ईरान से कूटनीतिक बातचीत की उम्मीदों के बीच फिसला अमेरिकी डॉलर, 101.75 के स्तर पर पहुंचा इंडेक्स अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक समझौते की नई संभावनाओं से अमेरिकी डॉलर इंडेक्स गिरकर 101.75 पर आ गया है, जिससे सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर की मांग घटी है। वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में सप्ताह की शुरुआत के साथ अमेरिकी डॉलर पर बिकवाली का नया दबाव देखा गया। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को कूटनीतिक वार्ता के जरिए सुलझाने की ताजा उम्मीदों ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को बढ़ाया है, जिससे सुरक्षित विकल्प माने जाने वाले डॉलर की मांग में नरमी आई। छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की बास्केट के मुकाबले ग्रीनबैक की मजबूती को मापने वाला अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) शुक्रवार के 101.60 के निचले स्तर से हुई मामूली रिकवरी को कायम रखने में विफल रहा। यूरोपीय कारोबारी सत्र की शुरुआत में यह इंडेक्स 0.20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ 101.75 के स्तर के आसपास कारोबार करता नजर आया। पश्चिम एशिया में कूटनीतिक बातचीत और होर्मुज जलडमरूमध्य पर हलचल बाजार में डॉलर की बिकवाली के पीछे पश्चिम एशिया से जुड़े कूटनीतिक घटनाक्रम प्रमुख कारण बने हैं। ईरानी वार्ताकारों ने रविवार को लगातार तीसरे दिन कतर के मध्यस्थों के साथ बैठकें कीं। इस दौरान ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के जलमार्ग को फिर से खोलने के लिए दो दिवसीय कार्ययोजना का प्रस्ताव रखा गया, जो इस शर्त पर आधारित है कि अमेरिका उसकी तय शर्तों को पूरा करे। इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने भी बाजार की धारणा पर असर डाला। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और ईरान समझौता करने का इच्छुक है। इन संकेतों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक जोखिम की आशंकाओं को कुछ हद तक शांत किया, जिससे पारंपरिक सुरक्षित निवेश के तौर पर अमेरिकी डॉलर की खरीदारी में कमी आई। तकनीकी संकेत: 100-घंटे के सिंपल मूविंग एवरेज के नीचे दबाव तकनीकी विश्लेषण के लिहाज से डॉलर इंडेक्स इस समय कमजोरी के दायरे में फंसा दिखाई दे रहा है। 102.10 के स्तर पर स्थित 100-घंटे के सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) के नीचे बने रहने से इसका इंट्राडे रुख नकारात्मक बना हुआ है। गति संकेतकों में मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) मामूली रूप से नकारात्मक दायरे में फिसल गया है, जबकि रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) लगभग 41 के स्तर पर बना हुआ है। लाइव तकनीकी आंकड़ों के अनुसार 14-अवधि का RSI 51 पर दर्ज है, जबकि MACD 0.23 के स्तर पर है जो इसके 0.33 के सिग्नल स्तर से नीचे है, जिससे इसका हिस्टोग्राम -0.10 की मंदी का संकेत दे रहा है। ये तकनीकी संकेतक दर्शाते हैं कि DXY में सुधार का प्रयास गति खो रहा है और टिकाऊ तेजी बनाने में संघर्ष जारी है। डॉलर इंडेक्स में तुरंत दबाव कम करने के लिए खरीदारों को 100-घंटे के SMA के इस अवरोध को पार कर उसके ऊपर टिकना होगा। नीचे की तरफ 101.60 का स्तर तत्काल समर्थन के रूप में सामने आता है, जिसके बाद अक्टूबर महीने का स्विंग लो लगभग 101.45 पर अगला अहम आधार है। 20-दिवसीय समर्थन भी करीब 101.45 के आसपास स्थित है। यदि इंडेक्स 101.45 से नीचे मजबूती से टूटता है, तो गिरावट और गहरी हो सकती है। ऐसी स्थिति में DXY 101.00 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसलकर 100-दिवसीय SMA समर्थन क्षेत्र 100.70 की तरफ बढ़ सकता है। दैनिक स्तर पर 52 हफ्तों का दायरा 95.55 से 102.95 के बीच रहा है, जबकि पिवट बिंदु 101.83 पर बना हुआ है, जिसके ऊपर रेजिस्टेंस R1 101.92 और R2 102.09 पर है, वहीं सपोर्ट S1 101.66 और S2 101.56 पर स्थित है। वैश्विक वित्तीय तंत्र में अमेरिकी डॉलर और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति अमेरिकी डॉलर संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा होने के साथ-साथ दुनिया के कई अन्य देशों में भी स्थानीय नोटों के समानांतर स्वतंत्र रूप से उपयोग की जाने वाली मुद्रा है। वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार में इसकी हिस्सेदारी 88 प्रतिशत से अधिक है, जहां 2022 के आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन औसतन 6.6 ट्रिलियन डॉलर के वित्तीय लेनदेन होते हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड की जगह दुनिया की प्राथमिक आरक्षित मुद्रा का स्थान हासिल किया था। अपने अधिकांश इतिहास में डॉलर सोने के समर्थन पर आधारित था, जिसे 1971 के ब्रेटन वुड्स समझौते के समापन के साथ समाप्त कर दिया गया था। अमेरिकी डॉलर के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे निर्णायक तत्व देश की मौद्रिक नीति है, जिसका निर्धारण फेडरल रिजर्व (Fed) करता है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक के पास मुख्य रूप से दो जिम्मेदारियां हैं: कीमतों में स्थिरता बनाए रखना यानी मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना और अधिकतम रोजगार सुनिश्चित करना। इन दोनों लक्ष्यों को हासिल करने के लिए फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में समायोजन को अपने प्रमुख हथियार के तौर पर इस्तेमाल करता है। जब कीमतें बहुत तेजी से बढ़ती हैं और महंगाई फेड के 2 प्रतिशत के वार्षिक लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है। ब्याज दरों में यह वृद्धि डॉलर के मूल्य को मजबूती प्रदान करती है। इसके विपरीत, जब महंगाई दर 2 प्रतिशत से नीचे आ जाती है या बेरोजगारी दर चिंताजनक स्तर तक बढ़ जाती है, तब फेड ब्याज दरों में कटौती करता है, जिसका सीधा दबाव डॉलर पर पड़ता है। असाधारण वित्तीय संकटों के समय फेडरल रिजर्व अतिरिक्त नकदी का प्रवाह बढ़ाने के लिए डॉलर की छपाई करके मात्रात्मक सहजता (Quantitative Easing या QE) लागू कर सकता है। यह एक गैर-मानक नीति उपाय है जिसका उपयोग तब किया जाता है जब बैंकों के बीच एक-दूसरे को ऋण देने का भरोसा समाप्त हो जाता है और ऋण प्रवाह सूख जाता है। यह अंतिम उपाय के रूप में अपनाया जाता है जब ब्याज दरों में सामान्य कटौती से अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाते। 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान क्रेडिट संकट से निपटने के लिए फेड ने इसी रणनीति का इस्तेमाल किया था। इसमें फेड नए डॉलर बनाकर वित्तीय संस्थानों से मुख्य रूप से अमेरिकी सरकारी बॉन्ड खरीदता है, जिससे आमतौर पर डॉलर कमजोर होता है। इसके उलट, मात्रात्मक कसाव (Quantitative Tightening या QT) वह प्रक्रिया है जिसमें केंद्रीय बैंक वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व होने वाले बॉन्ड्स के मूलधन को नए निवेश में नहीं लगाता, जो आमतौर पर डॉलर को मजबूती देता है। वैश्विक मुद्राओं, सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार पर असर डॉलर पर बने इस दबाव का असर अन्य वित्तीय संपत्तियों पर भी साफ दिखाई दिया। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) ने एशियाई सत्र की अपनी गिरावट को पलट दिया, क्योंकि ईरान से जुड़ी कूटनीतिक प्रगति ने जोखिम वाली मुद्राओं को सहारा दिया। हालांकि ऑस्ट्रेलिया के रिजर्व बैंक (RBA) के आगामी फैसले से पहले ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पिछले गुरुवार के एक महीने के उच्चतम स्तर से नीचे ही बना रहा। दूसरी ओर, USD/JPY की जोड़ी में सप्ताह की शुरुआत में सुधार देखने को मिला और यह बैंक ऑफ जापान की बैठक के बाद बने 157.00 से नीचे के स्तर से उबरकर एशियाई सत्र में 158.00 के करीब पहुंच गई। जापानी वित्त मंत्री तात्सुकी कातायामा की ओर से संभावित बाजार हस्तक्षेप की नई चेतावनी का भी इस जोड़ी पर खास असर नहीं पड़ा। कमोडिटी बाजार में सोने ने सप्ताह की शुरुआत मजबूती के साथ की और लगातार दो दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ दिया। शुक्रवार को सोने के भाव गिरकर 3,900 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गए थे, जो अक्टूबर 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर था। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त होने की कूटनीतिक उम्मीदों ने डॉलर को सीमित रखा, जिससे सोने को कुछ सहारा मिला। हालांकि तेल की वजह से बढ़ती महंगाई के चलते फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाएं अभी भी बनी हुई हैं, जो बिना ब्याज वाली इस पीली धातु के लिए आगे बाधा बन सकती हैं। डिजिटल संपत्तियों के बाजार में बिटकॉइन, इथेरियम और रिपल ने अक्टूबर महीने में लगातार चार हफ्तों की गिरावट के बाद सोमवार को मामूली सुधार दर्ज किया। बिटकॉइन अपने अहम समर्थन क्षेत्रों से संभलकर 78,462 डॉलर के ऊपर पहुंच गया, जबकि इथेरियम 2,295 डॉलर के स्तर से ऊपर निकला, हालांकि यह अभी भी प्रमुख एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज से नीचे है। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी और पश्चिम एशिया में कूटनीतिक बातचीत की प्रगति का सीधा असर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आयात और निवेश साधनों पर पड़ेगा। • भारत में: डॉलर के नरम होने से भारतीय आयातकों और कच्चा तेल खरीदने वाली कंपनियों के लिए लागत का दबाव कुछ कम हो सकता है। यदि यह रुख जारी रहता है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता बने रहने से घरेलू मुद्रास्फीति पर सकारात्मक असर पड़ेगा। • वैश्विक निवेशकों के लिए: सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में डॉलर की चमक कम होने से अंतरराष्ट्रीय पूंजी जोखिम वाली संपत्तियों और उभरते बाजारों की ओर लौट सकती है। इसका मतलब है कि विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय इक्विटी बाजारों में अपनी बिकवाली को थाम सकते हैं। • सोना और कमोडिटी खरीदारों के लिए: डॉलर इंडेक्स में गिरावट आमतौर पर सोने और चांदी की कीमतों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सहारा देती है। खरीदारों को घरेलू बाजार में आभूषण और बुलियन खरीदते समय कीमतों में संभावित उछाल के लिए तैयार रहना चाहिए। • क्रिप्टोकरेंसी और जोखिम संपत्तियों के लिए: डॉलर की नरमी से बिटकॉइन और प्रमुख डिजिटल टोकन को जरूरी सपोर्ट मिला है। अल्पकालिक ट्रेडर्स के लिए यह मौजूदा सपोर्ट स्तरों पर खरीदारी और स्थिरता का संकेत बन सकता है। ऐसा क्यों हुआ डॉलर इंडेक्स में गिरावट और वैश्विक बाजार में सुरक्षित निवेश की मांग कम होने के पीछे कूटनीतिक बातचीत और तकनीकी अवरोध मुख्य वजह बने हैं। • सीधा कारण: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए कतर की मध्यस्थता में चल रही बातचीत और होर्मुज जलमार्ग खोलने के ईरानी प्रस्ताव ने सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की खरीदारी को घटा दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से बातचीत सही दिशा में होने के बयान ने इस धारणा को और मजबूती दी। • तकनीकी कारक: डॉलर इंडेक्स 100-घंटे के मूविंग एवरेज 102.10 से नीचे बना हुआ है और मोमेंटम इंडिकेटर्स नकारात्मक रुझान दिखा रहे हैं। इसके चलते तकनीकी स्तर पर बिकवाली के सौदे बढ़े हैं। • आगे क्या होने की संभावना है: बाजार प्रतिभागी अब होर्मुज जलमार्ग से जुड़े कूटनीतिक घटनाक्रमों और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति पर नजर रखेंगे। यदि कूटनीतिक वार्ता विफल होती है या ऊर्जा संकट से महंगाई बढ़ती है, तो डॉलर में दोबारा उछाल आ सकता है। सवाल-जवाब 1. सोमवार को अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) में गिरावट क्यों आई? अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए चल रही कूटनीतिक वार्ताओं और डोनाल्ड ट्रंप के सकारात्मक बयानों से सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की मांग घटी है। 2. डॉलर इंडेक्स इस समय किस स्तर पर कारोबार कर रहा है? डॉलर इंडेक्स 0.20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ 101.75 के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा है। 3. होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान ने क्या प्रस्ताव दिया है? ईरान ने कतर के मध्यस्थों के साथ बैठक में कुछ अमेरिकी शर्तों की पूर्ति पर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए दो दिवसीय योजना का प्रस्ताव रखा है। 4. तकनीकी रूप से डॉलर इंडेक्स के लिए महत्वपूर्ण अवरोध स्तर क्या है? डॉलर इंडेक्स के लिए 102.10 पर स्थित 100-घंटे का सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) तात्कालिक अहम अवरोध बना हुआ है। 5. यदि डॉलर इंडेक्स 101.45 से नीचे गिरता है तो अगला समर्थन क्या होगा? 101.45 का स्तर टूटने पर इंडेक्स 101.00 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसलकर 100-दिवसीय SMA स्तर 100.70 तक जा सकता है। 6. वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की कितनी हिस्सेदारी है? अमेरिकी डॉलर का वैश्विक विदेशी मुद्रा लेनदेन में 88 प्रतिशत से अधिक का हिस्सा है, जहां प्रतिदिन औसतन 6.6 ट्रिलियन डॉलर का कारोबार होता है। 7. डॉलर में गिरावट का सोने की कीमतों पर क्या असर हुआ? डॉलर के कमजोर होने से सोने की दो दिनों की गिरावट थमी और यह 3,900 डॉलर प्रति औंस के निचले स्तर से उबरने में सफल रहा। 8. क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन किस स्तर पर संभला है? चार सप्ताह की लगातार गिरावट के बाद सुधार करते हुए बिटकॉइन 78,462 डॉलर के स्तर से ऊपर कारोबार करने लगा है। https://trendkia.com/market/iran-se-kutanitika-batachita-ki-ummidon-ke-bicha-phisala-us-dollar-101-75-ke-stara-para-pahuncha-index-54907 TrendKia — Har trend, sabse pehle.