# ईरान संघर्ष और मजबूत अमेरिकी डॉलर के दबाव में यूरो का आउटलुक हुआ कमजोर

> यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सख्त रुख के बावजूद भू-राजनीतिक तनाव और मजबूत अमेरिकी डॉलर यूरो की बढ़त सीमित कर रहे हैं। वहीं बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरें बढ़ाई हैं और वैश्विक बाजारों की नजर ट्रंप और शी जिनपिंग की बैठक पर टिकी है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/iran-sngharsha-aura-majabuta-american-dollar-ke-dabava-men-euro-ka-autaluka-hua-kamajora-37849 · **Language:** Hindi
**Tags:** यूरो, अमेरिकी डॉलर, विदेशी मुद्रा, बैंक ऑफ जापान, सोना, स्विस नेशनल बैंक, ब्याज दरें

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में साझा यूरोपीय मुद्रा यूरो के सामने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दबाव की स्थिति बनी हुई है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सख्त नीतिगत संकेतों के बाद भी यूरो को अपेक्षित मजबूती नहीं मिल पा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि जारी ईरान युद्ध के चलते यूरो के लिए ऊपर की ओर गति हासिल करना बेहद चुनौतीपूर्ण बना रहेगा। इसी पृष्ठभूमि में यूरो के एक महीने के अनुमान को 1.16 से घटाकर 1.14 कर दिया गया है। बाजार की बदलती परिस्थितियों के बीच नीतिगत बदलावों का आकलन भी तेज हो गया है, जहां इस महीने की शुरुआत में घोषित 25 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी के बाद अब अक्टूबर में दर वृद्धि की करीब 70 प्रतिशत संभावना देखी जा रही है।

## ईरान संकट और केंद्रीय बैंक के फैसलों का यूरो पर असर
यूरोपीय सेंट्रल बैंक के आक्रामक रुख से यूरो को मिलने वाला समर्थन कई वैश्विक कारणों की वजह से बाधित हुआ है। क्षेत्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से ईरान से जुड़ा सैन्य संकट, बाजार के विश्वास को प्रभावित कर रहा है। संघर्ष की अवधि अनिश्चित होने के कारण निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार तेजी ने अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर के आकर्षण को बनाए रखा है। विश्लेषकों का आकलन स्पष्ट करता है कि जब तक यह युद्ध जारी रहता है, तब तक यूरो की किसी भी संभावित रैली पर सीमाएं लगी रहेंगी।

## एशियाई कारोबार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और जापानी येन की चाल
गुरुवार को एशियाई सत्र के दौरान एशियाई और प्रशांत क्षेत्र की मुद्राओं में भी हलचल देखने को मिली। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7000 के स्तर की ओर गिरता नजर आया। यह गिरावट ऑस्ट्रेलिया के अगस्त रोजगार आंकड़ों के सार्वजनिक होने के बाद दर्ज की गई। ऑस्ट्रेलिया की बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि बाजार को 4.5 प्रतिशत की उम्मीद थी। हालांकि, रोजगार परिवर्तन के आंकड़ों ने अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए 39.5 हजार का आंकड़ा दर्ज किया।

दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन ने भी उतार-चढ़ाव दिखाया। यूएसडी/जेपीवाई की जोड़ी तीन सप्ताह के उच्च स्तर से पीछे हटते हुए एशियाई कारोबार में 158.00 के करीब नुकसान झेलती रही। जापान में सरकारी बॉन्ड यील्ड में आई तेजी और संभावित मुद्रा हस्तक्षेप के जोखिमों ने येन को कुछ सहारा दिया। हालांकि, फेडरल रिजर्व द्वारा सख्त मौद्रिक नीति बनाए रखने के बढ़ते दावों और ऊंची अमेरिकी यील्ड के चलते अमेरिकी डॉलर ने रात भर की बढ़त को बचाते हुए दो महीने के उच्च स्तर को बरकरार रखा।

