ईरान की सैन्य चेतावनी के बीच कच्चा तेल फिसला, वैश्विक बाजारों में रणनीतिक हलचल ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने जवाबी रणनीति और हथियार बदलने का कड़ा संदेश दिया है, जबकि ऊर्जा बाजार में डब्ल्यूटीआई क्रूड 93.60 डॉलर पर नरमी के साथ कारोबार करता दिखा। मध्य पूर्व में रणनीतिक तनातनी गहराने के संकेतों के बीच अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में एक दिलचस्प विरोधाभास देखने को मिला है। तेहरान की ओर से नए सैन्य हमलों की स्थिति में युद्ध के भौगोलिक दायरे और इस्तेमाल किए जाने वाले हथियारों में आमूलचूल बदलाव करने का कड़ा रुख सामने आया है। इस तरह के गंभीर भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के बावजूद, प्रमुख बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट के भाव में गिरावट दर्ज की गई, जिससे वैश्विक ऊर्जा व्यापारियों और व्यापक वित्तीय बाजारों के सामने जटिल समीकरण खड़े हो गए हैं। तेहरान का कड़ा रुख और नए रणनीतिक लक्ष्य ईरानी सैन्य प्रतिष्ठान के आधिकारिक बयानों से साफ संकेत मिलता है कि भविष्य की किसी भी सैन्य कार्रवाई का उत्तर पारंपरिक तौर-तरीकों से काफी अलग होगा। आईआरजीसी के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल हुसैन मोहेब्बी ने स्पष्ट किया कि किसी भी नए आक्रामक कदम की दशा में उनकी सुरक्षात्मक तथा जवाबी तैयारियों में बुनियादी परिवर्तन तय हैं। Our goals are no longer necessarily the same as before. हुसैन मोहेब्बी ने साफ तौर पर रेखांकित किया कि सैन्य टकराव का नया चरण न केवल भौगोलिक सीमाओं को बदल सकता है, बल्कि इसमें सर्वथा नई तकनीकों और अप्रत्याशित सैन्य साजो-सामान का प्रदर्शन भी शामिल होगा। उनके मुताबिक ऐसे संभावित लक्ष्यों को निशाना बनाने की रूपरेखा तैयार की गई है, जिन्हें पहले कभी केंद्र में नहीं रखा गया था। यह चेतावनी इस बात की तस्दीक करती है कि इस क्षेत्र में अब तक अपनाए जाने वाले पारंपरिक प्रतिरोध तंत्र के नियम बदल सकते हैं। ऊर्जा बाजार की प्रतिक्रिया और डब्ल्यूटीआई का मिजाज पश्चिम एशिया के अशांत माहौल के बीच वैश्विक जिंस बाजार में तात्कालिक उतार-चढ़ाव देखा गया। कारोबारी सत्र के दौरान वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट की कीमत में 1.74 प्रतिशत की नरमी आई और यह 93.60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। लाइव बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो क्रूड ऑयल का भाव 94.37 डॉलर के स्तर पर है, जो पिछले बंद भाव 100.30 डॉलर के मुकाबले 5.91 प्रतिशत की गिरावट प्रदर्शित करता है। इसका 52 हफ्तों का निचला स्तर 54.98 डॉलर तथा उच्चतम दायरा 119.48 डॉलर दर्ज रहा है। तकनीकी संकेतकों में 14 दिवसीय आरएसआई 52 पर तटस्थ दिखाई देता है। वहीं एमएसीडी 4.44 पर है जो 4.36 की सिग्नल लाइन से ऊपर रहकर 0.08 के हिस्टोग्राम के साथ सकारात्मक बना हुआ है। एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज के संदर्भ में ईएमए20 94.77 डॉलर, ईएमए50 89.31 डॉलर और ईएमए200 79.48 डॉलर पर टिका है, जबकि 50 और 200 दिनों के एसएमए क्रमशः 86.86 डॉलर और 80.86 डॉलर पर हैं। ईएमए50 के ईएमए200 से ऊपर होने के कारण दीर्घकालिक अपट्रेंड तथा गोल्डन क्रॉस की संरचना प्रभावी है। बोलिंजर बैंड 78.04 डॉलर से 108.38 डॉलर के बीच फैला है और मध्य रेखा 93.21 डॉलर पर है। 