भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों ने निकाले ₹48,056 करोड़, जानिए क्यों थमी बिकवाली की रफ्तार अक्टूबर महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 48,056 करोड़ रुपये की भारी निकासी की है। हालांकि, अमेरिकी बॉण्ड यील्ड में गिरावट और मजबूत रुपये की वजह से बीते हफ्ते बिकवाली की रफ्तार में कमी देखी गई। भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की बिकवाली का सिलसिला अक्टूबर के महीने में भी जारी रहा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, पश्चिम एशिया में तनाव, महंगाई की चिंताओं और भारतीय कंपनियों के उम्मीद से कमजोर पहली और दूसरी तिमाही के नतीजों के कारण विदेशी निवेशकों ने इस महीने अब तक शेयर बाजार से 48,056 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। हालांकि, राहत की बात यह रही कि 23 अक्टूबर को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान इस बिकवाली की रफ्तार काफी धीमी पड़ गई और दो कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशक शुद्ध खरीदार के रूप में उभरे। वैश्विक दबाव और घरेलू चिंताओं के बीच विदेशी निवेशकों की बिकवाली अक्टूबर के दौरान भारतीय इक्विटी बाजार पर कई मोर्चों से दबाव देखने को मिला है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव गहराने की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर लगभग 114 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गई थीं। इसके अलावा, घरेलू बाजार में कंपनियों की सुस्त आय वृद्धि और नकदी की उपलब्धता को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों के सेंटीमेंट को प्रभावित किया। चॉइस वेल्थ के चीफ इंवेस्टमेंट स्ट्रैटेजी ऑफिसर धीरज गौड़ के अनुसार, कच्चे तेल के दाम में उछाल, महंगाई की आशंका और कॉरपोरेट अर्निंग्स में नरमी जैसे कारकों ने विदेशी पूंजी की निकासी को बढ़ावा दिया। 2026 में अब तक रिकॉर्ड निकासी का आंकड़ा सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर के महीने में भी विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजारों से 35,861 करोड़ रुपये की बड़ी रकम निकाली थी। इससे पहले जुलाई में FPIs ने 20,200 करोड़ रुपये और अगस्त में 29,631 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया था। अक्टूबर में हुई भारी बिकवाली के बाद, साल 2026 में भारतीय शेयर बाजार से FPIs की कुल निकासी का आंकड़ा बढ़कर 3.08 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा साल 2025 में हुई कुल 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी की तुलना में लगभग दोगुना है, जो विदेशी निवेशकों के सतर्क रुख को दर्शाता है। किन वजहों से थमी बिकवाली की रफ्तार? अक्टूबर के तीसरे हफ्ते में बिकवाली का दबाव कम होने के पीछे कुछ राहत देने वाले संकेत भी मिले। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इंवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी. के. विजयकुमार ने बताया कि अमेरिकी बॉण्ड यील्ड में आई गिरावट और डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की मजबूती ने विदेशी निवेशकों का मूड बदला। अमेरिका में 10 साल के सरकारी बॉण्ड पर यील्ड 5.36 प्रतिशत के उच्च स्तर से गिरकर करीब 5 प्रतिशत पर आ गया। वहीं, भारतीय रुपया भी मजबूत होकर 94.94 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। इसके साथ ही भारतीय बाजार में बड़ी कंपनियों के शेयरों के वैल्यूएशन आकर्षक स्तर पर आ जाने से FPIs को खरीदारी का मौका दिखा। डेट और बॉण्ड बाजार में भी दिखी बिकवाली शेयर बाजार के साथ-साथ भारतीय बॉण्ड या डेट मार्केट में भी विदेशी निवेशकों का रुझान नकारात्मक रहा। अक्टूबर के दौरान पूर्ण सुलभ मार्ग (FAR) के तहत FPIs ने 3,858 करोड़ रुपये और स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग (VRR) के तहत 1,332 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की। इसके विपरीत, सामान्य मार्ग के माध्यम से विदेशी निवेशकों