कच्चे तेल में तेजी और बॉन्ड यील्ड से वैश्विक शेयर बाजार सहमे, ब्रिटेन और अमेरिका में आर्थिक चिंताएं बढ़ीं मध्य पूर्व में छह महीने से जारी संघर्ष के कारण ईंधन भंडार में गिरावट और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से दुनिया भर के शेयर बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। वैश्विक शेयर बाजारों में मजबूती का सिलसिला बना हुआ है, लेकिन बढ़ते आर्थिक जोखिमों और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण यह तेजी काफी नाजुक नजर आ रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय सूचकांक जैसे एमएससीआई एसीडब्ल्यूआई एक और सकारात्मक तिमाही की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन निवेशकों के लिए चुनौतियां कम नहीं हुई हैं। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष को छह महीने बीत चुके हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सामान्य स्थिति से काफी दूर है। इसके परिणामस्वरूप कच्चे तेल और तरल ईंधन के वैश्विक भंडार तेजी से घट रहे हैं। यदि ऊर्जा की कीमतों में फिर से उछाल आता है, तो इससे महंगाई दर को नियंत्रित करने के केंद्रीय बैंकों के प्रयासों को झटका लग सकता है, जिससे लंबी अवधि की बॉन्ड यील्ड लंबे समय तक ऊंचे स्तरों पर बनी रह सकती है। ऊर्जा आपूर्ति संकट और भू-राजनीतिक जोखिम मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव ने कमोडिटी बाजारों में आपूर्ति की कमी को बढ़ा दिया है। पिछले छह महीनों के दौरान वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों का स्टॉक काफी हद तक घट चुका है। हालिया कारोबारी सत्रों में क्रूड ऑयल (CL=F) की कीमतों में जोरदार तेजी देखी गई, जहां यह 5.50% की बढ़त के साथ 90.48 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो इसके पिछले बंद भाव 85.76 डॉलर से काफी अधिक है। दक्षिणी ईरान में नए विस्फोटों की खबरों के बाद तेल की कीमतों में यह उछाल आया। इसके साथ ही कच्चा तेल अपने 50-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) 79.80 डॉलर से ऊपर निकल गया है और बोलिंगर बैंड के ऊपरी स्तर 90.25 डॉलर को पार कर चुका है। तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय RSI 64 पर पहुंच गया है और MACD हिस्टोग्राम भी तेजी का संकेत दे रहा है। यूनानी महाकाव्य होमर की ओडिसी की तरह, जहां आगे की यात्रा कई तरह के खतरों से भरी होती है, मौजूदा बाजार का माहौल भी निवेशकों के लिए चुनौतियों से भरा है। सबसे बड़ा जोखिम यह है कि महंगे कच्चे तेल से वैश्विक स्तर पर महंगाई की दर फिर से बढ़ सकती है। यदि ऊर्जा की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो वित्तीय बाजार केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को कम कर सकते हैं, जिससे बॉन्ड Yields ऐतिहासिक रूप से ऊंचे स्तरों पर बनी रहेंगी। डीजल क्रैक स्प्रेड में रिकॉर्ड तेजी से औद्योगिक दबाव भले ही कुछ समय पहले तक कच्चे तेल की कीमतें स्थिर लग रही थीं, लेकिन शोधित ईंधन के बाजार में हालात चिंताजनक हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण अमेरिका में डीजल क्रैक स्प्रेड है, जो अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल (ULSD) फ्यूचर्स और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चे तेल के बीच का अंतर दिखाता है। अमेरिका में डीजल क्रैक स्प्रेड इतिहास में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार करते हुए 102.00 डॉलर प्रति बैरल के इंट्राडे रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। चूंकि डीजल का उपयोग वैश्विक माल ढुलाई, कृषि उपकरणों और भारी उद्योगों में मुख्य ईंधन के रूप में होता है, इसलिए इसमें आई तेजी से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर लागत का दबाव सीधे तौर पर बढ़ सकता है। सरकारी बॉन्ड में बिकवाली और ऊंची ब्याज दरें नया महीना शुरू होते ही दुनिया भर के सरकारी बॉन्ड बाजारों में बिकवाली का दौर देखा जा रहा है। निवेशक बढ़ती महंगाई और सरकारों के बड़े कर्ज को देखते हुए सरकारी बॉन्ड पर अधिक यील्ड की मांग कर रहे हैं। यूनाइटेड किंगडम के बॉन्ड बाजार में इसका सबसे अधिक असर देखने को मिला, जहां 2-वर्षीय और 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में कारोबार