# कच्चे तेल में तेजी से बैंक ऑफ कनाडा पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव, दिसंबर में भी कदम उठाने की संभावना

> कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और आर्थिक विकास की मजबूती के बीच बैंक ऑफ कनाडा जुलाई 2023 के बाद पहली बार नीतिगत दरें बढ़ा सकता है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इसके बाद दिसंबर में भी लगातार दूसरी बढ़ोतरी के 50 प्रतिशत आसार हैं।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/kachche-tela-men-teji-se-bank-of-canada-para-byaja-daren-barhane-ka-dabava-disnbara-men-bhi-kadama-uthane-ki-snbhavana-52362 · **Language:** Hindi
**Tags:** बैंक ऑफ कनाडा, कच्चा तेल, ब्याज दरें, मुद्रास्फीति, वैश्विक बाजार, कमोडिटी, वित्त

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की लगातार ऊंची कीमतों और मजबूत आर्थिक गतिविधियों ने केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति को लेकर चर्चा तेज कर दी है। आर्थिक सुस्ती और नियंत्रित कोर मुद्रास्फीति के कारण अब तक धैर्य बरतने वाले बैंक ऑफ कनाडा के सामने अब नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने का परिदृश्य मजबूत हो रहा है। नेशनल बैंक ऑफ कनाडा के अर्थशास्त्रियों टेलर श्लेइच और एथन करी के अनुसार, ऊर्जा कीमतों में जारी उछाल को देखते हुए केंद्रीय बैंक जुलाई 2023 के बाद पहली बार अपनी ब्याज दरों में बढ़ोतरी का फैसला ले सकता है। इसके साथ ही दिसंबर की आगामी बैठक में भी लगातार दूसरी बार दरें बढ़ाने की संभावना लगभग 50 प्रतिशत मानी जा रही है।

## ऊर्जा कीमतों का दबाव और मुद्रास्फीति का जोखिम
अर्थव्यवस्था में मौजूद सुस्ती और काबू में रही कोर मुद्रास्फीति ने इस वर्ष बैंक ऑफ कनाडा को दरों पर यथास्थिति बनाए रखने का मौका दिया था। इसके बावजूद नीति निर्माताओं ने बार-बार आगाह किया है कि ऊर्जा की कीमतें यदि लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर टिकी रहीं, तो महंगाई का दायरा अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों में फैलने का जोखिम काफी बढ़ जाता है। सितंबर की शुरुआत में जब वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, तब बैंक गवर्नर ने इस स्तर पर असहजता जताई थी। उसके बाद से कीमतों में 10 से 20 प्रतिशत की अतिरिक्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे नीति निर्माताओं के धैर्य की सीमा समाप्त होने के संकेत मिल रहे हैं।

कमोडिटी बाजार के ताजा सत्र में क्रूड ऑयल फ्यूचर्स का भाव 99.76 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया, जो पिछले बंद भाव 101.76 डॉलर के मुकाबले 1.97 प्रतिशत कम है। तकनीकी संकेतकों की बात करें तो 14-दिवसीय आरएसआई 56 पर है, जबकि एमएसीडी 2.42 पर सिग्नल लाइन 1.95 के ऊपर बना हुआ है, जो 0.47 का बुलिश हिस्टोग्राम दर्शाता है। 20-दिवसीय ईएमए 97.44 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 93.70 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 83.66 डॉलर पर स्थित हैं। 50-दिवसीय एसएमए 93.62 डॉलर और 200-दिवसीय एसएमए 85.71 डॉलर के साथ भाव लंबी अवधि के अपट्रेंड में बना हुआ है, जहां 52 हफ्तों का दायरा 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर रहा है। बोलिंजर बैंड 85.76 डॉलर से 105.65 डॉलर के बीच हैं, दैनिक एडीएक्स 31 पर ट्रेंडिंग स्थिति की पुष्टि कर रहा है और एटीआर 4.30 है। बाजार के लिए धुरी स्तर 99.92 डॉलर पर है, जिसमें पहला प्रतिरोध 100.10 डॉलर और दूसरा प्रतिरोध 100.43 डॉलर दर्ज है, जबकि समर्थन स्तर क्रमशः 99.59 डॉलर और 99.41 डॉलर पर स्थित हैं।

## दिसंबर बैठक और मौद्रिक समीक्षा के संकेत
यदि बैंक ऑफ कनाडा अपनी नीति को कड़ा करने का विकल्प चुनता है, तो वित्तीय बाजारों का ध्यान तुरंत अगली संभावित बढ़ोतरी के समय पर टिक जाएगा। नई मौद्रिक नीति रिपोर्ट में मुद्रास्फीति और आर्थिक विकास के अनुमानों में होने वाले ऊपर की ओर संशोधन दिसंबर में भी लगातार दूसरे कदम का समर्थन कर सकते हैं। केंद्रीय बैंक का ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी यह दर्शाता है कि वह आम तौर पर अपने नीतिगत सख्ती के चक्रों की शुरुआत लगातार दो बैक-टू-बैक बढ़ोतरी के साथ करता है।

