जापानी येन के मुकाबले बढ़त पर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की सख्त नीति का मिल रहा समर्थन वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों के कारण जापानी येन के मुकाबले ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में लगातार मजबूती देखी जा रही है। वैश्विक कमोडिटी बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी और प्रमुख केंद्रीय बैंकों की अलग-अलग मौद्रिक रणनीतियों के चलते जापानी येन के मुकाबले ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/JPY) में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है। दुनिया भर में कच्चे तेल के ऊंचे दामों ने जापान जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए आयात की लागत को काफी बढ़ा दिया है, जिससे जापानी येन पर भारी गिरावट का दबाव बना हुआ है। इसके विपरीत, रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा निकट भविष्य में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी किए जाने की बाजार की मजबूत उम्मीदों के चलते ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को लगातार समर्थन मिल रहा है। दोनों देशों के आर्थिक परिदृश्यों में यह बड़ा अंतर इस समय विदेशी मुद्रा बाजारों में AUD/JPY जोड़ी की दिशा तय कर रहा है। AUD/JPY विनिमय दर और जापानी अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव का विश्लेषण मंगलवार को यूरोपीय कारोबारी घंटों के दौरान AUD/JPY मुद्रा जोड़ी लगातार दूसरे दिन बढ़त के साथ आगे बढ़ी और 110.40 के स्तर के आसपास कारोबार करती देखी गई। जापानी येन की इस कमजोरी का मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आ रही तेजी है, जो जापान के ऊर्जा-निर्भर आर्थिक ढांचे पर गहरा असर डाल रही है। चूंकि जापान को अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं जैसे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के लिए लगभग पूरी तरह से आयात पर निर्भर रहना पड़ता है, इसलिए वैश्विक ऊर्जा बाजारों में कोई भी मूल्य वृद्धि उसके आयात बिल को तुरंत बढ़ा देती है। इससे देश के व्यापार संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और स्थानीय मुद्रा येन पर भारी दबाव आ जाता है, जिससे यह अपने प्रमुख व्यापारिक साझेदारों की मुद्राओं, विशेष रूप से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले कमजोर होने लगती है। हालांकि, AUD/JPY की इस तेजी की राह में कुछ ऐसे कारक भी मौजूद हैं जो जापानी येन की गिरावट को थामने का काम कर रहे हैं। विदेशी मुद्रा बाजार के प्रतिभागियों को अभी भी उम्मीद है कि बैंक ऑफ जापान (BoJ) अपनी ब्याज दर प्रणाली को सामान्य करने के लिए अधिक आक्रामक मौद्रिक नीति अपना सकता है। इसके साथ ही, वैश्विक कैरी ट्रेड के पलटने (अनवाइंडिंग) की प्रक्रिया जारी है, जिसमें निवेशक सस्ती दरों पर येन उधार लेकर अधिक ब्याज देने वाली विदेशी संपत्तियों में निवेश करते हैं। जब भी बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक इन संपत्तियों को बेचकर वापस येन खरीदते हैं, जिससे येन की गिरावट सीमित हो जाती है। इसके अलावा, ऐसे संकेत भी मिले हैं कि जापान के घरेलू संस्थागत निवेशक अपनी विदेशी संपत्तियों को वापस देश में ला रहे हैं (रीपेट्रिएशन), जिससे जापानी मुद्रा को एक मजबूत सुरक्षा कवच मिल रहा है। RBA की सख्त मौद्रिक नीति और वैश्विक रुख दूसरी तरफ, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) की आगामी मौद्रिक नीति को लेकर बनी सख्त उम्मीदों से काफी मजबूती मिल रही है। निवेशक इस समय RBA के डिप्टी गवर्नर एंड्रीव हॉसर द्वारा दिए गए एक सख्त (हॉकिश) भाषण का विश्लेषण कर रहे हैं। इस भाषण ने बाजार की धारणा को पूरी तरह से बदल दिया है, जिससे अब ट्रेडर्स यह मानने लगे हैं कि RBA इस महीने या आगामी नवंबर में अपनी नीतिगत ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी कर सकता है। रबोबैंक के वित्तीय विश्लेषकों