{
  "type": "article",
  "title": "ईरान प्रस्ताव पर ट्रंप के इनकार और प्रतिबंध राहत चर्चाओं के बीच कच्चे तेल में तेज उतार-चढ़ाव",
  "summary": "वाशिंगटन और तेहरान के बीच कूटनीतिक खींचतान के चलते डब्ल्यूटीआई क्रूड 95 डॉलर तक उछलने के बाद 91.50 डॉलर के करीब फिसला, जबकि सऊदी आपूर्ति बढ़ने से कीमतों पर दबाव दिखा।",
  "content": "अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भू-राजनीतिक तनाव और कूटनीतिक वार्ताओं के बीच कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार उथल-पुथल देखने को मिल रही है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमतें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान की शर्तों को ठुकराए जाने के बाद तेजी से 95.00 डॉलर प्रति बैरल की ओर बढ़ीं, लेकिन इसके तुरंत बाद बिकवाली हावी होने से भाव फिसलकर 91.50 डॉलर के आसपास आ गए। बाजार प्रतिभागी इस समय वाशिंगटन और तेहरान के बयानों का बारीकी से आकलन कर रहे हैं, जिससे तेल की कीमतों में किसी एक निश्चित दिशा का अभाव दिख रहा है और हर नई भू-राजनीतिक टिप्पणी के साथ व्यापक उतार-चढ़ाव दर्ज हो रहा है।\n\nईरान का सात दिवसीय प्रस्ताव और वाशिंगटन की प्रतिक्रिया\nतेहरान द्वारा पेश किए गए ताजा प्रस्ताव के तहत, यदि वाशिंगटन ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करता है, ईरानी कच्चे तेल पर लगे प्रतिबंध हटाता है और उसकी फ्रीज संपत्तियों को मुक्त करता है, तो सात दिनों की अवधि के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोल दिया जाएगा। इस समझौते के लागू होने के बाद परमाणु वार्ता को आगे बढ़ाने की रूपरेखा भी इस प्रस्ताव में रखी गई थी। शनिवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह अस्वीकार्य करार दिया। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत वाल्ट्ज ने इस पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि तेहरान शुरुआत में ही सारी राहत और रियायतें मांग रहा है।\n\nरविवार को दिए एक साक्षात्कार में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान द्वारा रखी गई ये शर्तें ऐसी थीं जिन्हें वाशिंगटन करीब एक साल पहले स्वीकार कर सकता था। उन्होंने रेखांकित किया कि एक साल पहले न तो कोई युद्ध छिड़ा था, न किसी बंदरगाह की नाकेबंदी थी और न ही होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने जैसी कोई नौसैनिक आपात स्थिति बनी थी। इस रुख से यह साफ संकेत मिला कि मौजूदा युद्धकालीन परिस्थितियों में अमेरिका बिना किसी ठोस गारंटी के ईरान को कोई शुरुआती राहत देने के पक्ष में नहीं है।\n\nप्रतिबंधों में ढील की संभावना और परमाणु प्रगति की शर्तें\nसोमवार को एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के हवाले से यह बात सामने आई कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ठोस परमाणु प्रगति के बदले ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने और उसकी जब्त संपत्तियों को जारी करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच सबसे बड़ा मतभेद समयसीमा और इस बात को लेकर है कि समझौते की दिशा में पहला कदम कौन उठाएगा। बाजार के रणनीतिकारों का मानना है कि चाहे प्रक्रिया का क्रम कोई भी हो, अंतिम परिणाम ईरानी तेल की अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में वापसी और होर्मुज के रास्ते अधिक टैंकरों की आवाजाही के रूप में ही सामने आएगा।