# हंगेरियन फ़ोरिंट पर बढ़ता दबाव: 2.5 प्रतिशत महंगाई लक्ष्य और वैश्विक बॉन्ड यील्ड के बीच सख्त मौद्रिक नीति की ज़रूरत

> हंगरी के केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दर कटौती 5.50 प्रतिशत पर रोकने और महंगाई लक्ष्य घटाने के बाद भी फ़ोरिंट दबाव में बना हुआ है, जबकि वैश्विक मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर की मज़बूती हावी है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/hungarian-forint-para-barhata-dabava-2-5-pratishata-mahngai-lakshya-aura-vaishvika-bonda-yilda-ke-bicha-sakhta-maudrika-niti-ki-za-38434 · **Language:** Hindi
**Tags:** हंगेरियन फ़ोरिंट, नेशनल बैंक ऑफ़ हंगरी, मुद्रास्फीति, विदेशी मुद्रा बाजार, अमेरिकी डॉलर, बैंक ऑफ़ जापान, ब्याज दर, वित्त

हंगरी की मुद्रा फ़ोरिंट इस समय अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों में लगातार चुनौतियों का सामना कर रही है, जहां केंद्रीय बैंक के हालिया नीतिगत कदमों और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रमों ने इसके लचीलेपन की कड़ी परीक्षा ली है। नेशनल बैंक ऑफ़ हंगरी ने ब्याज दर में कटौती के अपने सिलसिले को 5.50 प्रतिशत पर रोक दिया है। इसके साथ ही बैंक ने मध्यम अवधि के मुद्रास्फीति लक्ष्य को 3.0 प्रतिशत से घटाकर 2.5 प्रतिशत निर्धारित किया है, जो 1 जनवरी 2028 से प्रभावी होगा। हालांकि इस नए लक्ष्य के साथ 1 प्रतिशत अंक का मौजूदा टॉलरेंस बैंड बरकरार रखा गया है, लेकिन आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि लक्ष्य में कटौती का सीधा मतलब है कि केंद्रीय बैंक के पास महंगाई में किसी भी तरह की बढ़ोतरी को सहन करने की गुंजाइश काफी कम हो गई है। अगर बैंक अपने इस नए फ्रेमवर्क को बाजार में विश्वसनीय बनाए रखना चाहता है, तो यह केवल एक प्रतीकात्मक बदलाव नहीं रह सकता बल्कि इसके लिए सख्त नीतिगत रुख की दरकार होगी।

## महंगाई अनुमानों में उछाल और ऊर्जा कीमतों का असर
एक तरफ जहां नेशनल बैंक ऑफ़ हंगरी ने महंगाई के प्रति अपनी सहनशीलता को सीमित किया है, वहीं दूसरी तरफ भविष्य के लिए मुद्रास्फीति के पूर्वानुमानों में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। केंद्रीय बैंक के ताजा आकलन के अनुसार, 2026 के लिए औसत महंगाई का अनुमान 1.8 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा गया है, लेकिन 2027 के मुद्रास्फीति अनुमान को 2.3 प्रतिशत से तेजी से बढ़ाकर 3.1 प्रतिशत कर दिया गया है। इस तेज उछाल के पीछे मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल और ऊर्जा की बढ़ती कीमतें तथा सरकार द्वारा तंबाकू उत्पाद शुल्क में की गई बढ़ोतरी जिम्मेदार है। इसके चलते 2027 में कोर मुद्रास्फीति भी 3.0 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि समग्र महंगाई दर 2027 के मध्य में लगभग 3 प्रतिशत पर पहुंचने के बाद ही नीचे आने की उम्मीद है।

यह अनुमानित रफ्तार केंद्रीय बैंक के नए 2.5 प्रतिशत के लक्ष्य की तुलना में काफी तेज है। विश्लेषकों का आकलन है कि टिकाऊ आधार पर 2.5 प्रतिशत का लक्ष्य केवल 2028 के मध्य तक ही हासिल किया जा सकेगा। कॉमर्शबैंक के विश्लेषक तथा घोष के अनुसार, जब केंद्रीय बैंक अपने मध्यम अवधि के लक्ष्य को घटाता है और उसी समय आने वाले वर्षों के महंगाई अनुमानों को बढ़ाता है, तो सैद्धांतिक रूप से इसका नतीजा और अधिक प्रतिबंधात्मक मौद्रिक रुख होना चाहिए। इसके बावजूद नेशनल बैंक ऑफ़ हंगरी अब भी दरों को स्थिर रखने या उनमें कटौती करने की चर्चा कर रहा है। चुनाव के बाद मध्य पूर्व में जोखिम की स्थिति बिगड़ने के कारण फ़ोरिंट अपनी चमक खो चुका है और जब तक केंद्रीय बैंक स्पष्ट रूप से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं को स्वीकार नहीं करता, तब तक मुद्रा में किसी मजबूत सुधार की उम्मीद बेहद सीमित नजर आती है।

