर लुढ़क गया। कच्चे तेल में आई नरमी ने तत्काल महंगाई बढ़ने के जोखिम को कम किया, जिससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स बहु-वर्षीय उच्च स्तरों से नीचे आ गईं। यील्ड्स पर बने दबाव के चलते डॉलर के खरीदारों ने नए सौदे बनाने से परहेज किया। हालांकि, बुनियादी आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए विश्लेषकों का मानना है कि जब तक बिकवाली का ठोस दबाव नहीं बनता, तब तक यह कहना जल्दबाजी होगी कि सूचकांक शीर्ष बना चुका है। डॉलर इंडेक्स के तकनीकी स्तर और प्रमुख समर्थन तकनीकी चार्ट्स पर नजर डालें तो अमेरिकी डॉलर इंडेक्स के लिए नीचे की ओर 50 प्रतिशत रिट्रेसमेंट स्तर 100.18 पर तात्कालिक समर्थन बना हुआ है। इसके नीचे 100-दिवसीय सरल मूविंग एवरेज यानी SMA 99.90 पर और 38.2 प्रतिशत रिट्रेसमेंट स्तर 99.80 पर स्थित है। यदि दबाव और गहराता है, तो मजबूत ढांचागत मांग 23.6 प्रतिशत स्तर पर यानी 99.33 के आसपास और उसके बाद प्रमुख एंकर लो 98.58 के करीब देखने को मिल सकती है। लाइव तकनीकी संकेतकों के आधार पर 14-दिवसीय RSI 63 पर है, जो तेजी के रुझान में बना हुआ है। MACD लाइन 0.16 पर और सिग्नल लाइन -0.03 पर है, जहां 0.18 का हिस्टोग्राम मजबूती का संकेत दे रहा है। एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी EMA के स्तरों पर EMA20 99.74, EMA50 99.78 और EMA200 99.32 पर हैं, जबकि SMA50 99.92 और SMA200 99.17 पर स्थित हैं। लंबी अवधि में EMA50 का EMA200 से ऊपर निकलना गोल्डन क्रॉस की पुष्टि करता है। 20-दिवसीय बोलिंगर बैंड्स का दायरा 98.44 से 100.59 के बीच है, जिसका मध्य बिंदु 99.52 पर है। 14-दिवसीय ADX 27 पर ट्रेंडिंग बाजार दर्शाता है, जबकि स्टोकेस्टिक इंडिकेटर की फास्ट लाइन 89 और सिग्नल लाइन 88 पर है। 0.43 का 14-दिवसीय ATR दैनिक अस्थिरता को रेखांकित करता है। पिवट स्तर 100.48 पर है, जिसमें प्रतिरोध R1 100.63 और R2 100.82 तथा समर्थन S1 100.29 और S2 100.14 पर दर्ज हैं। फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति का तंत्र अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मौद्रिक नीतियों का निर्धारण फेडरल रिजर्व करता है। फेड के पास दो मुख्य जिम्मेदारियां हैं, जिनमें कीमतों में स्थिरता बनाए रखना और अधिकतम रोजगार को बढ़ावा देना शामिल है। इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए केंद्रीय बैंक का प्राथमिक हथियार ब्याज दरों में बदलाव करना होता है। जब वस्तुओं और सेवाओं के दाम अत्यधिक तेजी से बढ़ते हैं और महंगाई फेड के तय 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो नीति निर्माता ब्याज दरों में वृद्धि करते हैं। ब्याज दरें बढ़ने से पूरे वित्तीय तंत्र में कर्ज महंगा हो जाता है, जिससे निवेश और खर्च की रफ्तार धीमी होती है। विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी प्रतिभूतियों में निवेश अधिक आकर्षक हो जाने के कारण ब्याज दरों में बढ़ोतरी से आम तौर पर डॉलर मजबूत होता है। इसके विपरीत, जब महंगाई 2 प्रतिशत से नीचे गिर जाती है या बेरोजगारी दर चिंताजनक रूप से बढ़ जाती है, तो फेड आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए ब्याज दरों में कटौती करता है, जिससे कर्ज सस्ता होता है और डॉलर पर कमजोरी का दबाव आता है। एफओएमसी की बैठकें और नीतिगत उपकरण फेडरल रिजर्व एक वर्ष में आठ बार नियमित नीतिगत बैठकें आयोजित करता है। इन बैठकों में फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी FOMC देश की व्यापक आर्थिक स्थितियों का आकलन करती है और ब्याज दरों से जुड़े नीतिगत फैसले लेती है। इस कमेटी में कुल बारह नीति निर्माता भाग लेते हैं। इनमें बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सात