के दौरान 10 बेसिस पॉइंट तक की बढ़ोतरी हुई। दिन का कारोबार समाप्त होने तक 2-वर्षीय यील्ड 7 बेसिस पॉइंट और 10-वर्षीय यील्ड 8 बेसिस पॉइंट ऊपर बंद हुई। बॉन्ड यील्ड में इस बढ़ोतरी से दुनिया भर में कर्ज लेना महंगा हो जाता है, जिससे शेयर बाजारों के वैल्युएशन पर दबाव बनता है। विदेशी मुद्रा बाजार और डॉलर इंडेक्स में मजबूती विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिका के कमजोर आर्थिक आंकड़ों के बावजूद अमेरिकी डॉलर को सुरक्षित निवेश की मांग और बढ़ती यील्ड का समर्थन मिला। डॉलर इंडेक्स में आई मजबूती के कारण प्रमुख वैश्विक मुद्राओं में गिरावट दर्ज की गई। जीबीपी/यूएसडी (GBP/USD) गिरकर 1.3500 के निचले स्तर पर आ गया, जो दो हफ्ते का निचला स्तर है। इसी तरह, ईयूआर/यूएसडी (EUR/USD) में भी बिकवाली तेज हुई और यह 1.1600 के महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर से नीचे आ गया। यूरो में आई यह कमजोरी दर्शाती है कि आयातित ऊर्जा पर निर्भर यूरोपीय अर्थव्यवस्थाएं तेल की बढ़ती कीमतों के प्रति अधिक संवेदनशील हैं। सोने में नरमी और क्रिप्टोकरेंसी में स्थिरता बढ़ती अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और मजबूत डॉलर के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग कमजोर पड़ी। सोना गिरकर लगभग तीन हफ्ते के निचले स्तर पर 4,300 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के ठीक ऊपर कारोबार करता दिखा। दूसरी ओर, क्रिप्टोकरेंसी बाजार में मिला-जुला रुख रहा। बिटकॉइन (BTC) को स्पॉट ETF में नए निवेश का सहारा मिला, जिससे यह 78,000 डॉलर के सपोर्ट स्तर से ऊपर बना रहा। एथेरियम (ETH) संस्थागत खरीदारी के दम पर 2,450 डॉलर के आसपास टिका रहा, जबकि एक्सआरपी (XRP) पर दबाव बना रहा लेकिन उसने अपने 200-दिवसीय EMA सपोर्ट को बनाए रखा। इसका आप पर असर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और बॉन्ड यील्ड में उछाल सीधे तौर पर आम लोगों के बजट, महंगाई दर और निवेश पोर्टफोलियो को प्रभावित करते हैं। • ईंधन और परिवहन खर्च: कच्चे तेल और डीजल के दामों में उछाल से माल ढुलाई और परिवहन लागत बढ़ेगी। इसके परिणामस्वरूप दैनिक उपभोग की वस्तुओं और आवश्यक सामानों के दाम बढ़ सकते हैं। • ऋण और ईएमआई पर असर: सरकारी बॉन्ड यील्ड में तेजी से केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरें ऊंची रखनी पड़ सकती हैं। इससे होम लोन, कार लोन और व्यावसायिक ऋणों पर ईएमआई का बोझ बना रहेगा। • शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड: बॉन्ड यील्ड बढ़ने से शेयर बाजारों में बिकवाली का दबाव बढ़ जाता है। रिटेल निवेशकों के इक्विटी म्यूचुअल फंड और पोर्टफोलियो के रिटर्न पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। • भारत पर प्रभाव: भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, जिससे आयात बिल बढ़ेगा और भारतीय रुपये पर दबाव आ सकता है। इससे घरेलू स्तर पर ईंधन और विनिर्माण लागत में बढ़ोतरी संभव है। सवाल-जवाब 1. वैश्विक शेयर बाजारों पर वर्तमान में दबाव क्यों बना हुआ है? कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, ईंधन भंडार में कमी और मध्य पूर्व में तनाव के कारण ऊंची बॉन्ड यील्ड से वैश्विक शेयर बाजार दबाव में हैं। 2. कच्चे तेल और डीजल की कीमतों में क्या बदलाव आया है? ईरान में धमाकों की खबरों के बीच कच्चा तेल 5.50% बढ़कर 90.48 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड 102.00 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर आ गया। 3. बॉन्ड बाजार में यील्ड बढ़ने का क्या कारण है? महंगाई दर ऊंची बने रहने की आशंका से निवेशकों ने सरकारी बॉन्ड बेचे, जिससे ब्रिटेन के 2-वर्षीय और 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में 10 बेसिस पॉइंट तक की बढ़ोतरी हुई। 4. सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार का क्या हाल है? मजबूत डॉलर और ऊंची यील्ड के कारण सोना गिरकर 4,300 डॉलर प्रति औंस के पास आ गया, जबकि बिटकॉइन ETF में निवेश के दम पर 78,000 डॉलर से ऊपर टिका रहा। https://trendkia.com/market/kachche-tela-men-teji-aura-bond-yield-se-vaishvika-sheyara-bajara-sahame-britain-aura-america-men-arthika-chintaen-barhin-26018 TrendKia — Har trend, sabse pehle.