ईरान पर नरमी से ट्रंप के इनकार के बाद कच्चे तेल में लौटी मजबूती ईरान पर प्रतिबंध हटाने की अटकलों को खारिज करते हुए अमेरिकी रुख कड़ा रहने से डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमतें 88 डॉलर के पार निकल गईं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर कीमतों को सहारा देने लगा है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा तेहरान के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों में किसी भी प्रकार की ढील दिए जाने से साफ इनकार के बाद वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल मजबूत होकर 88.30 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। शुरुआती यूरोपीय कारोबारी सत्र में देखने को मिला यह सुधार सीधे तौर पर खाड़ी क्षेत्र में कूटनीतिक गतिरोध से जुड़ा है। कारोबारी अब अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन यानी ईआईए के आधिकारिक साप्ताहिक भंडार आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो आपूर्ति की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट करेंगे। प्रतिबंधों पर ट्रंप का सख्त रुख और कूटनीतिक गतिरोध बाजार में उस वक्त अचानक अनिश्चितता बढ़ गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन तमाम दावों को पूरी तरह नकार दिया जिनमें कहा जा रहा था कि अमेरिका ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने के लिए तैयार है। इससे पहले सामने आई एक मीडिया चर्चा में यह दावा किया गया था कि परमाणु कार्यक्रम पर ठोस कदमों के बदले ईरान के जब्त धन को मुक्त करने और व्यापारिक रियायतें देने की पेशकश की गई है। ट्रंप ने इस दावे का सीधे खंडन किया। इसके अलावा दोहा में कतर द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता कराने की कोशिशें भी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी हैं। दोनों पक्षों में से कोई भी अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं है। इस तरह की बातचीत का बेनतीजा रहना निवेशकों के मन में यह आशंका पैदा कर रहा है कि तनाव दोबारा भड़क सकता है। नई दिल्ली की शोध फर्म एसएस वेल्थस्ट्रीट की संस्थापक सुगंधा सचदेवा का मानना है कि प्रतिबंधों और वार्ता को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण तेल की कीमतों में भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम बना हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आपूर्ति सुधरने से कीमतों की बढ़त भले सीमित रहे, लेकिन नए अवरोध दोबारा बड़ी तेजी ला सकते हैं। अमेरिकी तेल भंडार में इजाफा और आपूर्ति के रुझान कीमतों में मजबूती के बीच अमेरिकी घरेलू बाजार से आपूर्ति बढ़ने के संकेत भी मिले हैं। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट यानी एपीआई के साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार 25 सितंबर को समाप्त हुए सप्ताह में अमेरिका का कच्चा तेल भंडार 1.019 मिलियन बैरल बढ़ा। हालांकि, यह बढ़त उससे पिछले हफ्ते दर्ज की गई 1.786 मिलियन बैरल की वृद्धि के मुकाबले धीमी रही है। निजी उद्योग समूह एपीआई का यह आंकड़ा बाजार को संकेत देता है कि मांग की तुलना में स्टॉक अभी भी सकारात्मक दायरे में बढ़ रहा है। बाजार विश्लेषक यह भी रेखांकित करते हैं कि सऊदी अरब के कच्चे तेल निर्यात में बढ़ोतरी की उम्मीदें और अमेरिकी भंडार में अपेक्षा से अधिक वृद्धि हाल के सत्रों में कीमतों पर दबाव बनाती रही हैं। डच वित्तीय समूह आईएनजी के अनुसार पिछले दिनों ब्रेंट क्रूड छह लगातार कारोबारी सत्रों तक गिरकर 99 डॉलर प्रति बैरल से नीचे चला गया था, जो अगस्त 2025 के बाद उसकी सबसे लंबी मंदी की लकीर थी और इसमें 9.5 प्रतिशत से अधिक का संचयी नुकसान दर्ज किया गया। तब डब्ल्यूटीआई भी गिरकर 89 डॉलर के करीब कारोबार कर रहा था। सऊदी पाइपलाइन की बहाली और वैश्विक प्रवाह आपूर्ति पक्ष पर एक बड़ा घटनाक्रम यह है कि सऊदी अरब ने अपनी पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन पर परिचालन फिर से शुरू कर दिया है। यह पाइपलाइन रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बाईपास करते हुए लाल सागर तट पर स्थित यानबू टर्मिनल तक कच्चा तेल पहुंचाती है। लगभग 7 मिलियन बैरल प्रतिदिन की क्षमता वाला यह मार्ग जल्द ही यानबू से समुद्री निर्यात दोबारा चालू कर सकता है। इस वैकल्पिक गलियारे के सक्रिय होने से