\n\nकच्चे तेल के लिए यह संभावित परिणाम मंदी का संकेत माना जाता है, क्योंकि अतिरिक्त आपूर्ति बाजार में प्रीमियम को खत्म कर सकती है। यही वजह है कि व्यापारी इस बात पर कम ध्यान दे रहे हैं कि अंतिम समझौता हुआ या नहीं, बल्कि उनका ध्यान इस बात पर अधिक है कि दोनों में से कौन सा पक्ष समझौते की दिशा में पहले कदम उठाने के करीब दिखाई दे रहा है। जब भी वाशिंगटन या तेहरान की तरफ से नरमी के संकेत मिलते हैं, कीमतों में मुनाफावसूली दिखने लगती है।\n\nयूरेनियम संवर्धन और तेहरान का विरोधाभासी रुख\nदूसरी तरफ, तेहरान के भीतर से आने वाले बयानों ने भ्रम की स्थिति को और गहरा कर दिया है। शुक्रवार को एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कड़े शब्दों में कहा कि यदि वाशिंगटन इस शांति योजना को स्वीकार भी कर लेता है, तब भी परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान किसी तरह का लचीलापन नहीं दिखाएगा। हालांकि, उसी दिन सामने आए अन्य विवरणों में यह उल्लेख किया गया कि ईरान अपने सबसे अधिक संवर्धित यूरेनियम को किसी तीसरे देश में भेजने का प्रस्ताव रख सकता है।\n\nइसके बाद सोमवार को एक सऊदी प्रसारक ने सूत्रों के हवाले से बताया कि ईरान प्रतिबंधों से राहत पाने के बदले यूरेनियम संवर्धन रोकने पर सहमत हो गया है। तकनीकी रूप से संवर्धन पर रोक ही वह निर्णायक कदम है जो अमेरिकी प्रतिबंधों से राहत का रास्ता खोल सकता है और ईरानी कच्चे तेल के वैध निर्यात को दोबारा पटरी पर ला सकता है। तेल बाजारों के लिए यह खबर सबसे महत्वपूर्ण है, हालांकि बाजार विश्लेषक इसे काफी कमजोर स्रोतों पर आधारित मान रहे हैं। इस अनिश्चितता के बीच, रविवार को ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि उनका देश युद्ध दोबारा शुरू होने की स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है।\n\nसऊदी अरब की वैकल्पिक पाइपलाइन और होर्मुज में बढ़ता ट्रैफिक\nकूटनीतिक खींचतान के समानांतर, वैश्विक आपूर्ति के मोर्चे पर सऊदी अरब की तरफ से आपूर्ति दबाव को कम करने वाले कदम उठाए गए हैं। सऊदी अरब ने सोमवार को लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक जाने वाली अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए कच्चे तेल का निर्यात दोबारा शुरू कर दिया। महीने की शुरुआत में ड्रोन हमलों से हुए नुकसान के बाद इस पाइपलाइन से परिचालन 17 दिनों तक पूरी तरह ठप रहा था। वर्तमान में इस पाइपलाइन के जरिए प्रवाह करीब 3.5 मिलियन बैरल प्रति दिन के करीब पहुंच चुका है, जो इसकी कुल 7 मिलियन बैरल प्रति दिन की क्षमता का लगभग आधा है।\n\nइस पाइपलाइन के जरिए भेजे जाने वाले बैरल खरीदारों तक बिना होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे पहुंचते हैं, जिससे इन आपूर्ति खेपों को वाशिंगटन या तेहरान के राजनीतिक फैसलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। उद्योग विश्लेषकों का अनुमान है कि पाइपलाइन को अपनी पूरी 7 मिलियन बैरल की क्षमता पर लौटने में लगभग छह सप्ताह का समय लग सकता है, जिसका समय 3 नवंबर के अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के ठीक बाद के सप्ताह में पड़ता है।