# ईरान के राष्ट्रपति ने अमेरिका को दी दो टूक चेतावनी, कच्चे तेल और वैश्विक मुद्रा बाजारों में मची हलचल

> ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका के साथ बातचीत की तत्परता जताते हुए धमकियों के आगे न झुकने का संकल्प दोहराया है। इस भू-राजनीतिक तनाव के बीच डब्ल्यूटीआई क्रूड 91.50 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डॉलर की मजबूती से सोने और वैश्विक मुद्राओं में गिरावट दर्ज की गई।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/iran-ke-rashtrapati-ne-us-ko-di-do-tuka-chetavani-kachche-tela-aura-vaishvika-mudra-bajaron-men-machi-halachala-37458 · **Language:** Hindi
**Tags:** कच्चा तेल, डब्ल्यूटीआई क्रूड, ईरान अमेरिका संबंध, विदेशी मुद्रा बाजार, फेडरल रिजर्व, सोने का भाव, ओपेक, बैंक ऑफ जापान

तेहरान और वॉशिंगटन के बीच करीब सात महीने से खिंचते चले आ रहे सैन्य तनाव के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने यह स्पष्ट किया है कि उनका देश अमेरिका के साथ चल रहे इस लंबे टकराव को समाप्त करने के लिए वार्ता की मेज पर लौटने को पूरी तरह तैयार है, लेकिन किसी भी प्रकार की धमकियों या दबाव के आगे कतई नहीं झुकेगा। उन्होंने यह बात रेखांकित की कि ईरान परमाणु हथियार तैयार करने का कोई इरादा नहीं रखता है, परंतु देश के आर्थिक विकास और प्रगति के लिए आवश्यक शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक विकसित करने के अपने कानूनी अधिकार से कभी पीछे नहीं हटेगा। इसके साथ ही, राष्ट्रपति पेजेशकियन ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थिरता बिगाड़ने का सीधा आरोप अमेरिका और इजरायल पर मढ़ते हुए कहा कि वे ईरान के नागरिकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर अवैध हमलों को अंजाम दे रहे हैं।

## भू-राजनीतिक खींचतान के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
पश्चिम एशिया में जारी इस भू-राजनीतिक तनातनी का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर देखने को मिला है। कारोबारी सत्र के दौरान वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमत में 2.25 प्रतिशत की जोरदार तेजी दर्ज की गई, जिसके चलते भाव बढ़कर 91.50 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य गतिरोध या कूटनीतिक अड़चन कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को तुरंत प्रभावित करती है, जिसके कारण निवेशक और आयातक देश किसी भी संभावित जोखिम से पहले ही खरीदारी बढ़ा देते हैं।

## डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल और इसके मूल्य निर्धारण के बुनियादी तंत्र
अंतरराष्ट्रीय पेट्रोलियम बाजार में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट दुनिया के तीन सबसे प्रमुख तेल मानकों में से एक माना जाता है, जिनमें ब्रेंट और दुबई क्रूड भी शामिल हैं। डब्ल्यूटीआई तेल को तकनीकी रूप से हल्का यानी लाइट और मीठा यानी स्वीट कच्चा तेल कहा जाता है, क्योंकि इसमें गुरुत्वाकर्षण का स्तर अपेक्षाकृत कम होता है और सल्फर की मात्रा भी बेहद कम पाई जाती है। अपनी इस रासायनिक विशेषता के कारण इसे रिफाइन करना काफी आसान होता है और इससे उच्च गुणवत्ता वाले पेट्रोलियम उत्पाद तैयार होते हैं। इस कच्चे तेल का उत्पादन मुख्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका के भीतर होता है और इसका वितरण कशिंग हब के जरिए किया जाता है, जिसे पाइपलाइन क्रॉसरोड्स ऑफ द वर्ल्ड के नाम से भी जाना जाता है। वैश्विक वित्तीय मीडिया और जिंस बाजारों में डब्ल्यूटीआई का भाव ऊर्जा लागत की सबसे अहम बेंचमार्क दरों में गिना जाता है।

