कच्चे तेल में उछाल के बाद नरमी, ट्रंप के बयान और चीनी निर्यात से ब्रेंट 102 डॉलर पर फिसला ईरान पर हमले को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप के बयान और चीन से ईंधन निर्यात दोबारा शुरू होने की खबरों के बाद ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के शिखर से नीचे आ गया है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में जोरदार तेजी के बाद कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली है। ब्रेंट क्रूड एक समय 105 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार करते हुए लगभग एक महीने के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन इसके बाद इसमें तेज गिरावट दर्ज की गई। दिन के कारोबार में तेल की कीमतें 106 डॉलर तक छूने के बाद फिसलकर 102 से 103 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में आ गईं। बाजार में यह ठहराव मुख्य रूप से भू-राजनीतिक तनाव में आई तात्कालिक कमी और आपूर्ति से जुड़े नए घटनाक्रमों के बाद देखने को मिला है। भू-राजनीतिक बयानबाजी और आपूर्ति से जुड़ी राहत कच्चे तेल में आई हालिया गिरावट की सबसे प्रमुख वजह अमेरिका की ओर से आया राजनीतिक रुख रहा। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि मध्यावधि चुनावों से पहले अमेरिका ईरान पर हमला नहीं करेगा। इस बयान के सामने आते ही तेल बाजार में आपूर्ति बाधित होने की जो तात्कालिक आशंकाएं बनी हुई थीं, वे काफी हद तक शांत हो गईं। इसके साथ ही ऐसी खबरें भी सामने आईं कि चीन अक्टूबर महीने में परिष्कृत ईंधन का निर्यात फिर से शुरू करने जा रहा है। चीनी निर्यात दोबारा शुरू होने की संभावना ने ईंधन बाजार पर बने दबाव को कम करने में बड़ी भूमिका निभाई, जिससे ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर के करीब आ गया। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और तूफान की चिंताएं कीमतों में हालिया गिरावट से ठीक पहले बाजार में अभूतपूर्व उछाल देखा गया था। कच्चे तेल में शुरुआती उछाल की मुख्य वजह होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट थी। पिछले हफ्ते तेल टैंकरों पर रिकॉर्ड संख्या में हुए हमलों के बाद इस प्रमुख समुद्री मार्ग से होने वाले व्यापार पर सीधा असर पड़ा था। इसके अलावा, अमेरिकी खाड़ी तट पर हरीकेन इसाइआस के करीब पहुंचने से तेल उत्पादन में संभावित रुकावट को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं। इन दोनों घटनाओं ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को लेकर डर पैदा कर दिया था, जिसके चलते ब्रेंट क्रूड अचानक 105 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया था। मुद्रा बाजार और कीमती धातुओं की स्थिति कच्चे तेल के साथ-साथ अन्य वित्तीय बाजारों में भी हलचल देखी जा रही है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट के कारण अमेरिकी डॉलर अपने 18 महीने के उच्च स्तर से नीचे बना हुआ है। इसका असर विभिन्न मुद्रा युग्मों पर साफ नजर आ रहा है। एशियाई कारोबार में शुक्रवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) अपने साप्ताहिक निचले स्तर से संभलते हुए 0.7000 के स्तर की ओर बढ़ने की कोशिश करता दिखा, जिसे रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया से जुड़ी आक्रामक नीतिगत उम्मीदों का भी समर्थन मिल रहा है। दूसरी ओर, जापान में घरेलू खर्च के आंकड़ों में लगातार नौवें महीने गिरावट दर्ज होने से जापानी येन पर दबाव बना और USD/JPY 158.00 के आसपास अपनी बढ़त बनाए रखने में कामयाब रहा। कीमती धातुओं की बात करें तो सोना शुक्रवार को मजबूती के साथ 4,200 डॉलर के स्तर को दोबारा छूता नजर आया और अपने दो महीने के निचले स्तर से उबरने में सफल रहा, हालांकि इसका दैनिक आरएसआई अभी भी मंदी के संकेत दे रहा है। कच्चे तेल का तकनीकी ढांचा और ताजा आंकड़े अगर कमोडिटी वायदा बाजार के ताजा सत्र की बात करें, तो क्रूड ऑयल फ्यूचर्स (CL=F) का भाव 90.43 डॉलर पर देखा गया, जो पिछले बंद स्तर 91.49 डॉलर के मुकाबले 1.16 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर के बीच रहा है, जबकि वॉल्यूम 20 दिनों के औसत का 0.09 गुना दर्ज हुआ। तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो 14-दिवसीय आरएसआई 47 पर है। एमएसीडी -0.39 पर है, जो सिग्नल लाइन 0.43 और हिस्टोग्राम -0.82 के साथ कमजोरी दिखा रहा है। मूविंग एवरेज के मोर्चे पर 20-दिवसीय ईएमए 91.89 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 90.14 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 81.20 डॉलर पर है, जबकि 50-दिवसीय एसएमए 89.17 डॉलर और 200-दिवसीय एसएमए 83.22 डॉलर पर बना हुआ है। इसमें गोल्डन क्रॉस बना हुआ है जो लंबी अवधि के अपट्रेंड को दर्शाता है। 