कच्चे तेल में उछाल और फेड की ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदों ने सोने-चांदी पर बढ़ाया दबाव कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और अमेरिका के मजबूत रोजगार आंकड़ों ने फेड की ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदें बढ़ा दी हैं, जिससे एमसीएक्स पर सोने-चांदी के भाव दबाव में आ गए हैं। कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी ने भारत के एमसीएक्स पर सोने और चांदी के भाव पर आज और दबाव डाल दिया है, ऐसे समय में जब बाजार पहले से ही इस महीने अमेरिका में ब्याज दर बढ़ने की आशंका से जूझ रहा है। 92 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल, ब्रेंट भी 97 डॉलर के ऊपर अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड वायदा एक फीसदी उछलकर 92 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जबकि ब्रेंट क्रूड भी एक फीसदी की बढ़त के साथ 97 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। कच्चे तेल में इतनी तेज रफ्तार से आई तेजी का असर आमतौर पर पूरे कमोडिटी बाजार पर दिखता है, क्योंकि महंगा ईंधन सीधे तौर पर परिवहन, उत्पादन और खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी कर देता है। कारोबारी इस संकेत को देखते ही महंगाई के जोखिम को कीमतों में शामिल करना शुरू कर देते हैं, और सोना-चांदी अक्सर इसका सबसे पहला असर झेलते हैं। सुरक्षित निवेश की मांग और महंगाई की चिंता के बीच फंसा सोना फिलहाल सोने की चाल बिल्कुल एकतरफा नहीं है। एक तरफ पश्चिम एशिया में बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता और डॉलर में आई नरमी से बुलियन को सहारा मिल रहा है, क्योंकि ये दोनों हालात निवेशकों को सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर खींचते हैं। दूसरी तरफ महंगाई बढ़ने की आशंका, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और ब्याज दर बढ़ने की बढ़ती संभावना सोने की तेजी पर लगाम लगाए हुए हैं। आने वाले हफ्ते में एमसीएक्स पर सोने और चांदी की चाल काफी हद तक स्पॉट गोल्ड और स्पॉट सिल्वर जैसे वैश्विक बेंचमार्क पर निर्भर करेगी। अमेरिका के मजबूत रोजगार आंकड़ों ने बदली ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदें मौजूदा दबाव की बड़ी वजह पिछले हफ्ते आए अमेरिका के रोजगार आंकड़े भी हैं। अगस्त में गैर-कृषि क्षेत्र में रोजगार 162,000 बढ़ा, जबकि जुलाई के आंकड़े को संशोधित कर 23,000 की बढ़ोतरी दिखाई गई, और यह बाजार के 56,000 के अनुमान से काफी बेहतर रहा। जब रोजगार बाजार उम्मीद से ज्यादा तेजी से नौकरियां जोड़ता है, तो अमेरिकी फेड को यह भरोसा मिलता है कि वह विकास को नुकसान पहुंचाए बिना ब्याज दरें बढ़ा सकता है। बेरोजगारी दर 4.1 फीसदी पर स्थिर रही, जबकि सालाना वेतन वृद्धि घटकर 3.1 फीसदी पर आ गई, हालांकि यह गिरावट अर्थशास्त्रियों के अनुमान से कम रही। इन सभी आंकड़ों ने मिलकर बाजार को सितंबर में ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना करीब 60 फीसदी तक बढ़ाने पर मजबूर कर दिया, जबकि आंकड़े आने से पहले यह संभावना करीब 50 फीसदी ही थी। ब्याज दरें बढ़ने पर सोने-चांदी जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियां बॉन्ड और डिपॉजिट के मुकाबले कम आकर्षक हो जाती हैं, यही वजह है कि सिर्फ संभावना बढ़ने भर से कीमतों पर दबाव बढ़ गया। समुद्र में तनाव ने बढ़ाई मुश्किल वीकेंड पर अमेरिका और ईरान के बीच जहाजों पर हुए हमलों के बाद सोना ऊंची तेल कीमतों के दबाव में और आ गया, जिससे महंगाई फिर से बढ़ने की चिंता ने जोर पकड़ लिया। पश्चिम एशिया के करीब समुद्री रास्तों पर होने वाले ऐसे हमलों से टैंकरों का बीमा और ढुलाई