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  "type": "article",
  "title": "हंगरी को यूरो अपनाने से पहले बड़े सुधार करने की जरूरत, कॉमर्जबैंक और आईएमएफ ने दिए संकेत",
  "summary": "अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और कॉमर्जबैंक के अनुसार सिर्फ यूरो अपनाने की समयसीमा तय करने से हंगेरियन फोरिंट मजबूत नहीं होगा, इसके लिए राजकोषीय और ढांचागत सुधार बेहद जरूरी हैं।",
  "content": "हंगरी की अर्थव्यवस्था और उसकी राष्ट्रीय मुद्रा हंगेरियन फोरिंट को मजबूत बनाने के लिए केवल यूरो अपनाने की समयसीमा तय करना पर्याप्त नहीं होगा। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के आर्टिकल IV मूल्यांकन पर टिप्पणी करते हुए कॉमर्जबैंक के अर्थशास्त्री तथा घोष ने स्पष्ट किया है कि यूरो अपनाना बुनियादी और राजकोषीय सुधारों का विकल्प कभी नहीं बन सकता। देश की आर्थिक स्थिरता को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए बुनियादी बदलावों की सख्त आवश्यकता है।\n\nराजकोषीय घाटे और बढ़ते सार्वजनिक कर्ज पर चिंता\nहंगरी के वर्तमान आर्थिक हालात का विश्लेषण करते हुए यह चेतावनी दी गई है कि यदि मौजूदा नीतियों में कोई ठोस बदलाव नहीं किया गया, तो देश का बजट घाटा मध्यम अवधि तक मास्ट्रिच सीमा से ऊपर बना रहेगा। इसके साथ ही सार्वजनिक कर्ज में लगातार बढ़ोतरी जारी रहने की पूरी आशंका है। मास्ट्रिच संधि के नियमों के तहत यूरोपीय संघ के देशों के लिए बजट घाटे और सरकारी कर्ज को नियंत्रित रखना अनिवार्य होता है, लेकिन वर्तमान नीतियां हंगरी को उस सुरक्षित सीमा से बाहर रख रही हैं।\n\nआईएमएफ ने इस स्थिति से निपटने के लिए एक विश्वसनीय, विकास-अनुकूल और तत्काल प्रभाव से लागू होने वाले राजकोषीय समेकन की सिफारिश की है। संस्था का मानना है कि हंगरी को आर्थिक विकृति पैदा करने वाली नीतियों को धीरे-धीरे खत्म करना चाहिए। इसके साथ ही सब्सिडी और प्रशासनिक खर्चों में भारी कटौती करने के साथ कर सुधारों को एक साथ लागू करने की जरूरत है, ताकि वित्तीय अनुशासन दोबारा कायम हो सके।\n\nसख्त मौद्रिक नीति और केंद्रीय बैंक के कदम\nअर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए राजकोषीय कदमों के साथ मौद्रिक नीति को भी उतना ही महत्वपूर्ण माना गया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने हंगेरियन नेशनल बैंक (एमएनबी) द्वारा ब्याज दरों में कटौती रोकने के हालिया फैसले का स्वागत किया है। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय बैंक द्वारा जनवरी 2028 से तय किए गए 2.5% के नए मुद्रास्फीति लक्ष्य को देखते हुए आगे भी अधिक सख्त रुख अपनाना अनिवार्य हो गया है।\n\nतथा घोष ने इस बात पर जोर दिया है कि महीने-दर-महीने मुद्रास्फीति की दर तेजी से बढ़ रही है। ऐसे माहौल में केवल ब्याज दरें स्थिर रखना ही हंगेरियन फोरिंट के मूल्यांकन को स्थायी रूप से सहारा देने के लिए काफी नहीं होगा। फोरिंट में वास्तविक और टिकाऊ मजबूती तभी आ सकती है जब राजकोषीय अनुशासन, ढांचागत सुधार और केंद्रीय बैंक की सख्त मौद्रिक नीति का एक साथ प्रभावी तालमेल देखने को मिले।