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  "type": "article",
  "title": "ईंधन निर्यात पर केंद्र का नया फैसला, पेट्रोल पर अप्रत्याशित लाभ कर बढ़ा और डीजल पर भारी कटौती",
  "summary": "केंद्र सरकार ने पेट्रोल निर्यात पर अप्रत्याशित लाभ कर बढ़ाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, जबकि डीजल पर निर्यात शुल्क घटाकर 8.5 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है।",
  "content": "केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड ने पेट्रोलियम उत्पादों के विदेशी निर्यात पर लागू होने वाले अप्रत्याशित लाभ कर की दरों में ताजा संशोधन की घोषणा की है। 16 अक्टूबर से प्रभावी हुए इस नए फैसले के तहत पेट्रोल निर्यात पर लगने वाले कर को 0.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसके विपरीत, डीजल के विदेशी लदान पर लगने वाले उपकर में राहत दी गई है और इसे 16 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 8.5 रुपये प्रति लीटर पर ला दिया गया है। वहीं विमानन टरबाइन ईंधन अर्थात एटीएफ के निर्यात शुल्क में इस बार कोई फेरबदल नहीं किया गया है और इसे 10.5 रुपये प्रति लीटर पर यथावत बनाए रखा गया है।\n\nपेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन पर नए कर नियम\nइस ताजा सरकारी संशोधन के बाद ईंधनों के निर्यात पर लागू होने वाले शुल्कों में व्यापक बदलाव दर्ज किया गया है। पेट्रोल के मामले में निर्यात शुल्क में सीधा पांच गुना उछाल देखा गया है, जहां प्रति लीटर दर में 2 रुपये की शुद्ध बढ़ोतरी की गई है। इसके उलट डीजल के शिपमेंट पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क में 7.5 रुपये प्रति लीटर की राहत दी गई है। प्रतिशत के आधार पर देखें तो डीजल के निर्यात शुल्क में पिछली दर 16 रुपये प्रति लीटर के मुकाबले लगभग 47 प्रतिशत की कमी आई है।\n\nहवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले जेट ईंधन के विदेशी लदान पर नीति निर्माताओं ने स्थिरता बनाए रखी है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि एटीएफ पर 10.5 रुपये प्रति लीटर का लेवी ढांचा बिना किसी बदलाव के जारी रहेगा। इस कदम का सीधा असर देश की तेल रिफाइनरियों द्वारा विदेशी बाजारों में बेचे जाने वाले ईंधनों के मार्जिन पर पड़ेगा, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिफाइनिंग मार्जिन में होने वाले उतार-चढ़ाव के आधार पर ही केंद्र सरकार इन शुल्कों की समय-समय पर समीक्षा करती है।\n\nजुलाई और अगस्त के मुकाबले शुल्कों का बदलता दायरा\nडीजल निर्यात कर की समीक्षा का इतिहास देखें तो इसमें बीते कुछ महीनों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। 1 जुलाई को केंद्र सरकार ने डीजल निर्यात शुल्क को 14 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 8.5 रुपये प्रति लीटर किया था। इसके बाद जुलाई महीने के दौरान ही अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए इस शुल्क में लगातार बढ़ोतरी की गई, जो 3 अगस्त के संशोधन के समय 25.5 रुपये प्रति लीटर के उच्चतम शिखर तक पहुंच गई थी। अब 16 अक्टूबर के आदेश से लागू हुई 8.5 रुपये प्रति लीटर की नई दर डीजल शुल्क को ठीक उसी पायदान पर वापस ले आई है, जहां वह 1 जुलाई को दर्ज की गई थी। इस तरह अगस्त महीने के 25.5 रुपये प्रति लीटर के उच्चतम स्तर से तुलना करें तो मौजूदा दर में लगभग 67 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है।\n\nइससे ठीक पहले 1 अक्टूबर को हुए पाक्षिक बदलाव में भी केंद्र सरकार ने कुछ अहम संशोधन किए थे। 1 अक्टूबर के उस संशोधन में डीजल पर निर्यात लेवी को 20 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 16 रुपये प्रति लीटर किया गया था। उसी समय एटीएफ पर लागू लेवी को कम करके 10.5 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया था, जबकि पेट्रोल निर्यात शुल्क को बिना किसी छेड़छाड़ के 0.5 रुपये प्रति लीटर पर बरकरार रखा गया था। अब पंद्रह दिनों के भीतर ही पेट्रोल पर लगने वाले शुल्क को निचले स्तर से उठाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।\n\nघरेलू खुदरा बाजार और आम उपभोक्ताओं पर प्रभाव\nईंधन निर्यात पर अप्रत्याशित लाभ कर में हुए इन बदलावों को लेकर देश भर के वाहन चालकों और आम उपभोक्ताओं के मन में पेट्रोल पंप की कीमतों को लेकर सवाल उठ सकते हैं। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड के नियमों के तहत यह साफ किया गया है कि ये सभी लेवी केवल भारत से बाहर भेजे जाने वाले परिष्कृत ईंधनों पर ही लागू होती हैं। देश के भीतर घरेलू खपत के लिए पेट्रोल पंपों पर बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल की मौजूदा शुल्क संरचना में कोई भी परिवर्तन नहीं हुआ है।