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  "type": "article",
  "title": "जियो प्लेटफॉर्म्स 21 अक्टूबर को ला सकती है भारत का सबसे बड़ा आईपीओ, 38,000 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी",
  "summary": "मुकेश अंबानी की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स 3.8 अरब डॉलर का मेगा इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग लाने की योजना बना रही है, जो भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम बन सकता है।",
  "content": "भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम पेश करने की तैयारी पूरी रफ्तार से आगे बढ़ रही है। मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स अपना इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग यानी आईपीओ 21 अक्टूबर को बाजार में उतारने की योजना पर काम कर रही है। इस मेगा निर्गम के जरिए कंपनी का इरादा लगभग 3.8 अरब डॉलर जुटाने का है, जो मौजूदा विनिमय दरों के आधार पर करीब 37,000 से 38,000 करोड़ रुपये बैठता है। यदि यह पेशकश तय कार्यक्रम के अनुरूप बाजार में आती है, तो यह देश के प्राथमिक पूंजी बाजार में एक नया कीर्तिमान स्थापित करेगी।\n\nप्रस्तावित समय सारिणी और शेयर बाजार में पदार्पण\nप्रस्तावित निर्गम की रूपरेखा के मुताबिक यह सार्वजनिक पेशकश निवेशकों के लिए 21 अक्टूबर को खुलेगी और 23 अक्टूबर तक बोली लगाने के लिए उपलब्ध रहेगी। इसके बाद बोली प्रक्रिया पूरी होने पर शेयरों के आवंटन की प्रक्रिया चलेगी और कंपनी का लक्ष्य 28 अक्टूबर को घरेलू स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध होने का है। हालांकि यह पूरी योजना और तिथियों का अंतिम निर्धारण वित्तीय बाजार की तत्कालीन परिस्थितियों पर निर्भर करेगा, और कंपनी प्रबंधन की तरफ से अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक सार्वजनिक घोषणा जारी नहीं की गई है।\n\nपिछली सबसे बड़ी सूचीबद्धताओं के रिकॉर्ड टूटने के आसार\nजियो प्लेटफॉर्म्स का यह संभावित निर्गम यदि पूरी तरह अमल में आता है, तो यह भारतीय बाजार में दर्ज पुराने सभी रिकॉर्ड को बहुत बड़े अंतर से पीछे छोड़ देगा। इससे पहले हुंडई मोटर इंडिया ने वर्ष 2024 में 2.9 अरब डॉलर का निर्गम पेश कर अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया था। इसके अलावा पिछले महीने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई ने 2.3 अरब डॉलर के आईपीओ के साथ बाजार में अपना पदार्पण किया था। जियो प्लेटफॉर्म्स का प्रस्तावित आकार इन दोनों ऐतिहासिक निर्गमों से कहीं अधिक बड़ा है।\n\nकंपनी का उद्यम मूल्यांकन और जुटाए गए धन का उपयोग\nबाजार में इस सार्वजनिक निर्गम के समय जियो प्लेटफॉर्म्स का उद्यम मूल्यांकन 143 से 146 अरब डॉलर के बीच रहने का अनुमान लगाया गया है, जो भारतीय मुद्रा में कम से कम 12 लाख करोड़ रुपये बैठता है। आईपीओ के जरिए जुटाई जाने वाली पूंजी का प्रमुख हिस्सा कंपनी के कर्ज निपटान में लगाया जाएगा। जियो प्लेटफॉर्म्स का स्पष्ट इरादा इन पैसों का इस्तेमाल अपनी सहयोगी कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम के लगभग 27,500 करोड़ रुपये के बकाया कर्ज को चुकाने या समय से पहले अदा करने के लिए करने का है। ऐसे में यह निर्गम केवल कारोबार विस्तार के लिए पूंजी जुटाने के बजाय कंपनी की बैलेंस शीट को पूरी तरह कर्ज मुक्त और मजबूत बनाने की रणनीति के काफी करीब दिखाई देता है।