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  "type": "article",
  "title": "जापान में अगले वित्त वर्ष के बजट प्रस्तावों की होगी कड़ी जांच, कातायामा ने टैक्स कटौती के लिए घाटे वाले बॉन्ड जारी करने से किया इनकार",
  "summary": "जापान में कातायामा ने स्पष्ट किया है कि खाद्य बिक्री कर कटौती की भरपाई के लिए कर्ज नहीं लिया जाएगा और अगले वित्त वर्ष के बजट प्रस्तावों की सख्त समीक्षा होगी। इस बीच अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती से डॉलर के मुकाबले येन दबाव में दिखा।",
  "content": "जापान के नीतिगत गलियारों से वित्तीय अनुशासन को लेकर एक अहम रुख सामने आया है, जहां कातायामा ने साफ कर दिया है कि अगले वित्त वर्ष से जुड़े सभी बजटीय अनुरोधों की बेहद बारीकी और सख्ती से जांच की जाएगी। सरकार का इरादा फिजूलखर्च में भारी कटौती करने और बिना अतिरिक्त कर्ज का बोझ बढ़ाए राजस्व संतुलन साधने का है। इस वित्तीय रुख के तहत स्पष्ट किया गया है कि कर छूट की भरपाई के लिए घाटा पूरा करने वाले बॉन्ड पर कतई निर्भरता नहीं रहेगी। बाजार में देश की साख और विश्वसनीयता को बनाए रखने के मकसद से सरकार खर्च और आय दोनों स्तरों पर व्यापक समीक्षा की तैयारी कर रही है।\n\nटैक्स कटौती और राजस्व का पूरा गणित\nप्रशासन की प्राथमिकताओं का ब्योरा देते हुए यह रेखांकित किया गया कि खाद्य पदार्थों पर बिक्री कर कटौती का वित्तीय भार उठाने के लिए कोई नया कर्ज नहीं उठाया जाएगा। इसके बजाय, गैर कर राजस्व बढ़ाने के सुनियोजित प्रयासों के जरिए आवश्यक संसाधन जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों को उम्मीद है कि कुल कर वसूली में उल्लेखनीय स्तर का अतिरिक्त इजाफा दर्ज किया जाएगा। इसी अनुमानित बढ़ोतरी और गैर कर आय के सहारे वित्तीय संतुलन साधने की योजना बनाई जा रही है, ताकि बजट घाटे की खाई को पाटने के लिए सॉवरेन डेट का सहारा न लेना पड़े। इसके अलावा प्रशासनिक और सरकारी व्यय में जो भी गैर जरूरी खर्चे हैं, उनमें अब सीधे तौर पर तेज कटौती की जाएगी।\n\nमुद्रा बाजार की हलचल और येन का रुख\nवित्तीय नीतियों के इस स्पष्टीकरण के बीच वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में जापानी मुद्रा दबाव में नजर आई। सत्र के दौरान यूएसडी/जेपीवाई 0.26 प्रतिशत चढ़कर 154.75 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग बनी रहने से यह जोड़ी लगातार 155.00 के मनोवैज्ञानिक स्तर की तरफ कदम बढ़ाती दिखी। निवेशक और ट्रेडर्स आगामी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी एफओएमसी और बैंक ऑफ जापान की नीतिगत बैठकों से पहले काफी सतर्क हैं। हालांकि, यदि बैंक ऑफ जापान की ओर से मौद्रिक सामान्यीकरण का रुख कड़ा होता है, तो यह येन को मजबूती दे सकता है और डॉलर-येन के उछाल पर ब्रेक लगा सकता है।\n\nबैंक ऑफ जापान का ऐतिहासिक मौद्रिक सफर\nजापान का केंद्रीय बैंक, जिसे बैंक ऑफ जापान कहा जाता है, देश की मौद्रिक नीति तय करने का वैधानिक निकाय है। बैंक ऑफ जापान का प्रमुख दायित्व बैंक नोट जारी करना, मुद्रा प्रबंधन करना और लगभग 2 प्रतिशत का मुद्रास्फीति लक्ष्य हासिल कर कीमतों में स्थिरता बनाए रखना है। देश में लंबे समय तक बने रहे कम महंगाई के माहौल से उबरने और आर्थिक रफ्तार को गति देने के लिए केंद्रीय बैंक ने 2013 में अल्ट्रा लूज मौद्रिक नीति की शुरुआत की थी। यह पूरी रणनीति क्वांटिटेटिव एंड क्वालिटेटिव ईजिंग यानी क्यूक्यूई पर आधारित थी, जिसमें वित्तीय व्यवस्था में नकदी डालने के लिए नोट छापकर सरकारी और कॉरपोरेट बॉन्ड जैसी परिसंपत्तियों की सीधी खरीदारी की जाती थी।