कच्चे तेल में गिरावट के बाद संभलने की कोशिश, 89 डॉलर के नीचे सीमित बढ़त तीन हफ्ते से ज्यादा के निचले स्तर से उछलने के बाद डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। पश्चिम एशिया के तनाव और सुस्त तकनीकी संकेतों के बीच कारोबारी नई दिशा तलाश रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में बुधवार को कच्चे तेल की कीमतों में पिछले सत्र की भारी गिरावट के बाद हल्की रिकवरी देखने को मिली है। अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई अपने तीन हफ्ते से अधिक के निचले स्तर से थोड़ा ऊपर उठने में सफल रहा, हालांकि इसमें किसी मजबूत तेजी का अभाव साफ नजर आ रहा है। जिंस बाजार में तेल करीब 88.80 डॉलर के दायरे में कारोबार करता दिखा, जो दिन के दौरान 0.80% से कुछ अधिक की बढ़त दर्शाता है। बाजार प्रतिभागी इस समय पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक संकट और अमेरिका व ईरान के बीच जारी गतिरोध के घटनाक्रमों पर पैनी नजर रखे हुए हैं। जहां एक ओर तनाव से आपूर्ति बिगड़ने का डर कीमतों को सहारा दे रहा है, वहीं दूसरी ओर आपूर्ति की तत्काल चिंताओं में कमी आने से यह उछाल सीमित दायरे में ही सिमट कर रह गया है। बाजार के ताजा आंकड़ों पर नजर डालें तो दैनिक सत्र की समाप्ति पर कच्चे तेल का मौजूदा भाव 91.01 डॉलर पर दर्ज हुआ है, जो पिछले बंद स्तर 89.38 डॉलर के मुकाबले 1.82% की दैनिक मजबूती दिखाता है। पिछले 52 हफ्तों के दौरान इस जिंस का दायरा 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर के बीच रहा है। ट्रेडिंग वॉल्यूम अपने 20-दिवसीय औसत का 0.66 गुना देखा गया, जो दिखाता है कि व्यापक बाजार फिलहाल आक्रामक खरीदारी से परहेज कर रहा है। चार्ट पर तकनीकी संकेतक भी मिश्रित तस्वीर पेश कर रहे हैं, जहां 14-दिवसीय आरएसआई 47 पर स्थिर है, जबकि एमएसीडी 0.99 पर है और 2.48 की सिग्नल लाइन के नीचे होने से इसका हिस्टोग्राम -1.49 के साथ मंदी का रुख दर्शा रहा है। चार्ट पर तकनीकी संरचना और अहम स्तर तकनीकी विश्लेषण के नजरिए से देखें तो 4-घंटे के चार्ट पर 200-पीरियड एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (ईएमए) के नीचे हालिया ब्रेकडाउन ने बिकवाली करने वाले कारोबारियों के लिए एक बड़ा संकेत दिया था। इसके बाद आई तेज फिसलन को अगस्त और सितंबर के दौरान बनी तेजी के 61.8% फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट स्तर के पास ठोस सहारा मिला। इस समर्थन के बावजूद गति से जुड़े संकेतक कमजोर बने हुए हैं। हालिया गिरावट के दौरान रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई 39 के स्तर के पास मंदी के दायरे से ठीक ऊपर टिका दिखा था, जबकि एमएसीडी लगातार नकारात्मक क्षेत्र में बना रहा, जिससे किसी बड़े अपसाइड के लिए सतर्कता बरतने की सलाह मिलती है। दैनिक चार्ट पर मूविंग एवरेज की स्थिति देखें तो 20-दिवसीय ईएमए 93.51 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 90.08 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 80.47 डॉलर पर स्थित है। इसके अलावा 50-दिवसीय एसएमए 88.49 डॉलर और 200-दिवसीय एसएमए 82.04 डॉलर पर है। 