\n\nइसके साथ ही, सऊदी अरब ने सीधे होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए भी अपने तेल कार्गो की आवाजाही बढ़ाई है, जिससे सितंबर में उसका कुल निर्यात 5 मिलियन बैरल प्रति दिन के युद्धकालीन उच्च स्तर के पार पहुंच गया। जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाले ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, 27 सितंबर को समाप्त हुए सप्ताह में होर्मुज से 132 जहाजों का आवागमन दर्ज किया गया, जबकि इससे पिछले सप्ताह यह संख्या 116 थी। तुलनात्मक रूप से, 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने से पहले इस संकीर्ण जलमार्ग से प्रतिदिन लगभग 130 जहाजों की आवाजाही हुआ करती थी। रिफाइनरियों तक पहुंचने वाला हर अतिरिक्त कार्गो अगले कार्गो की कीमत को कम कर रहा है, जिससे होर्मुज के बंद रहने को लेकर कच्चे तेल में शामिल जोखिम प्रीमियम लगातार घट रहा है।\n\n3 नवंबर के चुनाव और भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम की मियाद\nकच्चे तेल में मौजूद भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम पर अमेरिकी चुनावी कैलेंडर का गहरा असर देखा जा रहा है। सितंबर की शुरुआत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि 3 नवंबर के मध्यावधि चुनावों के तुरंत बाद यह संघर्ष समाप्त हो जाना चाहिए और मतदान के फौरन बाद तेल की कीमतों में भारी गिरावट आनी चाहिए। हालांकि, शुक्रवार को एक अमेरिकी अखबार ने दावा किया कि ट्रंप ने अपने सलाहकारों से कहा है कि वे चुनाव के बाद ईरान पर सैन्य हमलों के दोबारा शुरू होने की उम्मीद कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत वाल्ट्ज ने इसे गुमनाम रिपोर्टिंग कहकर खारिज कर दिया।\n\nईरानी पक्ष के भीतर भी समयसीमा को लेकर गहरा मतभेद है। सोमवार को ईरानी अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि वे मध्यावधि चुनाव से पहले किसी समझौते को लेकर काफी निराशावादी हैं। इसके विपरीत, गुरुवार को ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि तेहरान अमेरिकी मतदान से पहले ही एक समझौता चाहता है। इस विरोधाभास ने तेल बाजार के जोखिम प्रीमियम को एक तय समयसीमा तो दे दी है लेकिन कोई स्पष्ट दिशा नहीं दी है। यदि 3 नवंबर के बाद कोई औपचारिक समझौता होता है तो बाजार से जोखिम प्रीमियम पूरी तरह खत्म हो जाएगा, जबकि उसी समयसीमा पर सैन्य बमबारी दोबारा शुरू होने की स्थिति में कीमतों में तेज उछाल आएगा।\n\nकच्चे तेल का तकनीकी ढांचा, समर्थन और प्रतिरोध स्तर\nचार्ट के नजरिए से देखें तो कच्चे तेल की कीमतों में लगातार निचले स्तरों पर सीमित उछाल दर्ज हो रहा है। शुक्रवार को कच्चा तेल 93.50 डॉलर के ठीक ऊपर से बिकवाली का शिकार हुआ और दोबारा उस स्तर को पार नहीं कर सका। सोमवार को 95.00 डॉलर के ठीक ऊपर लगा स्पाइक गुरुवार के 96.00 डॉलर के उच्च स्तर से पहले ही थम गया। 15 सितंबर को 102.00 डॉलर के करीब बने शिखर के बाद से आई हर रैली पिछले उछाल की तुलना में नीचे ही रुक रही है, जो बाजार में बिकवाली के दबाव को दर्शाती है।\n\nनीचे की ओर, सोमवार का निचला स्तर जो कि 90.00 डॉलर के ठीक ऊपर है, पहला अहम तकनीकी समर्थन बना हुआ है। इसके नीचे 88.50 डॉलर का क्षेत्र आता है, जिसने 22 सितंबर और 23 सितंबर को कीमतों को सहारा दिया था। 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) भी बढ़कर इसी स्तर के करीब पहुंच चुका है, इसलिए यदि 88.50 डॉलर का स्तर टूटता है तो यह दोहरा ब्रेकडाउन साबित होगा। जब तक 95.00 डॉलर का स्तर ऊपरी सीमा के रूप में बना रहता है, रुझान बिकवाली की तरफ झुका हुआ है, जिसमें पहला लक्ष्य 90.00 डॉलर और दूसरा आधार 88.50 डॉलर है। दैनिक स्टोकेस्टिक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (Stoch RSI) 37 के आसपास है और 80 के पार से लगातार नीचे गिर रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि गति में अभी और गिरावट की गुंजाइश बाकी है। हालांकि, 96.00 डॉलर के ऊपर दैनिक बंदी इस मंदी के परिदृश्य को अमान्य कर देगी।