कच्चे तेल की कीमतों से बढ़ी ब्याज दर वृद्धि की आशंका, न्यूजीलैंड डॉलर में दर्ज हुआ सुधार कच्चे तेल के दामों में तेजी के चलते न्यूजीलैंड में महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा गई है, जिससे रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना 87 फीसदी तक पहुंच गई है। वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में गुरुवार को न्यूजीलैंड डॉलर में मजबूती देखी गई, जहां मुद्रा जोड़ी 0.5680 के स्तर के आसपास कारोबार करती नजर आई। इससे पिछले कारोबारी सत्र में आई मामूली गिरावट के बाद मुद्रा में यह सुधार दर्ज किया गया है। बाजार में इस तेजी की मुख्य वजह रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड द्वारा मौद्रिक नीति को और अधिक सख्त करने की बढ़ती संभावनाएं हैं। वित्तीय बाजारों में अब इस बात की 87 फीसदी संभावना आंकी जा रही है कि केंद्रीय बैंक अक्टूबर में तीसरी बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। महीने की शुरुआत में यह संभावना महज 20 फीसदी के स्तर पर थी। इस दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव तब देखने को मिला जब गवर्नर अन्ना ब्रेमन ने आगाह किया कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी अल्पावधि महंगाई को केंद्रीय बैंक के हालिया अनुमानों से काफी ऊपर धकेल सकती है। दूसरी ओर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के बावजूद अमेरिकी डॉलर में हल्की नरमी देखने को मिली, जिससे न्यूजीलैंड डॉलर को अपनी बढ़त बनाए रखने में मदद मिली। अमेरिकी मुद्रा को सितंबर के शुरुआती एसएंडपी ग्लोबल पीएमआई आंकड़ों से सहारा मिल रहा है, जहां मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 52.0 का आंकड़ा दर्ज किया। इस आंकड़े ने कंपोजिट और सर्विसेज सेक्टर की गतिविधियों में आई मामूली गिरावट के असर को सीमित करने का काम किया है। अमेरिकी श्रम बाजार से जुड़े बेरोजगार दावों के आंकड़ों से पहले निवेशक यह अनुमान लगा रहे हैं कि अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा दरें बढ़ाने की 69 फीसदी संभावना बनी हुई है। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, इस समय मुद्रा जोड़ी 0.5665 के करीब कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद स्तर 0.5724 से 1.04 फीसदी नीचे है और इसका 52 हफ्तों का दायरा 0.5584 से 0.6093 के बीच बना हुआ है। तकनीकी संकेत और प्रमुख अवरोध स्तर दैनिक चार्ट पर तकनीकी तस्वीर का विश्लेषण करें तो मुद्रा जोड़ी अल्पकालिक और मध्यम अवधि की ट्रेंड लाइनों से नीचे बनी हुई है। नौ दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी ईएमए 0.5727 पर और 50 दिवसीय ईएमए 0.5817 पर स्थित है, जो ऊपर की तरफ मजबूत रेजिस्टेंस के तौर पर काम कर रहे हैं। जब तक भाव इन मूविंग एवरेज से नीचे बने रहते हैं, तब तक अल्पावधि रुझान मंदी की ओर झुका हुआ नजर आता है। 14 दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई 29.29 पर फिसलकर ओवरसोल्ड दायरे में आ चुका है, जबकि लाइव तकनीकी संकेतकों में आरएसआई 25 के स्तर पर रिकॉर्ड किया गया है। यह स्थिति दर्शाती है कि गिरावट की गति काफी तेज है, लेकिन बिकवाली का दबाव अब अत्यधिक खिंच चुका है। बाजार के लिए लाइव डेटा के तहत 20 दिवसीय ईएमए 0.5789, 50 दिवसीय ईएमए 0.5824 और 200 दिवसीय ईएमए 0.5828 पर स्थित है, जहां 50 दिवसीय ईएमए का 200 दिवसीय ईएमए से नीचे आना डेथ क्रॉस की पुष्टि करता है। 20 दिवसीय बोलिंजर बैंड 0.5649 से 0.5983 के बीच फैले हैं और मध्य स्तर 0.5816 पर है। गति को मापने वाला एडीएक्स इंडिकेटर 43 के स्तर पर एक मजबूत ट्रेंडिंग बाजार का संकेत दे रहा है, जबकि स्टोकेस्टिक का फास्ट लाइन 0 और सिग्नल लाइन 11 पर है। ऊपर की तरफ पहला रेजिस्टेंस पिवट 0.5672 के बाद 0.5680 और 0.5695 पर बना हुआ है, जबकि नीचे की ओर सपोर्ट 0.5657 और 0.5650 पर देखा जा रहा है। चूंकि नीचे कोई मजबूत संरचनात्मक सपोर्ट मौजूद नहीं है, इसलिए ओवरसोल्ड आरएसआई ही स्थिरता का एकमात्र संदर्भ बिंदु बना हुआ है, जिससे आगे और तेज गिरावट के बजाय कंसोलिडेशन की संभावना बढ़ जाती है। न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था और कमोडिटी का प्रभाव न्यूजीलैंड डॉलर, जिसे वित्तीय बाजारों में कीवी के नाम से भी जाना जाता है, वैश्विक निवेशकों के बीच एक प्रमुख ट्रेड की जाने वाली मुद्रा है। इसका मूल्य मुख्य रूप से