\n\nरिलायंस समूह के लिए प्रतीकात्मक महत्व और बड़े वैश्विक साझेदार\nपूंजीगत आंकड़ों से इतर इस निर्गम का रिलायंस समूह के लिए बहुत गहरा प्रतीकात्मक महत्व भी है। यह साल 2008 के बाद से रिलायंस समूह की ओर से बाजार में लाया जाने वाला पहला सार्वजनिक निर्गम होगा। साथ ही यह इस कारोबारी समूह के भीतर किसी सीधे उपभोक्ता केंद्रित व्यवसाय का पहला आईपीओ बनने जा रहा है। कंपनी के शेयरधारक आधार में पहले से ही दुनिया के शीर्ष तकनीकी दिग्गज शामिल हैं। वैश्विक सोशल मीडिया दिग्गज मेटा के पास कंपनी की 10 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि सर्च इंजन दिग्गज गूगल के पास 7.7 प्रतिशत इक्विटी मौजूद है।\n\nनियामकीय मंजूरी और रोड शो की प्रक्रिया\nइस मेगा निर्गम के लिए नियामक प्रक्रियाएं तेजी से अंतिम चरण की तरफ बढ़ रही हैं। जियो प्लेटफॉर्म्स ने जून के महीने में अपने ड्राफ्ट पेपर बाजार नियामक सेबी के समक्ष दाखिल किए थे, जिस पर सेबी ने 28 अगस्त को अपने अंतिम निष्कर्ष जारी कर दिए थे। कंपनी विदेशी बाजारों में अपने निवेशक रोड शो पहले ही सफलतापूर्वक संपन्न कर चुकी है। इन विदेशी रोड शो का नेतृत्व आकाश अंबानी और ईशा अंबानी ने किया था, जहां कंपनी को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू संस्थागत निवेशकों से काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया हासिल हुई। अब 12 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस दाखिल किए जाने की उम्मीद है, जिसके तुरंत बाद भारत में घरेलू निवेशकों के लिए रोड शो आयोजित किए जाएंगे। रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस आने के बाद ही शेयर का प्राइस बैंड, लॉट साइज और विभिन्न श्रेणियों के कोटा स्पष्ट होंगे।\n\nग्रे मार्केट का रुझान और अनौपचारिक प्रीमियम\nप्राइस बैंड का औपचारिक ऐलान न होने के बावजूद गैर-आधिकारिक ग्रे मार्केट में जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों को लेकर हलचल बनी हुई है। इन्वेस्टरगेन के आंकड़ों के अनुसार 5 अक्टूबर की सुबह इस निर्गम का ग्रे मार्केट प्रीमियम 147 रुपये दर्ज किया गया, जबकि 4 अक्टूबर को इसने 148 रुपये का हालिया उच्चतम स्तर छुआ था। हालांकि निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि ग्रे मार्केट प्रीमियम केवल एक अनौपचारिक और गैर-विनियमित संकेतक होता है, जिसकी दरें बाजार की बदलती धारणा के साथ तेजी से बदल सकती हैं, और इसे लिस्टिंग के दिन के वास्तविक मुनाफे की पक्की गारंटी नहीं माना जा सकता।\n\nइसका आप पर असर\nयह देश का अब तक का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम होगा, जिससे खुदरा और संस्थागत निवेशकों के लिए प्राथमिक बाजार में निवेश के बड़े अवसर पैदा होंगे।\n\n• खुदरा निवेशकों के लिए: 21 से 23 अक्टूबर के बीच आवेदन विंडो खुलने की संभावना के चलते निवेशकों को पूंजी तैयार रखनी होगी। 12 अक्टूबर वाले सप्ताह में रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस आने के बाद लॉट साइज और आवश्यक न्यूनतम निवेश राशि तय होगी।\n• रिलायंस समूह के ग्राहकों के लिए: जुटाई जाने वाली रकम में से 27,500 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाया जाएगा। बैलेंस शीट साफ होने से कंपनी अपनी डिजिटल सेवाओं और दूरसंचार ढांचे को वित्तीय रूप से और सुदृढ़ कर सकेगी।