कच्चे तेल में तेजी और अमेरिकी चुनाव के तनाव से सोने पर दबाव, $3,900 के स्तर के पास बढ़ी हलचल मध्य पूर्व में सैन्य तनाव के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिकी मध्यावधि चुनावों की अनिश्चितता से सोने की रिकवरी थम गई है, जिससे पीली धातु 3,900 डॉलर के करीब संघर्ष कर रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की हालिया रिकवरी की रफ्तार थम गई है, क्योंकि ऊर्जा बाजार में फिर से तेजी लौटी है और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने के कयास मजबूत हो रहे हैं। ईरान के क़ेश्म द्वीप पर अमेरिकी हमले की खबरों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने वित्तीय बाजारों में मुद्रास्फीति की चिंताएं फिर बढ़ा दी हैं। हाजिर सोना (XAU/USD) मंगलवार को दबाव में आते हुए 3,909 डॉलर के आसपास फिसल गया, जो दिन के कारोबार में लगभग 0.93 प्रतिशत की कमजोरी दर्शाता है। इसके अलावा कारोबारी सत्र के दौरान भाव 3,900 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से भी नीचे फिसले, जिससे अक्टूबर 2025 के बाद के निचले स्तर दोबारा टेस्ट होने का जोखिम गहरा गया है। बाजार के मौजूदा लाइव आंकड़ों पर नजर डालें तो सोना 3,917 डॉलर पर कारोबार कर रहा है, जो अपने पिछले बंद भाव 3,970 डॉलर की तुलना में 1.34 प्रतिशत की गिरावट दिखाता है। पिछले 52 हफ्तों के दौरान सोने का दायरा 3,879 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच रहा है। तेल की बढ़ती लागत और अमेरिकी डॉलर में बना हुआ लचीलापन सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली इस पीली धातु के लिए लगातार बाधाएं खड़ी कर रहा है। तेल की कीमतों और फेडरल रिजर्व की नीतियों का समीकरण फरवरी के आखिर में संघर्ष शुरू होने के बाद से ही कच्चे तेल के दाम और ब्याज दरों का नजरिया सोने की चाल के सबसे अहम निर्धारक बने हुए हैं। जब भी ऊर्जा की कीमतें बढ़ती हैं, तब वैश्विक स्तर पर महंगाई का दबाव बढ़ जाता है। ऐसे हालात में केंद्रीय बैंक, विशेष रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व, अपनी सख्त मौद्रिक नीति को बरकरार रखने या दरों में और इजाफा करने के लिए मजबूर होते हैं। सोने पर कोई नियमित ब्याज या यील्ड नहीं मिलती, इसलिए जब उधार लेने की लागत और बॉन्ड यील्ड ऊंची रहती है, तो गैर-उपज वाली संपत्तियों को अपने पास रखने की अवसर लागत (अपॉर्चुनिटी कॉस्ट) काफी बढ़ जाती है। मध्य पूर्व के अनसुलझे तनाव, कच्चे तेल के उछाल और फेड के आक्रामक रुख के तालमेल ने अमेरिकी डॉलर को मजबूती दे रखी है। छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा की स्थिति दर्शाने वाला यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) 101.81 के करीब देखा गया। जब तक कच्चे तेल के दाम में टिकाऊ गिरावट नहीं आती, तब तक सोने की कीमतों में किसी मजबूत और स्थिर सुधार की गुंजाइश सीमित नजर आ रही है। इक्विटी बाजारों में मार्जिन कॉल और तकनीकी शेयरों का असर सोने पर दबाव केवल मुद्रा और दरों तक सीमित नहीं है, बल्कि वित्तीय बाजारों के व्यापक रुझान भी इसे प्रभावित कर रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के भारी पूंजीगत खर्च को लेकर निवेशकों में चिंताएं बढ़ी हैं, जिससे टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली देखने को मिली है। इस तरह के तेज करेक्शन के दौरान कई हेज फंड और बड़े निवेशक अपने इक्विटी नुकसान की भरपाई करने और मार्जिन कॉल पूरा करने के लिए तरल संपत्तियां बेचते हैं। ऐसे में सोने की बिकवाली भी तेज हो जाती है, जिससे धातु पर दोहरा दबाव पड़ता है। अमेरिका में विनिर्माण क्षेत्र की स्थिति भी मजबूत बनी हुई है। हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में लगातार 10वें महीने विस्तार हुआ है। इंस्टीट्यूट फॉर सप्लाई मैनेजमेंट (ISM) का मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई अक्टूबर महीने में बढ़कर 55.5 पर पहुंच गया, जो पिछले महीने के 54.5 और विश्लेषकों के अनुमानों से बेहतर है। इस आर्थिक मजबूती ने भी फेडरल रिजर्व द्वारा ढिलाई बरतने की संभावनाओं को कमजोर किया है। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव और राजनीतिक समीकरण वित्तीय बाजार इस समय अमेरिकी मध्यावधि चुनावों पर बारीक नजर रख रहे हैं, जो राजनीतिक शक्ति के संतुलन और वित्तीय नीतियों की दिशा तय करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों और वित्तीय संस्थानों का मानना है कि इन चुनावों के नतीजे सीधे तौर पर अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड को प्रभावित करेंगे। कॉमर्सबैंक के नॉर्मन लीबके के अनुसार, यदि रिपब्लिकन पार्टी दोनों सदनों में अपना बहुमत खो देती है, तो डॉलर पर अधिक दबाव देखा जा सकता है, क्योंकि ट्रंप प्रशासन के पास समग्र रूप से कम राजनीतिक समर्थन रह जाएगा। यदि केवल प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में नियंत्रण बदलता है, तब भी डॉलर को कुछ अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है, हालांकि उसका असर सीमित रहेगा। वहीं अगर रिपब्लिकन दोनों सदनों में अपना नियंत्रण बरकरार रखते हैं, तो इससे डॉलर को नया समर्थन मिलेगा, जिससे सोने पर दबाव और बढ़ सकता है। राजनीतिक घटनाक्रमों के साथ-साथ इस हफ्ते अमेरिका के रोजगार से जुड़े आंकड़े भी जारी होने हैं। मंगलवार को जोल्ट्स (JOLTS) जॉब ओपनिंग्स के आंकड़ों के साथ शुरुआत होकर शुक्रवार को नॉन-फार्म पेरोल (NFP) रिपोर्ट आएगी, जो ब्याज दरों के भविष्य को लेकर निवेशकों को नई दिशा देगी। तकनीकी संकेतक और प्रमुख सपोर्ट-रेजिस्टेंस स्तर चार्ट पर सोने का रुख अभी भी मंदी के दबाव में दिखाई दे रहा है। 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) लगभग 33 से 34 के स्तर पर मँडरा रहा है, जो ओवरसोल्ड क्षेत्र के बेहद करीब है। मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) शून्य से नीचे -82.50 पर बना हुआ है, जबकि इसका सिग्नल स्तर -70.49 और हिस्टोग्राम -12.01 पर नकारात्मक है। यह स्पष्ट करता है कि गिरावट की गति भले ही खिंच चुकी हो, लेकिन बाजार पर बिकवाली का दबदबा बरकरार है। चलते-औसत (मूविंग एवरेज) के मामले में 20-दिवसीय ईएमए 4,078 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 4,190 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 4,408 डॉलर पर स्थित हैं। 50-दिवसीय ईएमए का 200-दिवसीय ईएमए से नीचे होना डेथ क्रॉस की स्थिति दर्शाता है, जो लंबी अवधि के डाउनट्रेंड का संकेत है। 20-दिवसीय बोलिंगर बैंड्स 3,911 डॉलर से 4,273 डॉलर के दायरे में हैं और मौजूदा कीमत इस बैंड के निचले हिस्से में बनी हुई है। एडीएक्स 32 पर है, जो मौजूदा ट्रेंड की मजबूती को दर्शाता है, जबकि स्टोकेस्टिक इंडिकेटर की फास्ट लाइन 11 और सिग्नल लाइन 14 पर है। औसत ट्रू रेंज (ATR) 81.28 डॉलर पर है, जो दैनिक उतार-चढ़ाव की सीमा को दिखाता है। ऊपर की ओर, सोने के लिए पहला तात्कालिक प्रतिरोध 3,950 डॉलर से 4,000 डॉलर के दायरे में है, जिसके बाद पिवट स्तर 3,932 डॉलर और रेजिस्टेंस स्तर 3,959 डॉलर (R1) तथा 4,002 डॉलर (R2) पर आते हैं। इसके बाद 21-दिवसीय एसएमए 4,081 डॉलर पर है। यदि भाव और सुधरते हैं तो 100-दिवसीय एसएमए 4,205 डॉलर और 4,400 डॉलर का स्तर बाधा बनेगा, जिसके ऊपर 200-दिवसीय एसएमए 4,480 डॉलर और 4,513 डॉलर पर स्थित है। नीचे की तरफ पहला सपोर्ट 3,889 डॉलर (S1) और 3,861 डॉलर (S2) पर है, जबकि 20-दिवसीय सपोर्ट और हालिया 52-हफ्तों का निचला स्तर 3,870 से 3,879 डॉलर के बीच है। यदि यह स्तर टूटता है तो गिरावट और गहरी हो सकती है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में सोने की ऐतिहासिक भूमिका और केंद्रीय बैंकों की खरीद मानव इतिहास में सोने की भूमिका हमेशा से मूल्य के संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में अटूट रही है। आभूषणों में इसके आकर्षण के अलावा, अनिश्चितता और संकट के दौर में इसे पारंपरिक रूप से सबसे सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) माना जाता है। किसी सरकार या जारीकर्ता की साख पर निर्भर न होने के कारण यह मुद्रास्फीति और कमजोर होती कागजी मुद्राओं के खिलाफ एक मजबूत बचाव का काम करता है। दुनियाभर के केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े धारक हैं। संकट के समय में अपनी घरेलू मुद्राओं को स्थिरता प्रदान करने और अपनी वित्तीय साख को मजबूत करने के लिए वे अपने विदेशी मुद्रा भंडार का विविधीकरण करते हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में केंद्रीय बैंकों ने अपने भंडार में 1,136 टन सोना जोड़ा था, जिसकी कीमत लगभग 70 अरब डॉलर थी। यह रिकॉर्ड स्तर पर की गई अब तक की सबसे बड़ी वार्षिक खरीद थी। विशेष रूप से भारत, चीन और तुर्की जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंक तेजी से अपने स्वर्ण भंडार का विस्तार कर रहे हैं ताकि वैश्विक वित्तीय जोखिमों से अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रख सकें। सोने का अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड के साथ आमतौर पर विपरीत संबंध होता है। जब डॉलर गिरता है, तो सोना मजबूत होता है। इसी तरह शेयर बाजार में तेजी आने पर सोने की चमक अक्सर फीकी पड़ जाती है, जबकि जोखिम भरे बाजारों में गिरावट आने पर निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख करते हैं। अन्य मुद्राओं और क्रिप्टो बाजारों का हाल मुद्रा बाजार के अन्य हिस्सों में भी उतार-चढ़ाव जारी है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) में रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा ब्याज दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी के बावजूद कमजोरी देखी गई। यह फैसला सर्वसम्मत नहीं था और तीन सदस्यों ने दरों को 4.60 प्रतिशत पर ही अपरिवर्तित रखने का पक्ष लिया था, जिससे भविष्य में सख्ती की उम्मीदें कमजोर हुईं और डॉलर की मजबूती के बीच करेंसी दो हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गई। वहीं, जापानी येन (USD/JPY) 158.00 के स्तर से थोड़ा नीचे आया है, जहां मुद्रा बाजार में सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम और बैंक ऑफ जापान की अगली दर वृद्धि की अनिश्चितता के कारण दायरा सीमित बना हुआ है। दूसरी ओर, क्रिप्टोकरेंसी बाजार में कार्डानो (ADA) 0.189 डॉलर के स्तर से नीचे आ गया है, जहां अहम सपोर्ट टूटने और कमजोर ऑन-चेन मैट्रिक्स के चलते बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है। कुल मिलाकर, तेल के झटके, राजनीतिक अनिश्चितता और आर्थिक आंकड़े आने वाले दिनों में सोने और व्यापक वित्तीय बाजारों की दिशा तय करेंगे। इसका आप पर असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में आ रही इस अस्थिरता और तेल के उछाल का सीधा असर भारतीय आभूषण खरीदारों, निवेशकों और आयात लागत पर पड़ेगा। • भारत में आभूषण खरीदार: वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में 3,900 डॉलर के करीब आ रही कमजोरी से घरेलू बाजार में शादी-ब्याह के सीजन में खरीदारी करने वालों को कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि कच्चे तेल की तेजी से अगर भारतीय रुपया कमजोर होता है, तो अंतरराष्ट्रीय गिरावट का पूरा फायदा स्थानीय रिटेल कीमतों में मिलने में देरी हो सकती है। • घरेलू निवेशक: गोल्ड ईटीएफ और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश करने वाले निवेशकों को इस समय तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। अमेरिकी चुनावों के नतीजों और फेडरल रिजर्व के ब्याज दर फैसलों तक एकमुश्त पूंजी लगाने के बजाय व्यवस्थित निवेश योजना (SIP) अपनाना समझदारी होगी। • कच्चे तेल का प्रभाव: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भारत के चालू खाता घाटे और ईंधन की कीमतों पर दबाव डाल सकती है। इससे आने वाले हफ्तों में मुद्रास्फीति बढ़ सकती है, जो घरेलू ब्याज दरों में संभावित कटौती को और