ईरान-ओमान हॉर्मुज समझौते और ढीली अमेरिकी पाबंदियों से क्रूड में नरमी, 81.50 डॉलर के नीचे गिरा WTI तेल मध्य पूर्व में कूटनीतिक प्रगति और अमेरिकी पाबंदियों में ढील के चलते कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, अमेरिकी भंडार में उम्मीद से कम बढ़ोतरी ने तेल को बड़ी गिरावट से बचा लिया। एशियाई व्यापारिक सत्र के दौरान गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड का भाव 81.50 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे फिसलकर 81.30 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार करता नजर आया। पिछले सत्र की मामूली बढ़त को गंवाते हुए तेल की कीमतों में यह नरमी मध्य पूर्व में कूटनीतिक बातचीत के आगे बढ़ने से आई है। ओमान और ईरान के बीच महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को लेकर बनी सहमति के बाद बाजार में ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं काफी हद तक कम हुई हैं। मध्य पूर्व में कूटनीतिक पहल और हॉर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति ईरान और ओमान के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य के जल क्षेत्र तथा उससे जुड़े राजस्व के बंटवारे को लेकर एक द्विपक्षीय समझौता हुआ है। हालांकि, तेहरान प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को पूरी तरह से व्यापार के लिए फिर से खोलने के लिए केवल ओमान के साथ समझौता काफी नहीं होगा, बल्कि इसके लिए व्यापक व्यवस्था की आवश्यकता होगी। इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान जारी कर बताया कि मंगलवार को लगभग 10 मिलियन बैरल कच्चा तेल हॉर्मुज मार्ग से सुरक्षित गुजरा है। उन्होंने अपने इस दावे को भी दोहराया कि जलमार्ग में बिछाई गई समुद्री बारूदी सुरंगों को सेना द्वारा हटा दिया गया है। इसके अलावा, अमेरिका द्वारा ईरान पर उम्मीद से कम सख्त प्रतिबंध लगाने की खबर ने भी बाजार की चिंता को शांत किया है। पाबंदियां नरम रहने से फारस की खाड़ी से होने वाली कच्चे तेल की आपूर्ति रुकने का जोखिम घटा है, जिससे कीमतों पर नीचे की तरफ दबाव बना। हालांकि, लंबे समय के नजरिए से देखा जाए तो वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर जोखिम अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। यूक्रेन में रूस के संभावित कदमों और अन्य भू-राजनीतिक तनावों के कारण दीर्घकालिक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बाजार में सतर्कता बनी हुई है। अमेरिकी तेल भंडार के आंकड़ों ने दी निचले स्तरों पर राहत शुरुआती कारोबार में दर्ज की गई गिरावट के बाद कच्चे तेल के दामों में थोड़ा सुधार देखा गया, क्योंकि अमेरिकी सरकार के आधिकारिक आंकड़ों में कच्चे तेल के भंडार में उम्मीद से काफी कम बढ़ोतरी दर्ज की गई। अमेरिकी एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन यानी EIA की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, 21 अगस्त को समाप्त हुए हफ्ते में अमेरिका का वाणिज्यिक क्रूड स्टॉक 95,000 बैरल बढ़कर 428.9 मिलियन बैरल तक पहुंचा। यह आंकड़ा बाजार विश्लेषकों के उस अनुमान से बेहद कम था, जिसमें 597,000 बैरल की बड़ी बढ़ोतरी की संभावना जताई गई थी। भंडार में कम बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि अमेरिकी रिफाइनरियों में तेल की मांग उम्मीद से मजबूत बनी हुई है। इस आंकड़े के सामने आने के बाद क्रूड ऑयल की कीमतों को निचले स्तर पर सहारा मिला और गिरावट