जापान में दूसरे पूरक बजट की तैयारी से येन पर बढ़ा दबाव, डॉलर के मुकाबले 158 के पार फिसली मुद्रा जापान में नए पूरक बजट और प्रस्तावित टैक्स छूट को लेकर राजकोषीय चिंताएं बढ़ गई हैं, जिससे जापानी येन में कमजोरी देखी जा रही है। वैश्विक बाजारों में बढ़ती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों के बीच येन डॉलर के मुकाबले 158 के स्तर के इर्द-गिर्द कारोबार कर रहा है। जापान की राजकोषीय नीतियों को लेकर वित्तीय बाजारों में नई हलचल देखने को मिल रही है। जापानी सरकार द्वारा एक और यानी दूसरे पूरक बजट को लाने की तैयारी की चर्चाओं के बीच जापानी येन में नरमी का रुख बना हुआ है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन 158 के मध्य स्तरों के आसपास कारोबार करता नजर आ रहा है। डीबीएस ग्रुप रिसर्च के अर्थशास्त्री चांग वेई लियांग के अनुसार, जब सरकारें अप्रत्याशित वित्तीय खर्च की ओर कदम बढ़ाती हैं, तो विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में उस देश की मुद्रा पर स्वाभाविक रूप से दबाव बनता है। पहले दिए गए आधिकारिक संकेतों में अतिरिक्त बजट की संभावना को खारिज किया गया था और कहा गया था कि आपदाओं या आपात स्थितियों से निपटने के लिए आरक्षित फंड का इस्तेमाल होगा। ऐसे में नए बजट की चर्चा ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। राजकोषीय नीतियां और टैक्स कटौती की लागत बाजारों की बेचैनी सिर्फ नए पूरक बजट तक सीमित नहीं है, बल्कि आगामी वर्षों में प्रस्तावित कर रियायतों को लेकर भी चिंताएं गहरा रही हैं। जापान में अप्रैल 2027 से खाद्य वस्तुओं पर उपभोग कर में कटौती करने की योजना बनाई गई है। वित्तीय अनुमानों के मुताबिक, इस कदम से सरकारी खजाने पर सालाना लगभग 5 ट्रिलियन जापानी येन यानी लगभग 5 लाख करोड़ येन का बोझ पड़ेगा। यह रकम जापान के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के करीब 0.7 फीसदी के बराबर है। जब बॉन्ड यील्ड लगातार बढ़ रही हो, ऐसे नाजुक समय में सरकारी उधारी और खर्च में इस तरह की बढ़ोतरी जापानी सरकारी बॉन्ड यानी जेजीबी के निवेशकों के बीच गंभीर चिंता पैदा करती है। अतिरिक्त उधारी से बॉन्ड की आपूर्ति बढ़ने और उनकी कीमतों पर दबाव आने का खतरा रहता है। बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीति और महंगाई की चुनौतियां सरकारी खर्च में बढ़ोतरी के कारण मुद्रास्फीति के अनुमानों में तेजी आने की संभावना बढ़ जाती है। चांग वेई लियांग ने सचेत किया है कि यदि यह पूरक बजट अर्थव्यवस्था में महंगाई को और भड़काने वाला साबित होता है, तो बैंक ऑफ जापान यानी बीओजे को अपनी मौद्रिक नीति में सख्ती लाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। बीओजे को महंगाई की उम्मीदों पर कड़ी नजर रखनी होगी और वह आने वाले समय में सख्त मौद्रिक रुख का संकेत दे सकता है। हालांकि, मौजूदा समय में बैंक ऑफ जापान की ओर से आई नरम टिप्पणियों ने भी येन को सहारा नहीं मिलने दिया है। अतिरिक्त बजट से जुड़े राजकोषीय जोखिमों के साथ-साथ फ्रांस के ओएटी से जुड़े सरकारी उधारी जोखिम भी वैश्विक बॉन्ड परिदृश्य में हलचल मचा रहे हैं। डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का प्रभाव विदेशी मुद्रा बाजार में केवल जापानी नीतियां ही नहीं, बल्कि अमेरिकी ब्याज दरों का रुख भी भारी असर डाल रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र में यूएसडी/जेपीवाई 158.50 के करीब डेढ़ सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नए सिरे से आई तेजी ने सुरक्षित निवेश के तौर पर अमेरिकी डॉलर की मांग को फिर से बढ़ा दिया है। इस बीच तकनीकी स्तरों पर नजर रखने वाले ट्रेडर आगे की बड़ी बढ़त से पहले 200 दिनों के सरल मूविंग एवरेज यानी 200-डे एसएमए के स्तर के पार निकलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। बाजार की सभी निगाहें अब एफओएमसी मिनट्स पर टिकी हैं, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा साल के अंत से पहले ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं पर नए संकेत मिलने की उम्मीद है। तकनीकी संकेतक और लाइव बाजार आंकड़े विदेशी मुद्रा विनिमय में यूएसडी/जेपीवाई लाइव आंकड़ों के अनुसार 158.27 पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद स्तर 157.96 की तुलना में 0.19 फीसदी की तेजी दर्शाता है। 52 हफ्तों के दौरान इस मुद्रा जोड़ी का दायरा 149.41 से 163.98 के बीच रहा है, जबकि मौजूदा वॉल्यूम 20 दिनों के औसत के 1.00 गुना पर दर्ज किया गया। तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो 14-दिवसीय आरएसआई 56 पर स्थित है, जो संतुलित दायरे का संकेत देता है। एमएसीडी 0.12 पर है जबकि सिग्नल लाइन -0.13 पर है, जिसका 0.25 का हिस्टोग्राम तेजी का संकेत दे रहा है। 20-दिवसीय ईएमए 157.43, 50-दिवसीय ईएमए 157.99 और 200-दिवसीय ईएमए 157.75 पर है, जिसमें गोल्डन क्रॉस बना हुआ है। बॉलिंगर बैंड 153.51 से 159.88 के बीच है और कीमत बैंड के भीतर बनी हुई है। एडीएक्स 19 पर है, जो सीमित दायरे की चाल दर्शाता है। स्टोकैस्टिक फास्ट लाइन 75 और सिग्नल लाइन 72 पर है, जबकि 1.26 का एटीआर दैनिक उतार-चढ़ाव को दर्शाता है। दैनिक पिवट 158.21 पर है, जिसमें पहला रेजिस्टेंस 158.57 और दूसरा रेजिस्टेंस 158.88 है, जबकि पहला सपोर्ट 157.90 और दूसरा सपोर्ट 157.54 पर देखा जा रहा है। वैश्विक परिसंपत्तियों पर बिकवाली का दबाव भू-राजनीतिक अनिश्चितता और बढ़ती बॉन्ड यील्ड के कारण बुधवार को वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की धारणा और कमजोर हुई है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर डॉलर के मुकाबले 0.7000 के नीचे दबाव में बना रहा, जबकि आरबीए से सख्त रुख की उम्मीदें थीं। इसके अलावा, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत उछलकर 102 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई है, जिसने यूरोप के प्रमुख शेयर सूचकांकों में भारी बिकवाली को और गहरा कर दिया है। मजबूत होते अमेरिकी डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड के चलते सोने की कीमतों में भी लगभग 1.20 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। क्रिप्टो बाजार में भी सुधार का दौर देखा गया, जहां बिटकॉइन 87,200 डॉलर के स्तर पर बिकवाली दबाव के बाद नीचे आया, वहीं इथेरियम 2,600 डॉलर के समर्थन स्तर की ओर फिसला और रिपल 1.45 डॉलर के डिमांड क्षेत्र के करीब कारोबार करता नजर आया। केंद्रीय बैंकों के सामने नीतियों का संकट महंगाई और बॉन्ड यील्ड की दोहरी मार ने दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों के सामने नीतिगत असमंजस पैदा कर दिया है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक यानी ईसीबी के सामने एक अनोखी स्थिति बन गई है। आम परिस्थितियों में लक्ष्य से दोगुनी चल रही महंगाई को रोकने के लिए ईसीबी ब्याज दरें बढ़ाने का सीधा रास्ता चुनता। लेकिन मौजूदा हालात सामान्य नहीं हैं, क्योंकि बॉन्ड मार्केट पहले ही यील्ड बढ़ाकर वित्तीय सख्ती का एक हिस्सा खुद ही पूरा कर रहा है। ऐसे में ईसीबी के सामने नीतिगत तालमेल बैठाने की भारी दुविधा खड़ी हो गई है। जापान से लेकर यूरोप और अमेरिका तक, सरकारी खर्च और कर्ज की लागत का यह टकराव आने वाले महीनों में वैश्विक वित्तीय बाजारों की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। इसका आप पर असर जापानी येन में गिरावट और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी से अंतरराष्ट्रीय व्यापार, यात्रा और आयात लागत पर सीधा असर पड़ने