33 के एडीएक्स स्तर के साथ बाजार में दिशात्मक रुझान सक्रिय है। स्टोकेस्टिक की तेज रेखा 40 और सिग्नल रेखा 64 पर है, जबकि 4.44 का एटीआर दैनिक उतार-चढ़ाव को दर्शाता है। प्रमुख स्तरों में पिवट 95.06 डॉलर, पहला प्रतिरोध 96.53 डॉलर, दूसरा प्रतिरोध 98.70 डॉलर तथा समर्थन स्तर 92.89 डॉलर और 91.42 डॉलर पर बने हुए हैं। क्रूड ऑयल बेंचमार्क और भंडारण तंत्र वैश्विक कच्चे तेल के वर्गीकरण में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट को एक केंद्रीय स्थान हासिल है। ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ मिलकर यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण पैमानों में गिना जाता है। कम घनत्व और सल्फर की अत्यंत सीमित मात्रा के चलते इसे हल्के और मीठे ग्रेड के रूप में जाना जाता है, जिससे इसका शोधन काफी सुगम हो जाता है। अमेरिका से निकलने वाले इस तेल की मुख्य आपूर्ति कुशिंग जंक्शन के जरिए संचालित होती है, जिसे पाइपलाइन नेटवर्क का सबसे बड़ा वैश्विक चौराहा माना जाता है। मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया मुख्य रूप से आपूर्ति तथा उपभोग की निरंतर मांग पर आधारित होती है। अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संवृद्धि की रफ्तार मजबूत रहने पर ईंधन की खपत बढ़ती है, जबकि आर्थिक मंदी के दौर में मांग पर सीधा दबाव पड़ता है। इसके साथ ही भू-राजनीतिक अस्थिरता, प्रतिबंध और सैन्य टकराव आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर कीमतों में अनिश्चितता पैदा करते हैं। चूँकि कच्चे तेल का अधिकांश वैश्विक सौदा अमेरिकी मुद्रा में तय होता है, इसलिए डॉलर के मूल्य में उतार-चढ़ाव भी खरीदारों की क्षमता को प्रभावित करता है। अमेरिकी डॉलर की कमजोरी तेल की कीमतों को खरीदारों के लिए अनुकूल बनाती है, जबकि डॉलर की मजबूती आयात को महंगा कर देती है। बाजार के साप्ताहिक समीकरणों को समझने के लिए अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान और एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा जारी भंडारण रिपोर्टों पर गहरी नजर रखी जाती है। एपीआई प्रत्येक मंगलवार को अपने आंकड़े साझा करता है, जिसके अगले दिन सरकारी निकाय ईआईए का विस्तृत ब्योरा प्रकाशित होता है। ऐतिहासिक रूप से लगभग 75 प्रतिशत मामलों में दोनों एजेंसियों के निष्कर्ष एक-दूसरे के 1 प्रतिशत के दायरे में रहते हैं। जब भंडारण में अप्रत्याशित कमी आती है, तो इसे मांग में तेजी का संकेत मानकर भाव चढ़ते हैं, वहीं भंडार में बढ़ोतरी कीमतों को नीचे धकेलती है। ओपेक की भूमिका और उत्पादन नीतियां कच्चे तेल की कीमतों को संतुलित रखने में तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक के बारह सदस्य देशों का सामूहिक फैसला हमेशा निर्णायक साबित होता है। वर्ष में दो बार आयोजित होने वाली आधिकारिक बैठकों के दौरान सदस्य देशों के उत्पादन कोटे तय किए जाते हैं। जब यह समूह आपूर्ति को सीमित करने के लिए कोटे में कटौती करता है, तो बाजार में आपूर्ति तंग होने से कीमतें ऊपर चढ़ती हैं। इसके विपरीत उत्पादन बढ़ाने के फैसले कीमतों में नरमी लाते हैं। रूस सहित दस अन्य गैर-ओपेक साझेदारों को मिलाकर बने ओपेक+ ढांचे के बाद इस संगठन का वैश्विक प्रभाव और अधिक विस्तृत हो चुका है। मुद्रा बाजारों और बहुमूल्य धातुओं में उतार-चढ़ाव भू-राजनीतिक तनावों की छाया अन्य वित्तीय संपत्तियों पर भी साफ दिखाई दी। एशियाई कारोबारी समय में अमेरिकी डॉलर और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की जोड़ी 0.7100 के स्तर के ऊपर स्थिर बनी रही। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना द्वारा लोन प्राइम रेट में कोई बदलाव न करने के निर्णय ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर दबाव बनाया, हालांकि रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की ओर से ब्याज दरें और बढ़ाए जाने की संभावनाओं तथा आगामी ट्रंप-शी शिखर बैठक ने इसे आधार प्रदान किया। दूसरी ओर जापानी येन के मुकाबले डॉलर का भाव 157.00 के नीचे खिसकता नजर आया। बैंक ऑफ जापान द्वारा हाल ही में रेट चेक किए जाने के बाद संभावित सरकारी हस्तक्षेप की आशंकाएं बढ़ गई हैं। जापान में सार्वजनिक अवकाश के बावजूद रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशियाई घटनाक्रमों के चलते मुद्रा व्यापारी बेहद सतर्क रहे। इसी बीच बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत करने का कदम उठाया, जो मौद्रिक नीतियों को सामान्य बनाने की दिशा में बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहा। बहुमूल्य धातुओं की बात करें तो सोने में छह सप्ताह के निचले स्तरों से शुरू हुई हालिया रिकवरी पर ब्रेक लग गया। 4,400 डॉलर के स्तर पर मजबूत प्रतिरोध का सामना करने के बाद सोने की कीमतों में गिरावट आई। दैनिक तकनीकी चार्ट पर 14 दिवसीय आरएसआई के तटस्थ दायरे में रहने से आने वाले दिनों के लिए मिश्रित संकेत मिल रहे हैं। डिजिटल परिसंपत्तियों और आवास क्षेत्र का परिदृश्य क्रिप्टोकरेंसी बाजार में सोलाना ने अपनी बढ़त का दायरा बढ़ाते हुए 111.70 डॉलर के पार कारोबार किया। पिछले सप्ताह के दौरान लगभग 12 प्रतिशत की तेजी दर्ज करने के बाद सोलाना का टोकनाइज्ड इक्विटी तंत्र एक नए मील के पत्थर पर पहुंच गया है। मजबूत होते तकनीकी संकेतकों और संस्थागत पूंजी के निरंतर प्रवाह ने डिजिटल परिसंपत्तियों में सकारात्मक माहौल को सहारा दिया है। अमेरिकी घरेलू अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर आगामी आंकड़ों को लेकर सतर्कता बनी हुई है, जहां निवेशकों का प्रमुख ध्यान नए घरों की बिक्री के आंकड़ों पर टिका है। जुलाई में आई तीव्र गिरावट के बाद अगस्त के महीने में बिक्री में 2.6 प्रतिशत के आंशिक सुधार के साथ 623K की गति दर्ज किए जाने का अनुमान है। मॉर्गेज दरों की ऊंचाई ने खरीदारों की वहन क्षमता पर दबाव जरूर बनाए रखा है, लेकिन बिल्डरों द्वारा दिए जा रहे प्रोत्साहनों के कारण समग्र बाजार स्थितियों में कोई बड़ा बिगाड़ नहीं देखा गया है। मध्य पूर्व के कूटनीतिक और सैन्य घटनाक्रमों के साथ-साथ ये सभी आर्थिक कारक आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रवाह को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसका आप पर असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक तनावों के बीच बना यह संतुलन आम उपभोक्ताओं और ईंधन पर निर्भर उद्योगों के लिए कई सीधे वित्तीय प्रभाव पैदा करता है। • भारत में प्रभाव: देश की 80 प्रतिशत से अधिक तेल जरूरतों का आयात होने के कारण वैश्विक कच्चे तेल में उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर विदेशी मुद्रा और चालू खाते के घाटे को प्रभावित करता है। कच्चे तेल के भाव में 93 से 94 डॉलर के बीच स्थिरता रहने से घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल के दामों में तात्कालिक वृद्धि टल सकती है। • परिवहन और लॉजिस्टिक्स: माल