कच्चे तेल में गिरावट और अमेरिका-ईरान शांति की उम्मीदों से सोना $4,100 के पार पहुंचा अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के कारण सोने की कीमत $4,100 के पार पहुंच गई है, जिससे वैश्विक मुद्रास्फीति की चिंताएं घटी हैं। मध्य पूर्व में तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के चलते सोमवार को शुरुआती कारोबार में सोने की कीमतें $4,100 के पार पहुंच गईं। कीमती धातु में आई इस तेजी की मुख्य वजह कच्चे तेल की गिरती कीमतें हैं, जिससे वैश्विक मुद्रास्फीति की आशंकाएं घटी हैं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना कम हुई है। इसके साथ ही, अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य हमलों पर लगी अस्थायी रोक ने निवेशकों के बीच कूटनीतिक बातचीत के जरिए समाधान निकलने की उम्मीद जताई है। मध्य पूर्व में कूटनीतिक राहत और घटता सैन्य तनाव शुक्रवार देर रात अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे दो हफ्ते के बमबारी अभियान को निलंबित किए जाने के बाद कूटनीतिक मोर्चे पर बड़ी राहत देखने को मिली। अमेरिका के इस कदम के जवाब में तेहरान ने भी लगातार दूसरी रात मध्य पूर्व में वॉशिंगटन के सहयोगियों पर कोई जवाबी हमला नहीं किया। इस स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि हालांकि अमेरिकी सशस्त्र बल पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप संभावित कूटनीतिक वार्ताओं को मौका देना चाहते हैं। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से पुष्टि की कि तेहरान की सैन्य नीति हमलों का जवाब हमलों से देने की है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर अमेरिका अपने सैन्य हमले बंद रखता है, तो ईरान भी क्षेत्र में अपनी सैन्य कार्रवाइयों को स्थगित रखेगा। इस कूटनीतिक नरमी से वैश्विक ऊर्जा और वित्तीय बाजारों में जोखिम प्रीमियम कम हुआ है, जिससे कच्चे तेल के दामों में गिरावट दर्ज की गई है। केंद्रीय बैंकों के आगामी फैसले और FOMC बैठक वित्तीय बाजार अब इस सप्ताह होने वाली प्रमुख केंद्रीय बैंकों की बैठकों पर अपनी नजरें टिकाए हुए हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की इस हफ्ते होने वाली नीतिगत बैठक में ब्याज दरों के भविष्य के रुझान को लेकर संकेत मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) और बैंक ऑफ जापान (BoJ) के आगामी मौद्रिक नीतिगत फैसलों से भी वैश्विक मुद्रा बाजारों में हलचल देखने को मिल सकती है। सोना एक बिना ब्याज देने वाली संपत्ति है, इसलिए इसकी कीमतें ब्याज दरों से सीधे प्रभावित होती हैं। कम ब्याज दर की उम्मीदों के माहौल में निवेशक सर्राफा बाजार में निवेश करना अधिक फायदेमंद मानते हैं, जबकि ऊंची ब्याज दरें सोने की मांग पर दबाव डालती हैं। कच्चे तेल की सस्ती दरों के कारण मुद्रास्फीति का दबाव कम होने से निवेशकों ने केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने के अनुमान को घटा दिया है, जिससे सोने को मजबूती मिल रही है। सोने का ऐतिहासिक महत्व और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी मानव इतिहास में सोने ने हमेशा मूल्य के एक विश्वसनीय भंडार और विनिमय के माध्यम के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आभूषणों में इसके इस्तेमाल और चमक के अलावा वित्तीय बाजारों में सोने को एक सुरक्षित निवेश माना जाता है। आर्थिक अनिश्चितता या राजनीतिक संकट के समय निवेशक इसमें जमकर पैसा लगाते हैं। सोना किसी विशिष्ट सरकार या संस्थान की साख पर निर्भर नहीं करता, इसलिए यह मुद्रा के अवमूल्यन और मुद्रास्फीति के खिलाफ एक मजबूत बचाव का काम करता है। दुनियाभर के केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े धारक हैं। आर्थिक उथल-पुथल के दौर में अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं को सहारा देने और अर्थव्यवस्था में भरोसा बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का हिस्सा बढ़ाते हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, 2022 में केंद्रीय बैंकों ने अपने भंडारों में रिकॉर्ड 1,136 टन सोना जोड़ा था, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग $70 अरब थी। आंकड़ों की शुरुआत के बाद से यह किसी भी