आने वाले हफ्तों में वैश्विक बाजारों को खोई हुई आपूर्ति बहाल होने की उम्मीद है। वहीं कूटनीतिक मोर्चे पर मिले-जुले बयानों का दौर भी जारी रहा है। आईएनजी ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी अधिकारियों के साथ हालिया वार्ताओं को बेहद फलदायी बताया था, जिससे आपूर्ति बाधाएं टलने की उम्मीद जगी थी। लेकिन बाद में ट्रंप द्वारा प्रतिबंधों में राहत से खुले इनकार ने बाजार को सतर्क कर दिया। हालिया गिरावट के बावजूद साल-दर-साल के आधार पर कच्चे तेल की कीमतें अब भी 60 प्रतिशत से ज्यादा ऊपर बनी हुई हैं, जिससे साफ है कि बाजार ऐतिहासिक रूप से ऊंचे स्तरों पर टिका है। दैनिक चार्ट पर डब्ल्यूटीआई का तकनीकी विश्लेषण दैनिक मूल्य चार्ट पर नजर डालें तो हालिया मुनाफावसूली के बावजूद डब्ल्यूटीआई का ढांचा पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है। भाव 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज यानी एसएमए और निचले बोलिंगर बैंड से ऊपर बने रहकर अंतर्निहित लिवाली का प्रमाण दे रहे हैं। 45.9 के स्तर पर स्थित रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई तटस्थ क्षेत्र में है, जो संकेत देता है कि तेजी की रफ्तार जरूर थमी है, लेकिन कोई आक्रामक मंदी हावी नहीं हुई है। तकनीकी स्तरों की बात करें तो ऊपर की तरफ पहला अवरोध 93.45 डॉलर पर स्थित बोलिंगर मिडल बैंड के रूप में सामने है। इसके पार निकलने पर अगला कड़ा प्रतिरोध 101.05 डॉलर के आसपास ऊपरी बैंड पर मौजूद है। वहीं गिरावट की स्थिति में 85.80 डॉलर का निचला बोलिंगर बैंड प्राथमिक सहारा देता है, जिसके टूटने पर 100-दिवसीय एसएमए का 84.75 डॉलर का स्तर खरीदारों के लिए सबसे अहम सुरक्षा कवच साबित होगा। मौजूदा लाइव बाजार सत्र के तकनीकी पैरामीटर बताते हैं कि कच्चा तेल 90.94 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद भाव 89.38 डॉलर के मुकाबले 1.75 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। इसका 52-सप्ताह का दायरा 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर रहा है। वर्तमान में 14-अवधि का आरएसआई 47 पर है, जबकि 20-दिवसीय बोलिंगर बैंड 86.32 डॉलर से 105.66 डॉलर के बीच फैले हैं। तकनीकी नजरिए से पिवट स्तर 90.49 डॉलर पर है, जहां पहला प्रतिरोध 92.41 डॉलर तथा दूसरा प्रतिरोध 93.87 डॉलर पर आंका गया है, जबकि तात्कालिक समर्थन 89.03 डॉलर और 87.11 डॉलर पर स्थित है। कच्चे तेल के मूल निर्धारक और वैश्विक बाजार की संरचना वैश्विक मंच पर बिकने वाले कच्चे तेल में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट सबसे प्रमुख पैमानों में गिना जाता है, जिसके अलावा ब्रेंट और दुबई क्रूड अन्य दो बड़े मानक हैं। कम घनत्व और सल्फर की बेहद कम मात्रा के चलते इसे हल्का और मीठा कच्चा तेल कहा जाता है, जिसे रिफाइन करना आसान होता है। अमेरिका में उत्पादित होने वाला यह तेल कुशिंग हब के रास्ते वितरित किया जाता है, जिसे दुनिया के पाइपलाइन चौराहों का केंद्र माना जाता है। किसी भी अन्य व्यापारिक परिसंपत्ति की तरह तेल की दिशा मांग और आपूर्ति के संतुलन से तय होती है। मजबूत वैश्विक आर्थिक विकास ईंधन की खपत बढ़ाता है, जबकि आर्थिक मंदी कीमतों को कमजोर करती है। राजनीतिक उथल-पुथल, युद्ध और प्रतिबंध आपूर्ति श्रृंखला को झटका देकर कीमतों में उछाल लाते हैं। इसके अलावा तेल निर्यातक देशों का 12 सदस्यीय संगठन ओपेक अपनी नियमित बैठकों में उत्पादन कोटे घटाकर या बढ़ाकर आपूर्ति को नियंत्रित करता है। रूस समेत दस अतिरिक्त गैर-ओपेक देशों के साथ मिलकर यह समूह ओपेक+ कहलाता है। अमेरिकी डॉलर के उतार-चढ़ाव का भी इस पर गहरा असर पड़ता है, क्योंकि कमजोर डॉलर अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए तेल को सस्ता बनाता है। वहीं एपीआई और ईआईए द्वारा जारी होने वाले साप्ताहिक भंडार आंकड़े कारोबारी रुख तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों का ताजा रुख बुधवार के कारोबारी सत्र में ऊर्जा बाजार के साथ-साथ मुद्रा और बहुमूल्य धातुओं में भी महत्वपूर्ण हलचल दर्ज की गई। ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग दो महीने के निचले स्तर 0.6950 के करीब फिसल गई, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया के उम्मीद से कमजोर महंगाई आंकड़ों ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं को कमजोर कर दिया। जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर 157.00 से नीचे दबाव में रहा, जहां बैंक ऑफ जापान के सख्त रुख ने कमजोर घरेलू उत्पादन आंकड़ों के प्रभाव को सीमित रखा। उधर बहुमूल्य धातुओं में सोना एशियाई सत्र में 4,110 डॉलर के आठ-सप्ताह के निचले स्तर से उबरकर 4,200 डॉलर के नीचे स्थिर दिखा, जहां व्यापारी अमेरिकी श्रम और निजी उपभोग व्यय मूल्य सूचकांक आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। डिजिटल परिसंपत्ति क्षेत्र में आवे का टोकन पिछले दिन 10 प्रतिशत से अधिक की छलांग लगाने के बाद मुनाफावसूली के चलते 161 डॉलर के नीचे आ गया, जबकि इसके संस्थापक स्टानि कुलेचोव नए टोकन-बर्न तंत्र पर विचार कर रहे हैं। इसका आप पर असर कच्चे तेल में भू-राजनीतिक कारणों से आने वाली तेजी भारतीय उपभोक्ताओं की जेब और परिवहन लागत को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। • भारत में: अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड 88 डॉलर से ऊपर टिके रहने से भारत का तेल आयात बिल बढ़ेगा। इसके परिणामस्वरूप सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा और आने वाले दिनों में खुदरा पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने की गुंजाइश खत्म हो सकती है। • परिवहन और लॉजिस्टिक्स: डीजल की ऊंची लागत से माल ढुलाई महंगी होने की आशंका बढ़ जाती है। यदि ईंधन की कीमतें ऊंची रहीं तो रोजमर्रा की फल, सब्जियों और पैकेज्ड सामानों की थोक कीमतें बढ़ सकती हैं। • मुद्रा विनिमय: कच्चे तेल के आयात के लिए भारत को अधिक अमेरिकी डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। डॉलर की बढ़ती मांग के चलते भारतीय रुपये पर कमजोरी का दबाव बन सकता है। • शेयर बाजार के निवेशक: तेल रिफाइनिंग और पेंट तथा टायर बनाने वाली कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ेगी। निवेशकों को इन मार्जिन-संवेदनशील सेक्टरों के शेयरों में उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी रुख में सख्ती और कूटनीतिक वार्ताओं में ठहराव ने ऊर्जा बाजार में आपूर्ति की चिंताओं को फिर से जिंदा कर दिया है। • सीधा कारण: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर प्रतिबंधों में नरमी बरतने की खबरों का स्पष्ट खंडन किया जाना है। इस इनकार ने बाजार से ईरानी तेल की आसान वापसी की उम्मीदों को झटका दिया। • कूटनीतिक विफलता: कतर की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत बिना किसी सहमति के अटक गई। दोनों पक्षों के अड़ियल रवैये से खाड़ी क्षेत्र में गतिरोध और गहरा गया है। • आपूर्ति संतुलन: हालांकि सऊदी अरब की बाईपास पाइपलाइन शुरू होने और अमेरिकी भंडार बढ़ने से कुछ राहत मिली थी। लेकिन भू-राजनीतिक तनावों के नए जोखिम प्रीमियम ने बिकवाली के रुख को पलट दिया। सवाल-जवाब 1. डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमत में उछाल क्यों आया? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर से प्रतिबंध हटाने की संभावनाओं को खारिज करने के बाद कीमतें मजबूत हुईं। 2. कतर की मध्यस्थता में हुई वार्ता का क्या नतीजा निकला? अमेरिका और ईरान के बीच कतर द्वारा आयोजित बातचीत बिना किसी समझौते के विफल रही क्योंकि कोई भी पक्ष झुकने को तैयार नहीं था। 3. अमेरिकी तेल भंडार में पिछले हफ्ते कितना बदलाव हुआ? अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट के अनुसार 25 सितंबर को समाप्त सप्ताह में अमेरिकी क्रूड भंडार 1.019 मिलियन बैरल बढ़ा। 4. सऊदी अरब ने आपूर्ति बहाली के लिए क्या कदम उठाया है? सऊदी अरब ने 7 मिलियन बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर काम फिर से शुरू किया है जो होर्मुज जलडमरूमध्य को बाईपास करती है। 5. तकनीकी विश्लेषण के अनुसार डब्ल्यूटीआई के लिए अगला अवरोध स्तर क्या है? दैनिक चार्ट पर डब्ल्यूटीआई के लिए शुरुआती प्रतिरोध 93.45 डॉलर पर और बड़ा अवरोध 101.05 डॉलर के आसपास स्थित है। 6. सुगंधा सचदेवा के अनुसार तेल बाजार पर किसका असर दिख रहा है? एसएस वेल्थस्ट्रीट की सुगंधा सचदेवा के मुताबिक प्रतिबंधों और वार्ताओं की अनिश्चितता से कीमतों में भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम बना हुआ है। https://trendkia.com/market/irana-para-narami-se-trump-ke-inakara-ke-bada-kachche-tela-men-lauti-majabuti-40610 TrendKia — Har trend, sabse pehle.