## वैश्विक मुद्रा बाजार और अमेरिकी डॉलर का दबदबा
हंगेरियन फ़ोरिंट की यह कमजोरी केवल आंतरिक नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर के मुद्रा बाजार अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और सुरक्षित संपत्तियों की भारी मांग के दबाव में हैं। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दो दिनों की तेजी ने वैश्विक स्तर पर महंगाई की चिंताओं को फिर से हवा दी है, जिसके चलते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। भू-राजनीतिक तनावों और सख्त फेडरल नीतियों के चलते अमेरिकी डॉलर दो महीने के उच्च स्तर पर कारोबार कर रहा है, जिसने अन्य प्रमुख और उभरती हुई मुद्राओं पर भारी दबाव बना रखा है।

एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) रातों-रात 200-दिवसीय एसएमए से नीचे फिसलने के बाद 0.7000 के स्तर के पास काफी कमजोर नजर आया, जो अगस्त की शुरुआत के बाद का सबसे निचला स्तर है। रिजर्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया द्वारा संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी के कयासों पर अमेरिकी डॉलर की तेजी पूरी तरह हावी रही। इसी तरह, सोने की कीमतों में भी कोई खास बढ़त नहीं देखी गई और मजबूत डॉलर तथा ऊंची बॉन्ड यील्ड के कारण यह यूरोपीय कारोबारी सत्र में अपने साप्ताहिक निचले स्तर के पास एक सीमित दायरे में फंसा रहा।

## बैंक ऑफ़ जापान का नीतिगत कदम और येन की चाल
दूसरी तरफ, बैंक ऑफ़ जापान ने भी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। यह फैसला बैंक की नीतिगत बैठक में 7-2 के बहुमत से लिया गया, जो पिछले कई हफ्तों से बाजार की उम्मीदों के बिल्कुल अनुरूप था। हालांकि इस दर वृद्धि के बावजूद बैंक ऑफ़ जापान का रुख समग्र रूप से नरम आंका गया, जिसने येन की बढ़त को सीमित करने का काम किया।

शुक्रवार को एशियाई सत्र के दौरान अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) 159.00 के तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर पर रुकने के बाद मामूली गिरावट के साथ देखा गया। जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित करेंसी हस्तक्षेप के डर से सटोरियों ने थोड़ी सावधानी बरती। लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, USD/JPY वर्तमान में 157.98 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले 158.26 के बंद भाव से 0.18 प्रतिशत नीचे है। इसका 52-सप्ताह का दायरा 149.41 से 163.98 के बीच रहा है। तकनीकी संकेतकों की बात करें तो 14-अवधि का आरएसआई 55 पर है, जबकि एमएसीडी -0.32 पर है और सिग्नल लाइन -0.82 पर है, जो 0.50 के हिस्टोग्राम के साथ सकारात्मक गति दर्शाता है। 50-दिवसीय ईएमए 158.06 पर और 200-दिवसीय ईएमए 157.67 पर होने के साथ गोल्डन क्रॉस लंबी अवधि के अपट्रेंड की पुष्टि करता है। वर्तमान में पिवट 158.24 पर स्थित है, जिसमें पहला रेजिस्टेंस 158.59 और दूसरा 159.20 पर है, जबकि सपोर्ट 157.63 और 157.29 पर मौजूद है।

## उभरते बाजारों के लिए सख्त नीतियों की चुनौती
फ़ोरिंट और अन्य उभरते बाजारों की मुद्राओं के लिए आगे का रास्ता काफी चुनौतीपूर्ण दिख रहा है। जब तक प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में केंद्रीय बैंक महंगाई पर पूरी तरह काबू पाने के लिए कड़े कदम उठाते रहेंगे और ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बनी रहेगी, तब तक छोटी अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंकों के पास नरम रुख अपनाने की गुंजाइश नहीं होगी। नेशनल बैंक ऑफ़ हंगरी के सामने अब सबसे बड़ा इम्तिहान यह है कि वह 2027 में 3.1 प्रतिशत तक जाने वाली महंगाई और 2.5 प्रतिशत के नए लक्ष्य के बीच के अंतर को पाटने के लिए किस तरह अपनी नीतियों को सख्त रूप में पेश करता है, ताकि फ़ोरिंट में निवेशकों का भरोसा दोबारा कायम हो सके।

