भारतीय रुपया: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये को सहारा दे रहे भारतीय रिजर्व बैंक के उपाय भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विदेशी पूंजी प्रवाह को आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदमों से भारतीय मुद्रा को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती मिल रही है। जुलाई के फ्लैश परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) के आंकड़ों से यह संकेत मिलता है कि देश की आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती और गहरी हो रही है। इस मंदी के पीछे घरेलू मांग का कमजोर होना और लागत के दबाव का फिर से बढ़ना मुख्य वजहें हैं। हालांकि, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर इस मोर्चे पर अधिक लचीला साबित हुआ है, जिसे मजबूत बाहरी मांग का समर्थन मिल रहा है क्योंकि कंपनियां अनिश्चित वैश्विक माहौल के बीच अपने स्टॉक बफर को लगातार तैयार कर रही हैं। सेवा क्षेत्र पर दबाव और वैश्विक चुनौतियां इसके विपरीत, सेवा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों को कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ रहा है और वहां मांग की स्थिति भी कमजोर बनी हुई है। आने वाले समय में मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण ऊर्जा की बढ़ती लागत और सप्लाई चेन में व्यवधान आने का जोखिम मंडरा रहा है। इसके अलावा, कीमतों के दबाव में तेजी आने से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के वेट-एंड-सी यानी इंतजार करो और देखो के रुख के सामने मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। नया अमेरिकी शुल्क और छूट के दायरे व्यापार नीति के मोर्चे पर, अमेरिका ने सप्लाई चेन में जबरन श्रम से जुड़े मामलों के सामने आने के बाद भारतीय आयातों पर नया 10% शुल्क लगा दिया है। यह नया शुल्क 24 जुलाई से लागू हो गया है और इसने धारा 122 के तहत लागू किए गए उस अस्थायी 10% शुल्क की जगह ली है जो उसी दिन समाप्त हुआ था। हालांकि, भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्युटिकल उत्पादों जैसी 45% वस्तुएं इस नए शुल्क के दायरे से बाहर रहेंगी। मंत्रालय ने यह भी बताया कि अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत अभी जारी है और इसे जल्द से जल्द किसी ठोस नतीजे पर पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। विदेशी पूंजी प्रवाह और रिजर्व बैंक के कदम भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए शुरू किए गए उपायों का सकारात्मक असर दिखने लगा है। घरेलू बैंकों ने 17 जुलाई तक एफसीएनआर (बी) जमा, एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ईसीबी) और ओवरसीज फॉरेन करेंसी बॉरोइंग (ओएफसीबी) के जरिए कुल 20.7 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाए हैं। इन उपायों से साल के अंत तक 80 अरब अमेरिकी डॉलर तक की पूंजी आने का अनुमान लगाया गया है। एफसीएनआर (बी) सुविधा 30 सितंबर को बंद कर दी जाएगी, जबकि ईसीबी और ओएफसीबी योजनाएं 31 दिसंबर को समाप्त होंगी। इसका आप पर असर भारत में: विदेशी पूंजी आकर्षित करने के आरबीआई के उपायों और अमेरिकी शुल्कों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये की चाल पर असर पड़ रहा है, जिसका प्रभाव आयात-निर्यात और मुद्रास्फीति पर भी पड़ सकता है। सवाल-जवाब 1. भारतीय रिजर्व बैंक के विदेशी पूंजी आकर्षित करने वाले उपायों से कितनी राशि जुटाई जा चुकी है? घरेलू बैंकों ने 17 जुलाई तक एफसीएनआर (बी) जमा, ईसीबी और ओएफसीबी के जरिए कुल 20.7 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाए हैं। 2. अमेरिका द्वारा भारत पर नया शुल्क कब से लागू किया गया है? अमेरिका द्वारा भारत से होने वाले आयात पर नया 10% शुल्क 24 जुलाई से लागू कर दिया गया है। 3. नए अमेरिकी शुल्क के दायरे से किन उत्पादों को छूट दी गई है? इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्युटिकल उत्पादों सहित 45% वस्तुओं को इस नए अमेरिकी शुल्क से मुक्त रखा गया है। 4. एफसीएनआर (बी) जमा सुविधा कब समाप्त होगी? एफसीएनआर (बी) सुविधा 30 सितंबर को बंद कर दी जाएगी। https://trendkia.com/market/indian-rupee-finds-support-against-us-dollar-through-rbi-inflow-measures-10842 TrendKia — Har trend, sabse pehle.