50 ईएमए का 200 ईएमए से ऊपर होना लंबी अवधि में गोल्डन क्रॉस और तेजी के बुनियादी ढांचे को दर्शाता है, लेकिन अल्पकालिक बाधाएं कायम हैं। बोलिंजर बैंड की सीमा 86.33 डॉलर से 105.65 डॉलर के बीच फैली है, जिसका मध्य स्तर 95.99 डॉलर है और भाव अभी इसके भीतर ही गति कर रहा है। रुझान की ताकत बताने वाला एडीएक्स 24 पर है, जो बाजार के सीमित दायरे में रहने की पुष्टि करता है। स्टोकेस्टिक की फास्ट लाइन और सिग्नल लाइन दोनों 13 पर दर्ज हुई हैं। दैनिक अस्थिरता को मापने वाला एटीआर 4.61 पर है, जिसे स्टॉप-लॉस बफर के रूप में देखा जाता है। कारोबारियों के लिए पिवट बिंदु 90.52 डॉलर पर है, जबकि पहला प्रतिरोध आर1 92.45 डॉलर और दूसरा प्रतिरोध आर2 93.90 डॉलर पर है। नीचे की तरफ पहला समर्थन एस1 89.07 डॉलर और दूसरा समर्थन एस2 87.14 डॉलर पर बना हुआ है, जबकि 20 दिनों का दायरा 88.58 डॉलर के सपोर्ट और 106.75 डॉलर के रेजिस्टेंस के बीच आंका गया है। डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल और वैश्विक बाजार की संरचना वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सबसे प्रमुख ग्रेड्स में गिना जाता है। वैश्विक पटल पर बेंचमार्क माने जाने वाले तीन सबसे बड़े ग्रेड्स में डब्ल्यूटीआई के अलावा ब्रेंट और दुबई क्रूड शामिल हैं। डब्ल्यूटीआई को कम घनत्व और कम सल्फर सामग्री की वजह से क्रमशः लाइट और स्वीट कच्चा तेल कहा जाता है। कम सल्फर और हल्के घनत्व के कारण इसे उच्च गुणवत्ता वाला तेल माना जाता है, जिससे गैसोलीन और डीजल जैसी पेट्रोलियम सामग्री को परिष्कृत करना बेहद आसान होता है। इसका उत्पादन मुख्य रूप से अमेरिका में होता है और इसका वितरण ओक्लाहोमा स्थित कुशिंग हब के जरिए किया जाता है, जिसे पाइपलाइन क्रॉसरोड्स ऑफ द वर्ल्ड के नाम से भी जाना जाता है। पूरी दुनिया में तेल कारोबार के लिए यह प्रमुख पैमाना है और वित्तीय जगत में इसके भाव व्यापक रूप से देखे जाते हैं। किसी भी वित्तीय जिंस की तरह कच्चे तेल की कीमतें भी मांग और आपूर्ति के मूलभूत नियमों से तय होती हैं। वैश्विक आर्थिक वृद्धि में मजबूती ऊर्जा की खपत और मांग को सीधे बढ़ाती है, जबकि वैश्विक विकास दर कमजोर पड़ने पर खपत घटने से कीमतों पर दबाव बनता है। युद्ध, राजनीतिक उथल-पुथल और व्यापारिक प्रतिबंध आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करके भाव में भारी उछाल ला सकते हैं। इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर का मूल्य भी डब्ल्यूटीआई के लिए बेहद निर्णायक होता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल का व्यापार मुख्य रूप से डॉलर में ही होता है। डॉलर कमजोर होने पर अन्य मुद्रा धारकों के लिए तेल सस्ता हो जाता है जिससे खरीदारी बढ़ती है, जबकि मजबूत डॉलर आयात को महंगा बनाकर मांग पर अंकुश लगाता है। ओपेक और साप्ताहिक इन्वेंट्री आंकड़ों की भूमिका कच्चे तेल की आपूर्ति को नियंत्रित करने में पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन यानी ओपेक की भूमिका केंद्रीय रहती है। 12 सदस्य देशों का यह समूह साल में दो बार होने वाली बैठकों में अपने उत्पादन कोटे की समीक्षा करता है। जब ओपेक अपने कोटे में कटौती का फैसला करता है, तो बाजार में आपूर्ति घट जाती है और कीमतों को ऊपर की ओर सहारा मिलता है। इसके विपरीत, जब उत्पादन बढ़ाया जाता है तो अतिरिक्त आपूर्ति कीमतों को नीचे खींचती है। इस समूह के साथ जब रूस सहित 10 गैर-ओपेक सदस्य देश जुड़ते हैं, तो इसे ओपेक प्लस कहा जाता है, जिसका वैश्विक उत्पादन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा अमेरिकी बाजार में भंडारण की स्थिति बताने वाली दो साप्ताहिक रिपोर्टें निवेशकों की धारणा तय करती हैं। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट यानी एपीआई प्रत्येक मंगलवार को अपने आंकड़े जारी करता है, जबकि अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन यानी ईआईए बुधवार को आधिकारिक इन्वेंट्री रिपोर्ट प्रस्तुत करता है। सरकारी एजेंसी होने के कारण ईआईए के आंकड़ों को बाजार में अधिक प्रामाणिक माना जाता है, हालांकि लगभग 75% मामलों में दोनों रिपोर्टों के परिणाम 1% के अंतर के भीतर ही रहते हैं। भंडारण में कमी यह संकेत देती है कि मांग मजबूत बनी हुई है जिससे कीमतों में तेजी आती है, जबकि इन्वेंट्री में अप्रत्याशित वृद्धि अतिरिक्त आपूर्ति की ओर इशारा करती है जिससे भाव गिरते हैं। विदेशी मुद्रा, सोना और वृहद आर्थिक संकेतक बुधवार को व्यापक वित्तीय बाजारों में भी कई बड़े बदलाव दर्ज किए गए। मुद्रा बाजार में एशियाई सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) दो महीने के निचले स्तर 0.6950 के करीब आ गया। ऑस्ट्रेलिया के अगस्त महीने के अंतर्निहित उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहने के कारण रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में आगे बढ़ोतरी की संभावनाओं को झटका लगा है। चीन के पीएमआई आंकड़ों से भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कोई समर्थन नहीं मिल सका। दूसरी ओर, डॉलर और येन की जोड़ी (USD/JPY) 157.00 के नीचे दबाव में रही, जहां बैंक ऑफ जापान के सख्त रुख और संभावित बाजार हस्तक्षेप के जोखिमों ने कमजोर औद्योगिक उत्पादन और खुदरा बिक्री के आंकड़ों के बावजूद जापानी मुद्रा को सहारा दिया। सोने के बाजार में यूरोपीय सत्र की शुरुआत तक स्थिरता का माहौल रहा और पीली धातु 4,200 डॉलर के स्तर के नीचे दायरे में कारोबार करती रही। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने डॉलर को दो महीने के उच्च स्तर से नीचे खींचा, जिससे गैर-ब्याज वाली संपत्तियों को मदद मिली। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक नीतिगत रुख की आशंकाओं ने सोने की तेजी को बांधे रखा। क्रिप्टो बाजार में आवे (AAVE) पिछले दिन 10% से अधिक की छलांग लगाने के बाद मुनाफावसूली के चलते 161 डॉलर के नीचे आ गया, जबकि इसके संस्थापक स्टानी कुलेचोव द्वारा आवेनॉमिक्स 3.0 के तहत टोकन-बर्न तंत्र लाने पर विचार किया जा रहा है। निवेशक अब अमेरिकी ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक एनालिसिस द्वारा जारी किए जाने वाले अगस्त के पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (पीसीई) मूल्य सूचकांक का इंतजार कर रहे हैं, जो फेडरल रिजर्व का पसंदीदा मुद्रास्फीति पैमाना है और आगामी ब्याज दरों के फैसलों को निर्धारित कर सकता है। इसका आप पर असर कच्चे तेल की कीमतों में सीमित उतार-चढ़ाव से वैश्विक ईंधन लागत और घरेलू खुदरा महंगाई पर मिला-जुला असर पड़ने की संभावना है। • ईंधन की कीमतों पर असर: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के 88 से 91 डॉलर के दायरे में रहने से देश में पेट्रोल और डीजल के खुदरा भाव फिलहाल स्थिर बने रहने की उम्मीद है। आम वाहन चालकों और माल ढुलाई कंपनियों को तत्काल किसी बड़े मूल्य झटके का सामना नहीं करना पड़ेगा। • आयात बिल और व्यापार घाटा: कच्चे तेल का भाव 90 डॉलर के इर्द-गिर्द टिके रहने से भारत जैसे बड़े आयातक देश का विदेशी मुद्रा खर्च नियंत्रित दायरे में बना रहता है। इससे व्यापार घाटे और चालू खाता घाटे पर अचानक अतिरिक्त दबाव बनने की आशंका कम होती है। • विमानन और परिवहन खर्च: हवाई ईंधन यानी एटीएफ की लागत नियंत्रित रहने से विमानन कंपनियों