का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया का यह सख्त रवैया अमेरिकी ट्रेजरी की प्राथमिकताओं से पूरी तरह मेल खाता है, जो चाहती है कि ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था के गैर-आवास (नॉन-हाउसिंग) क्षेत्रों में मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए और अधिक प्रभावी कदम उठाए जाएं। चीन के आर्थिक आंकड़े और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर उनका असर चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच बहुत गहरे व्यापारिक संबंध हैं, जिसके कारण चीन से जारी होने वाले आर्थिक आंकड़े ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की चाल पर सीधा प्रभाव डालते हैं। हाल ही में चीन की ओर से जारी आंकड़े मिले-जुले आर्थिक सुधार की ओर इशारा करते हैं। चीन में अगस्त महीने की रिटेल सेल्स (खुदरा बिक्री) में सालाना आधार पर केवल 0.4% की मामूली वृद्धि दर्ज की गई। यह आंकड़ा बाजार के 0.8% के अनुमान से काफी कम रहा और जुलाई में दर्ज की गई 0.6% की वृद्धि से भी धीमा रहा, जो यह दिखाता है कि चीनी बाजार में घरेलू उपभोक्ता मांग और आत्मविश्वास अभी भी कमजोर बना हुआ है। इसके विपरीत, चीन का औद्योगिक उत्पादन (इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन) उम्मीद से बेहतर रहा और इसमें सालाना आधार पर 5.2% की वृद्धि दर्ज की गई। यह बाजार के 4.8% के अनुमान और पिछले महीने की 4.5% की वृद्धि से काफी बेहतर है, जिससे पता चलता है कि चीन का विनिर्माण क्षेत्र लगातार आर्थिक गतिविधियों को सहारा दे रहा है। हालांकि, चीन का फिक्स्ड एसेट इन्वेस्टमेंट (स्थिर संपत्ति निवेश) अगस्त में सालाना आधार पर -7.2% रहा, जो बाजार की उम्मीदों के बिल्कुल अनुरूप था। लेकिन जुलाई के -6.7% के आंकड़े की तुलना में इसमें और गिरावट आई है, जो यह दर्शाता है कि बुनियादी ढांचे और संपत्ति बाजार में निवेश लगातार कमजोर बना हुआ है, जिससे भविष्य में ऑस्ट्रेलियाई औद्योगिक धातुओं की मांग पर असर पड़ सकता है। वैश्विक केंद्रीय बैंकों के बुनियादी सिद्धांत और जिम्मेदारियां विदेशी मुद्रा बाजार की इन गतियों को पूरी तरह से समझने के लिए दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की मुख्य जिम्मेदारियों को जानना बेहद जरूरी है। किसी भी केंद्रीय बैंक का सबसे पहला और महत्वपूर्ण काम देश के भीतर दीर्घकालिक मूल्य स्थिरता (प्राइस स्टेबिलिटी) को सुनिश्चित करना होता है। हर अर्थव्यवस्था को समय-समय पर मुद्रास्फीति (इन्फ्लेशन) और अपस्फीति (डिफ्लेशन) के चक्रों का सामना करना पड़ता है। जब बाजार में वस्तुओं और सेवाओं की औसत कीमतें लगातार बढ़ती हैं, तो उसे मुद्रास्फीति कहा जाता, जबकि इन कीमतों का लगातार गिरना अपस्फीति कहलाता है। केंद्रीय बैंक अपनी नीतिगत दरों में बदलाव करके बाजार में मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने का काम करते हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed), यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) और बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) जैसे बड़े केंद्रीय बैंकों का मुख्य लक्ष्य वार्षिक मुद्रास्फीति को 2% के आसपास बनाए रखना होता है। मौद्रिक नीति के उपकरण और ब्याज दरों का बाजार में संचरण मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने या बढ़ाने के लिए केंद्रीय बैंकों के पास जो सबसे बड़ा नीतिगत उपकरण होता है, वह है उनकी बेंचमार्क नीतिगत दर, जिसे आम भाषा में ब्याज दर (इंटरेस्ट रेट) कहा जाता है। पूर्व-निर्धारित समय पर, केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति ब्याज दरों पर अपने फैसले की घोषणा करती है और इसके पीछे के आर्थिक कारणों को स्पष्ट करती है कि वे दरों को स्थिर रख रहे हैं, बढ़ा रहे हैं या घटा रहे हैं। इसके बाद वाणिज्यिक बैंक (कमर्शियल बैंक) भी केंद्रीय बैंक के फैसले के आधार पर अपने लोन और जमा की दरों में बदलाव करते हैं। यह प्रक्रिया सीधे तौर पर आम लोगों और कंपनियों को प्रभावित करती है, क्योंकि