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  "type": "article",
  "title": "फेडरल रिजर्व के फैसले से पहले अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सीमित दायरे में जापानी येन, अन्य प्रमुख मुद्राएं भी सुस्त",
  "summary": "फेडरल रिजर्व की आने वाली मौद्रिक नीति बैठक से पहले जापानी येन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 163.75 के आसपास स्थिर बना हुआ है। वहीं अन्य मुद्रा बाजारों और कमोडिटी में भी सतर्कता देखी जा रही है।",
  "content": "अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की महत्वपूर्ण मौद्रिक नीति घोषणा से ठीक पहले एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान जापानी येन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 163.75 के स्तर पर सपाट कारोबार कर रहा है। निवेशकों द्वारा किसी भी तरह का बड़ा कदम उठाने से बचने और प्रतीक्षा करो तथा देखो की नीति अपनाने के कारण यूएसडी/जेपीवाई जोड़ी में फिलहाल दिशाहीनता बनी हुई है।\n\nअन्य प्रमुख मुद्राओं और सर्राफा बाजार का हाल\n\nइस बीच, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत को मापता है, मामूली रूप से फिसलकर लगभग 101.46 के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा है। ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी एशियाई सत्र के दौरान तेजी के साथ खुलने के बाद थोड़ा नीचे आई है और 1.3290 के आसपास बनी हुई है। बाजार में छाई इस सतर्कता की मुख्य वजह बुधवार को आने वाला फेडरल रिजर्व का नीतिगत फैसला है। इसके अलावा, यूरोपीय सुबह के सत्र में यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी मासिक निचले स्तर के पास ही संघर्ष कर रही है और 1.1350 के आसपास मंडरा रही है, क्योंकि डॉलर की मांग लगातार बनी हुई है।\n\nदूसरी तरफ, सर्राफा बाजार में सोने की चाल सुस्त नजर आ रही है और यह एशियाई सत्र में 4050 डॉलर के ठीक नीचे कारोबार कर रहा है, जिसमें दिनभर के दौरान 0.85 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इससे पहले सोने को 4100 डॉलर के ऊपर टिकने में असफलता मिली थी, जिससे यह संकेत मिलता है कि bullion में बिकवाली का दबाव अभी भी बना हुआ है। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी कमजोरी दिख रही है, जहां रिपल और स्टेलर में पिछले दिन 4 प्रतिशत और 5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई थी, और डेरिवेटिव्स के आंकड़े भी मंदी की ओर इशारा कर रहे हैं।\n\nफेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान की नीतियां\n\n CME FedWatch tool के आंकड़ों के मुताबिक, व्यापारियों का मानना है कि फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को 3.50 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत के दायरे में यथावत रखने की संभावना 62 प्रतिशत है। इसके साथ ही सितंबर की नीतिगत बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की मजबूत संभावना भी जताई जा रही है। बाजार के तमाम प्रतिभागी यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि संयुक्त राज्य अमेरिका में महंगाई दर केंद्रीय बैंक के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर और कितने समय तक बनी रहेगी।\n\nइस बीच, बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी सख्त मौद्रिक नीति रुख को बनाए रखने की उम्मीद है। फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान दोनों के द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने की संभावना है, लेकिन निवेशकों की निगाहें आगामी बयानों पर टिकी हुई हैं।