एक वर्ष में की गई सबसे बड़ी खरीदारी थी। इस खरीदारी में चीन, भारत और तुर्की जैसे उभरते हुए देशों के केंद्रीय बैंक सबसे आगे रहे हैं। सोने की बाजार गतिशीलता और अमेरिकी डॉलर से संबंध सोने की दरें (XAU/USD) अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड से विपरीत रूप से जुड़ी हुई हैं। जब अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है, तो अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सोना खरीदना सस्ता हो जाता है, जिससे इसकी मांग और कीमत दोनों बढ़ती हैं। इसके विपरीत, जब अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो सोने की कीमतों में बढ़ोतरी रुक जाती है। इसी तरह, शेयर बाजार में तेजी आने पर निवेशक सोने से पैसा निकालकर जोखिम वाली परिसंपत्तियों में लगाते हैं, जिससे सोने के दाम गिरते हैं। लेकिन जब शेयर बाजार में गिरावट आती है, तो सोने की मांग बढ़ जाती है। वर्तमान में, शुक्रवार के उच्चतम स्तर से अमेरिकी डॉलर के नीचे आने से सोने के भाव को अतिरिक्त समर्थन मिला है। मुद्रा बाजार का हाल: EUR/USD, GBP/USD और AUD/USD वैश्विक मुद्रा बाजारों में भी इन अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का सीधा असर देखा गया है • EUR/USD: सोमवार को एशियाई कारोबारी सत्र में यूरोपीय मुद्रा EUR/USD बढ़त के साथ खुली और 1.1400 के स्तर से ऊपर पहुंच गई। अमेरिका और ईरान के बीच पांच महीने से जारी युद्ध के कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों से अमेरिकी डॉलर कमजोर हुआ, जिससे यूरो को मजबूती मिली। • GBP/USD: गुरुवार को भारी गिरावट के बाद शुक्रवार को अमेरिकी सत्र में GBP/USD 1.3300 के स्तर से ऊपर बना रहा। यूके के खुदरा बिक्री आंकड़ों और जुलाई PMI आंकड़ों में सुधार से ब्रिटिश पाउंड को समर्थन मिला, हालांकि मध्य पूर्व के तनाव के कारण बढ़त सीमित रही। अमेरिका के जुलाई PMI आंकड़ों का बाजार पर कोई खास असर नहीं पड़ा। • AUD/USD: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD) ने साल की पहली छमाही में काफी उतार-चढ़ाव देखा। चार साल के उच्चतम स्तर को छूने के बाद इसमें गिरावट आई। मध्य पूर्व में जारी संकट के कारण ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का दृष्टिकोण अभी भी अनिश्चित बना हुआ है। बाजार विशेषज्ञ और विश्लेषक लगातार इन वैश्विक गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं ताकि निवेशक मुद्रास्फीति और ब्याज दरों के इस बदलते दौर में सही निर्णय ले सकें। इसका आप पर असर वैश्विक बाजार में: कच्चे तेल की गिरती कीमतों से वैश्विक मुद्रास्फीति का दबाव कम हो रहा है, जिससे निवेशकों का रुझान सोने जैसे सुरक्षित ठिकानों की ओर बढ़ा है। निवेशकों के लिए: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के $4,100 के पार जाने से भारत और दुनिया भर में सर्राफा की कीमतों और निवेश पर असर पड़ेगा। सवाल-जवाब 1. सोने की कीमत में अचानक तेजी क्यों आई है? कच्चे तेल के दामों में गिरावट, अमेरिका-ईरान सैन्य संघर्ष पर रोक और मुद्रास्फीति की चिंताओं में कमी के कारण सोने की कीमतें $4,100 के पार पहुंच गई हैं। 2. मध्य पूर्व तनाव का तेल और सोने पर क्या असर पड़ा है? अमेरिका द्वारा दो हफ़्ते का बमबारी अभियान रोकने और ईरान द्वारा जवाबी कार्रवाई न करने से कच्चे तेल की कीमतें गिरी हैं और सोने को मजबूती मिली है। 3. केंद्रीय बैंकों ने कितना सोना खरीदा है? वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, 2022 में केंद्रीय बैंकों ने रिकॉर्ड 1,136 टन सोना खरीदा था, जिसकी कीमत लगभग $70 अरब थी। 4. सोने की कीमत पर अमेरिकी डॉलर का क्या प्रभाव पड़ता है? सोने का अमेरिकी डॉलर से विपरीत संबंध है; जब डॉलर कमजोर होता है, तो सोने की दरें आम तौर पर बढ़ जाती हैं। 5. इस सप्ताह किन प्रमुख केंद्रीय बैंकों के फैसले आने वाले हैं? निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व (FOMC), बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) और बैंक ऑफ जापान (BoJ) के आगामी फैसलों पर नजर बनाए हुए हैं। https://trendkia.com/market/kachche-tela-men-giravata-aura-us-iran-shanti-ki-ummidon-se-sona-4100-ke-para-pahuncha-10664 TrendKia — Har trend, sabse pehle.