ब्याज दरें बढ़ने पर लोन लेना महंगा हो जाता है और कंपनियों के लिए निवेश करना कठिन होता है, जबकि दरें घटने पर पूंजी सस्ती हो जाती है और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है। ब्याज दरों में बड़ी बढ़ोतरी को मौद्रिक सख्ती (मॉनेटी टाइटनिंग) कहा जाता है, जबकि दरों में कटौती को मौद्रिक ढील (मॉनेटरी ईजिंग) कहा जाता है। केंद्रीय बैंक के आंतरिक मतभेद: हॉक्स, डोव्स और ब्लैकआउट अवधि केंद्रीय बैंक अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आमतौर पर राजनीतिक हस्तक्षेप से पूरी तरह स्वतंत्र होकर काम करते हैं। नीति-निर्माता बोर्ड के सदस्यों को एक लंबी और पारदर्शी प्रक्रिया के बाद नियुक्त किया जाता है। बोर्ड के हर सदस्य का आर्थिक नीतियों को लेकर अपना एक अलग दृष्टिकोण होता है। जो सदस्य ब्याज दरों को कम रखकर आर्थिक गतिविधियों और रोजगार को बढ़ावा देना पसंद करते हैं, भले ही इसके कारण मुद्रास्फीति 2% से थोड़ी ऊपर चली जाए, उन्हें 'डोव्स' कहा जाता है। दूसरी तरफ, जो सदस्य हर हाल में मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने और बचत को बढ़ावा देने के लिए ऊंची ब्याज दरों के समर्थक होते हैं, उन्हें 'हॉक्स' कहा जाता है। ये हॉकिश सदस्य तब तक शांत नहीं बैठते जब तक मुद्रास्फीति 2% या उससे नीचे नहीं आ जाती। हर बैठक की अध्यक्षता गवर्नर या अध्यक्ष करते हैं, जिनका मुख्य काम इन दोनों विचारधाराओं के बीच सहमति बनाना होता है। मतदान में बराबरी की स्थिति होने पर अध्यक्ष ही अपना निर्णायक वोट डालते हैं। नीतिगत बैठकों से कुछ दिन पहले 'ब्लैकआउट अवधि' लागू हो जाती है, जिसके दौरान किसी भी नीति-निर्माता को सार्वजनिक रूप से ब्याज दरों या मौद्रिक नीतियों पर बात करने की अनुमति नहीं होती है, ताकि बाजार में अचानक कोई उथल-पुथल न मचे। वैश्विक मुद्रा और कमोडिटी बाजारों का ताजा रुख अगर हम अन्य वित्तीय बाजारों पर नजर डालें, तो वहां भी काफी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। मंगलवार को एशियाई सत्र के दौरान AUD/USD की जोड़ी दबाव में रही और 0.7150 के स्तर से नीचे कारोबार करती दिखी, जो कि पिछले सत्र में छुए गए तीन सप्ताह के निचले स्तर के करीब है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स के बहु-वर्षीय उच्चतम स्तर पर बने रहने के कारण अमेरिकी डॉलर को काफी मजबूती मिल रही है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव है। निवेशक इस समय फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की महत्वपूर्ण बैठक के नतीजों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसी तरह, USD/JPY की जोड़ी मंगलवार को 155.00 के स्तर की तरफ बढ़ती नजर आई, क्योंकि व्यापारी इस सप्ताह होने वाली FOMC और BoJ की नीतिगत बैठकों से पहले सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। अमेरिकी फेड द्वारा लंबे समय तक ब्याज दरों को ऊंचा रखने की संभावना और तेल जनित मुद्रास्फीति के खतरों ने बॉन्ड यील्ड को ऊपर बनाए रखा है। हालांकि, अगर BoJ की तरफ से मौद्रिक सामान्यीकरण को लेकर कोई आक्रामक संकेत मिलता है, तो जापानी येन मजबूत हो सकता है और USD/JPY की बढ़त सीमित हो सकती है। इसके अलावा, कमोडिटी बाजार में सोना (Gold) भी एशियाई सत्र में मामूली बढ़त के बाद लगातार संघर्ष कर रहा है और अपने एक महीने के निचले स्तर $4,300 के ठीक नीचे बना हुआ है। निवेशक आज से शुरू होने वाली दो दिवसीय FOMC बैठक के कारण बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं, जिससे बाजार में शांत और सतर्क माहौल बना हुआ है। इसका आप पर असर वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में हो रहा यह विकास अंतरराष्ट्रीय यात्रियों, आयातकों और खुदरा मुद्रा निवेशकों को सीधे प्रभावित करता है। • खुदरा निवेशकों के लिए: AUD/JPY जोड़ी में आ रही मजबूती विदेशी मुद्रा बाजार में ट्रेडिंग और मुनाफे के नए अवसर प्रदान करती है। इसका मतलब है कि निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को