कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से ब्रिटेन में 4 प्रतिशत तक बढ़ सकती है महंगाई, बैंक ऑफ इंग्लैंड ने ब्याज दरें 3.75 प्रतिशत पर रखीं वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड के 90 डॉलर के पार पहुंचने के बीच राबोबैंक ने चेतावनी दी है कि कच्चे तेल की महंगाई ब्रिटेन की मौद्रिक नीति के लिए सबसे बड़ा जोखिम बन गई है। इस बीच बैंक ऑफ इंग्लैंड ने अपनी मुख्य ब्याज दर को 3.75 प्रतिशत पर बनाए रखा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार आ रही तेजी अब वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं और केंद्रीय बैंकों की प्राथमिकताओं को नए सिरे से तय कर रही है। राबोबैंक के ताजा विश्लेषण के अनुसार, बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति और ब्रिटेन के आर्थिक परिदृश्य के लिए कच्चा तेल इस समय सबसे महत्वपूर्ण कारक बन चुका है। केंद्रीय बैंक के केंद्रीय पूर्वानुमानों में जहां कच्चे तेल के 76 डॉलर से घटकर 71 डॉलर प्रति बैरल पर आने और महंगाई के 3.2 प्रतिशत पर सीमित रहने का अनुमान जताया गया था, वहीं ब्रेंट क्रूड का 90 डॉलर के पार निकल जाना इन अनुमानों पर पानी फेरता नजर आ रहा है। कच्चे तेल की तेजी और ब्रिटेन की महंगाई के संभावित परिदृश्य राबोबैंक के शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि कच्चे तेल की दरें ब्रिटेन में महंगाई के स्तर को तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगी। केंद्रीय बैंक ने जुलाई के पहले पखवाड़े में ऑयल फ्यूचर्स कर्व के आधार पर अपना बेसलाइन मॉडल तैयार किया था। इस बेसलाइन मॉडल के तहत यह माना गया था कि तीसरी तिमाही में कच्चे तेल की कीमतें 76 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहेंगी और पूर्वानुमान अवधि के अंत तक गिरकर 71 डॉलर प्रति बैरल पर आ जाएंगी, जिससे मुद्रास्फीति का शिखर 3.2 प्रतिशत के पास रहेगा। हालांकि, बाजार की वास्तविक स्थिति इस पूर्वानुमान से काफी अलग हो चुकी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा है। राबोबैंक के गंभीर परिदृश्य विश्लेषण के अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती हैं और वहां बनी रहती हैं, तो ब्रिटेन में मुद्रास्फीति दर 4 प्रतिशत या उससे अधिक तक जा सकती है। यह परिदृश्य मौजूदा बाजार परिस्थितियों के ज्यादा करीब दिखाई दे रहा है और ब्रिटिश संपत्तियों के लिए महंगाई के जोखिम को स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है। बैंक ऑफ इंग्लैंड का मौद्रिक नीति निर्णय और मत विभाजन महंगाई के बढ़ते खतरों के बीच बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अपनी हालिया बैठक में बेंचमार्क ब्याज दर को 3.75 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया है। समिति में इस निर्णय को लेकर 6-3 का मतदान हुआ, जिसमें 6 सदस्यों ने दरों को स्थिर रखने का समर्थन किया जबकि 3 सदस्यों ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी के पक्ष में वोट दिया। विश्लेषकों का मानना है कि सितंबर की आगामी समीक्षा में ब्याज दर में बढ़ोतरी की संभावना काफी कम दिखाई देती है। मौद्रिक नीति में बदलाव केवल तभी देखने को मिल सकता है जब ऊर्जा कीमतों का टिकाऊ झटका ब्रिटिश अर्थव्यवस्था में मजदूरी, वस्तुओं की कीमतों या उपभोक्ता अपेक्षाओं को प्रभावित करने लगे। राबोबैंक के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों का सटीक अनुमान लगाना अत्यधिक कठिन है और यह पूरी तरह से ब्रिटेन के नियंत्रण से बाहर की चीज है। करेंसी मार्केट में हलचल: GBP/USD और EUR/USD में जोरदार उछाल बैंक ऑफ इंग्लैंड के दरें स्थिर रखने के फैसले और अमेरिकी डॉलर में आई चौतरफा कमजोरी के चलते विदेशी मुद्रा बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। GBP/USD जोड़ी 1.3450 के स्तर को पार करते हुए कई हफ्तों के नए उच्च स्तर पर पहुंच गई। ब्रिटिश पाउंड को MPC के 3 सदस्यों के सख्त रुख और अमेरिका के कमजोर जीडीपी आंकड़ों से सहारा मिला। इसी तरह, अमेरिकी सत्र के दौरान EUR/USD जोड़ी 1.1530 के आसपास कारोबार करती हुई छह हफ्तों के नए उच्चतम स्तर पर दर्ज की गई। अमेरिकी डॉलर में बिकवाली का दौर बना हुआ है, जिसके पीछे कई प्रमुख कारण हैं। बुधवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें स्थिर रखने के पक्ष में विभाजित मतदान ने सितंबर में दरों में बदलाव की उम्मीदों पर संशय पैदा किया है। इसके साथ ही, जापानी येन (JPY) में संभावित हस्तक्षेप ने भी डॉलर पर अतिरिक्त दबाव डाला है। अमेरिकी GDP अनुमानों में गिरावट का सोने और डॉलर पर असर विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की कमजोरी का सीधा असर कमोडिटी मार्केट पर पड़ा है। अमेरिका की दूसरी तिमाही (Q2) के शुरुआती सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आंकड़ों ने बाजार को निराश किया है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था दूसरी तिमाही में 1.5 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ी है, जबकि बाजार को 2.1 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद थी। जीडीपी आंकड़ों में इस गिरावट के कारण डॉलर इंडेक्स में बिकवाली तेज हो गई। हालांकि फेडरल रिजर्व की बैठक के बाद डॉलर में अल्पकालिक सुधार देखा गया था, लेकिन वह अपनी बढ़त को बनाए रखने में असमर्थ रहा। इस कमजोर डॉलर के माहौल में सोने की कीमतों को मजबूत सहारा मिला है और सोना 4,100 डॉलर प्रति औंस के स्तर से ठीक ऊपर कारोबार कर रहा है। इसका आप पर असर वैश्विक बाजार और निवेशकों पर: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें दुनिया भर में महंगाई का दबाव बढ़ा सकती हैं, जिससे केंद्रीय बैंकों पर ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख बनाए रखने की मजबूरी बनेगी। भारतीय अर्थव्यवस्था और उपभोक्ताओं पर: ब्रिटेन और पश्चिमी देशों में महंगाई बढ़ने से वैश्विक बॉन्ड यील्ड और कमोडिटी मार्केट प्रभावित हो सकते हैं, जिससे भारत में भी ईंधन और आयातित वस्तुओं की लागत पर असर पड़ सकता है। सवाल-जवाब 1. बैंक ऑफ इंग्लैंड ने ब्याज दरों पर क्या फैसला लिया है? बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति समिति ने 6-3 के बहुमत से अपनी मुख्य ब्याज दर को 3.75 प्रतिशत पर स्थिर रखने का निर्णय लिया है। 2. कच्चा तेल ब्रिटेन में महंगाई को कैसे प्रभावित कर सकता है? राबोबैंक के अनुसार, यदि कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल पर रहता है, तो ब्रिटेन में महंगाई दर 4 प्रतिशत या उससे अधिक तक पहुंच सकती है। 3. ब्रिटेन की महंगाई पर बैंक ऑफ इंग्लैंड का मूल अनुमान क्या था? बैंक का मूल अनुमान 76 डॉलर से गिरकर 71 डॉलर प्रति बैरल कच्चे तेल और 3.2 प्रतिशत के शीर्ष मुद्रास्फीति स्तर पर आधारित था। 4. GBP/USD जोड़ी में तेजी का मुख्य कारण क्या रहा? बैंक ऑफ इंग्लैंड के 3 सदस्यों द्वारा दर वृद्धि का समर्थन करने और अमेरिकी Q2 जीडीपी आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहने के कारण GBP/USD 1.3450 के पार पहुंच गया। 5. अमेरिका के Q2 जीडीपी आंकड़े क्या रहे हैं? अमेरिका की दूसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 1.5 प्रतिशत रही, जो 2.1 प्रतिशत के बाजार अनुमान से कम थी। https://trendkia.com/market/kachche-tela-ki-barhati-kimaton-se-uk-men-4-pratishata-taka-barha-sakati-hai-mahngai-bank-of-england-ne-byaja-daren-3-75-pratishat-12258 TrendKia — Har trend, sabse pehle.