कच्चे तेल की चाल और फेडरल रिजर्व के रुख से अमेरिकी डॉलर में तेजी के आसार कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से अमेरिकी डॉलर की हालिया रफ्तार थोड़ी थमी है, लेकिन फेडरल रिजर्व के आक्रामक संकेतों और वैश्विक अनिश्चितता के कारण डॉलर में फिर से बढ़त बनने के आसार दिख रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने फेडरल रिजर्व की बैठक के बाद बनी अमेरिकी डॉलर की तेज रफ्तार पर कुछ हद तक ब्रेक लगाया है, लेकिन आने वाले दिनों में डॉलर के दोबारा मजबूत होने की पूरी गुंजाइश बनी हुई है। फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख के स्पष्ट संकेत दिए गए हैं। महीने के अंत में अमेरिका के प्रमुख आर्थिक आंकड़ों के अभाव के कारण तेल की कीमतें और केंद्रीय बैंक के अधिकारियों के बयान ही अल्पावधि में डॉलर की दिशा तय करने वाले मुख्य कारक साबित हो रहे हैं। ऊर्जा बाजार की हलचल और कूटनीतिक बैठकों का असर कच्चे तेल के दामों में आई हालिया सुस्ती ने अमेरिकी डॉलर के तेजी के रुझान को थोड़ा धीमा किया है। ऊर्जा बाजारों में इस बात को लेकर कुछ उम्मीद जग रही है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और खाड़ी देशों के प्रतिनिधियों के बीच होने वाली संभावित चर्चा से इस क्षेत्र की भावी योजनाओं पर स्थिति साफ हो सकती है। इसके साथ ही इस बात की भी चर्चा तेज है कि राष्ट्रपति ट्रंप पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर कोई बड़ा कदम उठा सकते हैं, जिसमें सैन्य अभियान तेज करना या फिर शांति का मार्ग चुनना शामिल हो सकता है। इन तमाम राजनीतिक सरगर्मियों के बावजूद बाजार विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियां ब्रेंट क्रूड को इस स्तर पर 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे लाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। फेडरल रिजर्व की सख्ती और ब्याज दरों में बढ़ोतरी के आसार बुधवार को संपन्न हुई फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति समिति की बैठक से आए कड़े संदेशों ने वित्तीय बाजारों को यह संकेत दे दिया है कि यदि महंगाई और ऊर्जा के आंकड़े अनुमति देते हैं, तो अक्टूबर में ब्याज दरों में एक और वृद्धि की जा सकती है। इसी वजह से डॉलर के लिए ऊपर की ओर बढ़ने का जोखिम बरकरार है। नीति निर्माताओं के अनुमानों को दर्शाने वाला डॉट प्लॉट साफ संकेत देता है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक इस वर्ष दरों में दोबारा इजाफा करने का इरादा रखता है। आने वाले दिनों में केंद्रीय बैंक के विभिन्न नीति निर्माताओं के भाषणों पर निवेशकों की गहरी नजर रहेगी, हालांकि औपचारिक बैठक के इतर दिए जाने वाले ये बयान सितंबर के आर्थिक आंकड़े सामने आने के बाद और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाएंगे। विदेशी मुद्रा बाजार में अन्य प्रमुख मुद्राओं की चाल वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में शुक्रवार को एशियाई सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार दूसरे दिन बढ़त के साथ 0.7100 के स्तर से ऊपर टिका रहा। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी ने डॉलर के खरीदारों को रक्षात्मक मुद्रा में रखा। इसके अतिरिक्त, रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर बुलॉक के सख्त बयानों ने ऑस्ट्रेलिया में ब्याज दर बढ़ने की संभावनाओं को हवा दी, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को अच्छा सहारा मिला। हालांकि, फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने अमेरिकी डॉलर में होने वाली गिरावट को सीमित रखा और मुद्रा जोड़ी की बढ़त पर एक सीमा बांध दी। दूसरी ओर, यूरोपीय कारोबारी सत्र में डॉलर के मुकाबले जापानी येन में बिकवाली का दबाव बढ़ता दिखा और यह जोड़ी 158.00 के करीब पहुंचकर दो सप्ताह के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। बैंक ऑफ़ जापान द्वारा ब्याज दर को बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत किए जाने और गवर्नर उएदा के सख्त बयानों के बावजूद येन में कमजोरी दर्ज की गई। दर वृद्धि के पक्ष में आम सहमति न बन पाना और फैसले के खिलाफ दो आश्चर्यजनक असहमति भरे वोटों ने येन के सेंटिमेंट पर भारी दबाव डाला। सोने की कीमतों में रिकॉर्ड चमक और बिटकॉइन का संघर्ष कीमती धातुओं के बाजार में सोने ने शुक्रवार को यूरोपीय सत्र के पहले पहर तक लगातार दूसरे दिन बढ़त दर्ज की और साप्ताहिक स्तर पर नई ऊंचाई छू ली। सोने के खरीदार अब आगे की नई तेजी के लिए 4,400 डॉलर प्रति औंस के स्तर से ऊपर टिकने का इंतजार कर रहे हैं। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट ने केंद्रीय बैंक के आगामी भाषणों और मध्यम स्तर के अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों से पहले डॉलर की बढ़त को रोके रखा, जिससे सोने को गति मिली। क्रिप्टोकरेंसी के मोर्चे पर, बिटकॉइन ने जुलाई में 57,800 डॉलर के वार्षिक निचले स्तर तक फिसलने के बाद शानदार वापसी की है। इस दौरान लगभग 33 प्रतिशत की छलांग लगाते हुए इसने जुलाई और अगस्त में लगातार दो महीने बढ़त दर्ज की। इस मजबूत सुधार के बावजूद बिटकॉइन अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से अब भी करीब 40 प्रतिशत नीचे बना हुआ है। बाजार के कारोबारी अब इस असमंजस में हैं कि क्या यह नई बुल मार्केट की शुरुआत है या फिर व्यापक मंदी के दौर के भीतर आने वाला एक सामान्य तकनीकी उछाल मात्र है। जापान की सस्ती पूंजी के युग में बड़ा नीतिगत मोड़ जापान की दशकों पुरानी बेहद कम ब्याज दरों की नीति ने दुनिया भर के खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में केंद्रीय भूमिका निभाई थी, जिससे जापानी येन वैश्विक स्तर पर फंडिंग का सबसे सस्ता स्रोत बन गया था। इस हफ्ते बैंक ऑफ़ जापान द्वारा मौद्रिक नीति को और कड़ा करने की उम्मीदों के बीच यह सस्ता लाभ अब एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है। जब दुनिया की लगभग सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं महंगाई से निपटने के लिए ब्याज दरें बढ़ा रही थीं, तब लंबे समय तक जापान इस मामले में एक अकेला अपवाद बना रहा था, लेकिन अब वहां भी बदलाव की बयार दिखने लगी है। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर और तेल की बढ़ती कीमतों के इस समीकरण से वैश्विक वित्तीय बाजारों और आम उपभोक्ताओं के बजट पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है। • भारत में प्रभाव: मजबूत अमेरिकी डॉलर और ऊंचे कच्चे तेल के कारण भारत का आयात बिल बढ़ सकता है। इससे घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों और आयातित सामानों पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। • वैश्विक स्तर पर असर: फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें ऊंची रखने की संभावना से विकासशील देशों से पूंजी निकासी बढ़ सकती है। इससे स्थानीय मुद्राओं पर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोरी का जोखिम बना रहेगा। • सोने के खरीदारों के लिए: कमजोर बॉन्ड यील्ड के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,400 डॉलर के करीब मजबूत बना हुआ है। यदि यह स्तर पार होता है, तो घरेलू खुदरा आभूषण बाजारों में सोने की कीमतें और बढ़ सकती हैं। • क्रिप्टो निवेशकों के लिए: बिटकॉइन अपने निचले स्तर से 33 प्रतिशत सुधरने के बाद भी उच्चतम स्तर से 40 प्रतिशत नीचे है। निवेशकों को किसी भी नए निवेश से पहले बाजार के स्पष्ट रुझान का इंतजार करना चाहिए। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी डॉलर और कमोडिटी बाजार में इस हलचल के पीछे फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति, ऊर्जा बाजार की भू-राजनीति और वैश्विक केंद्रीय बैंकों के अलग-अलग रुख जिम्मेदार हैं। • फेडरल रिजर्व का सख्त रुख: हालिया नीतिगत बैठक और डॉट प्लॉट में केंद्रीय बैंक ने साफ किया कि वह महंगाई पर काबू पाने के लिए इस साल दोबारा ब्याज दरें बढ़ाने की योजना बना रहा है। इस रुख ने निवेशकों को अक्टूबर में संभावित दर वृद्धि के लिए तैयार रहने का संकेत दिया है। • कच्चे तेल में मूल्य अनिश्चितता: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और खाड़ी देशों के बीच संभावित बातचीत के बावजूद ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर से नीचे आने की उम्मीद नहीं दिख रही है। ऊर्जा की ये ऊंची कीमतें सीधे तौर पर महंगाई और डॉलर की मजबूती को हवा दे रही हैं। • बैंक ऑफ़ जापान में मतभेद: बैंक ऑफ़ जापान द्वारा दरें 1.25% करने के बावजूद नीति समिति के दो सदस्यों की असहमति ने निवेशकों को हैरान कर दिया। इससे जापानी येन में गिरावट आई और डॉलर को अतिरिक्त बढ़त हासिल हुई। सवाल-जवाब 1. फेडरल रिजर्व की बैठक के बाद अमेरिकी डॉलर की दिशा क्या रहने की उम्मीद है? केंद्रीय बैंक के सख्त रुख और अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना के कारण अमेरिकी डॉलर में आगे भी तेजी के आसार बने हुए हैं। 2. कच्चे तेल के दामों को लेकर बाजार का क्या अनुमान है? खाड़ी देशों के साथ कूटनीतिक चर्चाओं के बावजूद विश्लेषकों का मानना है कि ब्रेंट क्रूड फिलहाल 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आने की संभावना नहीं है। 3. बैंक ऑफ़ जापान द्वारा दरें बढ़ाने के बाद भी जापानी येन क्यों कमजोर हुआ? बैंक ऑफ़ जापान ने दरें बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कीं, लेकिन दर वृद्धि के खिलाफ दो आश्चर्यजनक असहमति वोटों ने येन की धारणा को कमजोर कर दिया। 4. सोने की कीमत में हालिया तेजी का मुख्य कारण क्या है? अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट और आगामी अमेरिकी आंकड़ों से पहले डॉलर की बढ़त थमने से सोना 4,400 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गया है। 5. बिटकॉइन की मौजूदा बाजार स्थिति क्या है? बिटकॉइन जुलाई के 57,800 डॉलर के निचले स्तर से लगभग 33 प्रतिशत सुधरा है, लेकिन अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से अभी भी करीब 40 प्रतिशत नीचे ट्रेड कर रहा है। https://trendkia.com/market/kachche-tela-ki-chala-aura-federal-reserve-ke-rukha-se-us-dollar-men-teji-ke-asara-33440 TrendKia — Har trend, sabse pehle.