ईरान संकट के बीच कच्चे तेल में लौटी मजबूती, 90 डॉलर के पार निकला भाव मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिकी राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच डब्ल्यूटीआई क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है, हालांकि कारोबारी अमेरिकी रोजगार आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बढ़त दर्ज की गई है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड 86.00 डॉलर प्रति बैरल के दो महीने के निचले स्तर से उबरते हुए 90.00 डॉलर के मनोवैज्ञानिक आंकड़े को पार करने में सफल रहा है। हालांकि, बाजार में अभी भी एकतरफा तेजी के पुख्ता संकेत नहीं दिख रहे हैं और सत्र के दौरान भाव लगभग 0.50 प्रतिशत चढ़कर कारोबार करता दिखा। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, कमोडिटी 91.69 डॉलर के आसपास बनी हुई है, जो पिछले बंद स्तर 90.52 डॉलर से 1.29 प्रतिशत की मजबूती दर्शाती है। पिछले 52 हफ्तों के दौरान इसका दायरा 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर के बीच रहा है। भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति की चिंताएं कीमतों में हालिया स्थिरता के पीछे मुख्य वजह वाशिंगटन और तेहरान के बीच गहराता टकराव है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि आवश्यकता पड़ने पर अमेरिका ईरान के शेष ठिकानों को भी नष्ट कर सकता है और यदि वे कोई कदम उठाते हैं तो दुनिया को जल्द ही इसका पता चल जाएगा। दोनों देशों के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर गहरा मतभेद बना हुआ है। ट्रंप ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा कोई भी काम अमेरिकी अनुमति के बिना आगे नहीं बढ़ा सकता। इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए कच्चे तेल के जहाजों की आवाजाही में कुछ सुधार के बावजूद वाणिज्यिक व्यापारिक जहाजों के लिए खतरे लगातार बने हुए हैं। वैश्विक तेल व्यापार के इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर जोखिम बरकरार रहने से ऊर्जा बाजार में रिस्क प्रीमियम बना हुआ है, जो कच्चे तेल की कीमतों को नीचे गिरने से रोक रहा है और भाव को सहारा दे रहा है। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव और कूटनीति की उम्मीदें दूसरी तरफ, तेल की कीमतों में बहुत बड़ी तेजी पर भी ब्रेक लगा हुआ है। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के बाद इस बात की संभावना काफी कम मानी जा रही है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ नए सिरे से सैन्य हमले शुरू करेंगे। सीनेट में शीर्ष डेमोक्रेट नेता चक शूमर ने ईरान के साथ जारी युद्ध को समाप्त करने की दिशा में दबाव बनाने का संकल्प लिया है। चक शूमर ने साफ किया है कि उनकी पार्टी सरकारी फंडिंग पर अपने नियंत्रण का उपयोग इस टकराव को रोकने के लिए कर सकती है। लगभग आठ महीनों से जारी अमेरिका और ईरान के बीच के इस सैन्य संकट के कूटनीतिक समाधान की आस फिर से जगी है। राजनीतिक संतुलन बदलने के कारण तेल खरीदार बहुत बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं, जिससे कीमतों में उछाल सीमित दायरा बनाए हुए है। व्यापक रुझान को देखें तो यह कमोडिटी अभी भी लगभग 12 प्रतिशत की भारी साप्ताहिक गिरावट दर्ज करने की कगार पर खड़ी है। रोजगार आंकड़ों पर टिकी निवेशकों की निगाहें मध्य पूर्व के घटनाक्रमों के अलावा वित्तीय बाजारों का ध्यान उत्तरी अमेरिकी कारोबारी सत्र में जारी होने वाली महत्वपूर्ण अमेरिकी नॉनफार्म पेरोल यानी एनएफपी रिपोर्ट पर लगा हुआ है। अक्टूबर महीने के यह रोजगार आंकड़े ब्याज दरों और अमेरिकी डॉलर की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। आंकड़ों के आने से पहले निवेशक और ट्रेडर सतर्क रुख अपनाए हुए हैं, जिसके चलते वॉल्यूम 20 दिनों के औसत का केवल 0.11 गुना दर्ज किया गया है। मुद्रा और धातु बाजारों में भी इसी तरह की उठापटक देखी जा रही है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी सत्र से पहले तीन सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया, जिस पर शेयर बाजारों की बिकवाली का दबाव रहा। डॉलर के मुकाबले जापानी येन में बैंक ऑफ जापान के सख्त रुख और संभावित सरकारी हस्तक्षेप की चर्चाओं से मजबूती आई है। दूसरी ओर, सोने की कीमतें 4,147 डॉलर के पार टिकने में नाकाम रहने के बाद 4,047 डॉलर के करीब स्थिर हुईं, जिसे हाल ही में 3,870.25 डॉलर के निचले स्तर से उछाल मिला था। निवेशक अब रोजगार आंकड़ों से यह परखना चाहते हैं कि डॉलर की चाल कैसी रहती है। डब्ल्यूटीआई क्रूड के बुनियादी पहलू और मांग-आपूर्ति का गणित डब्ल्यूटीआई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कारोबार होने वाले कच्चे तेल के प्रमुख प्रकारों में से एक है। वैश्विक बाजार में ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ इसे बेंचमार्क माना जाता है। डब्ल्यूटीआई को लाइट और स्वीट क्रूड की श्रेणी में रखा जाता है क्योंकि इसमें घनत्व कम होता है और सल्फर की मात्रा बेहद सीमित होती है। अपनी इस गुणवत्ता के कारण इसे रिफाइन करना काफी आसान होता है। इसका उत्पादन मुख्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका में होता है और इसका वितरण कुशिंग केंद्र से किया जाता है, जिसे दुनिया के पाइपलाइनों का चौराहा भी कहा जाता है। किसी भी अन्य संपत्ति की तरह कच्चे तेल के भाव भी आपूर्ति और मांग के नियमों से तय होते हैं। जब वैश्विक आर्थिक विकास की रफ्तार तेज होती है, तो उद्योगों और परिवहन में तेल की मांग बढ़ती है, जिससे कीमतें ऊपर जाती हैं। इसके विपरीत सुस्त आर्थिक वृद्धि मांग को घटाती है। युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और व्यापारिक प्रतिबंध आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करके कीमतों में तेजी लाते हैं। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की कीमत का भी तेल पर सीधा असर पड़ता है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल का व्यापार अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए कमजोर डॉलर अन्य मुद्राओं वाले देशों के लिए तेल को सस्ता बना देता है और खरीद को बढ़ावा देता है। इन्वेंट्री रिपोर्ट और ओपेक का प्रभाव कच्चे तेल की साप्ताहिक आपूर्ति को समझने के लिए अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान यानी एपीआई और अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन यानी ईआईए द्वारा जारी इन्वेंट्री रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। एपीआई का आंकड़ा प्रत्येक मंगलवार को आता है जबकि ईआईए अपनी रिपोर्ट बुधवार को पेश करता है। दोनों के आंकड़ों में आमतौर पर 75 प्रतिशत मौकों पर 1 प्रतिशत से भी कम का अंतर होता है, हालांकि सरकारी एजेंसी होने के कारण ईआईए के आंकड़ों को बाजार में अधिक विश्वसनीय माना जाता है। यदि रिपोर्ट में भंडार में गिरावट दिखती है तो यह बढ़ती मांग का संकेत होता है जिससे कीमतें बढ़ती हैं, जबकि भंडारण बढ़ने पर कीमतें नीचे आती हैं। इसके अलावा तेल निर्यातक देशों का संगठन ओपेक भी कीमतों को तय करने में बड़ी भूमिका निभाता है। ओपेक 12 तेल उत्पादक देशों का समूह है जो साल में दो बार बैठक करके उत्पादन कोटा तय करता है। जब ओपेक उत्पादन घटाता है, तो बाजार में आपूर्ति तंग हो जाती है और भाव चढ़ जाते हैं। उत्पादन बढ़ाने पर उल्टा असर होता है। ओपेक प्लस में रूस सहित दस अतिरिक्त गैर-ओपेक सदस्य शामिल हैं, जिनके साझा फैसले पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार को संचालित करते हैं। तकनीकी स्तर और आगे की दिशा तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो बाजार में 38.2 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट स्तर 89.88 डॉलर पर तात्कालिक सहारा बना हुआ है। इसके नीचे 200 दिनों का सिंपल मूविंग एवरेज और 50 प्रतिशत रिट्रेसमेंट क्लस्टर 86.10 डॉलर से 85.49 डॉलर के दायरे में मौजूद है, जहां गिरावट की स्थिति में खरीदारों के दोबारा सक्रिय होने की संभावना जताई जा रही है। लाइव तकनीकी संकेतकों के मुताबिक, 14 अवधि का आरएसआई 44 के स्तर पर न्यूट्रल स्थिति में है, जबकि एमएसीडी -0.33 पर नकारात्मक हिस्टोग्राम के साथ मंदी का हल्का पूर्वाग्रह दिखा रहा है। हालांकि, लंबी अवधि में 50 दिनों का ईएमए 94.34 डॉलर और 200 दिनों का ईएमए 84.84 डॉलर पर बना हुआ है, जो गोल्डन क्रॉस और दीर्घकालिक तेजी के रुझान को बरकरार रखता है। दैनिक स्तर पर धुरी बिंदु यानी पिवट 91.70 डॉलर पर है, जबकि पहला प्रतिरोध 92.52 डॉलर और दूसरा प्रतिरोध 93.34 डॉलर पर आंका गया है। नीचे की तरफ पहला सहारा 90.88 डॉलर और दूसरा सहारा 90.06 डॉलर पर स्थित है। 