\n\nताजा बाजार आंकड़ों के मुताबिक, क्रूड ऑयल फ्यूचर्स 94.20 डॉलर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले 92.60 डॉलर के बंद स्तर से 1.73 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। इसका 52-हफ्तों का दायरा 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर के बीच है। तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय आरएसआई 52 पर तटस्थ है, जबकि एमएसीडी 1.73 पर सिग्नल लाइन 2.93 के नीचे बना हुआ है जो -1.20 हिस्टोग्राम के साथ मंदी का रुख दिखाता है। प्रमुख मूविंग एवरेज में 20-दिवसीय ईएमए 94.23 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 90.23 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 80.41 डॉलर पर स्थित है, जो दीर्घकालिक स्तर पर गोल्डन क्रॉस की स्थिति बनाए हुए हैं। पिवट पॉइंट 93.82 डॉलर पर स्थित है, जिसके साथ प्रतिरोध स्तर 94.63 डॉलर (R1) और 95.07 डॉलर (R2) तथा समर्थन स्तर 93.38 डॉलर (S1) और 92.57 डॉलर (S2) पर बने हुए हैं।\n\nडब्ल्यूटीआई क्रूड के बुनियादी कारक और इन्वेंट्री का प्रभाव\nवेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचे जाने वाले कच्चे तेल की प्रमुख श्रेणियों में से एक है, जिसमें ब्रेंट और दुबई क्रूड भी शामिल हैं। अपने कम घनत्व और कम सल्फर सामग्री के कारण डब्ल्यूटीआई को 'लाइट' और 'स्वीट' क्रूड कहा जाता है। यह उच्च गुणवत्ता वाला तेल माना जाता है जिसे आसानी से परिष्कृत किया जा सकता है। यह मुख्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका में निकाला जाता है और कुशिंग हब के माध्यम से वितरित किया जाता है, जिसे वैश्विक पाइपलाइन नेटवर्क का चौराहा माना जाता है।\n\nसभी कमोडिटी संपत्तियों की तरह डब्ल्यूटीआई की कीमतें भी आपूर्ति और मांग के बुनियादी नियमों से संचालित होती हैं। वैश्विक आर्थिक वृद्धि मजबूत मांग पैदा करती है जबकि कमजोर आर्थिक वृद्धि खपत को घटाती है। राजनीतिक अस्थिरता, क्षेत्रीय युद्ध और आर्थिक प्रतिबंध आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर कीमतों को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर का मूल्य भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि तेल का वैश्विक व्यापार मुख्यतः डॉलर में होता है। कमजोर डॉलर तेल को अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए सस्ता बनाता है, जिससे मांग बढ़ती है, जबकि मजबूत डॉलर से मांग पर दबाव बनता है।\n\nअमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान (API) और ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) द्वारा जारी की जाने वाली साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्टें भी कीमतों पर तात्कालिक प्रभाव डालती हैं। भंडार में गिरावट मजबूत मांग या घटती आपूर्ति का संकेत देकर कीमतों को ऊपर धकेलती है, जबकि भंडार में वृद्धि आपूर्ति की अधिकता दर्शाकर कीमतों को नीचे गिराती है। एपीआई की रिपोर्ट प्रत्येक मंगलवार को और ईआईए की रिपोर्ट उसके अगले दिन बुधवार को आती है। लगभग 75 प्रतिशत मौकों पर दोनों रिपोर्टों के आंकड़े 1 प्रतिशत के अंतर के भीतर ही रहते हैं, हालांकि ईआईए एक सरकारी एजेंसी होने के कारण उसके आंकड़ों को बाजार में अधिक आधिकारिक माना जाता है। इसके अलावा 12 सदस्य देशों वाला ओपेक संगठन और रूस जैसे सहयोगी देशों वाला ओपेक+ अपनी उत्पादन सीमाओं से वैश्विक आपूर्ति को नियंत्रित करता है।