सदस्य, फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क के अध्यक्ष और बाकी ग्यारह क्षेत्रीय फेडरल रिजर्व बैंकों के अध्यक्षों में से चार अध्यक्ष शामिल होते हैं, जो एक-एक वर्ष के कार्यकाल के लिए बारी-बारी से सेवा देते हैं। असाधारण वित्तीय संकटों के दौरान फेडरल रिजर्व गैर-पारंपरिक नीतिगत कदमों का भी सहारा लेता है, जिसे क्वांटिटेटिव ईजिंग यानी QE कहा जाता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत केंद्रीय बैंक बैंकिंग प्रणाली में तरलता बढ़ाने के लिए वित्तीय संस्थानों से भारी मात्रा में उच्च श्रेणी के बॉन्ड खरीदता है। साल 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान फेड ने बड़े पैमाने पर इस विकल्प का प्रयोग किया था। अतिरिक्त डॉलर जारी कर बॉन्ड खरीदने की यह प्रक्रिया आम तौर पर डॉलर को कमजोर करती है। इसके उलट, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग यानी QT की प्रक्रिया में फेडरल रिजर्व बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व होने वाले बॉन्ड्स के मूलधन को दोबारा नए बॉन्ड्स में नहीं लगाता। इस प्रक्रिया से बाजार में मुद्रा की आपूर्ति घटती है, जो सामान्यतः अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर के लिए सकारात्मक मानी जाती है। वैश्विक मुद्राओं, सोने और क्रिप्टो में हलचल विदेशी मुद्रा बाजार के अन्य जोड़ों में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर मंगलवार को एशियाई सत्र के दौरान 0.7100 के स्तर से ऊपर कारोबार करता दिखा। रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया की असिस्टेंट गवर्नर सारा हंटर और गवर्नर मिशेल बुलॉक के कड़े बयानों से ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को समर्थन मिला। हालांकि, फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और मध्य पूर्व की जटिल परिस्थितियों ने डॉलर को समर्थन देकर AUD/USD की बढ़त को सीमित दायरे में बांधे रखा। बाजार की निगाहें सप्ताह के उत्तरार्ध में होने वाले ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन पर भी टिकी हैं। उधर जापानी येन के मुकाबले डॉलर 157.50 के करीब हल्की मजबूती के साथ कारोबार करता रहा। जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में हस्तक्षेप की आशंका ने येन की गिरावट को सीमित रखा। हालांकि बैंक ऑफ़ जापान ने अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है, जो 7-2 के बहुमत से लिया गया फैसला था और 31 वर्षों का उच्चतम स्तर है। विश्लेषकों की उम्मीदों के अनुरूप नीति सामान्यीकरण की दिशा में यह कदम उठाने के बावजूद केंद्रीय बैंक के नरम संकेतों ने येन को रक्षात्मक रुख पर रखा। कमोडिटी बाजार में सोने में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई और यूरोपीय सत्र की ओर बढ़ते हुए पीली धातु 4,315 डॉलर प्रति औंस के आसपास तीन दिन के निचले स्तर पर आ गई। फेड के सख्त मौद्रिक रुख ने गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों से पूंजी को दूर रखा। क्रिप्टोकरेंसी क्षेत्र में बिटकॉइन पिछले दिन 6.7 प्रतिशत की छलांग लगाने के बाद 85,500 डॉलर के नीचे कंसोलिडेशन के दौर में दिखा। संस्थागत मांग लगातार मजबूत बनी हुई है, जहां सोमवार को स्पॉट बिटकॉइन ईटीएफ में लगभग 1 अरब डॉलर का निवेश आया और स्ट्रैटेजी ने अपने खजाने में 950 बीटीसी और जोड़े। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर और कच्चे तेल में आए उतार-चढ़ाव का सीधा असर आयात लागत, मुद्रा विनिमय और घरेलू निवेश योजनाओं पर पड़ता है। • भारत में: कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से देश के आयात बिल और चालू खाता घाटे पर दबाव कम होगा। इससे पेट्रोल और डीजल की थोक लागत में राहत मिलने से परिवहन और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों को स्थिरता मिल सकती है। • वैश्विक निवेशकों के लिए: डॉलर इंडेक्स के 100.44 के स्तर पर थमने और बॉन्ड यील्ड्स के स्थिर होने से इक्विटी बाजारों में पूंजी निकासी का जोखिम धीमा पड़ता है। जो निवेशक अमेरिकी संपत्तियों या विदेशी ईटीएफ में निवेश करते हैं, उन्हें करेंसी उतार-चढ़ाव की निगरानी रखनी चाहिए। • सोने के खरीदारों के लिए: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के 4,315 डॉलर पर फिसलने से आभूषणों की कीमतों में तात्कालिक उछाल थम सकता है। शादियों या निवेश के उद्देश्य से सोना खरीदने वालों को कीमतों में स्थिरता का लाभ मिल सकता है। • क्रिप्टो निवेशकों के लिए: बिटकॉइन का 85,500 डॉलर के नीचे स्थिर होना और स्पॉट ईटीएफ में 1 अरब डॉलर का प्रवाह संस्थागत मजबूती दिखाता है। खुदरा निवेशकों को अत्यधिक उतार-चढ़ाव के बीच सख्त स्टॉप-लॉस के साथ व्यापार करने की सलाह दी जाती है। ऐसा क्यों हुआ ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की पेशकश और कच्चे तेल में आई गिरावट के कारण अमेरिकी डॉलर इंडेक्स अपने हालिया शिखर से नीचे आ गया। ऊर्जा कीमतों में नरमी ने महंगाई के तत्काल डर को कम किया, जिससे बॉन्ड यील्ड्स नीचे आईं और डॉलर पर दबाव बना। • होर्मुज पर राजनयिक प्रस्ताव: ईरान ने शर्त रखी कि यदि अमेरिकी सेना नाकेबंदी और सैन्य अभियान रोकती है, तो वह सात दिनों में जलडमरूमध्य खोल देगा। इस संकेत ने तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं को तुरंत शांत कर दिया। • कच्चे तेल में गिरावट: आपूर्ति संकट टलने की उम्मीदों से कच्चा तेल दो सप्ताह के निचले स्तर पर लुढ़क गया। ऊर्जा की कीमतों में गिरावट से अमेरिकी बाजार में तत्काल महंगाई दर बढ़ने का डर घट गया। • अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स में नरमी: घटते मुद्रास्फीति के दबाव के चलते अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स अपने बहु-वर्षीय उच्च स्तरों से नीचे आ गईं। यील्ड में इस गिरावट ने वैश्विक निवेशकों को डॉलर में नई पूंजी लगाने से अस्थायी रूप से रोक दिया। सवाल-जवाब 1. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में नरमी क्यों देखने को मिली? ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को सात दिनों में खोलने की पेशकश के बाद कच्चे तेल की कीमतें दो सप्ताह के निचले स्तर पर आ गईं, जिससे महंगाई का दबाव घटने से डॉलर इंडेक्स 30 जुलाई के उच्च स्तर से फिसल गया। 2. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का डॉलर पर क्या असर हुआ? कच्चे तेल के दाम घटने से अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स अपने बहु-वर्षीय उच्च स्तरों से नीचे आ गईं, जिसके कारण निवेशकों ने डॉलर में नए दांव लगाने से परहेज किया। 3. डॉलर इंडेक्स के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी समर्थन स्तर कौन से हैं? डॉलर इंडेक्स के लिए पहला समर्थन 100.18 पर है, जिसके बाद 100-दिवसीय SMA 99.90, 99.80 और ढांचागत समर्थन 99.33 तथा 98.58 पर स्थित है। 4. बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों पर क्या निर्णय लिया है? बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया, जो 31 वर्षों का उच्चतम स्तर है। 5. सोने और बिटकॉइन की कीमतों में क्या रुझान रहा? सोना फिसलकर 4,315 डॉलर के तीन-दिवसीय निचले स्तर पर आ गया, जबकि बिटकॉइन 6.7 प्रतिशत की बढ़त के बाद 85,500 डॉलर के नीचे कंसोलिडेट होता दिखा। https://trendkia.com/market/hormuz-jaladamarumadhya-para-iran-ke-prastava-ke-bada-dollar-index-men-narami-30-julai-ke-uchcha-stara-se-phisali-ameriki-mudra-36337 TrendKia — Har trend, sabse pehle.