जापानी येन पर भारी पड़ रहा ब्याज दरों का बड़ा अंतर, ब्रिटिश पाउंड और डॉलर के सामने दबाव बढ़ा बैंक ऑफ जापान की दरों में बढ़ोतरी के बावजूद मध्य पूर्व संकट और वैश्विक केंद्रीय बैंकों के कड़े रुख से जापानी येन दबाव में है, जिससे पाउंड स्टर्लिंग को मजबूती मिल रही है। वैश्विक मुद्रा बाजारों में जापानी येन की व्यापक कमजोरी का सीधा फायदा ब्रिटिश पाउंड को मिल रहा है। यूनाइटेड किंगडम और जापान के बीच ब्याज दरों का भारी अंतर पाउंड स्टर्लिंग के पक्ष में माहौल बनाए हुए है, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार में जीबूपी/जेपीवाई क्रॉस में मजबूती देखी जा रही है। हालांकि बैंक ऑफ जापान अपनी उधारी लागत में धीरे-धीरे इजाफा कर रहा है, लेकिन मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण ईंधन की कीमतों और महंगाई पर असर पड़ने से दुनिया भर के प्रमुख केंद्रीय बैंक सख्त रुख बनाए रखने पर मजबूर हैं। यही वजह है कि टोक्यो और अन्य वैश्विक वित्तीय राजधानियों के बीच यील्ड का अंतर बना हुआ है और जापानी मुद्रा पर बिकवाली का दबाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। बैंक ऑफ इंग्लैंड के नीति निर्माताओं की अलग राय ब्रिटेन के केंद्रीय बैंक बैंक ऑफ इंग्लैंड के अधिकारियों की हालिया टिप्पणियों से स्पष्ट हुआ है कि नीतिगत दर को लेकर अंदरूनी मतभेद बने हुए हैं। मौद्रिक नीति समिति की सदस्य स्वाति ढींगरा ने नरमी का संकेत देते हुए कहा कि ब्रिटेन में वित्तीय हालात पहले ही काफी कड़े हो चुके हैं। उनका मानना है कि वर्तमान में वैसी व्यापक मूल्य वृद्धि नहीं दिख रही है जैसी वर्ष 2022 के दौरान देखने को मिली थी। इसके साथ ही उन्होंने रेखांकित किया कि सर्दियों में ऊर्जा की कीमतें दूसरे दौर के मुद्रास्फीति प्रभावों को तय करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगी। इसके विपरीत बैंक ऑफ इंग्लैंड की डिप्टी गवर्नर क्लेयर लोम्बार्डेली ने अधिक सख्त रुख पेश किया। लोम्बार्डेली का कहना है कि वेतन वृद्धि अब भी इतनी अधिक बनी हुई है जो मुद्रास्फीति के तय लक्ष्य के अनुकूल नहीं है। उन्होंने सचेत किया कि यदि ऊर्जा के बढ़े हुए दाम बरकरार रहते हैं और महंगाई में गिरावट या आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती के ठोस प्रमाण सामने नहीं आते हैं, तो नीति को और सख्त करने की संभावना बढ़ती जाएगी। उनका यह भी कहना था कि भू-राजनीतिक संघर्ष जितने लंबे समय तक चलेगा, ब्याज दरों में नई बढ़ोतरी का आधार उतना ही मजबूत होता जाएगा। सरकारी हस्तक्षेप के खतरे और मुद्रा विनिमय दरें विदेशी मुद्रा बाजार में फिलहाल ब्याज दरों के बड़े अंतर का सहारा ब्रिटिश पाउंड को मिल रहा है, लेकिन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले येन में गिरावट ने नीति निर्माताओं के कान खड़े कर दिए हैं। यूएसडी/जेपीवाई जब 160 के मनोवैज्ञानिक स्तर की तरफ बढ़ता है, तब जापानी वित्त मंत्रालय और केंद्रीय बैंक की ओर से बाजार में सीधे हस्तक्षेप का जोखिम तेज हो जाता है। एशियाई कारोबारी सत्र में यूएसडी/जेपीवाई अपने तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर से पीछे हटा और लगभग 158.00 के करीब ठहरा दिखा। जापान में सरकारी बॉन्ड यील्ड में आई तेजी और संभावित सरकारी दखल की आशंका ने येन को हल्का सहारा दिया, जबकि मजबूत अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और फेडरल रिजर्व द्वारा दरें ऊंची रखने की उम्मीदों ने अमेरिकी डॉलर को दो महीने के उच्च स्तर के करीब संभाले रखा। प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले दैनिक उतार-चढ़ाव में येन सबसे ज्यादा स्विस फ्रैंक के सामने मजबूत रहा। बैंक ऑफ जापान और स्विस नेशनल बैंक के मौद्रिक निर्णय जापान के केंद्रीय बैंक बैंक ऑफ जापान ने अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। यह फैसला 7-2 के बहुमत से लिया गया, जो काफी हद तक बाजार विश्लेषकों की उम्मीदों के अनुरूप रहा। हालांकि इस बढ़ोतरी के बाद भी अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में जापान की दरें काफी कम हैं। दूसरी ओर यूरोप में स्विस नेशनल बैंक ने अपनी प्रमुख नीतिगत दर में कोई बदलाव नहीं किया और इसे 0% पर ही बरकरार रखा, जैसा कि वित्तीय बाजार पहले से मानकर चल रहे थे। स्विस नेशनल बैंक के नीतिगत आकलन में स्पष्ट किया गया कि बैंकों द्वारा केंद्रीय बैंक के पास रखी जाने वाली साइट डिपॉजिट पर एक निश्चित सीमा तक नीतिगत दर के हिसाब से भुगतान जारी रहेगा। इसके साथ ही स्विस केंद्रीय बैंक ने वर्ष 2026 के लिए अपने मुद्रास्फीति अनुमान को 0.6% से थोड़ा बढ़ाकर 0.7% कर दिया है। स्विस नेशनल बैंक ने इस बात पर जोर दिया कि स्विट्जरलैंड के आर्थिक परिदृश्य के सामने सबसे बड़ा जोखिम वैश्विक अर्थव्यवस्था के घटनाक्रमों से जुड़ा हुआ है। रोजगार आंकड़े और वैश्विक कूटनीति के बीच अन्य बाजारों की चाल अन्य प्रमुख मुद्राओं और संपत्तियों में भी तेज हलचल देखने को मिल रही है। एशियाई कारोबारी सत्र में एयूडी/यूएसडी फिसलकर 0.7000 के स्तर की तरफ आया। यह गिरावट ऑस्ट्रेलिया के अगस्त महीने के रोजगार आंकड़े जारी होने के बाद आई, जिसमें बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6% दर्ज की गई, जबकि अर्थशास्त्रियों का अनुमान 4.5% रहने का था। हालांकि इसी रिपोर्ट में रोजगार सृजन का आंकड़ा अनुमानों से बेहतर रहा और कुल 39.5 हजार नई नौकरियां जोड़ी गईं। इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली उच्च स्तरीय वार्ता से पहले भी मुद्रा कारोबारी सतर्क नजर आए। कमोडिटी बाजार में सोने पर लगातार दूसरे दिन नकारात्मक दबाव बना रहा। यूरोपीय सत्र के पहले पहर में सोना $4,300 के स्तर से नीचे फिसलकर एक सप्ताह के निचले स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। बुलियन निवेशक डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि इस बैठक से किसी बहुत बड़े ऐलान की उम्मीदें सीमित हैं, लेकिन बाजार सहभागी दुर्लभ धातुओं यानी रेयर अर्थ्स, प्रौद्योगिकी प्रतिबंधों और मौजूदा व्यापारिक संघर्ष विराम के विस्तार से जुड़े हर नए संकेत पर करीबी नजर गड़ाए हुए हैं। इसका आप पर असर मुद्रा विनिमय दरों और ब्याज दरों में आने वाले बदलावों का असर अंतरराष्ट्रीय यात्रा, आयात बिल और निवेश पर पड़ता है। • मुद्रा निवेशकों के लिए: ब्याज दरों में बड़े अंतर के चलते पाउंड और डॉलर के मुकाबले येन में गिरावट का रुख बना हुआ है। यदि जापानी अधिकारी 160 के स्तर पर बाजार में दखल देते हैं, तो विनिमय दरों में अचानक तेज उतार-चढ़ाव आ सकता है। • सोना खरीदारों के लिए: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत $4,300 प्रति औंस से नीचे फिसलने से