# ईरान संघर्ष और टैरिफ की दोहरी मार से उलझा अमेरिकी महंगाई का गणित, जानिए बाजार पर इसका असली असर

> कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और चीनी सामानों पर लगे स्थायी टैरिफ ने अमेरिकी खुदरा बाजार में महंगाई का संतुलन बिगाड़ दिया है। ऊर्जा की लागत युद्ध खत्म होते ही घट सकती है, लेकिन खिलौनों और परिधानों पर बढ़े शुल्क लंबे समय तक बने रहेंगे।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-15 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/iran-sangharsh-aur-tariffs-ki-dohari-maar-se-uljha-us-inflation-ka-ganit-market-par-asar-47979 · **Language:** Hindi
**Tags:** मुद्रास्फीति, कच्चा तेल, टैरिफ, डाउ जोंस, वॉलमार्ट, अमेरिकी अर्थव्यवस्था, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक, वित्त

अमेरिकी अर्थव्यवस्था में हालिया मुद्रास्फीति के आंकड़े दो अलग तरह के दबावों को उजागर करते हैं, जिनकी प्रकृति और प्रभाव एक दूसरे से काफी भिन्न हैं। सितंबर के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में मुख्य दर 3.7 प्रतिशत दर्ज की गई, जिसमें ऊर्जा की कीमतों में आई 20.4 प्रतिशत की सालाना छलांग का योगदान लगभग 1.3 अंक रहा। यह ऊर्जा दबाव पूरी तरह से कच्चे तेल के उतार चढ़ाव पर टिका है। जुलाई के पहले हफ्ते में ब्रेंट कच्चा तेल युद्ध पूर्व स्तर पर आ गया था, लेकिन 8 जुलाई को युद्धविराम टूटने के बाद महीने के अंत तक कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं। दूसरी तरफ, खाद्य और ऊर्जा को छोड़कर अन्य वस्तुओं की कीमतों पर टैरिफ का असर दिख रहा है, जहां महंगाई दर फरवरी के 1.0 प्रतिशत से सुस्त होकर 0.7 प्रतिशत पर आ गई है। टैरिफ की नीति जब भी किसी कानूनी अड़चन के कारण रोकी गई, सरकार ने तत्काल नया ढांचा लागू कर दिया। नतीजा यह है कि युद्ध समाप्त होने पर ऊर्जा का भारी उछाल तो हेडलाइन आंकड़ों से हट जाएगा, लेकिन टैरिफ के कारण बढ़े खुदरा दाम दुकानों की अलमारियों पर जस के तस बने रहेंगे।

## शेयर बाजारों पर दोनों दबावों का अलग असर
डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज में कंपनियों का भार उनके शेयर भाव के अनुपात में तय होता है, जिसके कारण यह सूचकांक इन लागत झटकों से गहराई से प्रभावित हुआ है। होम डिपो जैसी कंपनी, जो गृह निर्माण और मरम्मत से जुड़े उन सामानों का कारोबार करती है जो युद्ध से प्रेरित ऊंची ब्याज दरों और परिवहन लागत से सीधे प्रभावित हैं, उसका डाउ में भार वॉलमार्ट की तुलना में ढाई गुना अधिक है। वॉलमार्ट उन दैनिक उपभोक्ता वस्तुओं की बिक्री करती है जिन पर सीधे आयात शुल्क की मार पड़ी है। इसी असंतुलन की वजह से डाउ फ्यूचर्स अपने 5 अगस्त के रिकॉर्ड उच्च स्तर से लगभग 6 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहे हैं, जबकि एसएंडपी 500 फ्यूचर्स अपने सर्वकालिक शिखर से महज 2 प्रतिशत की दूरी पर हैं। दोनों प्रमुख सूचकांकों के बीच का यह अंतर साफ तौर पर दर्शाता है कि अर्थव्यवस्था के अलग अलग क्षेत्र इन लागतों को किस तरह वहन कर रहे हैं।

## टैरिफ का कानूनी घटनाक्रम और 20 प्रतिशत का बोझ
आयात शुल्कों के कानूनी मोर्चे पर इस वर्ष कई बड़े बदलाव देखने को मिले। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी को अपने ऐतिहासिक फैसले में व्यवस्था दी कि आपातकालीन शक्तियों से जुड़ा कानून 2025 के अधिकांश टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता। इसके तुरंत बाद, 24 फरवरी को एक दूसरे कानून के तहत 10 प्रतिशत का अतिरिक्त अधिभार लागू कर दिया गया। जब यह अधिभार 24 जुलाई को समाप्त हुआ, उसी दिन से चीन पर धारा 301 के तहत 12.5 प्रतिशत का नया शुल्क लगा दिया गया। वर्ष 2019 से चीनी खिलौनों पर लागू 7.5 प्रतिशत का धारा 301 शुल्क पहले से बरकरार था। इस प्रकार, सितंबर 2025 में चीनी खिलौनों पर कुल आयात शुल्क 37.5 प्रतिशत तक पहुंच गया था, जो वर्तमान में 20 प्रतिशत पर स्थिर है और इसके हटने की कोई तय समयसीमा घोषित नहीं की गई है।

