जकार्ता में राजनीतिक अशांति और महंगाई के खतरे से इंडोनेशियाई रुपिया पस्त, डॉलर के मुकाबले 17,800 के स्तर पर पहुंचा इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में लगातार जारी विरोध प्रदर्शनों और एल नीनो के कारण खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने की आशंका से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है। अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से दक्षिण पूर्व एशियाई बाजारों में हलचल बढ़ गई है। एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इंडोनेशियाई रुपिया लगातार तीसरे दिन दबाव में नजर आया, जिससे मुद्रा जोड़ा USD/IDR उछलकर 17,800 के आसपास कारोबार करने लगा। घरेलू स्तर पर गहराते राजनीतिक और आर्थिक चिंताओं के कारण रुपिया में कमजोरी दर्ज की जा रही है। इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में बड़े पैमाने पर जारी विरोध प्रदर्शनों ने वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बना दिया है, जिससे निवेशकों को बीते साल हुई सामाजिक उथल-पुथल की याद सताने लगी है। इसके अलावा, आगामी सप्ताह में जारी होने वाले अगस्त महीने के मुद्रास्फीति आंकड़ों को लेकर भी बाजार सतर्क हैं। एल नीनो मौसम प्रणाली से जुड़ी प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भारी उछाल आने का जोखिम मंडरा रहा है, जिसने घरेलू धारणा को और अधिक नाजुक बना दिया है। घरेलू चुनौतियां और केंद्रीय बैंक का रुख इंडोनेशियाई अर्थव्यवस्था पर घरेलू के साथ-साथ बाहरी दबाव भी लगातार बना हुआ है। जुलाई के आगामी व्यापार डेटा की घोषणा से पहले वैश्विक ऊर्जा बाजारों में बनी अनिश्चितता स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना रही है। इस आर्थिक माहौल के बीच बैंक इंडोनेशिया की नामित अधिकारी डेस्ट्री दमयंती ने नीतिगत निरंतरता बनाए रखने का भरोसा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि केंद्रीय बैंक का मुख्य ध्यान वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने पर केंद्रित रहेगा, जबकि साथ ही देश की आर्थिक वृद्धि को गति देने वाले उपायों का भी पूरा समर्थन किया जाएगा। भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कच्चे तेल का रुझान मध्य पूर्व में कूटनीतिक मोर्चे पर हुई प्रगति के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के साथ क्षेत्रीय जलसीमा और राजस्व साझाकरण को लेकर हुए ऐतिहासिक समझौते ने आपूर्ति संबंधी चिंताओं को कम किया है। इस समझौते से क्षेत्र में तनाव घटने की उम्मीद है, जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों से उत्पन्न होने वाले अल्पकालिक मुद्रास्फीति दबाव में कमी आई है। अमेरिकी बॉन्ड बायबैक योजना पर विवाद दूसरी ओर, अमेरिकी ट्रेजरी की बॉन्ड बायबैक योजना को दोगुना करने की रणनीति पर वित्तीय विशेषज्ञों और दिग्गज निवेशकों द्वारा तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। अरबपति निवेशक स्टेनली ड्रकनमिलर ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए इसे बाजार की विश्वसनीयता के लिए हानिकारक करार दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने एक ठोस और सार्थक कर्ज सुधार लागू करने का एक महत्वपूर्ण अवसर गंवा दिया है, जिससे आने वाले समय में वित्तीय बाजारों की स्थिरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स का तकनीकी विश्लेषण फॉरेक्स बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) का तकनीकी ढांचा वर्तमान में बेहद नाजुक स्थिति में नजर आ रहा है। स्कॉटियाबैंक के रणनीतिकारों ने बाजार को आगाह करते हुए कहा है कि यदि डॉलर इंडेक्स 98.75 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे आता है, तो उस पर मंदी का दबाव एक बार फिर हावी हो सकता है। विश्लेषकों ने इस 98.75 के आंकड़े को डॉलर में नए सिरे से आने वाली गिरावट के लिए एक अहम सीमा रेखा के रूप में चिह्नित किया है। अमेरिकी डॉलर का वैश्विक प्रभाव और फेडरल रिजर्व की भूमिका अमेरिकी डॉलर दुनिया की सबसे प्रमुख आधिकारिक मुद्रा होने के