कच्चे तेल की तपिश से बढ़ सकता है ब्याज दरों का बोझ, बैंक ऑफ कनाडा गवर्नर टिफ मैकलेम ने दी चेतावनी मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम ऊंचे बने रहने से मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंका है। बैंक ऑफ कनाडा के गवर्नर टिफ मैकलेम ने संकेत दिया है कि महंगाई पर लगाम कसने के लिए ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की जा सकती है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी उथल-पुथल ने केंद्रीय बैंकों के सामने नीतिगत चुनौतियों को फिर से गंभीर बना दिया है। मध्य पूर्व क्षेत्र में चल रहे संघर्ष की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें मजबूत बनी हुई हैं, जिससे आने वाले महीनों में महंगाई के दबाव में इजाफा होने का खतरा मंडरा रहा है। इसी पृष्ठभूमि में बैंक ऑफ कनाडा के गवर्नर टिफ मैकलेम ने संसदीय समिति के समक्ष स्पष्ट किया कि नीति नियंताओं को महंगाई को काबू में रखने के लिए उधार दरों में नए सिरे से बढ़ोतरी करने पर विवश होना पड़ सकता है। ईंधन की ऊंची लागत न केवल आम उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ डाल रही है, बल्कि कंपनियों के परिचालन व्यय को भी तेजी से बढ़ा रही है। संसदीय समिति के सामने ब्याज दरों पर गवर्नर का रुख ओटावा में हाउस ऑफ कॉमन्स की वित्त मामलों की स्थायी समिति के समक्ष मंगलवार को प्रस्तुत होते हुए गवर्नर टिफ मैकलेम ने मौजूदा आर्थिक परिदृश्य का विस्तृत ब्योरा पेश किया। उन्होंने कहा कि आगे और ब्याज दर वृद्धि की आवश्यकता हो सकती है, क्योंकि मध्य पूर्व में युद्ध के चलते ऊर्जा की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर टिकी हुई हैं। गवर्नर ने स्वीकार किया कि हाल के हफ्तों में मुद्रास्फीति के दृष्टिकोण में गिरावट दर्ज की गई है। संघर्ष के लंबा खिंचने के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के भाव चढ़े हैं और उनके आगे भी ऊंचे बने रहने की संभावना है। इस स्थिति का सीधा असर आम कनाडाई नागरिकों पर पड़ रहा है, जिन्हें पेट्रोल पंपों पर अधिक रकम चुकानी पड़ रही है, जबकि विनिर्माण और ढुलाई से जुड़े व्यवसायों के लिए लागत तेजी से बढ़ रही है। गवर्नर टिफ मैकलेम ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक अत्यधिक अनिश्चितता के दौर में किसी पूर्व निर्धारित नीतिगत मार्ग पर नहीं चलेगा, बल्कि हर आगामी बैठक में नए आंकड़ों की समीक्षा के आधार पर ही कोई फैसला लिया जाएगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मौजूदा परिस्थितियों में सरकार की राजकोषीय नीति केंद्रीय बैंक के मुद्रास्फीति घटाने के प्रयासों में बाधा उत्पन्न नहीं कर रही है। रिफाइनरी मार्जिन और कच्चे तेल के बढ़े हुए दाम उपभोक्ता स्तर तक पहुंच रहे हैं, जिससे अगले एक साल के दौरान मुद्रास्फीति में और व्यापक फैलाव देखने को मिल सकता है। मुद्रास्फीति और आर्थिक विकास दर का नया अनुमान केंद्रीय बैंक के ताजा अनुमानों के मुताबिक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति इस साल के अंत तक बढ़कर 3.5 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच सकती है। इतना ही नहीं, यह महंगाई दर वर्ष 2027 के अधिकांश हिस्से के दौरान 3 प्रतिशत या उससे ऊपर ही बनी रह सकती है। दीर्घकालिक लक्ष्यों के संदर्भ में, मुद्रास्फीति के मध्य 2028 तक ही 2 प्रतिशत के सामान्य लक्ष्य के करीब लौटने की संभावना जताई गई है। यह समयसीमा दर्शाती है कि ऊर्जा के झटके से निपटने में अर्थव्यवस्था को लंबा वक्त लग सकता है। दूसरी