\n\nघरेलू बाजार में बिकने वाले ईंधन अपने पूर्व निर्धारित केंद्रीय उत्पाद शुल्क और संबंधित राज्य सरकारों के मूल्य वर्धित कर नियमों के अनुसार ही बिकते रहेंगे। इसलिए उपभोक्ताओं को पेट्रोल के निर्यात शुल्क में पांच गुना बढ़ोतरी या डीजल निर्यात शुल्क में 47 प्रतिशत की कटौती को पेट्रोल पंप की दैनिक खुदरा कीमतों में बदलाव के रूप में नहीं देखना चाहिए। आम नागरिकों के लिए स्थानीय स्तर पर ईंधन की कीमतें पूर्ववत स्तर पर ही बनी रहेंगी।\n\nइसका आप पर असर\nइस सरकारी अधिसूचना से आम नागरिकों के दैनिक ईंधन खर्च पर कोई सीधा वित्तीय असर नहीं पड़ेगा क्योंकि यह कर केवल विदेशी निर्यात पर लागू होता है।\n\n• भारत में: घरेलू खुदरा पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें इस फैसले के कारण नहीं बदलेंगी। आम उपभोक्ताओं और वाणिज्यिक वाहन चालकों को पूर्व निर्धारित स्थानीय दरों पर ही ईंधन खरीदना होगा।\n• तेल रिफाइनरियों के लिए: डीजल निर्यात पर शुल्क 16 रुपये से घटकर 8.5 रुपये प्रति लीटर होने से निर्यात मार्जिन में सुधार होगा। हालांकि पेट्रोल पर शुल्क 0.5 रुपये से बढ़कर 2.5 रुपये होने से पेट्रोल निर्यात से होने वाले लाभ पर दबाव बढ़ेगा।\n• विमानन क्षेत्र के लिए: विमानन टरबाइन ईंधन पर लेवी 10.5 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर रखी गई है। इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ान परिचालकों की परिचालन लागत संरचना में कोई नया बदलाव नहीं आएगा।\n• राजस्व परिप्रेक्ष्य: केंद्र सरकार द्वारा पाक्षिक आधार पर की जाने वाली यह समीक्षा कच्चे तेल और वैश्विक रिफाइनिंग मार्जिन के संतुलन पर आधारित होती है। इससे सरकारी खजाने में अप्रत्याशित लाभ कर से मिलने वाला राजस्व अंतरराष्ट्रीय बाजार की दरों के अनुसार संतुलित रहेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nअंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों के रिफाइनिंग मार्जिन और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में लगातार होने वाले बदलावों के कारण केंद्र सरकार यह पाक्षिक समीक्षा करती है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी विशिष्ट उत्पाद का रिफाइनिंग स्प्रेड घटता या बढ़ता है, तब सरकार घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने और अप्रत्याशित मुनाफे पर संतुलित लेवी लगाने के लिए करों में संशोधन करती है।\n\n• डीजल मार्जिन में नरमी: अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल के रिफाइनिंग मार्जिन में आई गिरावट के चलते केंद्र सरकार ने डीजल निर्यात शुल्क में 7.5 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। इस कटौती का उद्देश्य घरेलू रिफाइनरियों के विदेशी व्यापार को प्रतिस्पर्धी बनाए रखना है।\n• पेट्रोल स्प्रेड में फेरबदल: वैश्विक स्तर पर पेट्रोल निर्यात से जुड़े मार्जिन की स्थिति को देखते हुए इस पर लागू नाममात्र शुल्क 0.5 रुपये प्रति लीटर को बढ़ाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर किया गया है। यह कदम रिफाइनरियों द्वारा विदेशी बाजारों में अर्जित किए जाने वाले अतिरिक्त लाभ को संतुलित करने के लिए उठाया गया है।\n• जुलाई और अगस्त के रुझान: इससे पहले 3 अगस्त को डीजल शुल्क बढ़कर 25.5 रुपये प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर चला गया था, जबकि 1 जुलाई को यह 8.5 रुपये प्रति लीटर था। मौजूदा दर में कटौती अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रैक स्प्रेड में आई तेज गिरावट का प्रत्यक्ष परिणाम है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पेट्रोल और डीजल पर नए निर्यात शुल्क कब से लागू हुए हैं?\nकेंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड के अनुसार ये नए निर्यात शुल्क 16 अक्टूबर से लागू हो चुके हैं।\n\n2. क्या इस बदलाव से पेट्रोल पंपों पर खुदरा कीमतें बढ़ेंगी या घटेंगी?\nनहीं, यह बदलाव केवल निर्यात किए जाने वाले ईंधन पर लागू है और घरेलू पेट्रोल पंपों पर बिकने वाले ईंधन की कीमतें अप्रभावित रहेंगी।\n\n3. डीजल के निर्यात शुल्क में कितनी कटौती की गई है?\nडीजल निर्यात शुल्क को 16 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 8.5 रुपये प्रति लीटर किया गया है, जो लगभग 47 प्रतिशत की कमी है।\n\n4. पेट्रोल के विदेशी निर्यात पर कितना नया कर लागू किया गया है?\nपेट्रोल पर निर्यात कर 0.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जो पांच गुना वृद्धि है।\n\n5. विमानन टरबाइन ईंधन अर्थात एटीएफ पर नया कर क्या है?\nएटीएफ पर निर्यात शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है और इसे 10.5 रुपये प्रति लीटर पर यथावत रखा गया है।",
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  "category": "बाज़ार",
  "publishedAt": "2026-10-17",
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