\n\nकेंद्रीय बैंकों के कार्य और मौद्रिक नीति का तंत्र\n\nदुनियाभर के केंद्रीय बैंकों का मुख्य उद्देश्य किसी देश या क्षेत्र में मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करना होता है। अर्थव्यवस्थाओं को लगातार महंगाई या मंदी का सामना करना पड़ता है, जो चुनिंदा वस्तुओं और सेवाओं के उतार-चढ़ाव से तय होती है। एक ही वस्तु के दाम लगातार बढ़ने को महंगाई और लगातार घटने को मंदी कहा जाता है। केंद्रीय बैंक का काम अपनी नीतिगत दरों में फेरबदल करके मांग को नियंत्रित रखना होता है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व, यूरोपीय सेंट्रल बैंक या बैंक ऑफ इंग्लैंड जैसे बड़े केंद्रीय बैंकों का लक्ष्य महंगाई को 2 प्रतिशत के करीब बनाए रखना होता है।\n\nमहंगाई को घटाने या बढ़ाने के लिए केंद्रीय बैंक के पास बेंचमार्क नीतिगत दर यानी ब्याज दर का सबसे बड़ा हथियार होता है। पहले से तय समय पर केंद्रीय बैंक अपनी नीतिगत दर की घोषणा करता है और दर को स्थिर रखने, घटाने या बढ़ाने के पीछे के कारणों को स्पष्ट करता है। इसके आधार पर स्थानीय बैंक अपनी बचत और ऋण दरों में बदलाव करते हैं, जिससे लोगों के लिए बचत पर रिटर्न पाना या कंपनियों के लिए कर्ज लेना और निवेश करना आसान या कठिन हो जाता है। जब केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में भारी बढ़ोतरी करते हैं, तो इसे मौद्रिक कड़ाई कहा जाता है, और जब दरें घटाई जाती हैं, तो इसे मौद्रिक ढील कहा जाता है।\n\nनीति निर्माता और मौद्रिक बोर्ड की कार्यप्रणाली\n\nकेंद्रीय बैंक आमतौर पर राजनीतिक रूप से स्वतंत्र होते हैं। नीति बोर्ड में शामिल होने वाले सदस्यों को कई दौर की सुनवाइयों और पैनलों से गुजरना पड़ता है। बोर्ड के प्रत्येक सदस्य की महंगाई पर नियंत्रण और मौद्रिक नीति को लेकर अपनी राय होती है। जो सदस्य कम दरों और आसान ऋण के जरिए अर्थव्यवस्था को तेजी देना चाहते हैं और 2 प्रतिशत से थोड़ी अधिक महंगाई को स्वीकार करते हैं, उन्हें 'डव्स' कहा जाता है। इसके विपरीत, जो सदस्य बचत को बढ़ावा देने और महंगाई पर हमेशा कड़ी नजर रखने के पक्ष में होते हैं, उन्हें 'हॉक्स' कहा जाता है, जो महंगाई को 2 प्रतिशत या उससे नीचे लाने के लिए प्रतिबद्ध होते हैं।\n\nबैठकों की अध्यक्षता करने वाले चेयरमैन का काम दोनों पक्षों के बीच आम सहमति बनाना होता है और नीति में बदलाव पर टाई की स्थिति से बचने के लिए उनका वोट निर्णायक होता है। चेयरमैन अक्सर भाषण देते हैं जिनके जरिए मौद्रिक रुख की जानकारी दी जाती है। नीतिगत घोषणा से कुछ दिन पहले ब्लैकआउट पीरियड शुरू होता है, जिसके दौरान बोर्ड के सभी सदस्य सार्वजनिक रूप से बयान देने से प्रतिबंधित होते हैं ताकि बाजार में अनावश्यक उतार-चढ़ाव न आए।\n\nइसका आप पर असर\nव्यापक आर्थिक प्रभाव: वैश्विक मुद्रा बाजारों और केंद्रीय बैंकों के नीतिगत फैसलों का सीधा असर आयात-निर्यात लागत, कच्चे तेल के दामों और घरेलू निवेशकों की धारणा पर पड़ता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले जापानी येन किस स्तर पर कारोबार कर रहा है?\nजापानी येन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 163.75 के स्तर पर सपाट कारोबार कर रहा है।\n\n2. CME FedWatch tool के अनुसार ब्याज दरों में बदलाव को लेकर क्या अनुमान है?\nव्यापारियों के अनुसार फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को 3.50% से 3.75% के दायरे में यथावत रखने की 62% संभावना है।\n\n3. सोने की कीमत में हालिया रुझान कैसा है?\nसोना एशियाई सत्र के दौरान 4,050 डॉलर के ठीक नीचे कारोबार कर रहा है और इसमें 0.85% की गिरावट दर्ज की गई है।\n\n4. केंद्रीय बैंकों का मुख्य लक्ष्य क्या होता है?\nकेंद्रीय बैंकों का मुख्य लक्ष्य देश या क्षेत्र में मूल्य स्थिरता बनाए रखना और महंगाई को 2 प्रतिशत के करीब रखना होता है।",
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  "category": "बाज़ार",
  "publishedAt": "2026-07-28",
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