ईरान और अमेरिका के बीच तनाव घटने से गिरा कच्चा तेल, पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की आशंका टली अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिरोध थमने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 6 प्रतिशत से अधिक टूट गया है, जिससे भारत सहित दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने का खतरा टल गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बीते दो दिनों से सीधे हमलों के रुकने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। लगातार 13 रातों तक चले हवाई हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र में आई इस शांति ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को बड़ी राहत दी है। पिछले एक महीने में 20 प्रतिशत तक उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचे क्रूड ऑयल के कारण भारत सहित दुनिया भर में ईंधन महंगा होने का खतरा मंडरा रहा था, लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव घटते ही कच्चे तेल में करीब 6 प्रतिशत से अधिक की नरमी आई है। ब्रेंट और WTI क्रूड के दामों में दर्ज हुई 6 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कम होते ही तेल बाजार में अचानक ठंडक देखने को मिली। कारोबार के दौरान अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड फिसलकर 90 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया और 6.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ ट्रेड करता दिखा। इसी तरह अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 6.31 प्रतिशत टूटकर 84.73 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। कीमतों में यह तेज गिरावट उस दौर के ठीक बाद दर्ज की गई है जब तेल बाजार ओवरबॉट जोन में पहुंच गया था, जहां से अब स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होती दिख रही है। खाड़ी देशों में 13 दिनों के बाद छाई शांति कच्चे तेल के तेवर नरम होने के पीछे खाड़ी क्षेत्र के जमीनी हालात में आया बदलाव मुख्य कारण है। लगातार 13 रातों तक चले भीषण हवाई हमलों के बाद पिछले दो दिनों से क्षेत्र में शांति बनी हुई है। ईरान ने कुवैत और बहरीन जैसे पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर कोई नई जवाबी कार्रवाई नहीं की है। इसके अलावा ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की अरामको रिफाइनरी पर हमले का दावा किया था, लेकिन सऊदी अधिकारियों द्वारा इसकी पुष्टि न किए जाने के बाद बाजार ने इस खबर को नजरअंदाज कर दिया। सप्लाई रूट पर मंडराता खतरा हुआ कम हाल के दिनों में होर्मुज की जलसंधि और लाल सागर में जहाजों पर हुए हमलों की वजह से समुद्री व्यापार मार्ग बाधित हो गया था, जिसने कच्चे तेल को 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा दिया था। इससे पहले अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के हालात बनने पर क्रूड ऑयल एक बार 120 डॉलर प्रति बैरल तक चला गया था, जिसके बाद दोनों पक्षों में युद्धविराम होने पर यह गिरकर 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गया था। अब एक बार फिर तनाव कम होने से ईंधन के दाम बढ़ने का खतरा फिलहाल टलता नजर आ रहा है। इसका आप पर असर • भारत में: कच्चे तेल में गिरावट से घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रहने या घटने की संभावना बढ़ी है। • वैश्विक स्तर पर: खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में स्थिरता आएगी और महंगाई का दबाव कम होगा। सवाल-जवाब 1. कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट क्यों आई? अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव कम होने और पिछले दो दिनों से कोई नया हमला न होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। 2. ब्रेंट क्रूड और WTI क्रूड के दाम कितने गिर चुके हैं? कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड 6.34% टूटकर 90 डॉलर से नीचे आ गया, जबकि WTI क्रूड 6.31% गिरकर 84.73 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। 3. क्या इससे भारत में पेट्रोल और डीजल सस्ता होगा? अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चा तेल सस्ता होने से भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने का दबाव कम हो गया है। 4. सऊदी अरामको रिफाइनरी पर हमले के दावे का बाजार पर क्या असर पड़ा? सऊदी अधिकारियों द्वारा हूती विद्रोहियों के हमले की पुष्टि न किए जाने के कारण बाजार ने इस खबर को नजरअंदाज कर दिया। https://trendkia.com/market/iran-aura-america-ke-bicha-tanava-ghatane-se-gira-kachcha-tela-petrola-dijala-ke-dama-barhane-ki-ashnka-tali-10649 TrendKia — Har trend, sabse pehle.