समायोजित करने के लिए आगामी BoJ और FOMC बैठकों पर पैनी नजर रखनी चाहिए। • अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए: भारत से ऑस्ट्रेलिया जाने वाले छात्रों और पर्यटकों को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मजबूत होने से अधिक खर्च उठाना पड़ सकता है। इससे ट्यूशन फीस, रहने के खर्च और दैनिक यात्रा बजट में बढ़ोतरी हो सकती है। • आयातकों और व्यवसायों के लिए: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में मूल्यवर्गित कच्चे माल या तैयार वस्तुओं का आयात करने वाली कंपनियों की लागत बढ़ जाएगी। इसके परिणामस्वरूप उन्हें इन बढ़े हुए खर्चों का बोझ अंततः आम उपभोक्ताओं पर डालना पड़ सकता है। • ऊर्जा उपभोक्ताओं के लिए: वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, जो येन को कमजोर कर रही है, आमतौर पर दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का संकेत देती है। इससे आने वाले समय में घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल के दामों में वृद्धि हो सकती है। ऐसा क्यों हुआ AUD/JPY मुद्रा जोड़ी में आ रही यह मजबूती जापान और ऑस्ट्रेलिया में अलग-अलग आर्थिक परिस्थितियों और वैश्विक स्तर पर बढ़ती ऊर्जा लागतों के कारण है। • वैश्विक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें: जापान अपनी अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए लगभग पूरी तरह से जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भर है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें जापान के आयात बिल को बढ़ा देती हैं, जिससे येन पर दबाव पड़ता है। • RBA का सख्त रुख: RBA के डिप्टी गवर्नर एंड्रीव हॉसर के सख्त भाषण ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी को लेकर बाजार की उम्मीदों को बढ़ा दिया है। ट्रेडर्स अब इस महीने और नवंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं को मानकर चल रहे हैं। • केंद्रीय बैंकों के विरोधाभासी कदम: हालांकि BoJ द्वारा नीतिगत सख्ती और कैरी ट्रेड के बंद होने से येन को कुछ सुरक्षा मिल रही है, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को घरेलू ब्याज दरों में वृद्धि की उम्मीदों से अधिक मजबूत धक्का मिल रहा है। यह स्थिति AUD/JPY जोड़ी के लिए अनुकूल माहौल बना रही है। सवाल-जवाब 1. जापानी येन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले दबाव में क्यों है? वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण येन कमजोर हो रहा है, जिससे जापान की ऊर्जा-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए आयात लागत काफी बढ़ गई है। 2. विदेशी मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को किस वजह से समर्थन मिल रहा है? डिप्टी गवर्नर एंड्रीव हॉसर के सख्त भाषण के बाद रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा आगामी समय में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बाजार उम्मीदों से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन मिल रहा है। 3. कौन से घरेलू कारक इस समय जापानी येन की गिरावट को सीमित कर रहे हैं? बैंक ऑफ जापान द्वारा मौद्रिक नीति में सख्ती की उम्मीदों, वैश्विक कैरी ट्रेड के पलटने और जापानी निवेशकों द्वारा विदेशी संपत्तियों को वापस लाने से येन की गिरावट सीमित हो रही है। 4. अगस्त में चीन की खुदरा बिक्री का प्रदर्शन कैसा रहा? अगस्त में चीन की खुदरा बिक्री (रिटेल सेल्स) में सालाना आधार पर 0.4% की वृद्धि हुई, जो कि अनुमानित 0.8% और पिछले महीने की 0.6% की वृद्धि से कम थी। 5. USD/JPY की जोड़ी वर्तमान में कहां कारोबार कर रही है? महत्वपूर्ण केंद्रीय बैंक बैठकों से पहले मंगलवार सुबह USD/JPY की जोड़ी 155.00 के स्तर की ओर बढ़ती नजर आ रही है। https://trendkia.com/market/japanese-yen-ke-mukabale-barhata-para-australian-dollar-reserve-bank-of-australia-ki-sakhta-niti-ka-mila-raha-samarthana-32472 TrendKia — Har trend, sabse pehle.