ईरान वार्ता और अमेरिकी ब्याज दरों के फेर में फंसा सोना, 3900 डॉलर के पार टिकने की जद्दोजहद मध्य पूर्व में शांति वार्ता की उम्मीदों और अमेरिकी डॉलर की चाल के बीच सोने की कीमतों में हल्का सुधार देखा गया, लेकिन फेडरल रिजर्व द्वारा दरें बढ़ाने की आशंका ने तेजी पर ब्रेक लगा रखा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सीमित बढ़त देखी गई, जहां पीली धातु ने 3,900 डॉलर प्रति औंस के निचले स्तर से उबरने का प्रयास किया। अमेरिकी डॉलर पर दबाव बनने से सोने को थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के कयासों ने किसी भी बड़े उछाल को रोक दिया। निवेशक अब आने वाले अमेरिकी व्यापक आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंक के रुख पर नजरें गड़ाए हुए हैं। मध्य पूर्व शांति वार्ता और कूटनीतिक हलचल ईरान के वार्ताकारों ने रविवार को कतर के मध्यस्थों के साथ लगातार तीसरे दिन बातचीत की। इस कूटनीतिक पहल का मुख्य उद्देश्य ईरान, अमेरिका और इसराइल के बीच जारी सैन्य संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक समझौते की दिशा में आगे बढ़ना है। इस बीच तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए 48 घंटे की एक योजना का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, ईरान ने इसके साथ यह शर्त रखी है कि अमेरिका इस्लामाबाद ज्ञापन के बाद लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों को हटाए और क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति को कम करे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और ईरान समझौता चाहता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों के बाद आगे की सैन्य कार्रवाई के विकल्प को खारिज नहीं किया गया है। दूसरी ओर, ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने अपने शीर्ष सैन्य कमांडरों को अमेरिका और इसराइल के साथ नए सिरे से टकराव के लिए तैयार रहने और जवाबी कार्रवाई के विकल्पों को विस्तार देने का निर्देश दिया है। इसके अतिरिक्त, यूक्रेन द्वारा रूसी तेल रिफाइनरियों पर किए गए ताजा हमलों ने वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक जोखिम के प्रीमियम को बनाए रखा है। फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति और डॉलर का असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था से हाल ही में जारी आंकड़ों ने यह संकेत दिया है कि आर्थिक विकास मजबूत बना हुआ है और महंगाई का दबाव अभी भी बना हुआ है। सीएमई ग्रुप के फेडवॉच टूल के अनुसार, लगभग 75 प्रतिशत कारोबारी संभावना जता रहे हैं कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक दिसंबर की बैठक में उधारी लागत में फिर से बढ़ोतरी कर सकता है। गैर-ब्याज देने वाली संपत्ति होने के कारण सोने के लिए उच्च ब्याज दरें हमेशा एक बड़ी चुनौती साबित होती हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के दो मुख्य उद्देश्य हैं: मूल्य स्थिरता हासिल करना और अधिकतम रोजगार को बढ़ावा देना। जब मुद्रास्फीति फेड के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर चली जाती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में इजाफा करता है। उच्च ब्याज दरों से अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है क्योंकि वैश्विक निवेशक अमेरिकी संपत्तियों में निवेश करना पसंद करते हैं। इसके विपरीत, जब महंगाई गिरती है या बेरोजगारी बढ़ती है, तो अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए दरें घटाई जाती हैं। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) साल में आठ नियमित बैठकें करती है, जिसमें बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सात सदस्य और विभिन्न फेडरल रिजर्व बैंकों के अध्यक्ष मौद्रिक नीति तय करते हैं। संकट के समय फेडरल रिजर्व क्वांटिटेटिव ईजिंग (क्यूई) का सहारा लेता है, जिसके तहत वित्तीय प्रणाली में नकदी बढ़ाने के लिए बॉन्ड खरीदे जाते हैं, जिससे आम तौर पर डॉलर कमजोर होता है। वहीं जब क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (क्यूटी) की जाती है, तो परिपक्व होने वाले बॉन्ड में दोबारा निवेश रोक दिया जाता है, जो अमेरिकी डॉलर को मजबूती प्रदान करता है। सोने के लिए तकनीकी स्तर और कारोबारी रुख लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, सोने का भाव 3,922 डॉलर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले 3,899 डॉलर के बंद भाव से 0.60 प्रतिशत ऊपर है। इसका 52 सप्ताह का दायरा 3,879 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच रहा है। तकनीकी संकेतकों की बात करें तो 14-अवधि का आरएसआई 31 के स्तर पर है, जबकि एमएसीडी -81.61 पर बना हुआ है जो सिग्नल लाइन -68.25 से नीचे नकारात्मक रुझान को दर्शाता है। 20-दिवसीय ईएमए 4,091 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 4,199 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 4,412 डॉलर पर स्थित हैं। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी सुधार की स्थिति में सोने को 4,068.55 डॉलर के स्तर पर स्थित 100-अवधि के ईएमए के पास भारी बिकवाली का सामना करना पड़ सकता है। गिरावट की स्थिति में 3,870 डॉलर का निचला क्षेत्र मजबूत सपोर्ट के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है, तो कीमतों में और बड़ी गिरावट का रास्ता खुल सकता है। दैनिक उतार-चढ़ाव को मापने वाला एटीआर 78.36 पर है, जबकि वर्तमान में मुख्य पिवट स्तर 3,913 डॉलर, पहला रेजिस्टेंस 3,937 डॉलर और तात्कालिक सपोर्ट 3,898 डॉलर पर आंका गया है। मुद्रा और क्रिप्टो बाजार का हाल भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और डॉलर की चाल का असर अन्य वित्तीय बाजारों पर भी देखने को मिला। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) में सोमवार को शुरुआती कमजोरी के बाद रिकवरी दर्ज की गई, क्योंकि ईरान कूटनीति की उम्मीदों ने जोखिम उठाने की क्षमता को सहारा दिया। हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (आरबीए) के आगामी नीतिगत निर्णय से पहले कारोबारी सतर्क दिखे। वहीं जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) 157.00 के नीचे से सुधरकर 158.00 के करीब पहुंच गया, जहां जापान की वित्त मंत्री तात्सुकी कातायामा की ओर से संभावित हस्तक्षेप की चेतावनी के बावजूद येन पर दबाव बना रहा। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी अक्टूबर की चार हफ्तों की लगातार गिरावट के बाद स्थिरता दिखी। बिटकॉइन (BTC) अपने प्रमुख सपोर्ट से उबरकर 78,462 डॉलर के ऊपर पहुंच गया, जबकि एथेरियम (ETH) 2,295 डॉलर के स्तर को पार करने में सफल रहा, हालांकि अहम मूविंग एवरेज से नीचे रहने के कारण इसका रुझान अभी भी सुस्त बना हुआ है। इसका आप पर असर सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों और अमेरिकी ब्याज दरों के रुख का सीधा असर वैश्विक सर्राफा बाजार और व्यक्तिगत निवेशकों के पोर्टफोलियो पर पड़ेगा। • भारत में: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों में स्थिरता या सीमित दायरे के कारण घरेलू बाजारों में आभूषणों की खुदरा कीमतों में अचानक बड़ा बदलाव नहीं आएगा। शादी के सीजन की खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं को मौजूदा दरों पर नजर बनाए रखनी चाहिए। • वैश्विक स्तर पर: अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ाने की 75 प्रतिशत संभावना के चलते अमेरिकी डॉलर मजबूत रह सकता है। इससे उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बना रहेगा और सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग सीमित रह सकती है। • निवेशकों के लिए: 3,870 डॉलर का मजबूत तकनीकी सपोर्ट टूटने पर सोने में और गिरावट आ सकती है। छोटी अवधि के व्यापारियों को नए सौदे लेने से पहले अहम आर्थिक आंकड़ों और 78 डॉलर के दैनिक उतार-चढ़ाव (ATR) को ध्यान में रखना चाहिए। • कमोडिटी खरीदारों के लिए: होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान के 48 घंटे के प्रस्ताव पर अमल होने की स्थिति में कच्चे तेल और परिवहन लागत में राहत मिल सकती है। हालांकि शांति समझौते की औपचारिक पुष्टि तक बाजार में सतर्कता बनी रहेगी। ऐसा क्यों हुआ सोने की कीमतों में हालिया गिरावट और मौजूदा सीमित सुधार मुख्य रूप से भू-राजनीतिक वार्ताओं और अमेरिकी मौद्रिक नीति की परस्पर विरोधी ताकतों का परिणाम है। • कूटनीतिक बातचीत: कतर की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए लगातार तीसरे दिन बातचीत हुई। कूटनीतिक प्रगति की खबरों से सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की तात्कालिक मांग घटी, जिससे सोने को हल्का सहारा मिला। • आर्थिक आंकड़े और दर वृद्धि: पिछले सप्ताह जारी अमेरिकी वृहद आर्थिक आंकड़ों में मजबूत विकास और जारी महंगाई के संकेत मिले। इसके चलते फेडरल रिजर्व द्वारा दिसंबर में दरों में वृद्धि की संभावना 75 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिसने सोने की बढ़त को सीमित कर दिया। • सैन्य तनाव की निरंतरता: डोनाल्ड ट्रंप द्वारा मध्यावधि चुनाव के बाद सैन्य विकल्प खुले रखने और ईरान के सर्वोच्च नेता द्वारा सेना को तैयार रहने के आदेश ने जोखिम को बनाए रखा। इसके अलावा यूक्रेन द्वारा रूसी रिफाइनरियों पर हमलों ने अनिश्चितता को बढ़ाया है। सवाल-जवाब 1. सोने की कीमतों में सीमित सुधार क्यों देखने को मिला? कतर में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता से अमेरिकी डॉलर में थोड़ी कमजोरी आई, जिससे सोने को निचले स्तरों से हल्का सहारा मिला। 2. फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों की संभावना का सोने पर क्या असर पड़ रहा है? दिसंबर में फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की 75% संभावना के चलते गैर-ब्याज वाली संपत्ति होने के कारण सोने की तेजी सीमित हो गई है। 3. ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर क्या प्रस्ताव दिया है? ईरान ने 48 घंटे में जलडमरूमध्य खोलने की पेशकश की है, बशर्ते अमेरिका प्रतिबंध हटाए और क्षेत्र में अपने सैनिकों की संख्या कम करे। 4. सोने के लिए तात्कालिक तकनीकी सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर क्या हैं? सोने का तात्कालिक सपोर्ट 3,870 से 3,898 डॉलर के बीच है, जबकि ऊपर की ओर 4,068.55 डॉलर पर 100-अवधि का ईएमए मजबूत रेजिस्टेंस है। https://trendkia.com/market/irana-varta-aura-us-byaja-daron-ke-phera-men-phnsa-gold-3900-dolara-ke-para-tikane-ki-jaddojahada-54827 TrendKia — Har trend, sabse pehle.