## इसका आप पर असर
वैश्विक मुद्रा बाजारों में डॉलर की मजबूती और केंद्रीय बैंकों के सख्त नीतिगत रुख से अंतरराष्ट्रीय निवेश और आयात लागत पर सीधा असर पड़ता है।

- **मुद्रा विनिमय दर:** अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से अन्य उभरती मुद्राओं की क्रय शक्ति घटती है। इसका सीधा असर विदेश यात्रा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार करने वालों की लागत पर पड़ता है।
- **आयात लागत और पेट्रोल-डीजल:** कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में तेजी से ईंधन और ऊर्जा आयात महंगा हो जाता है। इससे परिवहन खर्च बढ़ने के साथ-साथ खुदरा वस्तुओं की कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बनता है।
- **वैश्विक निवेश और विदेशी फंड:** अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से विदेशी संस्थागत निवेशक उभरते बाजारों से पूंजी निकालकर सुरक्षित अमेरिकी परिसंपत्तियों की ओर रुख करते हैं। इससे वैश्विक शेयर बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है।
- **सोने के खुदरा खरीदार:** डॉलर की मजबूती और ऊंची बॉन्ड यील्ड के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों में सीमित दायरे में कारोबार देखा जा रहा है। भारतीय खरीदारों के लिए घरेलू मुद्रा में उतार-चढ़ाव सोने के खुदरा भाव तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

## ऐसा क्यों हुआ
हंगेरियन फ़ोरिंट पर दबाव और वैश्विक मुद्रा बाजारों में उथल-पुथल के पीछे केंद्रीय बैंकों के नीतिगत विरोधाभास और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संकट मुख्य कारण हैं।

- **नीतिगत विरोधाभास:** नेशनल बैंक ऑफ़ हंगरी ने अपने मध्यम अवधि के मुद्रास्फीति लक्ष्य को घटाकर 2.5 प्रतिशत कर दिया, जबकि 2027 के महंगाई अनुमान को बढ़ाकर 3.1 प्रतिशत कर दिया। इसके बावजूद बैंक द्वारा ब्याज दर कटौती की संभावनाओं पर चर्चा करने से बाजार में मुद्रा की स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ गईं।
- **ऊर्जा कीमतों में तेजी:** अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दो दिनों की तेजी ने वैश्विक स्तर पर महंगाई की आशंकाओं को फिर से जगा दिया। इसके परिणामस्वरूप ऊर्जा आयातक देशों में मुद्रास्फीति के अनुमानों को ऊपर की ओर संशोधित करना पड़ा।
- **भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित मांग:** मध्य पूर्व में बढ़ते जोखिमों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण वैश्विक निवेशकों ने उभरती मुद्राओं को छोड़कर अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी बॉन्ड जैसी सुरक्षित संपत्तियों में निवेश बढ़ाया।

## सवाल-जवाब

### 1. नेशनल बैंक ऑफ़ हंगरी ने अपनी प्रमुख ब्याज दर को किस स्तर पर रोका है?
नेशनल बैंक ऑफ़ हंगरी ने अपनी प्रमुख ब्याज दर में और कटौती करने के बजाय इसे 5.50 प्रतिशत पर स्थिर रखा है।

### 2. हंगरी का नया मध्यम अवधि मुद्रास्फीति लक्ष्य क्या है?
हंगरी का नया मध्यम अवधि मुद्रास्फीति लक्ष्य 2.5 प्रतिशत तय किया गया है, जो 1 जनवरी 2028 से लागू होगा।

### 3. केंद्रीय बैंक के अनुसार 2027 के लिए महंगाई का क्या अनुमान है?
केंद्रीय बैंक ने 2027 के लिए अपने मुद्रास्फीति अनुमान को 2.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.1 प्रतिशत कर दिया है।

### 4. बैंक ऑफ़ जापान ने अपनी अल्पकालिक ब्याज दर में क्या बदलाव किया?
बैंक ऑफ़ जापान ने अपनी अल्पकालिक ब्याज दर को 7-2 के बहुमत से 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है।

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