देश की आर्थिक सेहत और केंद्रीय बैंक के नीतिगत फैसलों पर निर्भर करता है। इसके अलावा कुछ विशिष्ट कारक भी इस मुद्रा के उतार-चढ़ाव को तय करते हैं। चीन की अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन न्यूजीलैंड डॉलर पर सीधा प्रभाव डालता है, क्योंकि चीन न्यूजीलैंड का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। यदि चीनी अर्थव्यवस्था में कमजोरी के संकेत मिलते हैं, तो न्यूजीलैंड से होने वाले निर्यात में गिरावट आती है, जिससे घरेलू अर्थव्यवस्था और मुद्रा दोनों पर दबाव बनता है। इसके साथ ही डेयरी उत्पादों की कीमतें भी न्यूजीलैंड डॉलर की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं। डेयरी उद्योग न्यूजीलैंड का सबसे प्रमुख निर्यात क्षेत्र है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में डेयरी उत्पादों की कीमतें ऊंची होती हैं, तो देश की निर्यात आय में बढ़ोतरी होती है, जो आर्थिक वृद्धि और मुद्रा के लिए सकारात्मक साबित होती है। व्यापक आर्थिक आंकड़ों की बात करें तो उच्च आर्थिक विकास दर, कम बेरोजगारी और बेहतर कारोबारी विश्वास मुद्रा को मजबूती प्रदान करते हैं। मजबूत अर्थव्यवस्था विदेशी पूंजी को आकर्षित करती है और मुद्रास्फीति बढ़ने की स्थिति में केंद्रीय बैंक को ब्याज दरें बढ़ाने का आधार देती है। इसके विपरीत, कमजोर आर्थिक आंकड़े मुद्रा के मूल्य में गिरावट लाते हैं। केंद्रीय बैंक का नीतिगत ढांचा और वैश्विक जोखिम रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड का प्राथमिक लक्ष्य मध्यम अवधि में महंगाई दर को 1 फीसदी से 3 फीसदी के दायरे में बनाए रखना है, जिसमें मुख्य ध्यान 2 फीसदी के मध्य बिंदु पर टिका होता है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बैंक ब्याज दरों का उपयुक्त स्तर निर्धारित करता है। जब महंगाई अनियंत्रित होने लगती है, तो अर्थव्यवस्था को ठंडा करने के लिए ब्याज दरों में इजाफा किया जाता है। ब्याज दरें बढ़ने से बॉन्ड यील्ड में तेजी आती है, जो वैश्विक निवेशकों को देश में निवेश करने के लिए आकर्षित करती है और अंततः मुद्रा को सहारा मिलता है। इसके उलट, कम ब्याज दरें मुद्रा को कमजोर बनाती हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व और न्यूजीलैंड के नीतिगत रुख के बीच का ब्याज दर अंतर भी मुद्रा विनिमय दर तय करने में केंद्रीय भूमिका निभाता है। न्यूजीलैंड डॉलर की प्रवृत्ति जोखिम-सक्रिय यानी रिस्क-ऑन माहौल में मजबूत होने की रहती है। जब वैश्विक निवेशक व्यापक बाजार जोखिमों को कम मानते हैं और आर्थिक वृद्धि को लेकर आशावादी होते हैं, तो कमोडिटी और कमोडिटी मुद्राओं की मांग तेजी से बढ़ती है। इसके विपरीत, जब बाजार में उथल-पुथल या आर्थिक अनिश्चितता गहराती है, तो निवेशक उच्च जोखिम वाली संपत्तियों से हाथ खींचकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिसके चलते न्यूजीलैंड डॉलर में बिकवाली देखी जाती है। अन्य वैश्विक बाजारों और केंद्रीय बैंकों की हलचल एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान अन्य प्रमुख संपत्तियों में भी महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव देखने को मिला। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7000 के स्तर की ओर फिसलता नजर आया। ऑस्ट्रेलिया के अगस्त महीने के रोजगार आंकड़ों में बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6 फीसदी दर्ज की गई, जबकि अनुमान 4.5 फीसदी का था। हालांकि, रोजगार परिवर्तन के आंकड़ों ने अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए 39.5 हजार का आंकड़ा छुआ। इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली महत्वपूर्ण बैठक से पहले कारोबारी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर से फिसलकर 158.00 के करीब आ गया। जापान में बॉन्ड यील्ड में उछाल और सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम के बीच येन को सहारा मिला, जबकि फेड की नीतियों के चलते डॉलर इंडेक्स मजबूत बना हुआ है। सोने की कीमतें एशियाई सत्र में एक सप्ताह के निचले स्तर के करीब सीमित दायरे में कारोबार करती रहीं। इस बीच स्विस नेशनल बैंक ने अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दरों को 0 फीसदी पर अपरिवर्तित रखा है और वर्ष 2026 के लिए महंगाई दर 0.7 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है, जो पिछले 0.6 फीसदी के अनुमान से थोड़ा