किसी भी अन्य वित्तीय संपत्ति की तरह डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल का मूल्य भी पूरी तरह मांग और आपूर्ति के बुनियादी नियमों पर निर्भर करता है। वैश्विक आर्थिक वृद्धि तेज होने पर औद्योगिक मांग बढ़ती है, जिससे तेल की कीमतें चढ़ती हैं, जबकि आर्थिक सुस्ती के समय मांग कमजोर होने से कीमतें गिरने लगती हैं। इसके अलावा राजनीतिक अस्थिरता, क्षेत्रीय युद्ध और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध आपूर्ति को बाधित कर कीमतों में तेज उछाल ला सकते हैं। अमेरिकी डॉलर का मूल्य भी कच्चे तेल की कीमतों को सीधे नियंत्रित करता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल का अधिकांश कारोबार अमेरिकी डॉलर में ही निपटाया जाता है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो गैर-अमेरिकी खरीदारों के लिए तेल खरीदना सस्ता हो जाता है जिससे मांग को समर्थन मिलता है, जबकि मजबूत डॉलर आयातकों के लिए तेल को महंगा बना देता है।

## भंडारण आंकड़े और ओपेक की उत्पादन नीतियां
वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों की दिशा तय करने में साप्ताहिक इन्वेंट्री आंकड़ों की बहुत बड़ी भूमिका होती है। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट और एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा जारी किए जाने वाले साप्ताहिक इन्वेंट्री आंकड़े तेल की बदलती मांग और आपूर्ति का सबसे सटीक आईना पेश करते हैं। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट हर मंगलवार को सामने आती है, जबकि एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन अपनी रिपोर्ट ठीक अगले दिन यानी बुधवार को जारी करता है। ऐतिहासिक रूप से दोनों एजेंसियों के नतीजों में काफी समानता देखी जाती है और 75 प्रतिशत मामलों में उनके आंकड़े एक दूसरे के एक प्रतिशत के दायरे में ही रहते हैं। हालांकि, एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन एक सरकारी संस्था होने के कारण संस्थागत निवेशक इसके आंकड़ों को ज्यादा आधिकारिक और भरोसेमंद मानते हैं। जब इन रिपोर्टों में कच्चे तेल के भंडार में गिरावट दिखाई देती है, तो यह मजबूत खपत का संकेत होता है और कीमतें बढ़ती हैं, जबकि भंडार बढ़ने पर आपूर्ति अधिक होने की आशंका से भाव गिर जाते हैं।

दूसरी ओर, पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन यानी ओपेक बारह तेल उत्पादक राष्ट्रों का एक प्रभावशाली समूह है, जो साल में दो बार आयोजित होने वाली आधिकारिक बैठकों में अपने सदस्य देशों के लिए सामूहिक उत्पादन कोटा निर्धारित करता है। ओपेक द्वारा उत्पादन कोटे में की जाने वाली किसी भी कटौती से आपूर्ति सीमित हो जाती है और भाव चढ़ने लगते हैं, जबकि उत्पादन बढ़ाने पर बाजार में तेल की प्रचुरता से कीमतें नीचे आ जाती हैं। इसी समूह का एक विस्तारित प्रारूप ओपेक प्लस कहलाता है, जिसमें दस गैर-ओपेक तेल उत्पादक देश भी शामिल हैं, जिनमें सबसे प्रमुख और प्रभावशाली देश रूस है। ओपेक प्लस के निर्णय वैश्विक आपूर्ति संतुलन को नियंत्रित करने में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।

## विदेशी मुद्रा बाजार में उठापटक: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और येन पर दबाव
भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और मौद्रिक नीतियों के बीच मुद्रा बाजार में बुधवार को तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आए भारी उछाल के बाद अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में एक प्रतिशत से अधिक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आगे और सख्ती बरते जाने के निवेशकों के भरोसे के चलते अमेरिका के 5-वर्षीय और 10-वर्षीय टी-नोट की यील्ड 5 प्रतिशत की मनोवैज्ञानिक सीमा को पार कर गई। इसी दबाव के बीच ऑस्ट्रेलियाई डॉलर प्रति अमेरिकी डॉलर 0.7118 के उच्च स्तर को छूने के बाद फिसलकर 0.7039 के स्तर पर आ गया।