खर्च बढ़ जाता है, जिससे आपूर्ति पर दबाव पड़ता है और कच्चे तेल की कीमतें और चढ़ जाती हैं, इससे सोने का आउटलुक भी उलझ जाता है, भले ही कुछ निवेशक सुरक्षा के लिए इसकी ओर रुख कर रहे हों। आगे किस पर रहेगी बाजार की नजर अमेरिकी फेड का ब्याज दर पर फैसला अब कुछ ही हफ्तों दूर है, ऐसे में सोने और चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, जो कभी पश्चिम एशिया के तनाव से सहारा पाएगा तो कभी ऊंची ब्याज दरों की आशंका से दबेगा। डब्ल्यूटीआई और ब्रेंट क्रूड में आगे की चाल और स्पॉट गोल्ड-स्पॉट सिल्वर से मिलने वाले संकेत यह साफ करेंगे कि इनमें से कौन सा पहलू बाजार पर हावी रहता है। इसका आप पर असर अगर आप सोना या चांदी खरीदने की सोच रहे हैं या बुलियन में निवेश किया हुआ है, तो अगले कुछ हफ्ते एकतरफा नहीं बल्कि उतार-चढ़ाव भरे रह सकते हैं। • ज्वेलरी और सोना खरीदार: फिलहाल एमसीएक्स पर सोने-चांदी के भाव दबाव में हैं, इसलिए जिनके पास खरीद का समय टालने की गुंजाइश है, वे त्योहारी खरीदारी से पहले मौजूदा नरमी का फायदा उठा सकते हैं। • बुलियन निवेशक और एमसीएक्स कारोबारी: सितंबर में फेड की ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना अब करीब 60 फीसदी है, इसलिए किसी भी नए अमेरिकी आंकड़े या फेड की टिप्पणी पर सोने-चांदी में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। • ईंधन से जुड़ी लागत: डब्ल्यूटीआई का 92 डॉलर और ब्रेंट का 97 डॉलर के पार जाना वैश्विक कच्चे तेल में मजबूती दिखाता है, जिसका असर आगे चलकर परिवहन और उत्पादन लागत पर पड़ सकता है। • रुपये और आयात लागत पर नजर रखने वाले: डॉलर की चाल और ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदें दोनों मिलकर सोने के आयात को महंगा या सस्ता कर सकती हैं, क्योंकि सोना और तेल दोनों डॉलर में तय होते हैं। सवाल-जवाब 1. एमसीएक्स पर सोने-चांदी के भाव क्यों गिरे? कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिका के मजबूत रोजगार आंकड़ों ने सितंबर में फेड की ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना बढ़ा दी, जिससे बुलियन पर दबाव बढ़ा। 2. कच्चे तेल की कीमतें कितनी बढ़ीं? अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड एक फीसदी बढ़कर 92 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर और ब्रेंट क्रूड एक फीसदी बढ़कर 97 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। 3. अमेरिका के ताजा रोजगार आंकड़ों में क्या सामने आया? अगस्त में गैर-कृषि क्षेत्र में रोजगार 162,000 बढ़ा, जुलाई के आंकड़े को संशोधित कर 23,000 किया गया, बेरोजगारी दर 4.1 फीसदी पर स्थिर रही और वेतन वृद्धि घटकर 3.1 फीसदी रह गई। 4. सितंबर में फेड की ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना अब कितनी है? करीब 60 फीसदी, जबकि रोजगार आंकड़े आने से पहले यह संभावना करीब 50 फीसदी थी। 5. दबाव के बावजूद सोने को अभी क्या सहारा मिल रहा है? पश्चिम एशिया में बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता और डॉलर में आई नरमी बुलियन को कुछ सहारा दे रही है। 6. वीकेंड पर अमेरिका और ईरान के बीच क्या हुआ? दोनों देशों के बीच जहाजों पर हमलों का आदान-प्रदान हुआ, जिससे महंगाई फिर से बढ़ने की चिंता ने जोर पकड़ लिया। 7. आने वाले हफ्ते में किन संकेतों पर नजर रहेगी? स्पॉट गोल्ड और स्पॉट सिल्वर की वैश्विक चाल के साथ-साथ डब्ल्यूटीआई और ब्रेंट क्रूड में आगे के उतार-चढ़ाव से एमसीएक्स पर सोने-चांदी की दिशा तय होगी। https://trendkia.com/market/kachche-tela-men-uchhala-aura-fed-ki-byaja-dara-barhotari-ki-ummidon-ne-sone-chandi-para-barhaya-dabava-28822 TrendKia — Har trend, sabse pehle.