पर परिचालन दबाव नहीं बढ़ेगा। यात्रियों के लिए आने वाले त्योहारी और पर्यटन सीजन में हवाई किराए में तेज उछाल आने की संभावना सीमित रहेगी। • कमोडिटी और शेयर निवेशक: ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी तेल विपणन कंपनियों और पेट्रोकेमिकल शेयरों में एक सीमित दायरे में ट्रेडिंग देखने को मिल सकती है। निवेशकों को भू-राजनीतिक तनाव और साप्ताहिक भंडारण आंकड़ों को देखकर ही अपनी रणनीति तय करनी चाहिए। ऐसा क्यों हुआ कच्चे तेल में आई यह आंशिक मजबूती पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों और पूर्ववर्ती भारी बिकवाली के बाद तकनीकी समर्थन मिलने से प्रेरित हुई है। • भू-राजनीतिक तनाव: अमेरिका और ईरान के बीच गहराते गतिरोध ने वैश्विक तेल आपूर्ति में संभावित व्यवधान की आशंकाओं को जन्म दिया है। जब भी प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों में टकराव बढ़ता है, तो व्यापारी सुरक्षात्मक खरीदारी करते हैं जिससे कीमतों को तात्कालिक सहारा मिलता है। • तकनीकी समर्थन स्तर: पूर्ववर्ती सत्र में भारी गिरावट के बाद अगस्त और सितंबर के उछाल के 61.8% फाइबोनैचि स्तर पर कीमतों को मजबूत समर्थन मिला। तकनीकी स्तरों पर शॉर्ट पोजिशन काटने और निचले स्तरों पर खरीदारी आने से भाव अपने तीन हफ्ते के निचले स्तर से उछल सके। • आपूर्ति चिंताओं में कमी: उछाल के बावजूद कीमतों में तेज गति न आने की मुख्य वजह यह है कि बाजार में वास्तविक भौतिक आपूर्ति बाधित नहीं हुई है। तात्कालिक आपूर्ति संकट टलने की उम्मीदों ने सटोरिया खरीदारी को सीमित कर दिया और भाव 89 डॉलर के नीचे ही अटके रहे। • वृहद आर्थिक अनिश्चितता: अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों पर कड़े रुख के संकेतों और महत्वपूर्ण पीसीई महंगाई आंकड़ों से पहले बाजार प्रतिभागी बड़े सौदे करने से बच रहे हैं। नीतिगत ब्याज दरों के उच्च स्तर पर बने रहने की संभावना से भविष्य की तेल मांग प्रभावित होने की चिंता कायम है। सवाल-जवाब 1. डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल क्या है? वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई अमेरिका में उत्पादित होने वाला हल्का और मीठा कच्चा तेल है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रमुख मूल्य बेंचमार्क माना जाता है। 2. कच्चे तेल की कीमतों में हालिया उछाल की मुख्य वजह क्या है? अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और निचले तकनीकी स्तरों पर मिले समर्थन के कारण कीमतों में हल्की रिकवरी देखी गई। 3. क्या कच्चे तेल की कीमतों में तेजी लगातार जारी रहेगी? तकनीकी संकेतक कमजोर हैं और वास्तविक आपूर्ति में कमी न आने के कारण बढ़त सीमित दायरे में बनी हुई है, जिससे मजबूत तेजी का अभाव है। 4. ओपेक का कच्चे तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ता है? ओपेक देश उत्पादन कोटे में कटौती करके आपूर्ति घटा सकते हैं जिससे कीमतें बढ़ती हैं, जबकि उत्पादन बढ़ाने पर कीमतों में गिरावट आती है। 5. निवेशक किन आगामी आर्थिक आंकड़ों पर नजर रख रहे हैं? बाजार प्रतिभागी अमेरिका के अगस्त महीने के पीसीई मूल्य सूचकांक और ईआईए की साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्ट के नतीजों पर नजर बनाए हुए हैं। https://trendkia.com/market/kachche-tela-men-giravata-ke-bada-snbhalane-ki-koshisha-89-dollar-ke-niche-simita-barhata-40565 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