की संभावना है। • भारतीय यात्रियों और छात्रों पर असर: जापान की यात्रा करने वाले या वहां पढ़ाई कर रहे भारतीयों के लिए कमजोर येन खर्च को कुछ हद तक सस्ता बना सकता है। दूसरी ओर अमेरिका जाने वाले छात्रों के लिए मजबूत डॉलर के कारण पढ़ाई और रहने का खर्च बढ़ सकता है। • आयात लागत और मुद्रास्फीति: ब्रेंट क्रूड के 102 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से ईंधन आयात बिल में बढ़ोतरी हो सकती है। इससे पेट्रोल, डीजल और माल ढुलाई की लागत बढ़ने से घरेलू महंगाई पर दबाव बन सकता है। • सोने और निवेश पर प्रभाव: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव में 1.20 फीसदी की गिरावट से घरेलू खरीदारों को थोड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि डॉलर की मजबूती सोने में बड़ी गिरावट को सीमित कर सकती है। • मुद्रा और वित्तीय बाजार: वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से उभरते बाजारों से पूंजी निकासी का जोखिम बढ़ता है। शेयर बाजार के निवेशकों को विदेशी पोर्टफोलियो प्रवाह में उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए। ऐसा क्यों हुआ जापान में सरकारी खर्च बढ़ाने के लिए अतिरिक्त बजट लाने की तैयारियों और वैश्विक स्तर पर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल ने येन पर बिकवाली का दबाव बढ़ा दिया है। • पूरक बजट की नई योजना: पहले आधिकारिक बयानों में कहा गया था कि कोई पूरक बजट नहीं आएगा और आपात राहत के लिए आरक्षित फंड का उपयोग होगा। सरकार द्वारा इस रुख को बदलते हुए दूसरे पूरक बजट पर विचार करने से राजकोषीय अनुशासन पर सवाल उठे हैं। • भावी कर कटौती का राजकोषीय बोझ: अप्रैल 2027 से खाद्य वस्तुओं पर उपभोग कर घटाने से सरकारी खजाने पर सालाना 5 ट्रिलियन जापानी येन यानी जीडीपी के लगभग 0.7 फीसदी की चपत लगेगी। बॉन्ड यील्ड बढ़ने के दौर में इस तरह का राजस्व घाटा निवेशकों में बेचैनी पैदा कर रहा है। • अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मांग: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में ताजा उछाल और भू-राजनीतिक चिंताओं ने डॉलर की मांग बढ़ा दी है। इसके विपरीत बैंक ऑफ जापान की नरम टिप्पणियों ने दोनों देशों के बीच ब्याज दरों के अंतर को बनाए रखा है, जिससे येन कमजोर हुआ है। सवाल-जवाब 1. जापानी येन पर हालिया दबाव क्यों देखा जा रहा है? जापान सरकार द्वारा दूसरे पूरक बजट पर विचार करने की खबरों और अप्रैल 2027 में प्रस्तावित टैक्स कटौती से राजकोषीय घाटा बढ़ने की चिंताएं येन को कमजोर कर रही हैं। 2. अप्रैल 2027 की टैक्स कटौती से सरकारी खजाने पर कितना असर पड़ेगा? खाद्य पदार्थों पर उपभोग कर घटाने से सरकारी खजाने को सालाना करीब 5 ट्रिलियन जापानी येन यानी जीडीपी के लगभग 0.7 फीसदी का नुकसान होने का अनुमान है। 3. यूएसडी/जेपीवाई जोड़ी का मौजूदा स्तर क्या है? लाइव आंकड़ों के अनुसार यह मुद्रा जोड़ी 158.27 पर कारोबार कर रही है और एशियाई सत्र के दौरान 158.50 के करीब डेढ़ सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंची थी। 4. बैंक ऑफ जापान की इस स्थिति पर क्या प्रतिक्रिया हो सकती है? यदि अतिरिक्त बजट से महंगाई की उम्मीदें बढ़ती हैं, तो बैंक ऑफ जापान को आने वाले समय में सख्त मौद्रिक रुख अपनाने पर विचार करना पड़ सकता है। 5. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और सोने का क्या रुख रहा? ब्रेंट क्रूड ऑयल 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में तेजी के कारण सोने की कीमतों में लगभग 1.20 फीसदी की गिरावट आई। https://trendkia.com/market/japan-men-dusare-puraka-bajata-ki-taiyari-se-yen-para-barha-dabava-dollar-ke-mukabale-158-ke-para-phisali-mudra-44651 TrendKia — Har trend, sabse pehle.