सर्वोच्च अदालत ने यह भी तय किया था कि बंदरगाहों पर आयातकों द्वारा चुकाए गए धन को वापस लौटाया जाए। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने मार्च 2025 में इन शुल्कों को एक बार का मूल्य समायोजन करार दिया था। मुद्रास्फीति की गणितीय दर के लिहाज से उनकी बात सटीक लग सकती है, लेकिन एकमुश्त मूल्य समायोजन का व्यावहारिक अर्थ यह है कि आम खरीदार को हर खरीद पर बढ़ी हुई कीमत ही चुकानी पड़ती है।

## खिलौनों से लेकर परिधानों तक खुदरा कीमतों में उछाल
खुदरा आंकड़ों पर नजर डालें तो खिलौनों की कीमतें अगस्त में 2.3 प्रतिशत गिरी थीं, लेकिन सितंबर में अचानक 4.2 प्रतिशत बढ़ गईं। मासिक आंकड़ों के इस उतार चढ़ाव को अगर सालाना आधार पर देखें, तो खिलौनों की महंगाई 2.3 प्रतिशत से सीधे उछलकर 6.6 प्रतिशत पर पहुंच चुकी है। इसी प्रकार लड़कों के कपड़ों की कीमतें साल दर साल 3.9 प्रतिशत से बढ़कर 7.8 प्रतिशत पर पहुंच गईं और कंप्यूटर के दामों में 9.7 प्रतिशत का भारी इजाफा हुआ है। यह सब ऐसे समय हुआ जब अधिकांश टिकाऊ सामानों की औसत कीमतों में नरमी का रुख था। टॉय एसोसिएशन के अनुसार अमेरिका में बिकने वाले हर पांच में से चार खिलौने चीन में बनते हैं। वॉलमार्ट ने स्पष्ट किया है कि जुलाई तिमाही में उसकी जनरल मर्चेंडाइज बिक्री में खिलौनों की मुख्य भूमिका रही, जिसका सीधा अर्थ है कि कीमत बढ़ने के साथ ही खरीदारी का कुल बिल भी बढ़ गया।

खिलौना निर्माता मैटेल ने फरवरी में स्पष्ट संकेत दिया था कि उसकी कीमतों में बढ़ोतरी का पूरा असर 2026 के मध्य तक दिखेगा। इस लिहाज से सितंबर का भाव पुराने टैरिफ के तहत तय छुट्टियों का पहला भाव है, जिसे अब नया 20 प्रतिशत का टैरिफ इसी उच्च स्तर पर बनाए रखेगा। डोनाल्ड ट्रंप ने 30 अप्रैल 2025 को टिप्पणी की थी कि बच्चों के पास तीस गुड़ियों के बजाय दो गुड़ियां हो सकती हैं और उन दो गुड़ियों के लिए कुछ डॉलर अधिक चुकाने होंगे। लेकिन हकीकत यह है कि खिलौनों पर 6.6 प्रतिशत अधिक खर्च करने वाले उपभोक्ता की वास्तविक आमदनी पिछले वर्ष की तुलना में 0.7 प्रतिशत घट चुकी है, जिसका बड़ा कारण पेट्रोल की ऊंची लागत है। सरल शब्दों में कहें तो टैरिफ ने उत्पाद का दाम तय किया और युद्ध ने उपभोक्ता का बजट सीमित कर दिया।

## आवास बाजार में मंदी और फर्नीचर के गिरते दाम
खिलौनों के विपरीत, फर्नीचर और बिस्तर के सामान की कीमतें सितंबर में 0.8 प्रतिशत गिरीं और सालाना आधार पर इनमें 2.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। उपकरणों के दाम 1.0 प्रतिशत घटे और टेलीविजन के मूल्यों में 1.9 प्रतिशत की कमी आई। हालांकि इन सभी वस्तुओं पर भी वही 20 प्रतिशत का आयात शुल्क लागू है, फिर भी इनके दाम गिर रहे हैं क्योंकि इनकी मांग घर बदलने और नए मकान खरीदने से जुड़ी होती है। वर्तमान में अमेरिकी नागरिक नए मकानों में जाने से बच रहे हैं। फ्रेडी मैक के आंकड़ों के अनुसार 8 अक्टूबर को 30 साल के फिक्स्ड मॉर्गेज की दर 7.40 प्रतिशत दर्ज की गई, जो एक साल पहले 6.30 प्रतिशत थी।