ढुलाई करने वाले ट्रांसपोर्टर्स और विमानन कंपनियों के परिचालन खर्च सीधे ईंधन लागत से जुड़े होते हैं। कच्चे तेल में 1.74 प्रतिशत की गिरावट से परिवहन लागत में अल्पकालिक राहत मिलने की संभावना बनती है। • निवेशक और व्यापारी: कमोडिटी वायदा बाजार में सक्रिय व्यापारियों को पिवट स्तर 95.06 डॉलर और समर्थन स्तर 92.89 डॉलर पर नजर रखनी चाहिए। भू-राजनीतिक बयानों और ओपेक के फैसलों से बाजार में अचानक तेज उछाल का जोखिम बना रहता है। • घरेलू बजट और मुद्रास्फीति: आयातित कच्चे माल और ईंधन की कीमतों में संतुलन रहने से आम उपभोक्ता वस्तुओं की परिवहन लागत नियंत्रित रहती है। आने वाले सप्ताह में ईआईए के इन्वेंटरी आंकड़ों पर नजर रखना आवश्यक होगा ताकि महंगाई की दिशा का सही आकलन हो सके। ऐसा क्यों हुआ मध्य पूर्व में नए सिरे से सैन्य बयानबाजी और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में आई गिरावट के पीछे परस्पर विरोधी भू-राजनीतिक और आर्थिक कारण सक्रिय हैं। • सैन्य चेतावनी का प्रत्यक्ष कारण: ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने संभावित हमलों के मद्देनजर अपनी सैन्य प्रतिक्रिया के स्वरूप और भौगोलिक दायरे को बदलने की स्पष्ट चेतावनी जारी की है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य किसी भी बाहरी सैन्य कार्रवाई से पहले नए हथियारों और अप्रत्याशित लक्ष्यों की घोषणा कर रणनीतिक दबाव बनाना है। • आपूर्ति और मांग की गतिशीलता: भू-राजनीतिक जोखिमों के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में 1.74 प्रतिशत की नरमी यह दर्शाती है कि व्यापारी तात्कालिक आपूर्ति बाधाओं की तुलना में वैश्विक आर्थिक मांग की सुस्ती को अधिक तवज्जो दे रहे हैं। डॉलर की मजबूती और केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में सख्ती ने भी ऊर्जा खपत को सीमित किया है। • ओपेक और इन्वेंटरी प्रभाव: बाजार प्रतिभागी ओपेक के उत्पादन कोटे और अमेरिकी भंडारण स्तरों पर लगातार नजर रख रहे हैं। एपीआई और ईआईए की साप्ताहिक इन्वेंटरी रिपोर्टों से पहले मुनाफावसूली और तकनीकी स्तरों पर बिकवाली ने क्रूड पर दबाव बनाया है। सवाल-जवाब 1. आईआरजीसी के प्रवक्ता ने नई चेतावनी में क्या कहा है? ब्रिगेडियर जनरल हुसैन मोहेब्बी ने कहा कि किसी नए हमले की स्थिति में ईरान अपने बचाव और जवाबी कार्रवाई की भूगोल, हथियारों और लक्ष्यों में बड़ा बदलाव करेगा। 2. इस चेतावनी के दौरान डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल का भाव क्या रहा? रिपोर्ट किए गए कारोबारी समय में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 1.74 प्रतिशत की गिरावट के साथ 93.60 डॉलर प्रति बैरल पर दर्ज किया गया। 3. कच्चे तेल की कीमतों को निर्धारित करने वाले प्रमुख कारक कौन से हैं? वैश्विक आर्थिक वृद्धि, आपूर्ति और मांग, ओपेक के उत्पादन कोटे, भू-राजनीतिक तनाव तथा अमेरिकी डॉलर का मूल्य इसके प्रमुख निर्धारक हैं। 4. बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दरों में क्या बदलाव किया? बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। 5. सोने की कीमत किस स्तर पर रुक गई? सोने की हालिया रिकवरी 4,400 डॉलर के स्तर पर कड़े प्रतिरोध का सामना करने के बाद रुक गई। https://trendkia.com/market/iran-ki-sainya-chetavani-ke-bicha-kachcha-tela-phisala-vaishvika-bajaron-men-rananitika-halachala-35562 TrendKia — Har trend, sabse pehle.