ओर, कनाडा के सकल घरेलू उत्पाद में हालिया तिमाहियों के दौरान मिलाजुला रुख दिखा है। दूसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 3.3 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, जबकि तीसरी तिमाही में इसके लगभग 2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। अमेरिकी व्यापारिक कदमों और नए शुल्कों के बावजूद कनाडाई अर्थव्यवस्था ने लचीलापन दिखाया है और इसके विकास दृष्टिकोण में मामूली सुधार हुआ है। हालांकि, अमेरिकी शुल्कों के प्रभाव के चलते चौथी तिमाही में विकास दर के धीमे होने का अनुमान है, जिसके बाद वर्ष 2027 में इसमें सुधार की उम्मीद है। वार्षिक दृष्टिकोण पर नजर डालें तो सकल घरेलू उत्पाद के वर्ष 2026 में 1 प्रतिशत की दर से बढ़ने और वर्ष 2027 तथा 2028 दोनों में लगभग 2 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान व्यक्त किया गया है। बैंक ऑफ कनाडा का नीतिगत ढांचा और करेंसी बाजार की हलचल ओटावा में स्थित बैंक ऑफ कनाडा देश में मौद्रिक नीति का संचालन करने और आधिकारिक ब्याज दरें तय करने वाली शीर्ष वित्तीय संस्था है। बैंक हर साल आठ नियमित निर्धारित बैठकों का आयोजन करता है, जबकि आपातकालीन स्थितियों में जरूरत के मुताबिक अतिरिक्त बैठकें भी बुलाई जाती हैं। बैंक का प्राथमिक अधिदेश मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसके तहत मुद्रास्फीति को 1 प्रतिशत से 3 प्रतिशत के दायरे में सीमित रखने का लक्ष्य निर्धारित है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बैंक मुख्य तौर पर नीतिगत ब्याज दरों को घटाने या बढ़ाने के औजार का इस्तेमाल करता है। सामान्य तौर पर अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दरें कनाडाई डॉलर को मजबूती प्रदान करती हैं, जबकि दरों में कटौती से मुद्रा कमजोर होती है। मुद्रा बाजार के दैनिक रुझानों में कनाडाई डॉलर ने प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं के मुकाबले उतार-चढ़ाव दर्ज किया। जापानी येन के मुकाबले कनाडाई डॉलर सबसे अधिक मजबूत स्थिति में दिखाई दिया। विनिमय दरों के हीट मैप से पता चलता है कि विभिन्न मुद्राओं के बीच आपसी मूल्य निर्धारण में अमेरिकी नीतियों और कमोडिटी बाजार के उतार-चढ़ाव का गहरा प्रभाव बना हुआ है। क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग की भूमिका अत्यंत विकट और असाधारण आर्थिक परिस्थितियों में बैंक ऑफ कनाडा अपरंपरागत नीतिगत उपायों का सहारा ले सकता है, जिसमें क्वांटिटेटिव ईजिंग शामिल है। इस प्रक्रिया के तहत केंद्रीय बैंक नई नकदी का सृजन कर वित्तीय संस्थानों से सरकारी और कॉरपोरेट बॉन्ड जैसी वित्तीय संपत्तियों की सीधी खरीद करता है। इस उपाय का उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली में तरलता का प्रवाह बढ़ाना होता है, जिसके परिणामस्वरूप आमतौर पर कनाडाई डॉलर कमजोर पड़ता है। क्वांटिटेटिव ईजिंग को हमेशा अंतिम उपाय के तौर पर देखा जाता है, जब केवल ब्याज दरों में कटौती मूल्य स्थिरता बहाल करने के लिए नाकाफी साबित होती है। बैंक ऑफ कनाडा ने वर्ष 2009 से 2011 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान इस विकल्प को अपनाया था, जब बैंकों के बीच एक-दूसरे की ऋण अदायगी क्षमता पर अविश्वास गहराने से ऋण प्रवाह पूरी तरह ठप हो गया था। इसके विपरीत, जब अर्थव्यवस्था में सुधार गति पकड़ लेता है और मुद्रास्फीति में तेजी आने लगती है, तब क्वांटिटेटिव टाइटनिंग का सहारा लिया जाता है। जहां पहली व्यवस्था में केंद्रीय बैंक बाजार से परिसंपत्तियां खरीदकर