टाल सकती है। • पोर्टफोलियो विविधीकरण: इक्विटी बाजारों में तकनीकी शेयरों की कमजोरी के बीच सुरक्षा के लिहाज से सोने का महत्व बना रहेगा। लंबी अवधि के निवेशक 3,870 से 3,880 डॉलर के सपोर्ट स्तरों पर नजर रखकर अपने पोर्टफोलियो को हेज कर सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ सोने की कीमतों में आई हालिया गिरावट और 3,900 डॉलर के पास बने दबाव के पीछे मध्य पूर्व का भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा बाजार की हलचल और अमेरिकी राजनीतिक अनिश्चितताएं प्रमुख कारण हैं। • कच्चे तेल में उछाल और मुद्रास्फीति की चिंता: ईरान के क़ेश्म द्वीप पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की खबरों के बाद कच्चे तेल की कीमतें तेजी से उछली हैं। ऊर्जा की बढ़ती लागत ने दुनिया भर में मुद्रास्फीति के फिर से सिर उठाने का डर पैदा कर दिया है, जिससे केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना कमजोर पड़ गई है। • फेडरल रिजर्व का सख्त रुख: अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र के पीएमआई आंकड़ों में लगातार 10वें महीने मजबूती दर्ज की गई है, जिससे आर्थिक वृद्धि स्थिर बनी हुई है। इस मजबूत आर्थिक माहौल में फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है, जिससे गैर-उपज वाली संपत्ति होने के कारण सोने की आकर्षण क्षमता कम हो गई है। • अमेरिकी मध्यावधि चुनाव का जोखिम: अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में राजनीतिक नियंत्रण को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे डॉलर इंडेक्स को समर्थन मिल रहा है। चुनावों के नतीजे तय करेंगे कि मौजूदा नीतियों को कितना विधायी समर्थन मिलेगा, जिसके चलते बड़े फंड्स ने सोने में नए सौदे करने से परहेज किया है। • इक्विटी मार्जिन कॉल की पूर्ति: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े शेयरों में आई गिरावट के चलते संस्थागत निवेशकों को अपने शेयर नुकसान की भरपाई करनी पड़ रही है। ब्रोकरेज मार्जिन कॉल्स को पूरा करने के लिए कई निवेशक अपनी अत्यधिक तरल संपत्तियों जैसे सोने की बिकवाली कर रहे हैं। सवाल-जवाब 1. सोने की कीमतों में हालिया गिरावट की मुख्य वजह क्या है? ईरान के क़ेश्म द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद कच्चे तेल में आए उछाल और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें ऊंची रखने की संभावनाओं से सोने पर दबाव बना है। 2. मौजूदा समय में हाजिर सोना किस स्तर पर कारोबार कर रहा है? लाइव आंकड़ों के अनुसार सोना 3,917 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद स्तर 3,970 डॉलर से 1.34 प्रतिशत नीचे है। 3. कच्चे तेल की कीमतों का सोने के भाव पर क्या असर पड़ता है? महंगा कच्चा तेल महंगाई बढ़ाता है, जिससे केंद्रीय बैंक ब्याज दरें ऊंची रखते हैं। ऊंची दरों के कारण गैर-ब्याज वाली संपत्ति जैसे सोने की मांग घटती है। 4. अमेरिकी मध्यावधि चुनावों का असर सोने पर कैसे पड़ सकता है? कॉमर्सबैंक के अनुसार यदि रिपब्लिकन दोनों सदनों में बहुमत खोते हैं तो डॉलर गिर सकता है जिससे सोने को सहारा मिलेगा, जबकि दोनों सदन जीतने पर डॉलर मजबूत होकर सोने पर दबाव बनाएगा। 5. तकनीकी विश्लेषण के अनुसार सोने के लिए मुख्य सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर क्या हैं? सोने के लिए तात्कालिक सपोर्ट 3,889 और 3,861 डॉलर के साथ 3,870 डॉलर के स्तर पर है, जबकि ऊपर की ओर 3,950 से 4,000 डॉलर के बीच कड़ा रेजिस्टेंस मौजूद है। 6. केंद्रीय बैंकों ने हाल के वर्षों में सोने की कितनी खरीदारी की है? वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार वर्ष 2022 में केंद्रीय बैंकों ने रिकॉर्ड 1,136 टन सोना अपने विदेशी मुद्रा भंडार में जोड़ा था। https://trendkia.com/market/kachche-tela-men-teji-aura-us-election-ke-tanava-se-sone-para-dabava-3-900-ke-stara-ke-pasa-barhi-halachala-55750 TrendKia — Har trend, sabse pehle.