बुलियन कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है। अमेरिका और चीन की राजनीतिक वार्ता के नतीजों के आधार पर कीमती धातुओं में नया रुझान तय होगा। • वैश्विक यात्रियों और छात्रों के लिए: पाउंड स्टर्लिंग में मजबूती के कारण ब्रिटेन में पढ़ाई और यात्रा का खर्च अपेक्षाकृत अधिक बना रहेगा। इसके विपरीत कमजोर येन के चलते जापान की यात्रा और वहां खरीदारी अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए सस्ती बनी हुई है। • कारोबारियों के लिए: मध्य पूर्व संघर्ष और ऊर्जा कीमतों के चलते वैश्विक स्तर पर महंगाई का दबाव बना हुआ है। केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरें ऊंची रखने की संभावना से उधारी लागत निकट भविष्य में महंगी रह सकती है। ऐसा क्यों हुआ जापानी येन में लगातार आ रही कमजोरी का मुख्य कारण वैश्विक ब्याज दरों और टोक्यो की मौद्रिक नीति के बीच बना लंबा फासला है। मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक तनाव ने कच्चे तेल और ऊर्जा लागत को बढ़ाकर अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों को सख्त रुख बनाए रखने पर मजबूर किया है। • ब्याज दरों का भारी अंतर: बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी दर 1.25% करने के बावजूद ब्रिटेन और अमेरिका की ब्याज दरें काफी अधिक हैं। निवेशक अधिक रिटर्न पाने के लिए कम ब्याज वाली मुद्रा बेचकर उच्च ब्याज वाली संपत्तियों में पूंजी लगाते हैं। • ऊर्जा कीमतों से उपजी महंगाई: मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेजी आई है जिससे मुद्रास्फीति का जोखिम दोबारा बढ़ गया है। इसके चलते बैंक ऑफ इंग्लैंड जैसी संस्थाएं ब्याज दरों में कटौती करने से बच रही हैं। • केंद्रीय बैंकों के रुख में मतभेद: जहां बैंक ऑफ इंग्लैंड की उप गवर्नर ने सख्त मौद्रिक नीति जारी रखने के संकेत दिए हैं, वहीं स्विस नेशनल बैंक ने दरें 0% पर रखी हैं। अलग-अलग देशों के भिन्न आर्थिक रुझान मुद्राओं के क्रॉस रेट्स में असंतुलन पैदा कर रहे हैं। सवाल-जवाब 1. बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों में क्या बदलाव किया है? बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। 2. स्विस नेशनल बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति में क्या निर्णय लिया? स्विस नेशनल बैंक ने अपनी नीतिगत ब्याज दर को 0% पर अपरिवर्तित रखा है और 2026 के लिए महंगाई अनुमान 0.7% तय किया है। 3. बैंक ऑफ इंग्लैंड की क्लेयर लोम्बार्डेली का ब्याज दरों पर क्या कहना है? क्लेयर लोम्बार्डेली के अनुसार वेतन वृद्धि बहुत अधिक है और यदि ऊर्जा कीमतें ऊंची रहीं, तो ब्याज दरें और बढ़ाने की आवश्यकता पड़ सकती है। 4. सोने की कीमतों में क्या रुख देखा गया? सोना लगातार दूसरे दिन गिरावट के साथ $4,300 प्रति औंस से नीचे फिसलकर एक सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया। 5. ऑस्ट्रेलिया के रोजगार आंकड़ों में क्या परिणाम सामने आए? ऑस्ट्रेलिया की बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6% हो गई, जबकि नए रोजगार का आंकड़ा उम्मीद से बेहतर 39.5 हजार रहा। https://trendkia.com/market/japanese-yen-para-bhari-para-raha-byaja-daron-ka-bara-antara-british-pound-aura-dollar-ke-samane-dabava-barha-37817 TrendKia — Har trend, sabse pehle.