मॉर्गेज दरों में इस बढ़ोतरी की जड़ें 10 साल के ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में छिपी हैं, जो युद्ध शुरू होने के बाद से पूरा 1 प्रतिशत बढ़ चुका है। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट का मानना है कि जैसे ही युद्ध समाप्त होगा, बॉन्ड यील्ड गिरकर मध्य फरवरी के स्तर पर वापस आ जाएगी। नेशनल एसोसिएशन ऑफ रियल्टर्स के अनुसार सितंबर में पुराने घरों की बिक्री की सालाना दर घटकर 3.99 मिलियन रह गई। अगस्त और सितंबर इस पूरे वर्ष के सबसे सुस्त बिक्री वाले महीने साबित हुए हैं।

## अरबों डॉलर की रिफंड राशि और किराने का गलियारा
अदालत के आदेश के बाद सीमा शुल्क विभाग ने अब तक 134.7 अरब डॉलर के रिफंड दावों को स्वीकार किया है। जुलाई को समाप्त तिमाही में वॉलमार्ट को लगभग 2.9 अरब डॉलर का रिफंड मिला, जबकि टारगेट को 994 मिलियन डॉलर और होम डिपो को 685 मिलियन डॉलर प्राप्त हुए। वॉलमार्ट ने इस नकदी का उपयोग 11 हजार से अधिक उत्पादों पर अस्थायी मूल्य कटौती करने के लिए किया, जिसमें किराने का सामान और आवश्यक वस्तुएं सबसे आगे रहीं। हालांकि इसी तिमाही में कंपनी का ईंधन खर्च 2 अरब डॉलर से अधिक बढ़ गया था। सितंबर के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में किराने की कीमतें महीने के आधार पर 0.1 प्रतिशत घटीं और सालाना दर 2.2 प्रतिशत से घटकर 1.8 प्रतिशत पर आ गई। इससे साफ जाहिर होता है कि आयातकों को मिला रिफंड किराने की वस्तुओं पर छूट बनकर ग्राहकों तक पहुंचा, लेकिन टैरिफ का स्थायी बोझ खिलौनों की गलियों में अटका रहा।

## स्वास्थ्य बीमा के आंकड़ों में छिपा सांख्यिकीय भ्रम
कोर मुद्रास्फीति, जिसमें खाद्य और ईंधन शामिल नहीं होते, आधिकारिक तौर पर 2.6 प्रतिशत दर्ज की गई है। इस आंकड़े के नीचे रहने का मुख्य कारण दो बीमा घटकों की गणना पद्धति है, जहां स्वास्थ्य बीमा में सालाना आधार पर 9 प्रतिशत और मोटर वाहन बीमा में 5 प्रतिशत की गिरावट दिखाई गई है। श्रम सांख्यिकी ब्यूरो स्वास्थ्य पॉलिसी की प्रीमियम दरों को सीधे दर्ज नहीं कर पाता, इसलिए वह दावों के निपटारे के बाद बीमा कंपनियों के बचे हुए लाभ मार्जिन को मापता है, जिसमें आंकड़े करीब दस महीने की देरी से चलते हैं। सूचकांक में स्वास्थ्य बीमा 9 प्रतिशत सस्ता इसलिए दिख रहा है क्योंकि कंपनियों का मुनाफा मार्जिन संकुचित हुआ था, जबकि केएफएफ के शोध के अनुसार आम नागरिक का वास्तविक मासिक प्रीमियम भुगतान इस वर्ष 58 प्रतिशत बढ़कर औसतन 178 डॉलर प्रति माह हो गया है।

बीमा कंपनियों का जो मार्जिन सरकारी सूचकांक में अब भी गिरता हुआ दर्ज हो रहा है, वह वास्तविक बाजार में पहले ही उलट चुका है। डाउ में 4.4 प्रतिशत भार रखने वाली यूनाइटेडहेल्थ ने 13 अक्टूबर को जानकारी दी कि उसके कुल प्रीमियम में से दावों के भुगतान का हिस्सा घटकर 88.4 प्रतिशत रह गया, जो पिछले वर्ष 89.9 प्रतिशत था। कंपनी का समायोजित प्रति शेयर लाभ भी 2.92 डॉलर से बढ़कर 4.69 डॉलर दर्ज किया गया। यदि बीमा क्षेत्र की इस सांख्यिकीय विसंगति को बाहर कर दिया जाए, तो वास्तविक कोर मुद्रास्फीति 2.6 प्रतिशत के बजाय 2.9 प्रतिशत के करीब पहुंच जाती है।