ने भारतीय बॉण्ड बाजार में 3,737 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश दर्ज किया। इसका आप पर असर विदेशी निवेशकों की इस भारी बिकवाली से भारतीय शेयर बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर रिटेल निवेशकों के पोर्टफोलियो और म्यूचुअल फंड के एनएवी (NAV) पर पड़ेगा। • रिटेल निवेशकों पर असर: बाजार में विदेशी पूंजी की कमी से शॉर्ट-टर्म में शेयरों की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। जो लोग सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए निवेश कर रहे हैं, उन्हें गिरावट के दौर में अधिक यूनिट्स जमा करने का मौका मिलेगा। • पोर्टफोलियो रणनीति: कच्चा तेल और अमेरिकी बॉण्ड यील्ड उच्च स्तर पर रहने तक बड़ी और मजबूत कंपनियों (लार्ज-कैप) पर ध्यान केंद्रित करना अधिक सुरक्षित विकल्प हो सकता है। • मुद्रा बाजार और महंगाई: FPI निकासी से भारतीय रुपये पर दबाव बना रह सकता है, जिससे आयात महंगा होने और घरेलू महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। • भविष्य की संभावनाएं: यदि अमेरिकी बॉण्ड यील्ड में गिरावट और रुपये में मजबूती बनी रहती है, तो आने वाले हफ्तों में बाजार में फिर से विदेशी पूंजी का आगमन देखने को मिल सकता है। ऐसा क्यों हुआ अक्टूबर के दौरान विदेशी निवेशकों द्वारा शेयर बेचने की मुख्य वजहें भू-राजनीतिक तनाव, महंगे कच्चे तेल और अमेरिकी बॉण्ड यील्ड का उच्च स्तर रही हैं। • भू-राजनीतिक तनाव और कच्चा तेल: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 114 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गईं, जिससे भारत जैसे आयातक देश के लिए व्यापार घाटे की चिंता बढ़ गई। • उधार की ऊंची लागत: अमेरिका में 10-साल की बॉण्ड यील्ड 5.36% तक पहुंच जाने से विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी बाजार में जोखिम-मुक्त रिटर्न पाना अधिक आकर्षक हो गया, जिससे उन्होंने भारतीय बाजार से पूंजी निकाली। • कमजोर कॉरपोरेट नतीजे: भारतीय कंपनियों के पहली और दूसरी तिमाही के नतीजे बाजार की उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहे, जिसके चलते विदेशी संस्थागत निवेशकों ने मुनाफावसूली की। • रुपये में सुधार से राहत: जब अमेरिकी बॉण्ड यील्ड घटकर 5% पर आई और रुपया 94.94 प्रति डॉलर पर मजबूत हुआ, तब अक्टूबर के आखिरी हफ्तों में बिकवाली की गति धीमी पड़ी। सवाल-जवाब 1. अक्टूबर में FPIs ने भारतीय शेयर बाजार से कुल कितने रुपये निकाले हैं? अक्टूबर के महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय शेयर बाजार से शुद्ध रूप से 48,056 करोड़ रुपये निकाले हैं। 2. 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों की कुल निकासी कितनी हो चुकी है? साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों की कुल निकासी 3.08 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो 2025 में हुई 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी से काफी ज्यादा है। 3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली के मुख्य कारण क्या हैं? मुख्य कारणों में कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचना, पश्चिम एशिया में तनाव, महंगाई की चिंताएं और भारतीय कंपनियों के सुस्त तिमाही नतीजे शामिल हैं। 4. अक्टूबर के उत्तरार्ध में बिकवाली की रफ्तार क्यों कम हुई? अमेरिकी 10-साल के बॉण्ड पर यील्ड 5.36% से घटकर 5% पर आने, रुपया मजबूत होकर 94.94 प्रति डॉलर होने और बड़ी कंपनियों के आकर्षक वैल्यूएशन के कारण बिकवाली की रफ्तार धीमी हुई। 5. बॉण्ड या डेट बाजार में विदेशी निवेशकों का क्या रुख रहा? डेट बाजार में FPIs ने FAR के तहत 3,858 करोड़ रुपये और VRR के तहत 1,332 करोड़ रुपये निकाले, हालांकि सामान्य मार्ग से 3,737 करोड़ रुपये का निवेश भी आया। https://trendkia.com/market/indian-stock-market-se-foreign-investors-ne-nikale-48-056-karora-janie-kyon-thami-bikavali-ki-raphtara-51628 TrendKia — Har trend, sabse pehle.