पर कुछ हद तक ब्रेक लग गया। क्या है WTI क्रूड और क्यों है इसकी इतनी अहमियत? वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट, जिसे बाजार में संक्षेप में WTI कहा जाता है, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में बिकने वाले कच्चे तेल के सबसे प्रमुख बेंचमार्क में से एक है। Brent क्रूड और Dubai क्रूड के साथ मिलकर WTI वैश्विक स्तर पर तेल की दरें तय करने में अहम भूमिका निभाता है। मुख्य रूप से अमेरिका में उत्पादित होने वाले इस तेल को रिफाइनिंग के लिहाज से बेहद उच्च गुणवत्ता वाला माना जाता है। तकनीकी भाषा में WTI तेल को 'लाइट' और 'स्वीट' क्रूड कहा जाता है। 'लाइट' शब्द इसकी कम सघनता या API ग्रेविटी को दर्शाता है, जिससे इसका निष्कर्षण और परिवहन आसान होता है। वहीं 'स्वीट' शब्द इसमें सल्फर की बेहद कम मात्रा को दर्शाता है। सल्फर कम होने के कारण इसे पेट्रोल, डीजल और एविएशन फ्यूल जैसे उच्च गुणवत्ता वाले ईंधनों में आसानी से प्रोसेस किया जा सकता है। WTI तेल का मुख्य वितरण केंद्र ओकलाहोमा के कुशिंग हब में स्थित है, जिसे दुनिया भर में पाइपलाइनों का चौराहा माना जाता है। कच्चे तेल की कीमतें तय करने वाले मुख्य कारक: मांग, आपूर्ति और OPEC+ अन्य संपत्तियों की तरह WTI क्रूड का भाव भी पूरी तरह से मांग और आपूर्ति के सिद्धांतों से संचालित होता है। जब वैश्विक अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है, तो उद्योगों, परिवहन और विनिर्माण क्षेत्र में ऊर्जा की खपत बढ़ जाती है, जिससे क्रूड के दाम ऊपर जाते हैं। इसके विपरीत, आर्थिक सुस्ती या मंदी के माहौल में मांग घटने से कीमतें गिरने लगती हैं। युद्ध, राजनीतिक उथल-पुथल और व्यापारिक पाबंदियां आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर कीमतों में अचानक उछाल ला सकती हैं। तेल बाजार पर प्रभाव डालने वाली एक और सबसे शक्तिशाली संस्था OPEC यानी पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन है। 12 सदस्य देशों वाला यह समूह साल में दो बार बैठक कर सदस्य देशों के लिए उत्पादन कोटा निर्धारित करता है। जब OPEC उत्पादन घटाने का फैसला करता है, तो बाजार में आपूर्ति तंग हो जाती है और कीमतें बढ़ जाती हैं। इसके विस्तार के रूप में OPEC+ समूह काम करता है, जिसमें रूस सहित 10 गैर-OPEC उत्पादक देश शामिल हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल का कारोबार अमेरिकी डॉलर (USD) में होने के कारण डॉलर की मजबूती या कमजोरी भी इसकी कीमत पर सीधा असर डालती है। डॉलर कमजोर होने पर विदेशी खरीदारों के लिए तेल सस्ता हो जाता है, जिससे मांग को प्रोत्साहन मिलता है। API बनाम EIA: साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्ट का महत्व कच्चे तेल के कारोबारी और संस्थागत निवेशक हर हफ्ते जारी होने वाली इन्वेंट्री रिपोर्ट पर बारीकी से नजर रखते हैं। बाजार में दो प्रमुख रिपोर्ट्स आती हैं: अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (API) की रिपोर्ट जो हर मंगलवार को जारी होती है, और एनर्जी इंफॉर्मेशन एजेंसी (EIA) की रिपोर्ट जो हर बुधवार को आती है। यदि इन्वेंट्री में गिरावट आती है, तो यह मजबूत मांग का संकेत होता है, जिससे क्रूड के दाम बढ़ते हैं। वहीं, भंडार में बढ़ोतरी आपूर्ति अधिक होने का संकेत देती है, जिससे दाम नीचे आते हैं। आमतौर पर API और EIA के आंकड़ों में 75% मामलों में 1% से कम का अंतर होता है। हालांकि, EIA एक सरकारी एजेंसी होने के कारण वित्तीय बाजारों