कच्चे तेल में तेजी से मजबूत हुआ कनाडाई डॉलर, अमेरिकी डॉलर में नरमी के बीच वैश्विक मुद्रा बाजार में हलचल कच्चे तेल की कीमतें 95.80 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंचने से कनाडाई डॉलर मजबूत हुआ है, जबकि अमेरिकी मध्यावधि चुनावों और भू-राजनीतिक वार्ता के चलते अमेरिकी डॉलर पर दबाव देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई रिकवरी ने मुद्रा बाजार के समीकरणों को बदल दिया है। क्रूड ऑयल के भाव सुधरकर 95.80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से कमोडिटी आधारित कनाडाई डॉलर को जोरदार सहारा मिला है, जिसके कारण अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इसमें मजबूती दर्ज की गई और USD/CAD की विनिमय दर में गिरावट आई है। ऊर्जा आपूर्ति को लेकर उपजी चिंताओं के बीच अमेरिका और ईरान के बीच चल रही राजनयिक बातचीत और कतर की मध्यस्थता की कोशिशों ने तेल बाजार में तत्काल भू-राजनीतिक जोखिमों को कुछ हद तक शांत किया है। हालांकि, अमेरिकी मध्यावधि चुनाव को लेकर बनी अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर की मांग ने अमेरिकी मुद्रा के बड़े नुकसान को फिलहाल सीमित कर रखा है। ईरान वार्ता और कतर की मध्यस्थता से कच्चे तेल के रुख पर असर कच्चे तेल की कीमतों में संभावित उछाल पर ताजा कूटनीतिक गतिविधियों का दबाव बना हुआ है। ईरान ने इस बात की पुष्टि की है कि पिछले आठ महीनों से जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत का दौर लगातार जारी है। यह कूटनीतिक संवाद ईरानी अधिकारियों और कतर के मध्यस्थों के बीच कई दिनों तक चली बातचीत के बाद आगे बढ़ा है, जिसमें संशोधित प्रस्ताव तो सामने आए लेकिन अभी तक कोई बड़ा औपचारिक समझौता नहीं हो सका है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि विचार-विमर्श का यह दौर काफी गहन बना हुआ है। अब्बास अराघची के अनुसार, ईरान ने अपनी शर्तें सामने रख दी हैं और बातचीत में आगे की प्रगति पूरी तरह से वॉशिंगटन के राजनीतिक फैसलों पर निर्भर करती है। दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही संकेत दिया था कि वह मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई से बचेंगे। इस रुख ने तेल बाजार में अचानक आने वाले किसी बड़े आपूर्ति व्यवधान के डर को फिलहाल थाम रखा है। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों का समीकरण अमेरिका के भीतर चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम भी व्यापक आर्थिक माहौल और मुद्रा बाजार को दिशा दे रहे हैं। अमेरिकी मतदाता मध्यावधि चुनावों में अपने मताधिकार का उपयोग करने के लिए मतदान केंद्रों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन और रिपब्लिकन पार्टी पर ऊर्जा की ऊंची कीमतों को लेकर भारी राजनीतिक दबाव बना हुआ है। वर्तमान चुनावी सर्वेक्षणों के संकेत बताते हैं कि हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेट्स की जीत की संभावना अधिक मजबूत दिख रही है, जबकि सीनेट के नियंत्रण को लेकर दोनों दलों के बीच बेहद करीबी और कांटे की टक्कर बनी हुई है। कनाडाई डॉलर को मिले समर्थन के बावजूद USD/CAD में गिरावट सीमित रहने के आसार हैं, क्योंकि चुनाव से जुड़ी राजनीतिक अनिश्चितता अमेरिकी डॉलर को सेफ-हेवन के रूप में अतिरिक्त सहारा दे रही है। मध्यावधि चुनावों के कारण बाजार में महंगाई और बढ़ते बजट घाटे के पुराने मुद्दों पर नए सिरे से चर्चा छिड़ गई है। इन राजनीतिक और आर्थिक चिंताओं के बीच ब्याज दरों के अनुमानों में मामूली बदलाव देखा गया है। सीएमई फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावना अब घटकर