एशियाई कारोबारी सत्र में डॉलर और जापानी येन की जोड़ी 157.00 के मध्य स्तर के करीब कारोबार करती नजर आई, जो पिछले शुक्रवार को छुए गए दो सप्ताह के उच्चतम स्तर के बेहद करीब है। बैंक ऑफ जापान द्वारा हाल ही में की गई ब्याज दर वृद्धि के नरम रुख ने जापानी येन पर दबाव बनाए रखा है। हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख से अमेरिकी डॉलर को लगातार सहारा मिल रहा है, लेकिन जापानी मुद्रा में संभावित सरकारी हस्तक्षेप की आशंकाओं ने इस जोड़ी की आगे की बढ़त को सीमित कर दिया है। बाजार प्रतिभागी संभावित ट्रंप और शी की उच्चस्तरीय बैठक से पहले अमेरिका और ईरान के बीच संपन्न हुए अप्रत्यक्ष वार्ता के दौर पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहे हैं।

## सुरक्षित निवेश सोने में तेज बिकवाली
मुद्रा बाजार में डॉलर के मजबूत होने और अमेरिकी मुद्रा बाजार में सकारात्मक माहौल बनने के कारण बहुमूल्य धातु सोने पर भारी बिकवाली का दबाव आ गया। सप्ताह के मध्य में सोने ने पिछले दो दिनों की बढ़त को पूरी तरह गंवा दिया और तेज गिरावट दर्ज की। अमेरिकी डॉलर में आए जोरदार सुधार के चलते सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,300 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम स्तर से नीचे फिसल गया और साप्ताहिक निचले स्तर पर पहुंच गया। निवेशकों द्वारा सुरक्षित निवेश के बजाय प्रतिफल देने वाले अमेरिकी बॉन्ड में पूंजी लगाने से सोने की कीमतों में यह कमजोरी दर्ज की गई।

## केंद्रीय बैंकों के नीतिगत फैसले और महंगाई का लंबा असर
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर लंबे समय तक पड़ने वाले प्रभावों को लेकर केंद्रीय बैंकों का अनुमान काफी सतर्क बना हुआ है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अनुमान जताया है कि उसकी मुख्य संदर्भ ब्याज दर 2027 तक अपरिवर्तित रह सकती है। यह वही वर्ष है जब अंतरराष्ट्रीय शिपिंग की बढ़ी हुई लागत अमेरिकी खुदरा दुकानों की उपभोक्ता कीमतों पर पूरी तरह असर डाल सकती है। फरवरी के आखिर में ईरान के साथ संघर्ष शुरू होने से पहले की तुलना में एशिया से अमेरिका तक एक कंटेनर भेजने का भाड़ा चार गुना से भी अधिक बढ़ चुका है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के शोध के अनुसार, आयातित माल भाड़े में हुई इस भारी बढ़ोतरी का दुकानों में मिलने वाले सामान की कीमतों पर सबसे तीव्र असर लगभग एक साल बाद यानी वर्ष 2027 में चरम पर पहुंचने का अनुमान है।

इस बीच, जापान के केंद्रीय बैंक यानी बैंक ऑफ जापान ने अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। यह निर्णय सात के मुकाबले दो मतों के बहुमत से लिया गया, जो पिछले कई हफ्तों से वित्तीय बाजार की बनी हुई आम सहमति और अपेक्षाओं के पूरी तरह अनुरूप रहा। इस फैसले से साफ है कि वैश्विक केंद्रीय बैंक महंगाई और मुद्रास्फीति के दबावों से निपटने के लिए अलग-अलग गति से अपनी नीतियों को ढाल रहे हैं।

## इसका आप पर असर
कच्चे तेल में तेजी और मजबूत अमेरिकी डॉलर से वैश्विक व्यापार और घरेलू आयात लागत पर सीधा दबाव पड़ सकता है।