हालांकि वैश्विक स्तर पर अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों का रुख थोड़ा अलग रहा है। यूरोपियन सेंट्रल बैंक ने अधिक क्रमिक दृष्टिकोण चुना है और यूएस फेडरल रिजर्व के भी इसी तरह का संतुलित रुख अपनाने के आसार हैं। विश्लेषकों का मानना है कि बैंक ऑफ कनाडा की यह संभावित बढ़ोतरी कोई डोविश हाइक नहीं होगी, जिसमें दिसंबर में विराम की पहले से रूपरेखा तय की जाए। दूसरी ओर, बैंक सीधे तौर पर अगले कदम की अग्रिम घोषणा भी नहीं करेगा। इसके बजाय नीति निर्माता भविष्य के निर्णयों को आने वाले आर्थिक आंकड़ों और जोखिमों के बदलते संतुलन के आधार पर ही तय करने की बात कहेंगे। यही कारण है कि आगामी फैसले के बाद बाजार दिसंबर में एक और दर वृद्धि की संभावना लगभग 50 प्रतिशत तक आंक सकते हैं।

## वैश्विक मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में हलचल
इस बीच वैश्विक मुद्रा बाजार में कई प्रमुख जोड़ियों में महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। एशियाई सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर यानी एयूडी/यूएसडी जोड़ी में तेजी लौटी और यह 0.7030 के स्तर पर पहुंच गई। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की ओर से सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सहारा दिया, जिससे एक दिन पहले एक महीने के उच्चतम स्तर से आई सुधारात्मक गिरावट पलट गई। हालांकि अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बीच स्पॉट कीमतें 100-दिवसीय एसएमए के अहम प्रतिरोध स्तर से नीचे बनी रहीं।

दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन यानी यूएसडी/जेपीवाई में लगातार तीसरे कारोबारी दिन खरीदारों का आकर्षण देखा गया। बुधवार को आने वाले फेडरल ओपन मार्केट कमेटी के फैसले और शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान की नीतिगत समीक्षा से पहले यह जोड़ी एक महीने के निचले स्तर से और सुधरी। बैंक ऑफ जापान द्वारा आक्रामक दर वृद्धि टालने की अटकलों ने जापानी येन पर दबाव डाला, जिससे अमेरिकी डॉलर लगभग दो सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया।

## सोने की मजबूती और डिजिटल परिसंपत्तियों की स्थिति
कीमती धातुओं के बाजार में सोना मंगलवार की सामान्य बढ़त को 4,000 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर के ठीक ऊपर बनाए रखने की कोशिश करता दिखा। अमेरिकी डॉलर के मजबूत रुख, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के मिले-जुले रुझान और एफओएमसी बैठक से पहले सतर्कता के माहौल के बावजूद सोने में पिछले दिन के उछाल के बाद स्थिरता बनी रही।

डिजिटल परिसंपत्तियों के दायरे में पाई नेटवर्क टोकन 0.0760 डॉलर के ऊपर स्थिर रहा। पिछले कारोबारी दिन दर्ज की गई लगभग 2 प्रतिशत की रिकवरी के बाद इसकी तेजी थमती नजर आई। समग्र बाजार में कमजोर धारणा और कम ट्रेडिंग वॉल्यूम टोकन पर दबाव बनाए हुए हैं। तकनीकी रूप से इसका परिदृश्य मंदी का बना हुआ है, जहां कीमतें लंबी अवधि की प्रतिरोध ट्रेंडलाइन से नीचे सीमित हैं और मोमेंटम कमजोर बना हुआ है।

अमेरिकी डॉलर के लिहाज से 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले का समय बेहद निर्णायक माना जा रहा है। वित्तीय बाजार दिसंबर में फेड की ओर से ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी का अनुमान लगा रहे हैं। ऐसे में अमेरिकी कांग्रेस के नियंत्रण की जंग देश की राजकोषीय नीति की उम्मीदों को नया आकार दे सकती है, जो परोक्ष रूप से 2027 में अमेरिकी मौद्रिक नीति के मार्ग को भी प्रभावित कर सकती है।

## इसका आप पर असर
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें वैश्विक स्तर पर परिवहन, ईंधन और बुनियादी वस्तुओं की लागत बढ़ाकर मुद्रास्फीति को तेज कर सकती हैं।