लगभग 73 प्रतिशत रह गई है, जो इससे ठीक एक सप्ताह पहले 80 प्रतिशत आंकी जा रही थी। वैश्विक वित्तीय तंत्र में अमेरिकी डॉलर और मौद्रिक नीति की भूमिका अमेरिकी डॉलर संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक राष्ट्रीय मुद्रा है और दुनिया के कई अन्य देशों में स्थानीय नोटों के साथ वास्तविक चलन वाली मुद्रा के रूप में स्वीकार की जाती है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है, जिसकी वैश्विक विदेशी मुद्रा विनिमय टर्नओवर में 88 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी है और रोजाना औसतन 6.6 ट्रिलियन डॉलर के वित्तीय सौदे डॉलर में ही होते हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के समापन के बाद अमेरिकी डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड की जगह लेते हुए दुनिया की प्रमुख रिजर्व करेंसी का दर्जा हासिल किया था। अपने लंबे इतिहास के दौरान अमेरिकी डॉलर सोने पर आधारित रहा था, लेकिन 1971 में ब्रेटन वुड्स समझौते के समाप्त होने के साथ ही गोल्ड स्टैंडर्ड पूरी तरह खत्म कर दिया गया। अमेरिकी डॉलर के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे अहम घटक मौद्रिक नीति है, जिसका निर्धारण फेडरल रिजर्व करता है। फेडरल रिजर्व को दो प्रमुख जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जिनमें कीमतों में स्थिरता यानी मुद्रास्फीति पर नियंत्रण बनाए रखना और अर्थव्यवस्था में पूर्ण रोजगार को बढ़ावा देना शामिल है। इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में फेरबदल का मुख्य औजार अपनाता है। जब महंगाई दर फेडरल रिजर्व के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है, जिससे अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत, जब महंगाई दर 2 प्रतिशत से नीचे गिरती है या बेरोजगारी दर बहुत अधिक बढ़ जाती है, तो फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती कर सकता है, जिससे डॉलर के मूल्य पर दबाव पड़ता है। क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग की कार्यप्रणाली अत्यधिक गंभीर आर्थिक संकट की स्थितियों में फेडरल रिजर्व अतिरिक्त नकदी प्रवाह के लिए नए डॉलर भी जारी कर सकता है और क्वांटिटेटिव ईजिंग की व्यवस्था लागू करता है। क्वांटिटेटिव ईजिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत केंद्रीय बैंक वित्तीय तंत्र में ऋण के प्रवाह को तेजी से बढ़ाने का काम करता है। यह एक गैर-मानक मौद्रिक नीति उपाय है, जिसका इस्तेमाल उस समय किया जाता है जब बैंकों के बीच एक-दूसरे पर अविश्वास या डिफ़ॉल्ट के डर से ऋण प्रवाह पूरी तरह सूख जाता है। यह नीति तब अपनाई जाती है जब केवल ब्याज दरों में कटौती करने से अपेक्षित आर्थिक परिणाम मिलने की संभावना नहीं होती। वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के समय वित्तीय तंत्र में आई भारी रुकावट से निपटने के लिए फेडरल रिजर्व ने क्वांटिटेटिव ईजिंग को ही अपने मुख्य हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया था। इसमें केंद्रीय बैंक नए डॉलर जारी करके मुख्य रूप से वित्तीय संस्थानों से अमेरिकी सरकारी बॉन्ड खरीदता है, जिसका सामान्य परिणाम यह होता है कि अमेरिकी डॉलर कमजोर पड़ जाता है। इसके उलट, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग वह प्रक्रिया है जिसमें फेडरल रिजर्व वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व हो चुके बॉन्ड के मूलधन को नए बॉन्ड में फिर से निवेश नहीं करता। यह प्रक्रिया आमतौर पर अमेरिकी डॉलर के मूल्य को मजबूत करने में सहायक साबित होती है। एशियाई सत्र में अन्य प्रमुख मुद्राओं और सोने का कारोबार वैश्विक मुद्रा बाजार के एशियाई सत्र में मंगलवार को अन्य अहम परिसंपत्तियों में भी खास हलचल देखने को मिली। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी यानी AUD/USD पिछले दिन के नुकसान से उबरते हुए एक सप्ताह से अधिक के निचले स्तर से संभलकर 0.7000 के स्तर के आसपास स्थिर बनी रही। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के नीतिगत फैसले से पहले यह स्थिरता दिखी, जबकि अमेरिकी डॉलर में नरमी ने इस मुद्रा जोड़ी को सहारा दिया। दूसरी ओर, USD/JPY की जोड़ी मंगलवार के एशियाई सत्र में गिरकर 158.00 के पिछले दिन के स्तर से नीचे आ गई। जापान में विनिमय दर में सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम ने जापानी येन को सहारा दिया, लेकिन बैंक ऑफ जापान की अगली ब्याज दर वृद्धि के समय को लेकर अनिश्चितता ने येन की तेजी को एक सीमित दायरे में बांधे रखा। सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली सोने की धातु मंगलवार के एशियाई सत्र में 3,950 डॉलर के करीब स्थिर रही। अक्टूबर 2025 के बाद से सबसे निचले स्तर को छूने के बाद सोने ने पिछले कारोबारी सत्र में जो सुधार दिखाया था, यह उसी के बाद का ठहराव था। अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीति की उम्मीदों ने डॉलर पर दबाव बनाए रखा, जिसने आगामी अमेरिकी चुनाव की चिंताओं के साथ मिलकर सोने को समर्थन दिया। हालांकि, फेडरल रिजर्व की दर वृद्धि की उम्मीदों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स में आई हल्की बढ़त ने गैर-उपज वाली इस पीली धातु की बढ़त को सीमित रखा। ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक का दर फैसला और तकनीकी क्षेत्र से कॉर्पोरेट परिणाम मुद्रा बाजारों की नजर मंगलवार को घोषित होने वाले रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के मौद्रिक नीतिगत निर्णय पर भी टिकी हुई है। वित्तीय बाजार में इस बात की व्यापक उम्मीद की जा रही है कि ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक अपनी आधिकारिक कैश रेट को 25 आधार अंक बढ़ाकर 4.6 प्रतिशत से 4.85 प्रतिशत कर देगा। यदि यह फैसला उम्मीद के अनुसार लागू होता है, तो यह वर्ष 2026 में ब्याज दरों में होने वाली पांचवीं वृद्धि होगी और आधिकारिक कैश रेट सीधे 18 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच जाएगी। कॉर्पोरेट मोर्चे पर, वॉल स्ट्रीट पर तकनीकी दिग्गज कंपनी एप्पल के चौथी तिमाही के मजबूत नतीजों की भी खूब चर्चा रही। कंपनी के आईफोन की मजबूत बिक्री ने सोमवार को विश्लेषकों के अनुमानों को पीछे छोड़ दिया। एप्पल ने चौथी तिमाही में आईफोन की बिक्री से 57.58 अरब डॉलर का राजस्व दर्ज किया, जो विश्लेषकों के औसत अनुमान से 1 अरब डॉलर से भी अधिक रहा। हालांकि, राजस्व और लाभ दोनों पैमानों पर बाजार के अनुमानों को पछाड़ने के बावजूद, आफ्टर-आवर्स ट्रेडिंग में एप्पल के शेयर लगभग 4 प्रतिशत तक फिसल गए। इसका आप पर असर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अंतरराष्ट्रीय विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव से घरेलू ईंधन लागत और आयात व्यय पर सीधा असर पड़ सकता है। • ईंधन की कीमतें: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल का भाव 95.80 डॉलर तक बढ़ने से आने वाले दिनों में घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। यदि कीमतें ऊंची बनी रहीं तो माल ढुलाई और दैनिक यात्रा का खर्च बढ़ सकता है। • आयात और महंगाई: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अन्य मुद्राओं के उतार-चढ़ाव से आयातित वस्तुओं के बिल प्रभावित हो