4.73 का एटीआर बाजार में दैनिक उतार-चढ़ाव की सीमा को दर्शाता है। इसका आप पर असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता का सीधा असर परिवहन लागत, आयात बिल और घरेलू मुद्रास्फीति पर पड़ता है। • ईंधन दरों पर असर: कच्चे तेल के 90 डॉलर के ऊपर बने रहने से भारतीय तेल कंपनियों पर दबाव बना रहता है। इससे आने वाले हफ्तों में पेट्रोल और डीजल के खुदरा भाव में कटौती की गुंजाइश सीमित हो जाती है। • आयात और चालू खाता घाटा: भारत अपनी तेल जरूरतों का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी बने रहने से देश का विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से खर्च होता है। • घरेलू बजट और महंगाई: माल ढुलाई महंगी होने से रोजमर्रा के खाने-पीने और जरूरी सामानों की कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव आ सकता है। उपभोक्ता अपनी घरेलू बचत और खर्च की प्राथमिकताओं की योजना उसी अनुसार बनाएं। • निवेशकों के लिए रणनीति: ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े शेयरों और कमोडिटी फ्यूचर्स में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ट्रेडर्स 4.73 डॉलर के दैनिक एटीआर को ध्यान में रखकर ही अपने स्टॉप-लॉस निर्धारित करें। ऐसा क्यों हुआ कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी भू-राजनीतिक खतरों, समुद्री व्यापारिक बाधाओं और अमेरिकी राजनीतिक बदलावों के मिले-जुले असर के कारण सामने आई है। • सैन्य बयानबाजी और परमाणु विवाद: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर नए हमलों की चेतावनी और परमाणु कार्यक्रम पर सख्त रुख से आपूर्ति संकट गहराने की आशंका पैदा हुई। इस भू-राजनीतिक जोखिम के चलते व्यापारियों ने कमोडिटी में रिस्क प्रीमियम जोड़ दिया है। • होर्मुज जलडमरूमध्य में जोखिम: इस प्रमुख समुद्री मार्ग से तेल टैंकरों की आवाजाही दोबारा शुरू होने के बावजूद व्यापारिक जहाजों पर खतरे बने हुए हैं। वैश्विक व्यापार की इस मुख्य धमनी में किसी भी रुकावट से बड़े पैमाने पर आपूर्ति प्रभावित होने का डर रहता है। • मध्यावधि चुनाव और कूटनीति की उम्मीद: अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेट्स की जीत और चक शूमर द्वारा युद्ध रोकने के बयानों से बहुत बड़ी तेजी सीमित रही। इन कूटनीतिक संभावनाओं के चलते तेल की साप्ताहिक बढ़त पर करीब 12 प्रतिशत की भारी गिरावट का असर हावी रहा। सवाल-जवाब 1. डब्ल्यूटीआई क्रूड की वर्तमान कीमत क्या है? लाइव आंकड़ों के अनुसार डब्ल्यूटीआई क्रूड 91.69 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। 2. कच्चे तेल में तेजी की मुख्य वजह क्या है? अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग जोखिमों के कारण कीमतें 90 डॉलर के ऊपर टिकी हुई हैं। 3. अमेरिकी मध्यावधि चुनाव का तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ा? डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के बाद ईरान युद्ध के कूटनीतिक समाधान की उम्मीदें बढ़ी हैं, जिसने तेल कीमतों में भारी तेजी को सीमित कर दिया है। 4. डब्ल्यूटीआई क्रूड के लिए कौन से तकनीकी स्तर महत्वपूर्ण हैं? निचले स्तर पर 89.88 डॉलर और 86.10 डॉलर का दायरा मजबूत सहारा है, जबकि ऊपर की तरफ 92.52 डॉलर और 93.34 डॉलर पर प्रतिरोध देखा जा रहा है। https://trendkia.com/market/irana-snkata-ke-bicha-crude-oil-men-lauti-majabuti-90-dolara-ke-para-nikala-bhava-57065 TrendKia — Har trend, sabse pehle.