## तकनीकी संकेत और आने वाले प्रमुख पड़ाव
तकनीकी चार्ट पर डाउ फ्यूचर्स ने सितंबर की शुरुआत, मध्य सितंबर और 13 अक्टूबर को लगातार निचले उच्च स्तर बनाए हैं। इसके विपरीत, अक्टूबर के पहले दस दिनों में सूचकांक ने एक ही निचले स्तर से दो बार मजबूती से उछाल दिखाया। दैनिक स्टोकेस्टिक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी स्टोक आरएसआई अपने दायरे के मध्य में स्थित है और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक जारी होने के समय उस निचले स्तर से धीरे धीरे उबर रहा था। इसका अर्थ है कि मुद्रास्फीति के आंकड़े किसी अत्यधिक खिंचे हुए बाजार के बजाय एक सामान्य तकनीकी उछाल के दौरान सामने आए।

कमोडिटी बाजार के ताजा रुझान की बात करें तो क्रूड ऑयल फ्यूचर्स वर्तमान में 96.41 डॉलर के स्तर पर हैं, जो पिछले बंद भाव 95.09 डॉलर से 1.39 प्रतिशत अधिक है। क्रूड ऑयल का 52 हफ्तों का दायरा 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर रहा है। 14 दिवसीय आरएसआई 59 पर है और एमएसीडी हिस्टोग्राम 0.23 के साथ तेजी का रुझान दिखा रहा है। प्रमुख मूविंग एवरेज के स्तरों पर नजर डालें तो 20 दिनों का ईएमए 92.99 डॉलर, 50 दिनों का ईएमए 90.89 डॉलर और 200 दिनों का ईएमए 81.85 डॉलर पर है, जो लंबी अवधि के अपट्रेंड और गोल्डन क्रॉस को पुष्ट करते हैं। ट्रेडिंग के लिहाज से 95.20 डॉलर का पिवट स्तर महत्वपूर्ण है, जबकि पहला रेजिस्टेंस 97.95 डॉलर और दूसरा 99.48 डॉलर पर मौजूद है। गिरावट की स्थिति में 93.67 डॉलर और 90.92 डॉलर मजबूत सपोर्ट का काम करेंगे। 14 दिवसीय एटीआर 4.09 डॉलर के आसपास बना हुआ है।

शेयर बाजार का झुकाव एसएंडपी 500 के मुकाबले डाउ की तरफ कमजोर बना हुआ है, क्योंकि जब तक मॉर्गेज दरें ऊंची हैं और फर्नीचर उपकरण सस्ते हो रहे हैं, तब तक चक्रीय सुधार अधूरा रहेगा। 10 नवंबर को आने वाला अक्टूबर का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक इस दिशा में सबसे बड़ी परीक्षा होगा। यदि किराने के दाम और गिरते हैं, तो यह साबित होगा कि रिफंड की शक्ति डीजल की महंगाई पर भारी पड़ रही है। वहीं, होम डिपो के 17 नवंबर और वॉलमार्ट के 19 नवंबर को आने वाले तिमाही नतीजे खुदरा मांग की असली तस्वीर पेश करेंगे। युद्ध समाप्त होने से ऊर्जा की लागत घटेगी और होम फर्निशिंग क्षेत्र को राहत मिलेगी, लेकिन टैरिफ का असर झेल रहे आम उपभोक्ता को इस राहत के लिए लंबा इंतजार करना होगा।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी मुद्रास्फीति और टैरिफ नीतियों का सीधा असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, आयातित सामानों की कीमतों और शेयर बाजार के निवेशकों पर पड़ता है।