साथ-साथ कई अन्य देशों में समानांतर रूप से प्रचलन में रहने वाली वास्तविक मुद्रा भी है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में यह सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार में डॉलर की हिस्सेदारी 88% से अधिक रही है, जहां प्रतिदिन औसतन 6.6 ट्रिलियन डॉलर का लेन-देन होता है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड का स्थान लेते हुए दुनिया की प्रमुख रिजर्व मुद्रा का दर्जा हासिल किया था। ऐतिहासिक रूप से अमेरिकी डॉलर स्वर्ण मानक पर आधारित था, लेकिन 1971 के ब्रेटन वुड्स समझौते के समाप्त होने के बाद स्वर्ण मानक को पूरी तरह खत्म कर दिया गया। अमेरिकी डॉलर के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक अमेरिका का केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (Fed) और उसकी मौद्रिक नीति है। फेडरल रिजर्व के पास दो मुख्य जिम्मेदारियां हैं, पहला मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करना यानी मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना और दूसरा पूर्ण रोजगार को बढ़ावा देना। इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए केंद्रीय बैंक का सबसे मुख्य हथियार ब्याज दरों में बदलाव करना है। जब अमेरिका में वस्तु एवं सेवाओं की कीमतें बहुत तेजी से बढ़ने लगती हैं और मुद्रास्फीति फेड के 2% के लक्ष्य से ऊपर चली जाती है, तब केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में वृद्धि करता है, जिससे डॉलर की मजबूती बढ़ती है। इसके विपरीत, जब मुद्रास्फीति 2% से नीचे गिर जाती है या बेरोजगारी की दर चिंताजनक रूप से बढ़ जाती है, तब फेड ब्याज दरों में कटौती कर सकता है, जिससे डॉलर के मूल्य में गिरावट आती है। क्वांटिटेटिव ईज़िंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग की कार्यप्रणाली असाधारण वित्तीय संकट की स्थितियों में फेडरल रिजर्व अतिरिक्त डॉलर की छपाई करके क्वांटिटेटिव ईज़िंग (QE) जैसी गैर-पारंपरिक मौद्रिक नीति को लागू करता है। यह प्रक्रिया तब अपनाई जाती है जब बैंकों द्वारा एक-दूसरे को ऋण न देने के कारण वित्तीय प्रणाली में साख का प्रवाह पूरी तरह थम जाता है। 2008 के महान वित्तीय संकट के दौरान क्रेडिट संकट से निपटने के लिए फेड ने इसी रणनीति का प्रयोग किया था। इसके तहत केंद्रीय बैंक नए डॉलर छापकर वित्तीय संस्थानों से अमेरिकी सरकारी बॉन्ड खरीदता है, जिससे बाजार में नकदी की उपलब्धता बढ़ती है। सामान्यतः क्वांटिटेटिव ईज़िंग के कारण अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है। इसके बिल्कुल विपरीत प्रक्रिया को क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) कहा जाता है, जिसमें फेडरल रिजर्व बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व होने वाले बॉन्ड से मिलने वाले मूलधन का पुनर्निवेश नहीं करता। यह नीति आमतौर पर डॉलर को मजबूती प्रदान करती है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में जुलाई महीने का पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) मूल्य सूचकांक 0.2% की दर से बढ़ा है। यह आंकड़ा बाजार की उम्मीदों से अधिक रहा है, जो यह संकेत देता है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति का दबाव अभी भी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। नई दिल्ली स्थित फॉरेक्स विश्लेषक अख्तर फारूकी वैश्विक मुद्रा रुझानों और इस प्रकार के जटिल वित्तीय आंकड़ों का गहन विश्लेषण करते हैं। अन्य प्रमुख विदेशी मुद्राओं और क्रिप्टो बाजार का हाल वैश्विक मुद्रा बाजारों में GBP/USD की जोड़ी एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान अपने साप्ताहिक निचले स्तर के करीब 1.3600 के नीचे स्थिर होती दिखाई दी। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों के आगामी मार्ग को लेकर स्पष्ट संकेत मिलने तक व्यापारी नई दिशात्मक शर्तें लगाने से बच रहे हैं। दूसरी तरफ EUR/USD में हल्की बढ़त देखी गई और यह 1.1655 के स्तर के आसपास पहुंच गया। यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के सख्त मौद्रिक रुख ने यूरो को डॉलर के मुकाबले समर्थन दिया है। अब बाजार के सहभागियों की नजरें शुक्रवार को आयोजित होने वाली जैक्सन होल संगोष्ठी पर टिकी हैं। दक्षिण कोरियाई वोन ने डॉलर के मुकाबले मजबूती प्रदर्शित की, जिससे USD/KRW 0.3% गिरकर 1,380 के करीब आ गया। बैंक ऑफ कोरिया द्वारा लगातार की गई ब्याज दर वृद्धियों के कारण वोन 11 महीने के निचले स्तर को छूने में सफल रहा। इस बीच, डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में सकारात्मक माहौल बना रहा, जहां बिटकॉइन (BTC) गुरुवार को $78,000 के स्तर से ऊपर टिकने में सफल रहा। पिछले 24 घंटों में SPX6900 (SPX) और VeChain (VET) ने दहाई अंकों की बढ़त दर्ज करते हुए बाजार में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। इस पूरी स्थिति के बीच केविन वॉश फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष के रूप में शुक्रवार को जैक्सन होल संगोष्ठी में अपना पहला भाषण देने जा रहे हैं, जिस पर दुनिया भर के निवेशकों की निगाहें टिकी हैं। इसका आप पर असर यह खबर एशियाई मुद्रा बाजारों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है। • भारत में: अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अमेरिकी डॉलर की लगातार मजबूती के कारण भारतीय रुपये (INR) पर भी आंशिक दबाव बन सकता है, जिससे आयात होने वाला कच्चा तेल और इलेक्ट्रॉनिक सामान महंगे होने की संभावना है। आयातकों को विदेशी मुद्रा जोखिम प्रबंधन और हेजिंग पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होगी। • इंडोनेशिया और एशियाई बाजारों में: जकार्ता में विरोध प्रदर्शनों और एल नीनो के कारण खाद्य कीमतों में उछाल से आम नागरिकों के बजट पर असर पड़ेगा। इंडोनेशियाई रुपिया 17,800 प्रति डॉलर पर पहुंचने से देश में आयातित वस्तुओं की लागत बढ़ जाएगी और महंगाई दर में इजाफा होगा। • वैश्विक निवेशकों के लिए: अमेरिकी PCE मुद्रास्फीति 0.2% रहने और फेडरल रिजर्व की नीतियों के कारण वैश्विक पूंजी का प्रवाह उभरते बाजारों से निकलकर अमेरिकी बॉन्ड की तरफ बढ़ सकता है। • क्रिप्टो निवेशकों के लिए: पारंपरिक मुद्रा बाजारों में उथल-पुथल के बावजूद बिटकॉइन $78,000 से ऊपर बना हुआ है, जो डिजिटल परिसंपत्तियों में मजबूत लिवाली और निवेशक रुचि को दर्शाता है। सवाल-जवाब 1. USD/IDR मुद्रा जोड़ा किस स्तर पर कारोबार कर रहा है? एशियाई कारोबारी सत्र में USD/IDR मुद्रा जोड़ा लगातार तीसरे दिन बढ़त बनाते हुए 17,800 के आसपास कारोबार कर रहा है। 2. इंडोनेशियाई रुपिया में गिरावट का मुख्य कारण क्या है? जकार्ता में जारी विरोध प्रदर्शन, राजनीतिक अनिश्चितता और एल नीनो के कारण अगस्त महीने में खाद्य पदार्थों की महंगाई दर बढ़ने का जोखिम रुपिया में गिरावट के प्रमुख कारण हैं। 3. अमेरिका में जुलाई महीने का PCE मुद्रास्फीति आंकड़ा क्या रहा? अमेरिका में जुलाई महीने का पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) सूचकांक बढ़कर 0.2% पर पहुंच गया, जो बाजार की उम्मीदों से अधिक था। 4. बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टोकरेंसी का प्रदर्शन कैसा रहा? बिटकॉइन (BTC) $78,000 के स्तर से ऊपर टिका रहा, जबकि SPX6900 (SPX) और VeChain (VET) ने पिछले 24 घंटों में दहाई अंकों की बढ़त हासिल की। 5. होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर क्या कूटनीतिक समझौता हुआ है? ईरान और ओमान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में क्षेत्रीय जलसीमा और राजस्व साझाकरण को लेकर समझौता किया है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। 6. दक्षिण कोरियाई वोन का डॉलर के मुकाबले क्या रुझान रहा? बैंक ऑफ कोरिया द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के कारण दक्षिण कोरियाई वोन मजबूत हुआ और USD/KRW 0.3% गिरकर 1,380 के करीब पहुंच गया। https://trendkia.com/market/jakarta-men-rajanitika-ashanti-aura-mahngai-ke-khatare-se-indonesian-rupiah-pasta-dollar-ke-mukabale-17-800-ke-stara-para-pahuncha-22933 TrendKia — Har trend, sabse pehle.