20-दिवसीय बोलिंगर बैंड्स 84.20 डॉलर से 104.49 डॉलर के दायरे में हैं और कीमत इसके बीच में है। एडीएक्स 18 पर कमजोर ट्रेंड का संकेत दे रहा है, जबकि स्टोकेस्टिक फास्ट लाइन 34 और सिग्नल लाइन 25 पर है। 14-दिवसीय एटीआर 4.19 डॉलर है, जो दैनिक उतार-चढ़ाव को दर्शाता है। महत्वपूर्ण स्तरों में धुरी बिंदु (पिवट) 90.68 डॉलर, पहला प्रतिरोध (R1) 91.16 डॉलर, दूसरा प्रतिरोध (R2) 91.90 डॉलर, जबकि पहला समर्थन (S1) 89.94 डॉलर और दूसरा समर्थन (S2) 89.46 डॉलर पर स्थित है। 20 दिनों का आधार समर्थन 86.86 डॉलर और प्रतिरोध 106.75 डॉलर के आसपास बना हुआ है। इसका आप पर असर कच्चे तेल की कीमतों में आई यह नरमी ईंधन की बढ़ती लागत और वैश्विक मुद्रास्फीति से आम उपभोक्ताओं को तात्कालिक राहत प्रदान कर सकती है। • भारत में प्रभाव: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कच्चे तेल के भारी आयात पर निर्भर रहता है। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें 105 डॉलर से घटकर 90 से 102 डॉलर के बीच टिकती हैं, तो सरकारी तेल कंपनियों पर लागत का दबाव कम होगा और पेट्रोल तथा डीजल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी का खतरा टल सकता है। • वैश्विक उपभोक्ताओं के लिए: चीन द्वारा अक्टूबर से परिष्कृत ईंधन का निर्यात फिर से शुरू करने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डीजल और विमान ईंधन की आपूर्ति में सुधार होगा। इससे आने वाले महीनों में माल ढुलाई और यात्रा खर्च में होने वाली अचानक वृद्धि पर लगाम लग सकती है। • मुद्रा और विनिमय दर: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर के अपने 18 महीने के उच्च स्तर से फिसलने से उभरते बाजारों की मुद्राओं को सहारा मिलेगा। इससे आयात बिल को संतुलित रखने में केंद्रीय बैंकों को सुविधा मिलेगी। • निवेशकों और व्यापारियों के लिए: कच्चे तेल के 90.68 डॉलर के पिवट और 4.19 डॉलर के एटीआर को देखते हुए ऊर्जा क्षेत्र में तेज उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। कमोडिटी और डेरिवेटिव्स ट्रेडर्स को 89.46 डॉलर के सपोर्ट और 91.90 डॉलर के रेजिस्टेंस स्तरों पर नजर रखकर ही अपनी रणनीति बनानी चाहिए। ऐसा क्यों हुआ कच्चे तेल की कीमतों में पहले तेज उछाल और फिर उसके बाद गिरावट का मुख्य कारण समुद्री परिवहन में आई रुकावटें, मौसमी खतरे और उसके बाद भू-राजनीतिक रुख में आया बदलाव था। • सैन्य तनाव और टैंकर हमले: पिछले सप्ताह होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर रिकॉर्ड संख्या में हुए हमलों ने समुद्री आवाजाही को बुरी तरह बाधित किया। फारस की खाड़ी से होने वाली आपूर्ति रुकने की आशंका ने ब्रेंट क्रूड को सीधे 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा दिया था। • तूफान से उत्पादन का खतरा: अमेरिकी खाड़ी तट की ओर हरीकेन इसाइआस के बढ़ने से अपतटीय उत्पादन और रिफाइनरी गतिविधियों के ठप होने का डर पैदा हुआ, जिससे बाजार में आपूर्ति की कमी की आशंका और गहरी हो गई थी। • ट्रंप का राजनीतिक बयान: राष्ट्रपति ट्रंप के यह स्पष्ट करने के बाद कि मध्यावधि चुनावों से पहले अमेरिका ईरान पर सैन्य हमला नहीं करेगा, भू-राजनीतिक तनाव में एकाएक नरमी आ गई। इस बयान ने तेल अनुबंधों से जुड़े युद्ध जोखिम प्रीमियम को समाप्त कर दिया। • चीनी रिफाइनरी निर्यात: चीन द्वारा अक्टूबर में रिफाइंड ईंधन का निर्यात फिर से शुरू करने की खबरों ने उत्पाद बाजार में आपूर्ति की चिंता दूर की। इस खबर के आते ही बिकवाली शुरू हुई और ब्रेंट क्रूड 102 से 103 डॉलर के दायरे में आ गया। सवाल-जवाब 1. ब्रेंट क्रूड की कीमतें 105 डॉलर से नीचे क्यों आ गईं? राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान पर हमला न करने का बयान देने और चीन द्वारा अक्टूबर में परिष्कृत ईंधन निर्यात शुरू करने की खबरों के बाद कीमतें घटकर 102-103 डॉलर पर आ गईं। 2. कच्चे तेल में शुरुआती उछाल की मुख्य वजह क्या थी? होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों पर रिकॉर्ड हमलों के कारण जहाजों की आवाजाही ठप होना और अमेरिकी तट पर हरीकेन इसाइआस का खतरा इसका मुख्य कारण था। 3. चीन के किस कदम से ईंधन बाजार को राहत मिली? चीन द्वारा अक्टूबर महीने में परिष्कृत ईंधन का निर्यात दोबारा शुरू करने की खबरों ने वैश्विक बाजार में आपूर्ति की चिंता कम की। 4. सोने और मुद्रा बाजार में शुक्रवार को क्या रुझान देखा गया? सोना सुधरकर 4,200 डॉलर पर पहुंचा, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7000 की ओर बढ़ा और कमजोर घरेलू खर्च के कारण येन के मुकाबले डॉलर 158.00 के करीब बना रहा। https://trendkia.com/market/kachche-tela-men-uchhala-ke-bada-narami-trump-ke-bayana-aura-chini-niryata-se-brent-102-dolara-para-phisala-45307 TrendKia — Har trend, sabse pehle.