में इसके आंकड़ों को अधिक प्रामाणिक और विश्वसनीय माना जाता है। करेंसी और गोल्ड मार्केट पर भी दिखा असर क्रूड ऑयल में आई इस हलचल के बीच विदेशी मुद्रा (Forex) और बुलियन मार्केट में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला। अमेरिकी डॉलर में मजबूती के चलते ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) में बिकवाली दर्ज की गई और यह बुधवार को 1.3600 के स्तर से नीचे फिसल गया। इसी तरह EUR/USD में भी दबाव रहा और यह एशियाई सत्र की शुरुआत से पहले 1.1600 के मध्य स्तर के पास आ गया। यूरोपीय सेंट्रल बैंक की बैठक के विवरण (ECB Accounts) और अमेरिका के महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों से पहले बाजार में सतर्कता देखी गई। दूसरी ओर, सोने की कीमतों में निचले स्तरों से हल्की रिकवरी दर्ज की गई। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और हॉर्मुज को लेकर तनाव कम होने के बावजूद अमेरिकी PCE महंगाई के आंकड़ों ने Fed द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं को जीवित रखा है, जिससे सोने की बढ़त सीमित रही। बाजार की निगाहें अब फेडरल रिजर्व (Fed) के अध्यक्ष केविन वॉश के शुक्रवार को जैक्सन होल संगोष्ठी में दिए जाने वाले भाषण पर टिकी हैं, जिससे भविष्य की मौद्रिक नीति का स्पष्ट संकेत मिल सकता है। इसका आप पर असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट का सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और वैश्विक महंगाई पर देखने को मिल सकता है। • भारत में: कच्चे तेल की कीमतों में कमी से भारतीय तेल कंपनियों का आयात बिल कम होगा, जिससे देश के व्यापार घाटे को राहत मिलेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड का भाव 80 डॉलर के आसपास स्थिर रहता है, तो घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दामों में कटौती का रास्ता साफ हो सकता है। • वैश्विक बाजार में: ऊर्जा आपूर्ति की चिंताएं कम होने से दुनिया भर में माल ढुलाई और विनिर्माण लागत में कमी आएगी। इससे उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और केंद्रीय बैंकों पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव कम होगा। सवाल-जवाब 1. गुरुवार को WTI कच्चे तेल का भाव कितना रहा? गुरुवार को एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान WTI क्रूड का भाव 81.50 डॉलर के स्तर से फिसलकर 81.30 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था। 2. ईरान और ओमान के बीच क्या समझौता हुआ है? ईरान और ओमान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के जल क्षेत्र और उससे जुड़े राजस्व के बंटवारे को लेकर समझौता किया है, जिससे तेल आपूर्ति पर छाए संकट के बादल छंटे हैं। 3. अमेरिका के तेल भंडार में कितनी बढ़ोतरी दर्ज की गई? अमेरिकी एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) के अनुसार, 21 अगस्त को समाप्त सप्ताह में कच्चे तेल का भंडार 95,000 बैरल बढ़कर 428.9 मिलियन बैरल हो गया। 4. WTI क्रूड क्या है और इसे स्वीट तेल क्यों कहा जाता है? WTI अमेरिकी कच्चा तेल का बेंचमार्क है। इसमें सल्फर की मात्रा बेहद कम होने के कारण इसे 'स्वीट' क्रूड कहा जाता है, जिससे इसे रिफाइन करना बेहद आसान होता है। https://trendkia.com/market/iran-oman-hormuz-samajhaute-aura-dhili-american-pabndiyon-se-kruda-men-narami-81-50-dolara-ke-niche-gira-wti-tela-22770 TrendKia — Har trend, sabse pehle.