सकते हैं। आयात महंगा होने की स्थिति में इलेक्ट्रॉनिक्स और कच्चे माल पर आधारित उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं। • सोने में निवेश: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव 3,950 डॉलर के आसपास स्थिर रहने से खुदरा खरीदारों को तत्काल बड़ी राहत नहीं मिलने की संभावना है। आने वाले शादियों और त्योहारों के सीजन में आभूषण खरीदारों को ऊंचे स्तरों पर खरीदारी करनी पड़ सकती है। • विदेशी शिक्षा और यात्रा: मुद्रा दरों में अनिश्चितता के कारण विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों और पर्यटकों के लिए विदेशी मुद्रा विनिमय दरों पर नजर रखना आवश्यक हो गया है। डॉलर में उतार-चढ़ाव ट्यूशन फीस और यात्रा बजट को सीधे प्रभावित कर सकता है। ऐसा क्यों हुआ कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बने कूटनीतिक संतुलन और अमेरिका में राजनीतिक घटनाक्रमों के मेल का परिणाम है। • कच्चे तेल में तेजी: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की मांग में स्थिरता और आपूर्ति चिंताओं के बीच कीमतें सुधरकर 95.80 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गईं, जिससे कनाडाई डॉलर मजबूत हुआ। यह उछाल ऊर्जा-निर्यातक देशों की मुद्राओं को सीधा सहारा देता है। • ईरान और अमेरिका वार्ता: ईरान और अमेरिका के बीच आठ महीनों से जारी संघर्ष को सुलझाने के लिए अप्रत्यक्ष बातचीत और कतर की मध्यस्थता ने बाजार में अचानक युद्ध की आशंका को कुछ कम किया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के अनुसार शर्तें रखी जा चुकी हैं और अब निर्णय वॉशिंगटन को लेना है। • अमेरिकी चुनाव और नीतिगत अनिश्चितता: अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में ऊर्जा की ऊंची कीमतों को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ा हुआ है। इसके साथ ही फेडरल रिजर्व द्वारा दिसंबर में ब्याज दर बढ़ाने की संभावना 80 प्रतिशत से गिरकर 73 प्रतिशत होने से डॉलर में सुस्ती देखी गई। सवाल-जवाब 1. कच्चे तेल की कीमतों का कनाडाई डॉलर पर क्या असर पड़ा? कच्चे तेल का भाव सुधरकर 95.80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से कमोडिटी आधारित कनाडाई डॉलर को मजबूती मिली है और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इसमें बढ़त देखी गई। 2. अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की क्या स्थिति है? ईरान ने पुष्टि की है कि कतर की मध्यस्थता में अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता चल रही है, जिसमें शर्तें रखी जा चुकी हैं और आगे का फैसला वॉशिंगटन पर निर्भर है। 3. अमेरिकी मध्यावधि चुनावों का मुद्रा बाजार पर क्या प्रभाव पड़ रहा है? मध्यावधि चुनावों के कारण महंगाई और घाटे की चिंताओं के बीच डॉलर सेफ-हेवन बना हुआ है, जबकि दिसंबर में फेड दर वृद्धि की संभावना घटकर 73 प्रतिशत रह गई है। 4. रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया से ब्याज दरों को लेकर क्या उम्मीद है? रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा अपनी कैश रेट में 25 आधार अंकों की वृद्धि कर इसे 4.6 प्रतिशत से 4.85 प्रतिशत करने का अनुमान लगाया जा रहा है। 5. चौथी तिमाही में एप्पल के आईफोन की बिक्री कैसी रही? एप्पल ने चौथी तिमाही में 57.58 अरब डॉलर की आईफोन बिक्री दर्ज की, जो बाजार के औसत अनुमान से 1 अरब डॉलर से भी ज्यादा रही। https://trendkia.com/market/kachche-tela-men-teji-se-majabuta-hua-canadian-dollar-us-dollar-men-narami-ke-bicha-vaishvika-mudra-bajara-men-halachala-55361 TrendKia — Har trend, sabse pehle.