\n\nवैश्विक मुद्रा बाजारों में अन्य हलचल\nअंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों में अन्य प्रमुख संपत्तियों पर भी अहम हलचल देखी गई है। एशियाई कारोबारी सत्र में शुक्रवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (AUD/USD) ने अपने साप्ताहिक निचले स्तर से उबरते हुए मजबूती हासिल की और यह 0.7000 के स्तर की ओर बढ़ने की कोशिश में रही। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई रातोंरात गिरावट ने अमेरिकी डॉलर को 18 महीने के उच्चतम स्तर से नीचे बनाए रखा, जिससे इस मुद्रा जोड़ी को सहारा मिला। इसके साथ ही रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया से सख्त नीतिगत कदमों की अपेक्षाओं ने भी ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को मजबूती दी।\n\nदूसरी तरफ, USD/JPY की जोड़ी शुक्रवार को 158.00 के आसपास अपनी बढ़त बनाए रखने में सफल रही। जापान में जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार घरेलू खर्च में लगातार नौवें महीने गिरावट दर्ज की गई, जिसने जापानी येन पर दबाव बना दिया। हालांकि, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और फेडरल रिजर्व के रुख के बीच भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने इस जोड़ी में बड़ी गिरावट को सीमित रखा।\n\nसोने की कीमतें और कनाडा के रोजगार आंकड़े\nकमोडिटी बाजार में सोने ने अपनी मजबूती दिखाई और शुक्रवार को $4,200 के स्तर को दोबारा छू लिया। दो महीने के निचले स्तर से उबरते हुए सोने ने यह बढ़त दर्ज की। कच्चे तेल की कीमतों और ट्रेजरी यील्ड में नरमी के साथ अमेरिकी डॉलर कमजोर पड़ा, जबकि निवेशक नए अमेरिकी सेंटिमेंट आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हालांकि दैनिक आरएसआई तकनीकी रूप से अभी भी मंदी का संकेत दे रहा है, लेकिन बाजार की धारणा धीरे-धीरे सोने के पक्ष में मुड़ती दिख रही है।\n\nइसके अलावा, शुक्रवार को स्टैटिस्टिक्स कनाडा की तरफ से सितंबर श्रम बल सर्वेक्षण जारी किया जाना तय है। अगस्त में रोजगार में आई भारी गिरावट के बाद वित्तीय बाजार इस बार रोजगार में मामूली सुधार की उम्मीद कर रहे हैं। यह रिपोर्ट इसलिए विशेष महत्व रखती है क्योंकि इसमें 22 अगस्त से लागू हुए नए अमेरिकी शुल्कों के असर का पहला पूर्ण प्रभाव सामने आने की संभावना है।\n\nइसका आप पर असर\nवैश्विक मुद्रा बाजारों और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नीतियों में होने वाले इन बदलावों का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश और यात्रा लागत पर पड़ता है।\n\n• मुद्रा विनिमय दरें: विदेशी मुद्रा बाजार में चल रही अस्थिरता के कारण अंतरराष्ट्रीय यात्रा और विदेश में पढ़ाई करने वालों के लिए बजट योजना प्रभावित हो सकती है। विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव से विदेशी खर्चों की कुल लागत में बदलाव देखने को मिल सकता है।\n• सोने के खरीदार और निवेशक: सोने की कीमतों में $4,200 के स्तर पर वापसी से खुदरा आभूषण खरीदारों और निवेशकों के लिए लागत बढ़ सकती है। सुरक्षित निवेश चाहने वाले खुदरा निवेशक अपने पोर्टफोलियो आवंटन की समीक्षा कर सकते हैं।\n• वैश्विक आर्थिक रुझान: केंद्रीय बैंकों द्वारा सख्त मौद्रिक नीतियां जारी रखने से उधारी की लागत वैश्विक स्तर पर ऊंची बनी रह सकती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फंड जुटाने वाली कंपनियों और आयातकों को उच्च ब्याज दरों के लिए तैयार रहना होगा।