\n\nवैश्विक बाजारों, मुद्राओं और परिसंपत्तियों पर असर\nकच्चे तेल में आई इस तेजी और भू-राजनीतिक तनाव ने व्यापक वित्तीय बाजारों को भी प्रभावित किया है। मुद्रा बाजार में, मजबूत होते अमेरिकी डॉलर के सामने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) 0.7000 के स्तर का बचाव करने में जुटा है, जो 4 अगस्त के बाद का इसका सबसे निचला स्तर है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स बहु-वर्षीय उच्च स्तर के करीब बनी हुई हैं, क्योंकि तेल की ऊंची कीमतों से मुद्रास्फीति बढ़ने और अक्टूबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाएं तेज हो गई हैं।\n\nडॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) में भी गिरावट पर खरीदारी देखी गई और यह 158.00 के स्तर की तरफ बढ़ गया। बैंक ऑफ जापान के नरम रुख वाले मिनट्स ने येन की बढ़त को सीमित रखा, जबकि अमेरिकी डॉलर को फेड दर वृद्धि की उम्मीदों से अतिरिक्त समर्थन मिला। पिछले सप्ताह अमेरिकी फेड और बैंक ऑफ जापान दोनों ने ही ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की थी और दोनों ही केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति के जोखिमों का सामना करते हुए आगामी आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर रहने का संकेत दे चुके हैं।\n\nसुरक्षित निवेश मानी जाने वाली संपत्तियों में, भू-राजनीतिक चिंताओं के बावजूद मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड के दबाव में सोना गिरकर 4,100 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के दायरे में आ गया, जो अगस्त की शुरुआत के बाद का निचला स्तर है। वहीं क्रिप्टोकरेंसी बाजार में, पिछले हफ्ते 4 प्रतिशत से अधिक चढ़ने के बाद बिटकॉइन 82,800 डॉलर के नीचे कारोबार करता दिखा, जहां स्पॉट बिटकॉइन एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में संस्थागत पूंजी प्रवाह बना हुआ है लेकिन ऊपरी स्तरों पर तेजी की रफ्तार कुछ सुस्त पड़ी है। ब्रिटेन में आर्थिक चिंताओं के बीच डीजल की कीमतों ने रिकॉर्ड स्तर को छू लिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।\n\nइसका आप पर असर\nअंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर आम उपभोक्ताओं के ईंधन खर्च और महंगाई पर पड़ता है।\n\n• भारत में प्रभाव: वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल का 90 से 95 डॉलर के दायरे में बने रहना घरेलू तेल विपणन कंपनियों की खरीद लागत को ऊंचा रखता है। इससे आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल के खुदरा भाव में कटौती की गुंजाइश सीमित हो जाती है और माल ढुलाई महंगी रह सकती है।\n• घरेलू बजट पर असर: ऊर्जा की ऊंची कीमतें परिवहन लागत बढ़ाकर रोजमर्रा की खाद्य वस्तुओं और पैकेज्ड सामानों की कीमतों को प्रभावित करती हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राहत नहीं मिलती है तो घरेलू उपभोक्ताओं को अपने मासिक बजट पर दबाव का सामना करना पड़ सकता है।