\n• घरेलू पूंजी बाजार पर प्रभाव: 37,000 से 38,000 करोड़ रुपये का विशाल आकार अल्पकालिक रूप से सेकेंडरी मार्केट की नकदी सोख सकता है। संस्थागत और खुदरा निधियां इस बड़े निर्गम की ओर आकर्षित होने से अन्य शेयरों में अस्थायी सुस्ती देखने को मिल सकती है।\n• ग्रे मार्केट पर नजर रखने वालों के लिए: अनौपचारिक प्रीमियम 147 से 148 रुपये के आसपास चल रहा है। निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि यह अनधिकृत संकेत है और अंतिम लिस्टिंग के दिन का प्रतिफल बाजार की तत्कालीन चाल पर तय होगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nजियो प्लेटफॉर्म्स यह विशाल आईपीओ मुख्य रूप से अपनी दूरसंचार इकाई के कर्ज का बोझ उतारने और वर्ष 2008 के बाद पहली बार समूह की उपभोक्ता कंपनी को सीधे शेयर बाजार में लाने के लिए पेश कर रही है।\n\n• कर्ज मुक्ति की वित्तीय योजना: जुटाए जाने वाले 37,000 से 38,000 करोड़ रुपये में से करीब 27,500 करोड़ रुपये रिलायंस जियो इन्फोकॉम के कर्ज को चुकाने में जाएंगे। इसका प्राथमिक उद्देश्य कंपनी को कर्ज के दबाव से मुक्त कर बैलेंस शीट को हल्का करना है।\n• नियामकीय प्रक्रियाओं का पूरा होना: कंपनी ने जून में दस्तावेज दाखिल किए थे, जिस पर सेबी ने 28 अगस्त को अपने अंतिम सुझाव जारी कर दिए। सेबी की मंजूरी मिलने और विदेशी रोड शो पूरे होने के बाद ही अक्टूबर की तारीखें तय की जा सकी हैं।\n• ग्लोबल निवेशकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया: आकाश अंबानी और ईशा अंबानी के नेतृत्व में हुए विदेशी रोड शो में वैश्विक निवेशकों ने गहरी दिलचस्पी दिखाई है। इसी विश्वास के दम पर कंपनी 143 से 146 अरब डॉलर के भारी मूल्यांकन पर बाजार में उतर रही है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ कब खुलने की संभावना है?\nप्रस्तावित योजना के अनुसार यह आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर तक बोली के लिए उपलब्ध रहेगा।\n\n2. कंपनी आईपीओ के माध्यम से कितनी राशि जुटाने की योजना बना रही है?\nकंपनी लगभग 3.8 अरब डॉलर जुटाना चाहती है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 37,000 से 38,000 करोड़ रुपये बैठता है।\n\n3. शेयरों की स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टिंग किस तारीख को हो सकती है?\nयोजना के मुताबिक शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को होने का लक्ष्य रखा गया है।\n\n4. जुटाई गई धनराशि का इस्तेमाल किस काम के लिए किया जाएगा?\nइस राशि का बड़ा हिस्सा रिलायंस जियो इन्फोकॉम के लगभग 27,500 करोड़ रुपये के बकाया कर्ज को चुकाने में इस्तेमाल किया जाएगा।\n\n5. जियो प्लेटफॉर्म्स में किन बड़ी वैश्विक कंपनियों की हिस्सेदारी है?\nकंपनी में मेटा के पास 10 प्रतिशत और गूगल के पास 7.7 प्रतिशत की इक्विटी हिस्सेदारी है।\n\n6. आईपीओ के लिए सेबी से मंजूरी कब मिली थी?\nबाजार नियामक सेबी ने कंपनी के ड्राफ्ट पेपर्स पर 28 अगस्त को अपने अंतिम निष्कर्ष जारी किए थे।\n\n7. वर्तमान में इसका अनौपचारिक ग्रे मार्केट प्रीमियम कितना चल रहा है?\nइन्वेस्टरगेन के अनुसार 5 अक्टूबर की सुबह ग्रे मार्केट प्रीमियम 147 रुपये था, जो 4 अक्टूबर को 148 रुपये के उच्च स्तर पर था।",
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  "category": "बाज़ार",
  "publishedAt": "2026-10-05",
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