\n• व्यापार और टैरिफ प्रभाव: नए अमेरिकी शुल्कों और वैश्विक श्रम आंकड़ों के असर से अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ सकता है। इससे निर्यातकों और आयातकों को अपने मूल्य निर्धारण और डिलीवरी समयसीमा में बदलाव करना पड़ सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nहंगरी की मुद्रा पर दबाव और वैश्विक बाजारों में हलचल बुनियादी नीतिगत असंतुलन और केंद्रीय बैंकों के अलग-अलग कदमों के कारण देखने को मिल रही है। बिना आवश्यक आर्थिक सुधारों के केवल यूरो अपनाने की बात करने से निवेशकों का भरोसा कायम नहीं हो पा रहा है।\n\n• राजकोषीय नीतियां और बढ़ता घाटा: हंगरी में अत्यधिक सब्सिडी और प्रशासनिक खर्चों के कारण बजट घाटा मास्ट्रिच सीमा से लगातार ऊपर बना हुआ है। जब तक कर सुधार और खर्च में कटौती नहीं होती, सार्वजनिक कर्ज कम होने का कोई ठोस आधार नहीं दिखता।\n• मुद्रास्फीति में उछाल: देश के भीतर महीने-दर-महीने आधार पर महंगाई दर में तेजी से वृद्धि हो रही है। केंद्रीय बैंक द्वारा जनवरी 2028 के लिए निर्धारित 2.5% मुद्रास्फीति लक्ष्य को हासिल करने के लिए ब्याज दरों में कटौती रोकना अनिवार्य हो गया था।\n• अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी: अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट के चलते डॉलर अपने 18 महीने के उच्च स्तर से फिसला है। इसी कारण ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और सोने जैसी परिसंपत्तियों को उबरने का तत्काल अवसर मिला।\n• टैरिफ और कमजोर उपभोक्ता मांग: जापान में घरेलू खर्च में लगातार नौवें महीने आई गिरावट और कनाडा में 22 अगस्त से लागू अमेरिकी शुल्कों ने संबंधित अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर सीधा असर डाला है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. क्या हंगरी के लिए सिर्फ यूरो अपनाना उसकी आर्थिक समस्याओं का समाधान है?\nनहीं, अर्थशास्त्रियों और आईएमएफ के अनुसार जब तक राजकोषीय और ढांचागत सुधार नहीं किए जाते, तब तक केवल यूरो अपनाने की समयसीमा तय करने से हंगेरियन फोरिंट को मजबूती नहीं मिलेगी।\n\n2. हंगेरियन नेशनल बैंक का नया मुद्रास्फीति लक्ष्य क्या है?\nहंगेरियन नेशनल बैंक ने जनवरी 2028 से 2.5% का नया मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारित किया है।\n\n3. शुक्रवार को सोने की कीमत किस स्तर पर पहुंची?\nसोने ने दो महीने के निचले स्तर से उबरते हुए शुक्रवार को $4,200 के स्तर को दोबारा छुआ।\n\n4. जापान में घरेलू खर्च के आंकड़े क्या दर्शाते हैं?\nसरकारी आंकड़ों के अनुसार जापान में घरेलू खर्च में लगातार नौवें महीने गिरावट दर्ज की गई है, जिससे जापानी येन दबाव में रहा।\n\n5. कनाडा के आगामी रोजगार आंकड़ों पर किन शुल्कों का असर देखा जा रहा है?\nकनाडा के सितंबर श्रम बल सर्वेक्षण पर 22 अगस्त से लागू हुए नए अमेरिकी शुल्कों के प्रभाव का पहला व्यापक असर दिखने की संभावना है।",
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  "category": "बाज़ार",
  "publishedAt": "2026-10-09",
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