अधिक है। दूसरी ओर, बैंक ऑफ जापान ने मौद्रिक नीति सामान्यीकरण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 फीसदी से बढ़ाकर 1.25 फीसदी कर दिया है। इसका आप पर असर वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में ब्याज दरों और कच्चे तेल की कीमतों के चलते विनिमय दरों तथा आयात लागत पर सीधा असर पड़ने वाला है। • मुद्रा विनिमय लागत: न्यूजीलैंड जाने वाले पर्यटकों और छात्रों को अपनी मुद्रा परिवर्तित करते समय विनिमय दरों के उतार-चढ़ाव पर नजर रखनी होगी। ब्याज दरों में संभावित वृद्धि से न्यूजीलैंड की मुद्रा मजबूत हो सकती है, जिससे वहां पढ़ाई और यात्रा का खर्च बढ़ सकता है। • आयात और ईंधन खर्च: कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल से परिवहन और आयात की लागत में वृद्धि होने का जोखिम है। यदि वैश्विक स्तर पर ईंधन महंगा होता है तो उपभोक्ताओं के लिए रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं। • विदेशी मुद्रा ट्रेडर्स: फॉरेक्स ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों को तकनीकी स्तरों और केंद्रीय बैंकों की बैठकों पर कड़ी नजर रखनी होगी। ओवरसोल्ड तकनीकी संकेतों के बीच आगामी आर्थिक आंकड़े बाजार में तेज उतार-चढ़ाव ला सकते हैं। • वैश्विक व्यापार: चीन और न्यूजीलैंड के बीच व्यापारिक गतिशीलता से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर प्रभाव पड़ सकता है। प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में मांग में बदलाव होने से निर्यातकों और आयातकों की योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। ऐसा क्यों हुआ कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और लगातार ऊंची बनी हुई महंगाई ने केंद्रीय बैंकों को नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की दिशा में सोचने पर मजबूर किया है। • कच्चे तेल की कीमतों में तेजी: वैश्विक ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल के भाव बढ़ने से न्यूजीलैंड में महंगाई के केंद्रीय बैंक के अनुमानों से ऊपर जाने की आशंका पैदा हुई है। इसके चलते केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने नीतिगत सख्ती के स्पष्ट संकेत दिए हैं। • ब्याज दर वृद्धि की संभावना: बाजार में अक्टूबर के दौरान तीसरी बार ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना अचानक बढ़कर 87 फीसदी हो गई है। निवेशकों का मानना है कि महंगाई को 2 फीसदी के लक्ष्य पर रखने के लिए दरों को बढ़ाना आवश्यक हो सकता है। • अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों का समर्थन: अमेरिका में विनिर्माण क्षेत्र के पीएमआई आंकड़ों में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन ने डॉलर को मजबूती दी है। हालांकि, फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित कदमों के बीच निवेशक अन्य केंद्रीय बैंकों के फैसलों पर भी ध्यान दे रहे हैं। सवाल-जवाब 1. न्यूजीलैंड डॉलर में हालिया तेजी की मुख्य वजह क्या है? रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड द्वारा अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावना 87 फीसदी तक पहुंचने के कारण मुद्रा में सुधार दर्ज हुआ है। 2. गवर्नर अन्ना ब्रेमन ने किस बात को लेकर आगाह किया है? उन्होंने चेतावनी दी है कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि से अल्पकालिक महंगाई केंद्रीय बैंक के अनुमानों से अधिक हो सकती है। 3. रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड का महंगाई लक्ष्य क्या है? केंद्रीय बैंक का लक्ष्य मध्यम अवधि में मुद्रास्फीति को 1 फीसदी से 3 फीसदी के दायरे में रखना है, जिसमें 2 फीसदी का मध्य बिंदु मुख्य फोकस होता है। 4. चीन की अर्थव्यवस्था का न्यूजीलैंड की मुद्रा पर क्या प्रभाव पड़ता है? चीन न्यूजीलैंड का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, इसलिए चीनी मांग घटने पर न्यूजीलैंड के निर्यात और उसकी मुद्रा पर सीधा नकारात्मक असर पड़ता है। 5. बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दरों में क्या बदलाव किया है? बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 फीसदी से बढ़ाकर 1.25 फीसदी कर दिया है। https://trendkia.com/market/kachche-tela-ki-kimaton-se-barhi-byaja-dara-vriddhi-ki-ashnka-new-zealand-dollar-men-darja-hua-sudhara-37880 TrendKia — Har trend, sabse pehle.