नकदी की आपूर्ति करता है, वहीं क्वांटिटेटिव टाइटनिंग के तहत बैंक ऑफ कनाडा नई संपत्तियों की खरीद रोक देता है और अपने पोर्टफोलियो में परिपक्व होने वाले बॉन्ड के मूलधन का दोबारा निवेश नहीं करता। वित्तीय तंत्र से तरलता को समेटने की यह प्रक्रिया आम तौर पर कनाडाई डॉलर के लिए सकारात्मक और तेजी लाने वाली साबित होती है। वैश्विक मुद्रा, कमोडिटी और क्रिप्टो बाजार का रुख अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मंगलवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में कमजोरी के साथ एशियाई कारोबार के दौरान दो सप्ताह के निचले स्तर पर फिसल गया। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया ने बाजार की उम्मीदों के अनुरूप ब्याज दर में 25 आधार अंकों की वृद्धि की थी, लेकिन यह निर्णय सर्वसम्मति से नहीं लिया गया। समिति के तीन सदस्यों ने दरों को 4.60 प्रतिशत पर ही अपरिवर्तित रखने के पक्ष में मत दिया। इस असहमति ने आगे दर वृद्धि की उम्मीदों को कम कर दिया, जिसने अमेरिकी डॉलर की हल्की मजबूती के साथ मिलकर इस मुद्रा जोड़ी पर दबाव बनाया। जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर मंगलवार के एशियाई सत्र में फिसलकर 158.00 के पिछले स्तर से नीचे आ गया। ईरान से जुड़ी कूटनीतिक उम्मीदों और अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले ग्रीनबैक दबाव में दिखा। हालांकि जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार हस्तक्षेप के जोखिम से येन को समर्थन मिला, लेकिन बैंक ऑफ जापान द्वारा अगली दर वृद्धि के समय को लेकर अनिश्चितता ने बढ़त को सीमित रखा। दूसरी तरफ, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर इंडेक्स सत्र के निचले स्तर से थोड़ा संभलकर 102.00 के नीचे कारोबार करता दिखा। ईरान में तनाव और कच्चे तेल की तेजी से ग्रीनबैक को सहारा मिला, जबकि अमेरिकी राजनीतिक अनिश्चितता ने इस तेजी पर अंकुश लगाया। कमोडिटी और डिजिटल एसेट बाजारों में भी तेज हलचल दर्ज की गई। ईरान के केशम द्वीप पर अमेरिकी हमले के घटनाक्रम के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई, जिससे सोने की गति थम गई। हाजिर सोना 0.93 प्रतिशत की दैनिक गिरावट के साथ लगभग 3,909 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। क्रिप्टो परिसंपत्तियों में भी बिकवाली देखी गई, जहां बिटकॉइन फिसलकर 76,566 डॉलर पर आ गया और छह सप्ताह के निचले स्तर की परीक्षा लेता दिखा। इथेरियम भी इसी तरह के दबाव में एक संकीर्ण दायरे में स्थिरता तलाश रहा था, जबकि रिपल मामूली रूप से 1.25 डॉलर के ऊपर बना हुआ था। इसका आप पर असर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी का सीधा असर उपभोक्ताओं के घरेलू बजट, कर्ज की लागत और वैश्विक निवेश प्रवाह पर पड़ेगा। • ईंधन और दैनिक खर्च: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहने से परिवहन लागत बढ़ेगी और रोजमर्रा के सामान महंगे हो सकते हैं। पेट्रोल पंपों पर ईंधन की बढ़ी हुई कीमतें सीधे तौर पर आम नागरिकों की मासिक बचत को प्रभावित करेंगी। • कर्ज की ईएमआई: यदि केंद्रीय बैंक नीतिगत दरों में बढ़ोतरी करते हैं, तो वाणिज्यिक बैंक होम लोन और ऑटो लोन पर ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं। इससे उधारकर्ताओं की मासिक किस्त में इजाफा होगा और नया कर्ज लेना अधिक खर्चीला हो जाएगा। • व्यावसायिक लागत: रिफाइनरी मार्जिन और लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ने से कंपनियों की उत्पादन लागत में वृद्धि होगी। कई कंपनियां इस