- **भारत में:** कच्चे तेल में तेजी से देश का आयात बिल बढ़ता है, जिससे घरेलू स्तर पर ईंधन और परिवहन लागत में बढ़ोतरी का खतरा रहता है। यदि तेल 100 डॉलर के स्तर पर बना रहा तो आने वाले हफ्तों में थोक और खुदरा महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
- **कनाडा और वैश्विक स्तर पर:** केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी से आम नागरिकों के लिए होम लोन, ऑटो लोन और क्रेडिट कार्ड का ब्याज महंगा हो जाएगा। कर्जधारकों को अपनी मासिक ईएमआई में अतिरिक्त वित्तीय बोझ का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।
- **मुद्रा बाजार पर असर:** दरों में वृद्धि और सख्त मौद्रिक नीति से कनाडाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। आयात-निर्यात से जुड़े व्यापारियों को करेंसी हेजिंग और विनिमय जोखिमों पर सतर्क नजर रखनी चाहिए।
- **निवेशकों के लिए प्रभाव:** बढ़ती ऊर्जा लागत और महंगे कर्ज से कंपनियों के मुनाफे पर दबाव आ सकता है, जिससे शेयर बाजारों में अस्थिरता बढ़ेगी। निवेशकों को ऊर्जा क्षेत्र और ब्याज-संवेदनशील शेयरों में अपने आवंटन की समीक्षा करनी चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
कच्चे तेल की कीमतों में 10 से 20 प्रतिशत की ताजा वृद्धि और मजबूत आर्थिक विकास ने बैंक ऑफ कनाडा को अपनी मौद्रिक नीति में बदलाव करने पर मजबूर किया है। जब तक ऊर्जा की लागत सीमित थी तब तक केंद्रीय बैंक दरों में बदलाव से बच रहा था, लेकिन तेल की तेजी ने मुद्रास्फीति के फैलने का जोखिम बढ़ा दिया है।

- **कच्चे तेल में भारी उछाल:** सितंबर की शुरुआत में डब्ल्यूटीआई 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, जिसके बाद कीमतों में और तेज वृद्धि हुई। ऊर्जा लागत में इस उछाल ने नीति निर्माताओं की सहनशीलता को समाप्त कर दिया है।
- **आर्थिक गतिविधियों में मजबूती:** अर्थव्यवस्था में पूर्व में दर्ज सुस्ती के बावजूद विकास के संकेतकों में सुधार आया है। मजबूत आर्थिक आधार ने केंद्रीय बैंक को ब्याज दरों में बढ़ोतरी का कदम उठाने का आधार प्रदान किया है।
- **मुद्रास्फीति का व्यापक जोखिम:** केंद्रीय बैंक के अधिकारियों का मानना है कि ईंधन की ऊंची कीमतें अंततः गैर-ऊर्जा उत्पादों और सेवाओं की कीमतों को भी बढ़ा देती हैं। इस संभावित व्यापक महंगाई को रोकने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी को जरूरी माना जा रहा है।
- **ऐतिहासिक मौद्रिक रुझान:** बैंक ऑफ कनाडा पूर्व के सख्त चक्रों में आमतौर पर लगातार दो बार दरें बढ़ाकर शुरुआत करता रहा है। यही ऐतिहासिक पैटर्न आगामी दिसंबर बैठक में भी लगातार दूसरी दर वृद्धि की संभावना को मजबूत बना रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. बैंक ऑफ कनाडा से ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीद क्यों की जा रही है?
कच्चे तेल की कीमतों में 10 से 20 प्रतिशत की वृद्धि और आर्थिक विकास के मजबूत संकेतों के कारण केंद्रीय बैंक पर मुद्रास्फीति रोकने का दबाव बढ़ गया है।

### 2. बैंक ऑफ कनाडा ने पिछली बार ब्याज दरें कब बढ़ाई थीं?
बैंक ऑफ कनाडा ने इससे पहले आखिरी बार जुलाई 2023 में अपनी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की थी।

### 3. दिसंबर की मौद्रिक नीति बैठक में दर वृद्धि की क्या संभावना है?
अर्थशास्त्रियों के अनुसार आगामी फैसले के बाद बाजार दिसंबर में लगातार दूसरी बार दरें बढ़ने की संभावना करीब 50 प्रतिशत तक मान रहे हैं।

### 4. कच्चे तेल के ताजा तकनीकी स्तर क्या दर्शा रहे हैं?
क्रूड ऑयल 99.76 डॉलर पर कारोबार कर रहा है, जहां 14-दिवसीय आरएसआई 56 और एमएसीडी 2.42 पर है, जो लंबी अवधि के अपट्रेंड की पुष्टि करता है।

### 5. सोने और अन्य वैश्विक परिसंपत्तियों की स्थिति क्या रही?
सोना 4,000 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर स्थिर बना हुआ है, जबकि अमेरिकी डॉलर में प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले मजबूती देखी गई।

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