## बैंक ऑफ जापान की दर वृद्धि और स्विस नेशनल बैंक का यथास्थिति फैसला
केंद्रीय बैंकों के फैसलों के मोर्चे पर बड़ा कदम बैंक ऑफ जापान द्वारा उठाया गया। बैंक ऑफ जापान ने अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। यह निर्णय 7-2 के बहुमत से लिया गया, जो मौद्रिक नीति के सामान्यीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। नीति निर्माताओं का यह कदम हफ्तों से बनी व्यापक बाजार अपेक्षाओं के पूरी तरह अनुरूप रहा।

इसके विपरीत, स्विस नेशनल बैंक ने अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दरों को 0 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया, जिसकी उम्मीद बाजार पहले से कर रहा था। स्विस नेशनल बैंक के मौद्रिक नीति आकलन के मुख्य बिंदुओं के अनुसार, केंद्रीय बैंक के पास रखे बैंकों के मांग जमा (साइट डिपॉजिट्स) पर एक निश्चित सीमा तक नीतिगत दर के हिसाब से पारिश्रमिक दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय बैंक ने साल 2026 के लिए अपने मुद्रास्फीति अनुमान को पिछले 0.6 प्रतिशत से संशोधित कर 0.7 प्रतिशत कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि स्विट्जरलैंड के आर्थिक परिदृश्य के लिए मुख्य जोखिम वैश्विक अर्थव्यवस्था में होने वाले घटनाक्रमों से उपजा है।

## सोने में नरमी और ट्रंप तथा शी जिनपिंग की अहम बैठक पर नजर
कीमती धातुओं के बाजार में सोने में लगातार दूसरे दिन नकारात्मक रुख बना रहा। यूरोपीय सत्र के पहले हिस्से में सोना 4,300 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे फिसल गया, जो इसका एक सप्ताह का निचला स्तर है। सर्राफा बाजार में यह सुस्ती अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली महत्वपूर्ण बैठक से पहले दर्ज की गई।

व्यापारियों के बीच इस बैठक को लेकर किसी बड़ी घोषणा की उम्मीदें तो बहुत कम हैं, लेकिन बाजार सहभागी दुर्लभ धातुओं (रेयर अर्थ्स), प्रौद्योगिकी प्रतिबंधों और दोनों देशों के बीच मौजूदा व्यापारिक युद्धविराम के विस्तार पर किसी भी प्रगति पर पैनी नजर रख रहे हैं। जब तक इन प्रमुख भू-राजनीतिक और व्यापारिक वार्ताओं के नतीजे सामने नहीं आते, तब तक विदेशी मुद्रा, कमोडिटी और बॉन्ड बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बने रहने की पूरी संभावना है।

## इसका आप पर असर
वैश्विक विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में चल रही इस उठापटक का सीधा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश और यात्रा लागतों पर पड़ेगा।

- **मुद्रा विनिमय और यात्रा:** मजबूत होते अमेरिकी डॉलर के कारण विदेश यात्रा और अंतरराष्ट्रीय अध्ययन पर होने वाले खर्च बढ़ सकते हैं। यात्रियों और छात्रों को विदेशी मुद्रा खरीदते समय मुद्रा विनिमय दरों पर निरंतर नजर रखनी चाहिए।
- **सोने के खरीदार और निवेशक:** सोने की कीमतों में $4,300 से नीचे आई इस गिरावट से आभूषण खरीदारों और खुदरा निवेशकों को कुछ राहत मिल सकती है। निवेशकों को भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए किसी भी बड़े सौदे से पहले बाजार स्थिरीकरण का इंतजार करना चाहिए।
- **वैश्विक व्यापार और आयात:** डॉलर के दो महीने के उच्च स्तर पर बने रहने से आयातित वस्तुओं और कच्चे माल की लागत ऊंची बनी रह सकती है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े आयातकों और निर्यातकों को अपनी मुद्रा हेजिंग रणनीतियों की तत्काल समीक्षा करनी होगी।
- **ब्याज दरें और विदेशी निवेश:** बैंक ऑफ जापान द्वारा ब्याज दरें 1.25% करने से वैश्विक पूंजी प्रवाह और बॉन्ड प्रतिफल प्रभावित होंगे। अंतरराष्ट्रीय म्यूचुअल फंड या बॉन्ड में निवेश करने वाले निवेशकों को अपने विदेशी परिसंपत्ति आवंटन का पुनर्मूल्यांकन करना चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
यह बाजार परिस्थिति भू-राजनीतिक युद्ध, केंद्रीय बैंकों द्वारा मौद्रिक नीतियों में किए जा रहे बदलाव और प्रमुख वैश्विक नेताओं की बैठक से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण उत्पन्न हुई है।