अतिरिक्त वित्तीय भार को उपभोक्ताओं पर उत्पादों के दाम बढ़ाकर डालेंगी। • मुद्रा और निवेश: उच्च ब्याज दरों के संकेतों से बॉन्ड यील्ड और विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में अस्थिरता देखने को मिलेगी। निवेशकों को शेयर और कमोडिटी जैसे जोखिम भरे संपत्तियों में निवेश करते समय सावधानी बरतनी होगी। ऐसा क्यों हुआ मध्य पूर्व में जारी सैन्य संघर्ष और उससे उपजे आपूर्ति व्यवधानों के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में कीमतें बढ़ी हैं, जिसने केंद्रीय बैंक के मुद्रास्फीति अनुमानों को बिगाड़ दिया है। • मध्य पूर्व में युद्ध: क्षेत्र में निरंतर जारी संघर्ष और सैन्य हमलों के चलते ऊर्जा आपूर्ति मार्ग प्रभावित होने का जोखिम बढ़ गया है। इसी भू-राजनीतिक तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल के भाव को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रखा है। • रिफाइनरी मार्जिन और लागत फैलाव: कच्चे तेल की ऊंची लागत और बढ़ते रिफाइनरी मार्जिन का असर सीधे उपभोक्ता उत्पादों पर पड़ रहा है। यह लागत दबाव परिवहन और विनिर्माण क्षेत्रों से होते हुए व्यापक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को ऊपर खींच रहा है। • आर्थिक लचीलापन और मांग: अमेरिकी व्यापारिक पाबंदियों और शुल्कों के बावजूद आर्थिक गतिविधियों में अप्रत्याशित मजबूती देखी गई है। मांग का स्तर ऊंचा बना रहने के कारण कीमतों में स्वतः गिरावट नहीं आ रही है, जिससे मौद्रिक सख्ती की संभावना बनी हुई है। सवाल-जवाब 1. बैंक ऑफ कनाडा के गवर्नर टिफ मैकलेम ने ब्याज दरों को लेकर क्या चेतावनी दी है? गवर्नर टिफ मैकलेम ने कहा है कि मध्य पूर्व में युद्ध के कारण ऊर्जा की कीमतें ऊंची बनी रहने से मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए आगे और ब्याज दर वृद्धि की आवश्यकता हो सकती है। 2. कनाडा में मुद्रास्फीति के कब तक सामान्य स्तर पर लौटने की उम्मीद है? केंद्रीय बैंक के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति इस साल के अंत तक 3.5% तक बढ़ सकती है और मध्य 2028 तक ही 2% के लक्ष्य के करीब लौट सकती है। 3. कनाडा की आर्थिक विकास दर के लिए क्या अनुमान लगाए गए हैं? सकल घरेलू उत्पाद 2026 में 1% और 2027 तथा 2028 दोनों वर्षों में लगभग 2% की दर से बढ़ने का अनुमान है। 4. क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में मुख्य अंतर क्या है? क्वांटिटेटिव ईजिंग में केंद्रीय बैंक तरलता बढ़ाने के लिए वित्तीय संपत्तियां खरीदता है, जबकि क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में बैंक नई संपत्तियां खरीदना और परिपक्व बॉन्ड का पुनर्निवेश बंद कर देता है। 5. रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के हालिया दर फैसले पर क्या विवाद रहा? रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया ने ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की वृद्धि की, लेकिन तीन सदस्यों ने दरों को 4.60% पर ही स्थिर रखने का समर्थन किया। 6. भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच सोने और बिटकॉइन की कीमतों पर क्या असर पड़ा? सोना 0.93% गिरकर लगभग 3,909 डॉलर पर आ गया, जबकि बिटकॉइन कमजोर होकर 76,566 डॉलर पर छह सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया। https://trendkia.com/market/kachche-tela-ki-tapisha-se-barha-sakata-hai-byaja-daron-ka-bojha-bank-of-canada-gavarnara-tiff-macklem-ne-di-chetavani-55926 TrendKia — Har trend, sabse pehle.