- **उपभोक्ता बजट:** गैर-जरूरी उपभोक्ता सामानों जैसे खिलौने और कपड़ों की कीमतें 6 से 8 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। आने वाले त्योहारी सीजन में ग्राहकों को सीमित विकल्प और महंगे उत्पादों के साथ खरीदारी करनी होगी।
- **किराना बनाम टिकाऊ सामान:** बड़ी खुदरा कंपनियों द्वारा कस्टम रिफंड का इस्तेमाल किराना उत्पादों में छूट देने के लिए किया जा रहा है। ग्राहकों को दैनिक खाद्य पदार्थों में मामूली राहत मिलेगी, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स और होम अप्लायंसेज पर यह छूट लागू नहीं होगी।
- **रियल एस्टेट और होम लोन:** 30 वर्षीय मॉर्गेज दरें 7.40 प्रतिशत तक पहुंच जाने से मकानों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लग गया है। घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों को ऊंची ईएमआई लागत का सामना करना पड़ रहा है।
- **निवेशक पोर्टफोलियो:** डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज में शामिल चक्रीय कंपनियों के शेयर एसएंडपी 500 से पिछड़ रहे हैं। कमोडिटी और ऊर्जा से जुड़े ट्रेडर क्रूड ऑयल के 95.20 डॉलर पिवट और 97.95 डॉलर रेजिस्टेंस स्तरों पर नजर रख सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह आर्थिक स्थिति भू-राजनीतिक तनावों के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट और लगातार बदले जा रहे व्यापारिक आयात शुल्कों के संयुक्त प्रभाव से उत्पन्न हुई है।

- **भू-राजनीतिक संघर्ष और तेल कीमतें:** मध्य पूर्व में संघर्ष विराम विफल होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं। इससे परिवहन लागत बढ़ी और हेडलाइन सीपीआई में ऊर्जा का योगदान बढ़कर 1.3 अंक तक पहुंच गया।
- **कानूनी फेरबदल और 20 प्रतिशत टैरिफ:** सुप्रीम कोर्ट द्वारा शुरुआती 2025 टैरिफ को अवैध ठहराए जाने के बाद सरकार ने धारा 301 के तहत नया ढांचा तैयार किया। पूर्ववर्ती 7.5 प्रतिशत और नए 12.5 प्रतिशत शुल्क के जुड़ने से चीनी सामानों पर 20 प्रतिशत का स्थायी बोझ बन गया।
- **बॉन्ड यील्ड और सख्त वित्तीय स्थितियां:** युद्ध के चलते अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में पूरे एक प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसने बंधक दरों को 7.40 प्रतिशत पर पहुंचा दिया, जिससे रियल एस्टेट गतिविधि और होम फर्निशिंग की मांग ठप पड़ गई।
- **सांख्यिकीय गणना में विलंब:** स्वास्थ्य और वाहन बीमा घटकों की गणना में 10 महीने की देरी के कारण कोर मुद्रास्फीति वास्तविकता से कम दिखाई दे रही है। बीमा कंपनियों के सुधरते लाभ मार्जिन आने वाले महीनों में मुद्रास्फीति के आंकड़ों में फिर से परिलक्षित होंगे।

## सवाल-जवाब

### 1. सितंबर के सीपीआई आंकड़ों में ऊर्जा और टैरिफ का कितना प्रभाव रहा?
सितंबर की 3.7 प्रतिशत की हेडलाइन मुद्रास्फीति में ऊर्जा की 20.4 प्रतिशत वृद्धि का योगदान 1.3 अंक रहा, जबकि गैर-खाद्य और गैर-ऊर्जा सामानों पर टैरिफ का असर लगभग 0.1 अंक का रहा।

### 2. चीनी खिलौनों पर इस समय कुल कितना आयात शुल्क लागू है?
वर्तमान में चीनी खिलौनों पर कुल 20 प्रतिशत का आयात शुल्क लागू है, जिसमें 2019 का 7.5 प्रतिशत और जुलाई में लागू हुआ 12.5 प्रतिशत का धारा 301 शुल्क शामिल है।

### 3. रिटेल कंपनियों को मिले कस्टम रिफंड का क्या उपयोग किया गया?
सीमा शुल्क विभाग ने 134.7 अरब डॉलर के रिफंड स्वीकृत किए, जिसमें से वॉलमार्ट को 2.9 अरब डॉलर मिले और कंपनी ने इसका बड़ा हिस्सा 11,000 से अधिक किराना उत्पादों के दाम घटाने में लगाया।

### 4. फर्नीचर और घरेलू उपकरणों की कीमतें क्यों गिर रही हैं?
30 साल की मॉर्गेज दरें 7.40 प्रतिशत तक बढ़ जाने से घरों की बिक्री सुस्त हो गई है, जिसके चलते मांग घटने से इन सामानों की कीमतों में गिरावट आई है।

### 5. कच्चे तेल का मौजूदा तकनीकी रुझान क्या दर्शाता है?
क्रूड ऑयल 96.41 डॉलर पर ट्रेड कर रहा है, जहां 14-दिवसीय आरएसआई 59 पर है और मूविंग एवरेज लंबी अवधि के अपट्रेंड को दर्शा रहे हैं।

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