- **ईंधन की कीमतें:** अंतरराष्ट्रीय बाजार में डब्ल्यूटीआई क्रूड 91.50 डॉलर तक चढ़ने से तेल विपणन कंपनियों की खरीद लागत बढ़ सकती है। यदि यह स्तर लंबे समय तक बना रहा तो आने वाले हफ्तों में घरेलू स्तर पर पेट्रोल, डीजल और गैस सिलेंडरों के खुदरा भाव प्रभावित हो सकते हैं।
- **आयात और खुदरा महंगाई:** एशिया से अमेरिका तक समुद्री कंटेनर भाड़ा युद्ध पूर्व स्तर से चार गुना से अधिक हो चुका है। शिपिंग लागत का यह अतिरिक्त बोझ विनिर्मित उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक्स और कच्चे माल को महंगा कर सकता है जिसका असर 2027 तक दिखने का अनुमान है।
- **सोना और आभूषण खरीदार:** डॉलर की मजबूती के कारण सोना 4,300 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ गया है। वैश्विक बाजार में आई इस कमजोरी से घरेलू सर्राफा बाजारों में आभूषण खरीदारों को कीमतों में तात्कालिक राहत मिल सकती है।
- **मुद्रा और निवेश:** अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5 प्रतिशत पार करने से डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है। विदेशी निवेशकों द्वारा डॉलर संपत्तियों को प्राथमिकता देने से उभरते बाजारों और एशियाई मुद्राओं पर दबाव बढ़ सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
ईरान और अमेरिका के बीच पिछले सात महीने से जारी सैन्य टकराव और वैश्विक केंद्रीय बैंकों की सख्त मौद्रिक नीतियों के कारण वित्तीय और ऊर्जा बाजारों में यह उथल-पुथल शुरू हुई है।

- **भू-राजनीतिक टकराव:** ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन द्वारा अमेरिकी धमकियों को खारिज करने और शांतिपूर्ण परमाणु अधिकारों पर अड़े रहने से कूटनीतिक तनाव बरकरार है। ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर अपने बुनियादी ढांचे पर अवैध हमले करने के आरोप लगाए हैं, जिससे खाड़ी क्षेत्र में आपूर्ति अवरोध का डर बढ़ा है।
- **माल ढुलाई लागत में तेज उछाल:** फरवरी के अंत में शुरू हुए सैन्य संघर्ष के बाद से एशिया से अमेरिका तक कंटेनर शिपिंग लागत चार गुना से अधिक बढ़ चुकी है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार इस बढ़े हुए माल भाड़े का अधिकतम असर 2027 तक खुदरा सामान की कीमतों में दिखाई देगा।
- **ब्याज दरों पर फेडरल रिजर्व का रुख:** अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा अपनी प्रमुख संदर्भ दर को 2027 तक अपरिवर्तित रखने के अनुमान और 5 प्रतिशत से ऊपर पहुंची बॉन्ड यील्ड ने डॉलर को मजबूती दी है। इसी कारण गैर-ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने में निवेशकों ने बिकवाली की।
- **बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक सख्ती:** बैंक ऑफ जापान ने अपनी अल्पकालिक ब्याज दर को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। हालांकि नीति सामान्यीकरण के इस अपेक्षित कदम के बावजूद केंद्रीय बैंक के नरम संकेतों ने जापानी येन पर दबाव बनाए रखा।

## सवाल-जवाब

### 1. ईरान के राष्ट्रपति ने अमेरिका के साथ बातचीत को लेकर क्या रुख अपनाया है?
राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि ईरान पिछले सात महीने से जारी टकराव को खत्म करने के लिए वार्ता को तैयार है, लेकिन वह किसी भी धमकी का जवाब नहीं देगा और शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक का अधिकार नहीं छोड़ेगा।

### 2. डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमत में कितना बदलाव दर्ज किया गया?
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल 2.25 प्रतिशत की बढ़त के साथ 91.50 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर पहुंच गया।

### 3. संघर्ष शुरू होने के बाद से समुद्री माल भाड़े पर क्या असर पड़ा है?
फरवरी के अंत में संघर्ष शुरू होने के बाद से एशिया से अमेरिका तक कंटेनर भेजने का खर्च चार गुना से भी अधिक बढ़ चुका है।

### 4. अमेरिकी फेडरल रिजर्व का ब्याज दरों को लेकर क्या अनुमान है?
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी मुख्य संदर्भ ब्याज दर को 2027 तक अपरिवर्तित बनाए रखने का अनुमान व्यक्त किया है।

### 5. सोने की कीमतों में गिरावट की क्या मुख्य वजह रही?
अमेरिकी डॉलर की मजबूती और 5 व 10 वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड के 5 प्रतिशत के पार पहुंचने से सोना फिसलकर 4,300 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गया।

### 6. बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दरों में क्या फैसला लिया है?
बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है।

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