\n\nवर्ष 2016 में केंद्रीय बैंक ने अपनी इस नीति को और आक्रामक रूप दिया। पहले नकारात्मक ब्याज दरें लागू की गईं और फिर 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड के यील्ड को सीधे नियंत्रित करने का कदम उठाया गया। हालांकि, एक लंबे दौर के बाद मार्च 2024 में बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी का ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अपनी इस अल्ट्रा लूज मौद्रिक व्यवस्था से पीछे हटने की शुरुआत कर दी। इस भारी मौद्रिक प्रोत्साहन के कारण येन अपने प्रमुख वैश्विक समकक्षों की तुलना में काफी कमजोर हुआ था। वर्ष 2022 और 2023 में यह गिरावट इसलिए और बढ़ गई क्योंकि अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने दशकों की रिकॉर्ड महंगाई से निपटने के लिए ब्याज दरों में तेज वृद्धि की, जिससे जापान और बाकी दुनिया के बीच नीतिगत अंतर बहुत चौड़ा हो गया। यही ब्याज दर अंतर येन की गिरावट का बड़ा कारण बना, हालांकि मार्च 2024 में रुख बदलने के बाद इस रुझान में आंशिक सुधार देखा गया।\n\nमहंगाई, मजदूरी और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों का हाल\nजापानी येन की कमजोरी और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतों में आए उछाल ने जापान के भीतर घरेलू महंगाई को केंद्रीय बैंक के 2 प्रतिशत के तय लक्ष्य से ऊपर धकेल दिया। इसके साथ ही देश में कर्मचारियों के वेतन में होने वाली संभावित बढ़ोतरी ने भी महंगाई को हवा देने वाले मुख्य कारक के रूप में काम किया। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तर के करीब टिकी हुई है, जिसे तेल कीमतों से जुड़े महंगाई के जोखिमों का समर्थन मिल रहा है। इस माहौल ने अमेरिकी डॉलर को मजबूती दी है।\n\nअन्य संपत्तियों में एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7150 के नीचे कमजोर बना रहा, जो पिछले सत्र में छूए गए तीन सप्ताह के निचले स्तर के करीब है। चीन की ओर से अगस्त महीने के मिले-जुले आर्थिक आंकड़ों से भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कोई खास सहारा नहीं मिला। वहीं सोने की कीमतों में मामूली बढ़त के बाद भी दबाव बरकरार रहा और यह कमोडिटी अपने एक महीने के निचले स्तर के करीब 4,300 डॉलर प्रति औंस के निशान से ठीक नीचे कारोबार करती दिखी। बाजार प्रतिभागी अब एफओएमसी की दो दिवसीय नीतिगत समीक्षा बैठक के शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।\n\nइसका आप पर असर\nजापान की सख्त वित्तीय नीति और केंद्रीय बैंकों की आगामी बैठकों से मुद्रा विनिमय दरों और आयात-निर्यात लागत पर असर पड़ सकता है।\n\n• मुद्रा विनिमय दरें: डॉलर के मुकाबले येन 154.75 के स्तर पर कमजोर बना हुआ है। आयातित उत्पादों पर निर्भर उद्योगों और विदेश यात्रा करने वालों की मुद्रा लागत प्रभावित होगी।