\n• वैश्विक यात्रियों और लॉजिस्टिक्स: अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों के लिए जेट फ्यूल महंगा होने से लंबी दूरी के हवाई टिकटों की दरों पर असर पड़ता है। लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए भी समुद्री और सड़क परिवहन का खर्च बढ़ जाता है।\n• निवेशकों के लिए रणनीति: ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े शेयरों और कमोडिटी फ्यूचर्स में 95 डॉलर के स्तर पर कड़ा प्रतिरोध देखा जा रहा है। व्यापारियों को सख्त स्टॉप-लॉस के साथ काम करने और अमेरिकी चुनावों से जुड़े घटनाक्रमों पर नजर रखने की जरूरत है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nकच्चे तेल में यह तीव्र उतार-चढ़ाव वाशिंगटन द्वारा ईरान के कूटनीतिक प्रस्ताव को खारिज करने और साथ ही प्रतिबंध राहत की शर्तों पर चल रही पर्दे के पीछे की बातचीत के कारण पैदा हुआ है।\n\n• ईरान के प्रस्ताव पर अमेरिकी अस्वीकृति: ईरान ने सात दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के बदले नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और प्रतिबंधों में छूट की मांग रखी थी। राष्ट्रपति ट्रंप और राजदूत वाल्ट्ज ने इसे पूरी तरह एकतरफा मांग बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया।\n• सऊदी अरब की वैकल्पिक आपूर्ति बहाली: ड्रोन हमलों से 17 दिनों तक बंद रहने के बाद सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन से 3.5 मिलियन बैरल प्रति दिन का प्रवाह शुरू हो गया। इसके अलावा होर्मुज से सऊदी तेल का निर्यात बढ़कर युद्धकालीन उच्च स्तर 5 मिलियन बैरल प्रति दिन के पार पहुंच गया।\n• अमेरिकी चुनाव और नीतिगत अनिश्चितता: 3 नवंबर के अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद संघर्ष खत्म होने या दोबारा सैन्य हमले शुरू होने की परस्पर विरोधी खबरों ने बाजार को अनिश्चित कर रखा है। व्यापारी दोनों संभावनाओं के बीच अपनी पोजीशन बदल रहे हैं जिससे कीमतों में टिकाऊ रुझान नहीं बन पा रहा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए क्या शर्तें रखी थीं?\nईरान ने मांग की थी कि वाशिंगटन पहले उसकी बंदरगाह नाकेबंदी हटाए, कच्चे तेल पर लगे प्रतिबंध खत्म करे और फ्रीज संपत्तियों को मुक्त करे, जिसके सात दिन बाद जलडमरूमध्य खोला जाएगा।\n\n2. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाया?\nराष्ट्रपति ट्रंप ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया और कहा कि ऐसी शर्तें एक साल पहले स्वीकार की जा सकती थीं जब कोई युद्ध या नाकेबंदी नहीं थी।\n\n3. सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन से कितना तेल निर्यात बहाल हुआ है?\n17 दिनों के व्यवधान के बाद पाइपलाइन से लगभग 3.5 मिलियन बैरल प्रति दिन का प्रवाह फिर शुरू हो गया है, जो इसकी कुल 7 मिलियन बैरल क्षमता का आधा है।\n\n4. सितंबर के अंतिम सप्ताह में होर्मुज जलडमरूमध्य से कितने जहाजों का आवागमन हुआ?\n27 सितंबर को समाप्त हुए सप्ताह में होर्मुज से 132 जहाजों का आवागमन दर्ज किया गया, जो इससे पिछले सप्ताह के 116 जहाजों से अधिक है।\n\n5. डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल के लिए तत्काल समर्थन और प्रतिरोध स्तर क्या हैं?\nडब्ल्यूटीआई के लिए 95.00 डॉलर पर कड़ा प्रतिरोध बना हुआ है, जबकि नीचे की तरफ पहला समर्थन 90.00 डॉलर और प्रमुख आधार 88.50 डॉलर पर है।",
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  "publishedAt": "2026-09-29",
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