- **मध्य पूर्व में युद्ध और भू-राजनीतिक जोखिम:** जारी ईरान युद्ध के चलते वैश्विक निवेशक जोखिम से बचते हुए अमेरिकी डॉलर जैसी सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं। इस अनिश्चित माहौल के कारण यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सख्त रुख के बावजूद यूरो पर लगातार दबाव बना हुआ है।
- **फेडरल रिजर्व और बैंक नीतियों में अंतर:** अमेरिका में मजबूत आर्थिक आंकड़ों और ऊंची बॉन्ड यील्ड के कारण फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें ऊंची बनाए रखने के अनुमान मजबूत हुए हैं। इसके उलट, स्विस नेशनल बैंक ने ब्याज दरें 0% पर बनाए रखी हैं, जिससे डॉलर का आकर्षण अन्य मुद्राओं की तुलना में बढ़ गया है।
- **रोजगार और आर्थिक आंकड़ों का असर:** ऑस्ट्रेलिया के अगस्त रोजगार आंकड़ों में बेरोजगारी दर 4.6% तक बढ़ने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव बना। केंद्रीय बैंकों की आगामी नीतियों को लेकर अनिश्चितता से मुद्रा बाजारों में अस्थिरता और तेज हो गई है।
- **ट्रंप-शी वार्ता को लेकर सतर्कता:** अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच आगामी बैठक से पहले बाजार सहभागी अत्यधिक सतर्क हैं। दुर्लभ धातुओं और प्रौद्योगिकी प्रतिबंधों पर अनिश्चितता के कारण सोने और अन्य जोखिम वाली संपत्तियों में मुनाफावसूली देखी जा रही है।

## सवाल-जवाब

### 1. यूरो के लिए एक महीने का नया पूर्वानुमान क्या तय किया गया है?
जारी ईरान युद्ध और अमेरिकी डॉलर के दबाव के कारण यूरो के एक महीने के पूर्वानुमान को 1.16 से घटाकर 1.14 कर दिया गया है।

### 2. यूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ाने की कितनी संभावना है?
इस महीने की शुरुआत में 25 बेसिस प्वाइंट्स की वृद्धि के बाद बाजार में अक्टूबर में दर वृद्धि की करीब 70 प्रतिशत संभावना देखी जा रही है।

### 3. बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दरों में क्या बदलाव किया है?
बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है।

### 4. स्विस नेशनल बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति पर क्या फैसला लिया?
स्विस नेशनल बैंक ने अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर को 0% पर अपरिवर्तित रखा और 2026 के लिए मुद्रास्फीति अनुमान को 0.7% किया है।

### 5. सोने की कीमतों में हालिया गिरावट का क्या स्तर रहा?
सोना लगातार दूसरे दिन गिरते हुए $4,300 प्रति औंस के स्तर से नीचे आ गया, जो इसका एक सप्ताह का निचला स्तर है।

### 6. ऑस्ट्रेलिया के अगस्त रोजगार रिपोर्ट के आंकड़े क्या रहे?
ऑस्ट्रेलिया की बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6% हो गई, जबकि रोजगार परिवर्तन में 39.5 हजार की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

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