\n• सोने के निवेशक: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,300 डॉलर के स्तर के ठीक नीचे बना हुआ है। केंद्रीय बैंकों की नीतिगत घोषणाओं से पहले सोने के घरेलू खुदरा भाव में सीमित उतार-चढ़ाव रह सकता है।\n• वैश्विक बॉन्ड और ब्याज दरें: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में उधारी लागत और पूंजी प्रवाह की दिशा इससे तय होगी।\n• खाद्य कर और राहत: खाद्य बिक्री कर में कटौती को बिना कर्ज लिए लागू करने की योजना है। इससे आम जनता को महंगाई से राहत मिलने के साथ ही राजकोषीय साख बनी रहेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह घटनाक्रम जापान के बढ़ते राजकोषीय घाटे को रोकने के प्रयासों और वैश्विक स्तर पर ब्याज दर भिन्नता के कारण सामने आया है। दशकों के मौद्रिक प्रोत्साहन के बाद अब जापानी नीति निर्माता बाजार में वित्तीय विश्वसनीयता बहाल करने में जुटे हैं।\n\n• राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण: कातायामा ने टैक्स कटौती के लिए घाटा पूरा करने वाले बॉन्ड जारी करने से स्पष्ट मना किया है। सरकार गैर कर राजस्व बढ़ाकर और फिजूलखर्च में भारी कटौती कर वित्तीय अनुशासन लाना चाहती है।\n• मौद्रिक नीतियों का अंतर: 2022 और 2023 में अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने रिकॉर्ड महंगाई से लड़ने के लिए दरें तेजी से बढ़ाईं, जबकि बैंक ऑफ जापान अपनी अल्ट्रा लूज नीति पर अड़ा रहा। इस ब्याज दर अंतर ने येन को कमजोर किया।\n• महंगाई और मजदूरी वृद्धि: कमजोर मुद्रा और वैश्विक ऊर्जा कीमतों के झटके से जापान में महंगाई 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकल गई। मजदूरी में बढ़ोतरी की संभावनाओं ने भी नीति सामान्यीकरण की जमीन तैयार की।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कातायामा ने अगले वित्त वर्ष के बजट को लेकर क्या घोषणा की है?\nउन्होंने कहा कि अगले वित्त वर्ष के सभी बजटीय अनुरोधों की सख्ती से जांच की जाएगी और फिजूलखर्च में भारी कटौती की जाएगी।\n\n2. क्या खाद्य बिक्री कर कटौती के लिए नया कर्ज लिया जाएगा?\nनहीं, कातायामा ने साफ किया है कि खाद्य बिक्री कर कटौती के लिए घाटे वाले बॉन्ड जारी नहीं किए जाएंगे और इसके लिए गैर कर राजस्व का सहारा लिया जाएगा।\n\n3. विदेशी मुद्रा बाजार में यूएसडी/जेपीवाई का क्या स्तर रहा?\nसत्र के दौरान यूएसडी/जेपीवाई जोड़ी 0.26 प्रतिशत बढ़कर 154.75 के स्तर पर कारोबार कर रही थी और 155.00 की ओर बढ़ रही थी।\n\n4. बैंक ऑफ जापान ने अल्ट्रा लूज मौद्रिक नीति कब और क्यों शुरू की थी?\nबैंक ऑफ जापान ने अर्थव्यवस्था को गति देने और कम महंगाई से निपटने के लिए 2013 में क्वांटिटेटिव एंड क्वालिटेटिव ईजिंग के तहत यह नीति शुरू की थी।\n\n5. बैंक ऑफ जापान ने अपनी मौद्रिक नीति में बदलाव कब किया?\nकेंद्रीय बैंक ने मार्च 2024 में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की और अपनी अल्ट्रा लूज मौद्रिक नीति के रुख को औपचारिक रूप से समाप्त किया।\n\n6. वैश्विक बाजार में सोने की क्या स्थिति रही?\nसोने की कीमतें एशियाई सत्र में एक महीने के निचले स्तर के करीब रहीं और यह 4,300 डॉलर प्रति औंस के निशान से ठीक नीचे कारोबार कर रहा था।",
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  "publishedAt": "2026-09-19",
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